Bhopal में जी20 का दो दिवसीय आयोजन समाप्त

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समापन समारोह की अध्यक्षता करते हुए पूर्व राजदूत एवं रिसर्च एडवाइजरी काउंसिल ऑफ आरआईएस (इण्डिया) के चेयरमैन एस.टी. देवारे ने कहा कि इसमें जी-20 देशों के ख्याति प्राप्त अर्थशास्त्री, नीति निर्माता और चिंतक शामिल हुए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिये गये मंत्र “वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर’’ को ध्यान में रखते हुए भोपाल में आयोजित जी-20 के दो दिवसीय विशेष थिंक-20 इवेंट “पर्यावरण सम्मत जीवन शैली-नैतिक मूल्य तथा सुमंगलम युक्त वैश्विक सुशासन’’ का मंगलवार को समापन हुआ। समापन समारोह की अध्यक्षता करते हुए पूर्व राजदूत एवं रिसर्च एडवाइजरी काउंसिल ऑफ आरआईएस (इण्डिया) के चेयरमैन एस.टी. देवारे ने कहा कि इसमें जी-20 देशों के ख्याति प्राप्त अर्थशास्त्री, नीति निर्माता और चिंतक शामिल हुए।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें सभी की खुशहाली के लिये मानव केन्द्रित पहलुओं पर जोर देना चाहिये। थिंक-20 में जीवन मूल्य और सुशासन की बेहतरी पर चर्चा हुई। नवाचार, सुझाव और उपयोगी अनुशंसाएँ की गई हैं। भारत में सदियों से जीवन मूल्यों को समृद्ध करने वाली संस्कृति के साथ स्वास्थ्य के लिये आयुर्वेद और योग मौजूद है।’’ रिसर्च एण्ड इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर डेवलपिंग कंट्रीज (आरआईएस) के महानिदेशक और अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ गुड गवर्नेंस एंड पॉलिसी एनालिसिस के वाइस चेयरमैन प्रो. सचिन चतुर्वेदी ने कॉन्फ्रेंस रिपोर्ट प्रस्तुत किया।

नीदरलैंड के राजदूत मार्टिन वेन डेन बर्ग, भारत में विकास निगम के प्रमुख और जर्मन दूतावास में मंत्री उवे गेहलेन, बांग्लादेश के सेंटर फॉर पॉलिसी डायलॉग (सीपीडी) की डिस्टिंग्विश्ड फेलो डॉ. देबप्रिय भट्टाचार्य, थिंक-20 इण्डिया की टास्क फोर्स-6 के अध्यक्ष और विजिटिंग फेलो आरआईएस, नई दिल्ली जी.ए. टडास और केंद्रीय विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री संदीप चक्रवर्ती ने भी संबोधित किया। प्रो सचिन चतुर्वेदी ने कॉन्फ्रेंस रिपोर्ट के प्रेजेंटेशन में बताया कि दो दिवसीय इवेंट में 80 शोधार्थियों ने अपने शोध साझा किये।

रिपोर्ट को ‘भोपाल घोषणापत्र’ के नाम से जाना जायेगा। इसमें समावेशी विकास मॉडल की बात कही गई है। इसमें ‘वन अर्थ-वन फेमिली’ के साथ सतत विकास, सामाजिक, वित्तीय, स्वास्थ्य, बाल विकास, महिलाओं के नेतृत्व में विकास, जलवायु परिवर्तन, त्रिपक्षीय सहयोग पर जोर दिया गया है। बच्चों के भविष्य की चिंता की गई है। सभी के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिये जीवन मूल्यों की ओर लौटने की बात कही गई है। पर्यावरण के साथ जीवन-शैली को जोड़ने की बात कही गई है।

वैश्विक स्तर पर मौजूद संस्थाओं का सभी के लिये समन्वित सहयोग के लिये परिवर्तन की आवश्यकता की अनुशंसा की गई है। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि वैश्विक खुशहाली के लिये दक्षिण एशिया और दक्षिण अफ्रीकी देशों को साथ लेना होगा। नीदरलैंड के राजदूत मॉर्टिन वेन डेन बर्ग ने कहा, ‘‘हमारी संयुक्त रूप से जिम्मेदारी है कि हम प्रणाली के साथ रह कर उसे बदलने का कार्य करें। अपनी आवाज को सशक्त बनायें। वन ड्रीम, वन डायमेंशन, वन फ्यूचर, वन फेमिली एण्ड वन अर्थ की ओर हमें आगे बढ़ना है।’’

जर्मन दूतावास भारत में मंत्री उबे गेहलेन ने कहा, ‘‘जनता के पैसे का उपयोग बेहतर तरीके से होना चाहिये। हमें देखना होगा कि वित्त का प्रवाह सही दिशा में हो। समाज की सहभागिता और समग्रता, जनता की ताकत को कभी भी नहीं भूलना चाहिये। संसार में अभी भी गरीबी और भुखमरी मौजूद है।’’ बांग्लादेश के सेंटर फॉर पॉलिसी डायलॉग के डिस्टिंग्विश फेलो डॉ. भट्टाचार्य ने कहा कि जी-20 का कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने में किसी को भी पीछे नहीं छोड़ना है, सबको साथ लेकर चलना है।

भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव संदीप चक्रवर्ती ने कहा, ‘‘लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिये हम दक्षिण अफ्रीका में मिलेट प्रोजेक्ट, फॉरेस्ट और लाइफ मेनेजमेंट के कार्यक्रम चला रहे हैं। निश्चित ही भोपाल घोषणापत्र जी-20 में बहुत मददगार साबित होगा।’’ थिंक-20 के प्लेनरी सत्र-5 न्यू कॉम्प्लीमेंट ट्रीज़ इन ट्रेड एंड वैल्यू चेन्स की अध्यक्षता कर रहे सेंटर फॉर पॉलिसी डायलॉग बांग्लादेश के प्रो. मुस्तफ़िज़ूर रहमान अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा, ‘‘कोविड महामारी दौर में ग्लोबल वैल्यू चेन पर पड़े दुष्प्रभाव ने वैश्विक व्यापार एवं अर्थव्यवस्था को ज़ोरदार झटका दिया है। इस दौरान व्यापार प्रतिबंधों एवं सप्लाई चेन पर पड़े दबाव ने विशेष रूप से अल्प विकसित एवं कम आय वाले देशों को अपना शिकार बनाया।’’

प्रो. रहमान ने कहा, ‘‘आज जब हम वैश्विक विकास की बात कर रहे हैं, यह महत्वपूर्ण है कि हमारा विकास का मॉडल समावेशी हो। प्रतियोगी विचारों के साथ अल्प विकसित एवं विकासशील देशों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी तक पहुँच एवं विशेष ट्रेड प्रावधान होने चाहिए, जो इन देशों की वैश्विक बाज़ार तक पहुँच स्थापित करने में सहायक हो।’’ उन्होंने कहा कि आज की तेजी से बदलती अर्थ-व्यवस्था में ग्लोबल वैल्यू चेन को और सशक्त करने की ज़रूरत है।

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