जिससे जीवन की शुरूआत हुई उस पर खुलकर होगी बात, विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस पर ऑनलाइन होगें कार्यक्रम आयोजित

जिससे जीवन की शुरूआत हुई उस पर खुलकर होगी बात,  विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस पर ऑनलाइन होगें कार्यक्रम आयोजित

एक रिपोर्ट के मुताबिक माहवारी की जानकारी के अभाव के चलते 23 प्रतिशत लड़कियां को स्कूल छोड़ना पड़ता है । जागरूकता के अभाव में देश की आधी आवादी को कई शारीरिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है। ऐसा माना जा रहा है कि जिससे जीवन की हुई शुरुआत पर उस पर बात करने की अभी भी नहीं हुई शुरुआत।

भोपाल। कोरोना संकट के बीच विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस 28 मई को लोगों को जागरूक करने के लिए हर वर्ष की तरह ही इस साल भी कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। लेकिन इस बार लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग के चलते यह कार्यक्रम सामाजिक संस्थाओं द्वारा ऑनलाइन और सोशल मीडिया के माध्यम से मनाया जाएगा। भारत में अधिकांश जगह आज भी माहवारी पर बात करने में लोगों को शर्म महसूस होती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक माहवारी की जानकारी के अभाव के चलते 23 प्रतिशत लड़कियां को स्कूल छोड़ना पड़ता है । जागरूकता के अभाव में देश की आधी आवादी को कई शारीरिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है। ऐसा माना जा रहा है कि जिससे जीवन की हुई शुरुआत पर उस पर बात करने की अभी भी नहीं हुई शुरुआत। इसी को लेकर सुखिभव फाउंडेशन पिछले 6 सालों से इस महत्वपूर्ण विषय पर काम कर रहा है। संस्था के संचालक दिलीप पत्तुबाला का एक ही उद्देश्य की महावारी को एक गैर मुद्दा बनाया जाए और उस पर बात हो। जिसको लेकर देश के विभिन्न क्षेत्रों से जागरूकता फैलाने के लिए सोशल मीडिया पर अपनी सेल्फी के साथ हाथ में रक्त की एक बूंद दिखाकर अभियान चलाया जा रहा है। 

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इसे लेकर सुखिभव फाउंडेशन हर वर्ष फैलोशिप का आयोजन करती है, मुख्य रूप से इसका मकसद पुरूष और महिला लीडरों को महिलाओं के मासिक स्वास्थ्य संबंधित चिकित्सा व्यवस्था में प्रशिक्षित करना है। वर्तमान में यह फेलोशिप मध्य प्रदेश भोपाल में सुचारू रूप से क्रियान्वित की जा रही है। भारत के अलग-अलग हिस्सों से आए 6 सदस्यों जिसमें शिल्पा नायर(मुंबई), राधिका मोदी(असम), प्रियंका भारद्वाज (ऋषिकेश), साक्षी श्रीवास्तव(लखनऊ), नीतीश भगतॉ(कर्नाटका)और सत्यम मिश्रा (दतिया) मध्य प्रदेश की  राजधानी भोपाल में रह रहे हैं और यहाँ की बस्तियों और स्कूलों में जाकर माहवारी के विषय में खुलकर बात कर रहे हैं। बस्तियों में सुखिभव कि महिलाओं(सीआरपी)की टीम हर संभव जानकारी देने का प्रयास कर रहे हैं और लॉकडाउन के दौरान भी वीडियो व फोन के माध्यम से अपना काम जारी रखे हुए हैं।

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इस वर्ष संस्था 28 मई को पूरे विश्व में मनाए जाने वाले माहवारी स्वच्छता दिवस पर लॉक डाउन के दौरान सोशल मीडिया के माध्यम से इसे मनाने जा रहा है। गुरूवार को सोशल मीडिया के माध्यम से संस्था के सदस्य ऑनलाइन जुड़कर विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन करेगें। जिसमें महावारी से जुड़ी भ्रांतियों और स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए रणनीति पर विचार के साथ ही इसके क्रियान्वयन के लिए प्रयास किए जाएगें। 





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