राजस्थान की VVIP सीटों पर दिग्गजों के हालात, वसुंधरा के मंत्री हारे चुनाव!

By रेनू तिवारी | Publish Date: Dec 11 2018 11:14AM
राजस्थान की VVIP सीटों पर दिग्गजों के हालात, वसुंधरा के मंत्री हारे चुनाव!
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देश में 5 राज्यों में हुए चुनाव के बाद आज वोटों की गिनती शुरू हो गई है। मध्यप्रदेश को छोड़ कर बाकि राज्यों में बीजेपी की स्थिति खराब चल रही हैं लेकिन तब भी बीजेपी- कांग्रेस में कांटे की टक्कर हैं

देश में 5 राज्यों में हुए चुनाव के बाद आज वोटों की गिनती शुरू हो गई है। मध्यप्रदेश को छोड़ कर बाकि राज्यों में बीजेपी की स्थिति खराब चल रही हैं लेकिन तब भी बीजेपी- कांग्रेस में कांटे की टक्कर हैं पहले चरण के रूझानों के अनुसार 5 राज्यों में से कांग्रेस 3 राज्यों में सरकार बना सकती हैं। बात की जाए राजस्थान की तो यहां पर कांग्रेस की मेहनत रंग लाई है वेसे ये राज्य चुनावी रूप से   काफी महत्वपूर्ण स्थान रखता हैं। राजस्थान की कुछ वीवीआईपी सीटें ही राजस्थान का भविष्य तय करती हैं। आइये जानते है राजस्थान की उन सीटों के बारें वो बनाती है राजस्थान की सरकार-

झालरापाटन

राजस्थान VVIP सीटों में सबसे पहले आती है झालरापाटन सीट जहां से राजस्थान की मुख्यमंत्री बीजेपी से वसुंधरा राजे चुनाव लड़ रही है जिनको कांटे की टक्कर दे रहे हैं कांग्रेस मारवाड़ के दिग्गज नेता मानवेंद्र सिंह। मानवेंद्र भी राजस्थान का लोकप्रिय चेहरा है वहीं वसुंधरा राजे 2003 से इस सीट ये लगातार विधायक हैं। इस लिए इस सीट पर सबकी निगाहें बनी हुई हैं। 

टोंक



कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट टोंक सीट से राजस्थान के चुनावी दंगल में उतरे हैं। सचिन पायलट को राजस्थान का अगला मुख्यमंत्री माना जा रहा हैं। रूझानो के अनुसार सचिन टोंक सीट जीत सकते हैं। सचिन पायलट को देखते हुए बीजेपी ने बीजेपी ने अपने मौजूदा विधायक और घोषित प्रत्याशी में बदलाव करते हुए वरिष्ठ नेता यूनुस खान को मैदान में उतारा है।

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सांगानेर

बीजेपी के बागी नेता घनश्याम तिवाड़ी सांगानेर सीट से मैदान में हैं। चुनाव में वैश्य कार्ड कार्ड बीजेपी ने खेलते हुए अशोक लाहोटी को मैदान में उतारा था। कांग्रेस के प्रत्याशी पुष्पेंद्र भारद्वाज भी यहां अपनी किस्मत आजमा रहे हैँ। ये सीट सालों से बीजेपी जीत रही है ऐसे में इस सीट को बचाना बीजेपी की साख पर बन आया हैँ। 

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सरदारपुरा

राजस्थान की जोधपुर की सरदारपुरा सबसे महत्वपूर्ण सीटों में से एक है क्योंकि यहां से राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत चुनावी दंगल में उतरे हैं। अगर कांग्रेस राजस्थान में जीत दर्ज कराती हैं तो अशोक गहलोत को भी मुख्यमंत्री का दावेदार माना जा रहा है क्योकि कांग्रेस ने अपना मुख्यमंत्री का नाम घोषित नहीं किया हैं। इस सीट पर गहलोत को टक्कर देने के लिए बीजेपी ने शंभू सिंह खेतासर को मैदान में उतारा है। कांग्रेस के अशोक गहलोत 1998 से 2003 तक और फिर 2008 से 2013 तक राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे।

