राजस्थान में आपदा और राज्य सरकार लापता : राजे

Vasundhara Raje
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उन्होंने कहा कि बारां, झालावाड़, कोटा, धौलपुर, चितौड़गढ़, प्रतापगढ़ और भीलवाड़ा सहित कई ज़िलों में बाढ़ से ज़नजीवन प्रभावित हुआ है एवं लोग तीन-तीन दिन भूखे प्यासे फंसे रहे। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘ मौसम विभाग की चेतावनी के बाद भी लोगों को संभावित बाढ़ क्षेत्र से सुरक्षित स्थान पर नहीं पहुँचाया गया।

जयपुर, 26 अगस्त।  राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे ने बुधवार को झालावाड़, बारां, कोटा और टोंक जिलों के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया। उनके साथ सांसद दुष्यंत सिंह भी थे। राजे ने बाद में झालावाड़ में संवाददाताओं से बातचीत में राज्य की कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि गत वर्ष की बाढ़ से सबक लेकर राज्य सरकार चेत जाती तो यह स्थिति नहीं होती। उनका कहना था कि जो हालात सामने है उनसे साफ है कि ‘प्रदेश में आपदा और गहलोत सरकार लापता’।

उन्होंने कहा कि बारां, झालावाड़, कोटा, धौलपुर, चितौड़गढ़, प्रतापगढ़ और भीलवाड़ा सहित कई ज़िलों में बाढ़ से ज़नजीवन प्रभावित हुआ है एवं लोग तीन-तीन दिन भूखे प्यासे फंसे रहे। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘ मौसम विभाग की चेतावनी के बाद भी लोगों को संभावित बाढ़ क्षेत्र से सुरक्षित स्थान पर नहीं पहुँचाया गया। राज्य सरकार ने जनता को भगवान भरोसे छोड़ दिया। लोग मर रहे हैं,पशु धन नष्ट हो रहा है। घर ढह गये हैं, पर सरकार का अता-पता नहीं है।’’ उन्होंने कहा कि किसानों की सोयाबीन, उड़द, धान, मक्का, चवला सहित ख़रीफ़ की कई फसलों में बड़ा नुकसान है , ऐसे में गत वर्ष की बाढ़ से सबक़ लेकर राज्य सरकार चेत जाती तो यह स्थिति नहीं होती।

उन्होंने दावा किया कि कई लोगों को गत वर्ष बाढ़ में हुए नुकसान का मुआवजा आज भी नहीं मिला तथा गत वर्ष सोयाबीन का फसल बीमा क्लेम अभी भी बाक़ी है। पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार से माँग की कि लोगों को तुरंत मुआवजा और मृतक आश्रितों को तुरंत आर्थिक सहायता दी जाए। राजे ने सेना, पुलिस, अधिकारियों, कर्मचारियों एवे भाजपा कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया जिन्होंने लोगों की जान बचाई। उल्लेखनीय है कि भारी बारिश, नदियों में जलस्तर बढ़ने एवं बांधों के गेट खोले जाने के कारण कोटा संभाग में कई इलाकों में बाढ़ के हालात पैदा हो गए हैं। कई आवासीय इलाके पानी में डूब गए और बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया पड़ा। इससे सबसे अधिक कोटा, झालावाड़ और बूंदी जिले प्रभावित हुए हैं।

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