रविशंकर से मिले शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष: राम मंदिर निर्माण की हिमायत की

UP Shia Waqf Board requests Sri Sri to mediate in Ayodhya issue; Hindu Mahasabha says he has no right
रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर मध्यस्थता की नयी पहल के बीच उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के संस्थापक श्री श्री रविशंकर से मुलाकात करके अयोध्या के विवादित स्थल पर राम मंदिर निर्माण की हिमायत की।

लखनऊ। रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर मध्यस्थता की नयी पहल के बीच उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के संस्थापक श्री श्री रविशंकर से मुलाकात करके अयोध्या के विवादित स्थल पर राम मंदिर निर्माण की हिमायत की। रिजवी ने बताया कि उन्होंने श्री श्री रविशंकर से मुलाकात की और बोर्ड का रुख स्पष्ट किया कि अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मंदिर बनना चाहिये। उन्होंने मंदिर निर्माण के लिये अदालती लड़ाई लड़ रहे सभी संतों और महन्तों से मुलाकात की है और वे सभी बातचीत के जरिये मसले का हल निकालने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि शिया वक्फ बोर्ड दोनों पक्षों के बीच आपसी समझौते का खाका तैयार कर रहा है।

शिया वक्फ बोर्ड राम जन्मभूमि पर किसी भी मस्जिद का निर्माण नहीं चाहता है। मस्जिद का निर्माण किसी मुस्लिम बहुल क्षेत्र में किया जाना चाहिये। वैसे, अयोध्या में जितनी मस्जिदें हैं वे काफी हैं। अब किसी नयी मस्जिद की कोई जरूरत नहीं है। रिजवी ने कहा कि जो लोग राम जन्मभूमि या उसके आसपास मस्जिद बनाने की मांग कर रहे हैं, वे इस विवाद को सुलझाने के बजाय लटकाना चाहते हैं। उन्होंने दावा किया कि बाबरी मस्जिद शिया वक्फ की सम्पत्ति थी और ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को इस बारे में फैसला करने का कोई हक नहीं है। सिर्फ शिया वक्फ बोर्ड ही इसे तय करेगा। रिजवी ने कहा कि उन्होंने श्री श्री रविशंकर को अपने रुख से अवगत करा दिया है।

अगर वह कोई पहल करते हैं तो इससे हिन्दू-मुस्लिम भाईचारा मजबूत होगा। उल्लेखनीय है कि अयोध्या विवाद पर उच्चतम न्यायालय में सुनवाई के बीच, श्री श्री रविशंकर ने गत छह अक्तूबर को बेंगलुरू में निर्मोही अखाड़ा और कुछ मुस्लिम धर्मगुरुओं से मुलाकात की थी। रविशंकर द्वारा जारी बयान के मुताबिक वे धर्मगुरु ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य थे। बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य जफरयाब जीलानी ने इस घटनाक्रम के बारे में पूछे जाने पर कहा था कि फिलहाल बोर्ड का स्पष्ट रूख है कि अयोध्या विवाद पर अब बातचीत की कोई सम्भावना नहीं है। वह यह भी नहीं जानते कि बोर्ड के किन सदस्यों ने रविशंकर से मुलाकात की थी।

हालांकि उन्होंने कहा था कि अगर बोर्ड को कभी महसूस होगा कि बातचीत से बात बन सकती है तो वह अपनी बैठक में इसका प्रस्ताव लाएगा। दूसरी ओर, निर्मोही अखाड़ा के मुख्य महन्त रामदास ने बताया कि उन्हें गत छह अक्तूबर को अखाड़े के पदाधिकारियों और मुस्लिम धर्मगुरुओं के बीच बेंगलुरू में बातचीत होने के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा था कि आगामी पांच दिसम्बर से अयोध्या मामले में सुनवाई शुरू होनी है, लिहाजा इस समय बातचीत शुरू होने का कोई खास मतलब नहीं है। बहरहाल, उनके लिये बातचीत के दरवाजे अब भी खुले हैं।

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