उदयपुर शहर



राजस्थान के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया बीजेपी की तरफ से उदयपुर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। यह सीप पर कटारिया लंबे समय से लड़ते आ रहे है यह उनका गढ़ कहा जाता हैं।  कटारिया को टक्कर दे रहे है कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. गिरिजा व्यास। व्यास के उतरने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है।

डीग-कुम्हेर

राजस्थान के भरतपुर सबसे ज्यादा चर्चा में रही डीग-कुम्हेर से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विश्वेंद्र सिंह चुनाव लड़ रहे है भरतपुर राजघराने के पूर्व महाराज विश्वेंद्र सिंह के मुकाबले बीजेपी ने दिवंगत नेता दिगंबर सिंह के पुत्र डॉ. शैलेष सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है। इस सीट पर सालों से  राजघराने  का अधिकार है। देश भर में लोकसभा चुनाव के दौरान मोदी लहर थी लेकिन इस लहर का इस सीट पर कोई असर नहीं पड़ा। 

नाथद्वारा

नाथद्वारा विधानसभा सीट से कांग्रेस की तरफ से सीपी जोशी चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा ने सीपी जोशी को टक्कर देने के लिए राजपूत वोटरों को टार्गेट करते हुए महेश प्रताप सिंह को मैदान में उतारा है।

लाडपुरा

बीजेपी की तरफ से भवानी सिंह राजावत का टिकट काट कर बीजेपी ने पूर्व सांसद इज्यराज सिंह की पत्नी कल्पना को उतारा है। भवानी सिंह इस सीट से तीन बार विधायक बन चुके हैं। जबकि कांग्रेस से नईमुद्दीन गुड्डू की पत्नी गुलनाज को मैदान में उतारा है।

बीकानेर 

टिकट बटवारें होने के दौरान इस सीट पर काफी घमासान मचा था। कांग्रेस ने इस सीट पर बीडी कल्ला को टिकट दिया हैं वहीं बीजेपी ने तीन बार विधायक रहे गोपाल जोशी को फिर से मैदान में उतारा है। जोशी ने कल्ला को दो बार चुनावी दंगल में धूल चटाई हैं। 

खिंवसर

राजस्थान की खिंवसर विधानसभा सीट पर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के अध्यक्ष हनुमान बेनीवाल मैदान में हैं। कांग्रेस ने रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी सवाई सिंह पर दांव लगाया है। जबकि बीजेपी से रामचंद्र उत्ता सियासी रण में है। बेनीवाल 2013 में निर्दलीय चुनाव जीत हासिल की थी। इस बार दोनों बड़े दलों से नए चेहरे मैदान में उतरने से मुकाबला रोचक हो गया है। 

राजस्थान विधानसभा चुनाव की मतगणना के शुरूआती रुझान में कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच कांटे का मुकाबला होता दिख रहा है, लेकिन कई सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार आगे चल रहे हैं। अगर निर्दलीय उम्मीदवार इन सीटों से जीतते हैं तो सरकार बनाने में इनकी भूमिका अहम हो सकती है। सुबह सवा दस बजे तक के रुझान में 88 सीटों पर कांग्रेस, 70 सीटों पर भाजपा, दो सीटों पर माकपा, दो पर बसपा, दस सीटों पर निर्दलीय और पांच सीटों पर अन्य दल आगे चल रहे हैं। प्रमुख प्रत्याशियों की बात की जाए तो मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे झालरापाटन सीट पर, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सरदारपुरा सीट पर तथा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट टोंक सीट पर आगे चल रहे हैं। वहीं मौजूदा वसुंधरा राजे सरकार के मंत्रियों की बात की जाए तो शुरूआती रुझान में ज्यादातर मंत्री पिछड़ते नजर आ रहे हैं जिनमें गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया भी शामिल हैं। अन्य प्रमुख चेहरों में भारत वाहिनी पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष घनश्याम तिवाड़ी सांगानेर सीट पर पीछे चल रहे हैं। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रमुख हनुमान बेनीवाल खींवसर सीट पर चौथे चरण की मतगणना के बाद 3,645 मतों से आगे चल रहे हैं।

 

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