महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन की कोई जरुरत नहीं: अजीत पवार

 Ajit Pawar
भाजपा नेताओं ने उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के पास से एक एसयूवी बरामद होने के मामले में पुलिस अधिकारी सचिन वाजे की गिरफ्तारी और राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख पर आईपीएस अधिकारी परमबीर सिंह द्वारा भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जाने के बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है।
पुणे। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने शुक्रवार को कहा कि राज्य की स्थिति ऐसी नहीं है कि राष्ट्रपति शासन लगाने की जरुरत हो। उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा कि पुलिस तबादले में कथित भ्रष्टाचार की जांच के तहत आईपीएस अधिकारी रश्मि शुक्ला द्वारा की गई फोन टैपिंग पर मुख्य सचिव सीताराम कुंटे की रिपोर्ट बिल्कुल स्पष्ट है और उसमें सभी तथ्य शामिल हैं। पवार ने कहा, ‘‘(भाजपा नेता) सुधीर मुंगंटीवार और विपक्ष राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने पर जोर दे रहा है। लेकिन राज्य में ऐसी स्थिति नहीं है।’’ उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ एमवीए गठबंधन के पास 165 विधायकों का समर्थन है और विधानसभा में उसके पास बहुमत है। 

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भाजपा नेताओं ने उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के पास से एक एसयूवी बरामद होने के मामले में पुलिस अधिकारी सचिन वाजे की गिरफ्तारी और राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख पर आईपीएस अधिकारी परमबीर सिंह द्वारा भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जाने के बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है। अंबानी के घर के पास बरामद एसयूवी में जिलेटिन की छड़ें थीं। फोन टैपिंग पर कुंटे की रिपोर्ट के बारे में पवार ने कहा कि वह बहुत ईमानदार और प्रतिभाशाली अधिकारी हैं। पवार ने कहा, ‘‘उन्होंने जो रिपोर्ट दी है वह बिल्कुल स्पष्ट है और उसे पढ़कर कोई भी तथ्यों को समझ सकता है।’’ उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जैसा कि शुक्ला ने राज्य के तत्कालीन डीजीपी को लिखे अपने पत्र में कथित रूप से रिश्वत लेकर तबादला करने का आरोप लगाया है, ऐसा कभी नहीं हुआ। मुंबई के भांडुप में एक अस्पताल में आग लगने से 10 मरीजों की मौत होने के संबंध में पवार ने कहा कि उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि भविष्य में ऐसी घटना नहीं होनी चाहिए। 

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उन्होंने कहा, ‘‘हमने सरकारी अस्पतालों का दमकल विभाग से ऑडिट कराने के लिए धन जारी कर दिया है।’’ संप्रग गठबंधन का नेतृत्व शरद पवार को करना चाहिए, इस बारे में शिवसेना सांसद संजय राउत के बयान के संबंध में पूछे जाने पर अजीत पवार ने कहा कि वह राष्ट्रीय मुद्दों पर नहीं बोलते हैं। पवार ने कहा, ‘‘मैं सिर्फ राज्य से जुड़े मुद्दों पर बोल सकता हूं। मैं 1991 में केन्द्र से वापस आ गया था (उस दौरान वह कुछ वक्त तक सांसद रहे थे), इसलिए मेरा संपर्क भी सीमित है।

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