दशहरा रैली को लेकर आमने-सामने उद्धव और शिंदे गुट, पूर्व सीएम ने किया बड़ा ऐलान

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ANI
अंकित सिंह । Aug 29, 2022 4:34PM
दूसरी ओर शिंदे गुट का दावा है कि उद्धव गुट को दशहरा रैली करने का अधिकार ही नहीं है। शिंदे गुट ने कहा है कि हिंदुत्व को उद्धव ठाकरे ने त्याग दिया है। ऐसे में उनके पास इस रैली को लेकर अधिकार ही नहीं है। हालांकि, शिंदे गुट की ओर से यह भी कहा गया है कि मुख्यमंत्री जल्द ही दशहरा रैली को लेकर निर्णय लेंगे।

महाराष्ट्र में राजनीतिक हलचल पिछले कई दिनों से तेज बनी हुई है। महाराष्ट्र में सत्ता परिवर्तन के बाद शिवसेना को लेकर उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे आमने-सामने हैं। अब दोनों गुट दशहरा रैली को लेकर आपस में भिड़ चुके हैं। उत्तर ठाकरे गुट का दावा है कि दशहरा रैली शिवसेना की थी और यह रहेगी भी। वहीं, आज उद्धव ठाकरे ने साफ तौर पर कह दिया है कि महाराष्ट्र में दशहरा रैली शिवाजी पार्क में की जाएगी। इसमें राज्य भर के शिवसैनिक हिस्सा लेंगे। इसके साथ ही उद्धव ठाकरे ने यह भी कहा कि मुझे पता नहीं है कि सरकार इस रैली की इजाजत देगी या नहीं देगी। इससे पहले आदित्य ठाकरे ने दावा किया था कि सरकार ने अभी तक दशहरा सभा की अनुमति उनकी पार्टी को नहीं दी है।

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दूसरी ओर शिंदे गुट का दावा है कि उद्धव गुट को दशहरा रैली करने का अधिकार ही नहीं है। शिंदे गुट ने कहा है कि हिंदुत्व को उद्धव ठाकरे ने त्याग दिया है। ऐसे में उनके पास इस रैली को लेकर अधिकार ही नहीं है। हालांकि, शिंदे गुट की ओर से यह भी कहा गया है कि मुख्यमंत्री जल्द ही दशहरा रैली को लेकर निर्णय लेंगे। आपको बता दें कि उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे की ओर से शिवसेना पर कब्जे की कवायत लगातार जारी है। वर्तमान में देखे तो एकनाथ शिंदे गुट में शिवसेना के 40 विधायक और 12 सांसद हैं। वही उद्धव ठाकरे के साथ संगठन के नेता हैं। असली शिवसेना का अधिकारी कौन, फिलहाल यह मामला कोर्ट में है। इसको लेकर लगातार सुनवाई चल रही है।

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आपको बता दें कि हर साल शिवसेना शिवाजी पार्क में दशहरा रैली करती आई है। यहां पार्टी प्रमुख अपने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हैं। राज्य के अलग-अलग हिस्सों से शिवसैनिक शिवाजी पार्क में बड़ी संख्या में शामिल होते हैं। पिछले 2 साल में कोरोना वायरस की वजह से यह रैली नहीं हो सका है। इस बार दोनों गुटों की ओर से इस रैली को करने का दम दिखाया जा रहा है। शिवसेना से बगावत के बाद एकनाथ शिंदे राज्य के मुख्यमंत्री बने हैं। उन्होंने उद्धव ठाकरे की जगह ली है। ऐसे में उनकी ओर से दावा किया जा रहा है कि असली शिवसेना उन्हीं के पास है और वह बाला साहब ठाकरे के विचारों को आगे बढ़ा रहे हैं। दूसरी और उद्धव ठाकरे गुट का दावा है कि असली शिवसेना तो उनके पास है।

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