टिफिन बैठक का फंडा: मंत्रियों को दिए थे कार्यक्षमता बढ़ाने के टिप्‍स, कितना अमल हुआ, अब PM ने मांगी रिपोर्ट

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अभिनय आकाश । Aug 23, 2022 1:50PM
पीएम की ओर से मंत्रिपरिषद की बैठकों में दिए गए सुझावों के फॉलो-अप से पता चलता है कि कैसे वह खुद प्रोग्रेस को मॉनिटर करते हैं। हमने सभी विभागों को डीटेल्‍स भेज दी हैं।'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्रियों से कम्प्लायंस रिपोर्ट मांगी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कुछ महीने पहले ही मंत्रिपरिषद दक्षता बढ़ाने और सर्वोत्तम शासन प्रथाओं को अपनाने के लिए सुझाव दिए थे। अब पीएम जानना चाहते हैं कि उनके सुझावों पर कितना अमल हुआ है। सूत्रों ने कहा कि मंत्रियों और उनके विभागों को हाल ही में जीईएम (गवर्नमेंट ई-मार्केट प्लेस) पोर्टल के माध्यम से वस्तुओं और सेवाओं की खरीद, अधिकारियों के साथ 'टिफिन बैठक' आयोजित करने और प्रसार के लिए सोशल मीडिया का उपयोग करने सहित कई मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए कहा गया था। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार पीएम की ओर से मंत्रिपरिषद की बैठकों में दिए गए सुझावों के फॉलो-अप से पता चलता है कि कैसे वह खुद प्रोग्रेस को मॉनिटर करते हैं। हमने सभी विभागों को डीटेल्‍स भेज दी हैं।'

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टीओआई की रिपोर्ट के अनुसारपीएम मोदी ने टिफिन बैठक का आइडिया गुजरात के मुख्यमंत्री रहते निकाला था। जिसमें अधिकारियों संग खाने पर बैठक होती थी।भोजन पर अधिकारियों के साथ बैठक पर केंद्रित है। अधिकारी बैठकों में अपना टिफिन लेकर आते हैं और अपने भोजन के साथ-साथ विचार भी साझा करते हैं। उन्होंने कहा कि मंत्रियों को सलाह दी गई थी कि वे इस संस्कृति को टीम-निर्माण और साथियों के बीच आपसी बंधन के साधन के रूप में विकसित करें। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि सरकार का निगरानी और अनुवर्ती कार्रवाई पर बहुत अधिक ध्यान है। पीएम की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठकों के दौर के बाद शॉर्टलिस्ट किए गए कार्रवाई योग्य सुझावों का यह अनुवर्ती दिखाता है कि प्रगति की निगरानी कैसे की जाती है। 

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पिछले साल प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सरकार ने, प्रौद्योगिकी-आधारित संसाधनों को विकसित करने, अपनी टीम में पेशेवर लोगों को शामिल करने और सभी मंत्रियों के कार्यालयों में अपनाई जाने वाली अन्य समान पहलों को और अधिक पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से मंत्रिपरिषद को आठ समूहों में विभाजित किया था। यह कवायद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुए ‘‘चिंतन शिविरों’’ के बाद की गई थी। चिंतन शिविर की प्रत्येक बैठक लगभग पांच घंटे तक चली थी। चिंतन शिविर के ऐसे कुल पांच सत्र आयोजित किए गए थे। इनमें व्यक्तिगत दक्षता, केंद्रित क्रियान्वयन, मंत्रालयों के कामकाज और हितधारकों की भागीदारी, पार्टी के साथ समन्वय, प्रभावी संचार और संसदीय प्रथाओं पर पर एक-एक सत्र हुआ था। 

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