छह सालों में बहुत सारे सुधार हुए, अब उसकी गति, दायरा बढ़ रहा है: PM मोदी

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  अक्टूबर 19, 2020   19:01
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छह सालों में बहुत सारे सुधार हुए, अब उसकी गति, दायरा बढ़ रहा है: PM मोदी

कृषि के क्षेत्र में किए गए हालिया सुधारों, शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए लाई गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, मजदूरों के लिए लाए गए श्रम सुधार सहित अन्य सुधारों की चर्चा करते हुए मोदी ने कहा कि ये सुधार इसलिए किए जा रहे है ताकि यह दशक भारत का दशक बने।

मैसुरू। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि बीते छह सालों में देश में चौतरफा सुधार हुए हैं और पिछले कुछ महीनों से इसकी गति और दायरे दोनों को बढ़ाया गया है ताकि 21वीं सदी भारत की हो। मैसूर विश्वविद्यालय के शताब्दी दीक्षांत समारोह को वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हमारे देश में चौतरफा सुधार हो रहे हैं, इतने सुधार पहले कभी नहीं हुए। पहले कुछ फैसले होते भी थे तो वह किसी एक क्षेत्र में होते थे और दूसरे क्षेत्र छूट जाते थे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘बीते छह सालों में बहुत सारे सुधार हुए हैं और कई क्षेत्रों में सुधार हुए हैं।’’ कृषि के क्षेत्र में किए गए हालिया सुधारों, शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए लाई गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, मजदूरों के लिए लाए गए श्रम सुधार सहित अन्य सुधारों की चर्चा करते हुए मोदी ने कहा कि ये सुधार इसलिए किए जा रहे है ताकि यह दशक भारत का दशक बने। उन्होंने कहा, ‘‘पिछले छह-सात महीने से सुधार की गति और दायरा दोनों बढ़ रहा है। खेती हो या अंतरिक्ष, रक्षा का क्षेत्र हो या उड्डयन का क्षेत्र, श्रम हो या फिर कोई और क्षेत्र, हर क्षेत्र में जरूरी बदलाव किए जा रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘अगर राष्ट्रीय शिक्षा नीति देश के शिक्षा क्षेत्र का भविष्य सुनिश्चित कर रही है, तो ये युवाओं को भी सशक्त कर रही है। अगर खेती से जुड़े सुधार किसानों को सशक्त कर रहे हैं, तो श्रम सुधार मजदूरों और उद्योगों दोनों को विकास और सुरक्षा दे रहे हैं।’’

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के फायदों के बारे में छात्रों को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा यह ‘‘प्री नर्सरी से लेकर पीएचडी’’ तक देश की पूरी शिक्षा व्यवस्था में मौलिक बदलाव लाने वाला एक बहुत बड़ा अभियान है। उन्होंने कहा, ‘‘भारत को उच्च शिक्षा के लिए एक वैश्विक केन्द्र और हमारे युवाओं को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए सभी स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं। ‘स्किलिंग’, ‘रिस्किलिंग’ और ‘अपस्किलिंग’ आज की जरूरत और राष्ट्रीय शिक्षा नीति इसी पर केन्द्रित है।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि बीत छह सालों में देश को उच्च शिक्षा के केंद्र के रूप में स्थापित करने का हर स्तर पर प्रयास हो रहा है। इसी को ध्यान में ध्यान में रखते हुए देश में प्रबंधन, चिकित्सा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में संस्थानों और उनमें सीटों की संख्या बढ़ाई गई है। उन्होंने कहा कि छह सालों के भीतर सात नए भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), 15 अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), हर साल एक नया भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) और 16 नए भारतीय सूचना और प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) की स्थापना की गई है। उन्होंने कहा, ‘‘वर्ष 2014 से पहले देश में 13 आईआईएम ही थे। इसी तरह करीब छह दशक तक देश में सिर्फ सात एम्स देश में सेवाएं दे रहे थे। साल 2014 के बाद इससे दोगुने यानि 15 एम्स देश में या तो स्थापित हो चुके हैं या फिर शुरु होने की प्रक्रिया में हैं। आज़ादी के इतने वर्षों के बाद भी साल 2014 से पहले तक देश में 16 आईआईटी और नौ आईआईआईटी थे।’’ 

