मास्क पहनना ही कोरोना के खिलाफ बचाव का एकमात्र तरीका: उद्धव ठाकरे

Uddhav Thackeray
मुख्यमंत्री ने किले में ‘पालना समारोह’ समेत कई कार्यक्रमों में शिरकत किया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री अजित पवार भी उपस्थित थे। कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर जिला प्रशासन ने लोगों से मराठा योद्धा शिवाजी महाराज की जयंती पर शिवनेरी में भीड़भाड़ नहीं करने का अनुरोध किया है।
पुणे। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज के समय में युद्ध लड़ने के लिए तलवार और ढाल का इस्तेमाल होता था लेकिन कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में मास्क ही एकमात्र बचाव का तरीका है। उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि देने के लिए पुणे जिले के जुन्नार तहसील में शिवनेरी किले का दौरा किया। शिवाजी महाराज का जन्म 1630 में शिवनेरी किले में हुआ था। ठाकरे सुबह शिवनेरी किला गए जहां उन्होंने शिवाजी महाराज और उनकी मां जीजाबाई को श्रद्धांजलि दी। ठाकरे ने कहा कि समूचा महाराष्ट्र छत्रपति शिवाजी महाराज को देवता की तरह पूजता है। उन्होंने कहा, ‘‘कई राजा आए और गए... कई लड़ाइयां लड़ी गयीं, कई साम्राज्य आए और खत्म हो गये, लेकिन छत्रपति शिवाजी महाराज में कुछ विशिष्ट था।’’ उन्होंने कहा, ‘‘शिवाजी महाराज ने कई युद्ध लड़े और ‘स्वराज’ की स्थापना की...। यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि उन्होंने विरोधियों का कैसे मुकाबला किया। इस तरह का युद्ध अब नहीं लड़ा जा रहा है और न ही तलवार और ढाल का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन इस वक्त हम कोरोना वायरस के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं और मास्क पहनना ही इस लड़ाई में बचाव का एकमात्र तरीका है।’’ ठाकरे ने कहा, ‘‘...लड़ाई में जब जरूरत पड़ेगी तो हम हथियार उठाएंगे और बचाव के लिए ढाल का इस्तेमाल करेंगे। इस लड़ाई में मास्क हमारा ढाल है... इसे कभी नहीं भूलें।’’

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उन्होंने कहा कि कोई सिर्फ तलवार थामकर युद्ध नहीं जीत सकता है। इसके लिए दृढ़ निश्चय और जीत की इच्छाशक्ति होनी चाहिए। शिवाजी महाराज हमेशा प्रेरित करते रहेंगे। मुख्यमंत्री ने किले में ‘पालना समारोह’ समेत कई कार्यक्रमों में शिरकत किया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री अजित पवार भी उपस्थित थे। कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर जिला प्रशासन ने लोगों से मराठा योद्धा शिवाजी महाराज की जयंती पर शिवनेरी में भीड़भाड़ नहीं करने का अनुरोध किया है। ठाकरे ने यह भी कहा कि वह खुद को भाग्यशाली और आभारी मानते हैं कि उन्हें लगातार दूसरे साल श्रद्धांजलि देने के लिए शिवनेरी आने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि राज्य में सभी किलों से संबंधित इतिहास को दुनियाभर में बताने की जरूरत है।

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