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प्रधानमंत्री ने कहा कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे प्रयास सिर्फ नए संस्थान खोलने तक ही सीमित नहीं है। इन संस्थाओं के प्रशासन में सुधार से लेकर लैंगिक और सामाजिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए भी काम किया गया है। इन संस्थानों को ज्यादा अधिकार भी दिए गए हैं और इनमें पारदर्शिता भी लाई गई है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता की कमी थी और उसे दूर करने के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग बनाया जा चुका है। उन्होंने कहा, ‘‘भारत के जीवन में यह दशक बहुत बड़ा मौका लेकर आया है। देश के युवा आत्मनिर्भर बनेंगे तो देश भी आत्मनिर्भर बनेगा।’’ प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कर्नाटक में बाढ़ और भारी बारिश से अस्त व्यस्त हुए जनजीवन और नुकसान की भी चर्चा की और पीड़ित परिवार के प्रति संवेदनाएं प्रकट की। उन्होंने कहा कि केन्द्र और कर्नाटक सरकार राज्य में बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के लिए हर संभव कदम उठा रही है। कर्नाटक के राज्यपाल वजूभाई वाला और कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री सीएन अश्वथ नारायण भी इस कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। ज्ञात हो कि मैसूर विश्वविद्यालय की स्थापना 27 जुलाई, 1916 को हुई थी। यह देश का छठा विश्वविद्यालय और कर्नाटक राज्य में पहला विश्वविद्यालय था। विश्वविद्यालय की स्थापना तत्कालीन मैसूर रियासत के दूरदर्शी महाराजा, नलवाड़ी कृष्णराज वाडियार और तत्कालीन दीवान सर एम.वी. विश्वेश्वरैया ने की थी।





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स्वदेशी वैक्सीन पर विपक्ष की सियासत, बीजेपी बोली- फैलाया रहा कंफ्यूजन

  •  अभिनय आकाश
  •  मार्च 5, 2021   18:06
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स्वदेशी वैक्सीन पर विपक्ष की सियासत, बीजेपी बोली- फैलाया रहा कंफ्यूजन

बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा है कि विपक्षी दलों की सरकारें अपने राज्यों में कोरोना वैक्सीन का टीका लगाने से इनकार कर रही हैं। पंजाब, छत्तीसगढ़ और केरल की सरकारों ने कहा है कि वो अपने राज्य के लोगों को को-वैक्सीन का टीका नहीं लगवाएंगे।

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने जानकारी दी कि देश में कोविड-19 के 1.77 करोड़ से अधिक टीके लगाए जा चुके हैं। भारत में 16 जनवरी को स्वास्थ्य कर्मियों को टीके लगाए जाने के साथ ही देशव्यापी टीकाकरण अभियान शुरू हुआ था। कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में अग्रिम मोर्चे पर तैनात कर्मियों को टीके लगाने की शुरुआत दो फरवरी से हुई थी। लेकिन इसके साथ ही वैक्सीन को लेकर सियासत भी देश में जोरो पर है। 

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बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा है कि विपक्षी दलों की सरकारें अपने राज्यों में कोरोना वैक्सीन का टीका लगाने से इनकार कर रही हैं। पंजाब, छत्तीसगढ़ और केरल की सरकारों ने कहा है कि वो अपने राज्य के लोगों को को-वैक्सीन का टीका नहीं लगवाएंगे। संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल कोरोना की शुरुआत से लेकर केवल राजनीति करके कंफ्यूजन पैदा कर रही है। बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि विपक्ष द्वारा शासित राज्यों छत्तीसगढ़, पंजाब और केरल ने कहा है कि वे को-वैक्सीन का टीकाकरण अपने राज्यों में नहीं करेंगे। जिस प्रकार की राजनीति विपक्षी दल कर रहे हैं, ये अवांछित है।





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कोरोना के बाद PM मोदी के पहले विदेश दौरे का क्या है चुनावी कनेक्शन?

  •  अभिनय आकाश
  •  मार्च 5, 2021   17:44
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कोरोना के बाद PM मोदी के पहले विदेश दौरे का क्या है चुनावी कनेक्शन?

पीएम मोदी की आखिरी विदेश यात्रा 2019 के नवंबर में हुई थी जब वह ब्राजील के दौरे पर गए थे। पिछले साल फरवरी में उन्हें बेल्जियम के दौरे पर जाना था। लेकिन आखिरी समय में इसे रद्द कर दिया गया था। बांग्लादेश के प्रस्तावित दौरे से ठीक पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर वहां गए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महीने के आखिर में बांग्लादेश के दो दिवसीय दौरे पर जा रहे हैं। 26-27 मार्च को पीएम मोदी बांग्लादेश के दौरे पर होंगे। कोरोना महामारी के बाद यह पीएम मोदी की पहली विदेश यात्रा है। नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद 2020 पहला ऐसा साल जब उनह्नों एक भी विदेश दौरा नहीं किया। पीएम मोदी की आखिरी विदेश यात्रा 2019 के नवंबर में हुई थी जब वह ब्राजील के दौरे पर गए थे। पिछले साल फरवरी में उन्हें बेल्जियम के दौरे पर जाना था। लेकिन आखिरी समय में इसे रद्द कर दिया गया था। बांग्लादेश के प्रस्तावित दौरे से ठीक पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर वहां गए।

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बांग्लादेश दौरे पर विदेश मंत्री 

विदेश मंत्री एस जयशंकर प्रधानमंत्री मोदी की बांग्लादेश की आगामी यात्रा से पहले एक दिवसीय यात्रा पर यहां पहुंचे। प्रधानमंत्री इस महीने बांग्लादेश की आजादी की 50वीं वर्षगांठ और बांग्लादेश-भारत के बीच कूटनीतिक संबंधों की स्थापना के 50 साल पूरे होने के अवसर पर यहां आने वाले हैं। बांग्लादेश के विदेश मंत्री ए. के. अब्दुल मोमेन के साथ विस्तृत चर्चा के बाद जयशंकर ने कहा कि भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति में बांग्लादेश का प्रमुख स्थान है और भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ में भी वह प्रासंगिक है।

कटिहार से ढाका मैत्री एक्सप्रेस

पीएम मोदी के बांग्लादेश दौरे के ही दिन बिहार के कटिहार के रास्ते मैत्री एक्सप्रेस बांग्लादेश की राजधानी ढाका पहुंचेगी। यह मैत्री एक्सप्रेस और बंधन एक्सप्रेस के बादी तीसरी यात्री ट्रेन होगी जो दो दोस्ताना पड़ोसी देशों के बीच चलने जा रही है। 

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मतुआ समुदाय पर नजर

पीएम मोदी का बांग्लादेश दौरा ऐसे वक्त में है जब उससे सटे राज्य पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। वहां 27 मार्च को पहले चरण की वोटिंग होनी है। खबरों के अनुसार पीएम मोदी उसी दिन मतुआ समुदाय के अराध्य हरिश चंद्र ठाकुर की जन्मस्थली भी जा सकते हैं। इस समुदाय के लिए यह जगह बहुत ही प्रतिष्ठित मानी जाती है। बंगाल चुनाव में इस समुदाय को बहुत ही निर्णायक फैक्टर माना जा रहा है। बीजेपी-टीएमसी दोनों दलों की ओर से इसे अपने पक्ष में करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव में इस समुदाय का बीजेपी के प्रति झुकाव देखने को मिला था। 2019 के चुनाव के वक्त पीएम मोदी बंगाल में चुनानी अभियान की शुरुआत मतुआ संप्रदाय के 100 साल पुराने मठ में आर्शीवाद लेकर किया। गृह मंत्री अमित शाह दिसंबर में जब बंगाल दौरे पर थे तो उन्होंने मतुआ समुदाय के शख्स के यहां भोजन किया था। मतुआ समुदाय बंगाल की 70 फीसदी से अधिक सीटों पर अहम भूमिका निभाता है। 





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।


चोरी करने के लिए फ्लाइट से करते थे ट्रैवल, यहां पढ़े असल जिंदगी के बंटी-बबली की कहानी

  •  निधि अविनाश
  •  मार्च 5, 2021   17:37
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चोरी करने के लिए फ्लाइट से करते थे ट्रैवल, यहां पढ़े असल जिंदगी के बंटी-बबली की कहानी

एक खबर के मुताबिक, इस गैंग ने कई राज्यों में 100 से ज्यादा जूलर्स को कंगाल कर दिया है। भारत में पकड़े न जाएं इसके लिए वह चोरी का माल नेपाल में बेच देते।

बॉलिवुड फिल्म बंटी-बबली से प्रेरणा लेते हुए बदमाशों ने कुछ ऐसा किया जिसे सुनकर आप भी हैरान हो जाएंगे। वारदात है गाजियाबाद की जहां बदमाशों की गैंग कई चोरियों को अंजाम दे चुके है। बता दें कि यह गैंग इसल जिंदगी के बंटी-बबली का किरदार निभा रहे थे। पहले यह गैंग बड़े-बड़े होटलों में रूकते, चोरी के लिए स्पेशली फ्लाइट से आना-जाना करते और रेकी के लिए बदमाशों को हायर करते फिर अपने काम को अंजाम देते। एक खबर के मुताबिक, इस गैंग ने कई राज्यों में 100 से ज्यादा जूलर्स को कंगाल कर दिया है। भारत में पकड़े न जाएं इसके लिए वह चोरी का माल नेपाल में बेच देते। 

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पुलिस ने इस गैंग में शामिल 3 महिलाओं को गिरफ्तार किया है जो की बबली का किरदार निभाते थे वहीं बंटी का किरदार निभाने वाला अभी भी फरार है। मोदीनगर और साहिबाबाद की एक पुलिस टीम ने इस गैंग को पकड़ा। पुलिस ने बताया कि, गैंग ने अबतक 2.10 लाख रुपये कैश, 4 लाख की जूलरी, गैस कटर और कई अन्य सामान बरामद किया है। इस गैंग ने हाल-फिलहाल 9 से 26 फरवरी तक मोदीनगर और साहिबाबद के जूलरी शॉप को लूटा है। बता दें कि इन गैंग का मास्टरमाइंड शमा का पति तनवीर अभी भी फरार है।





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