सदन में पूछे जाने वाले प्रश्न कितने प्रकार के होते हैं, सांसदों के सवाल किस आधार पर स्वीकार-अस्वीकार किए जाते हैं?

सदन में पूछे जाने वाले प्रश्न कितने प्रकार के होते हैं, सांसदों के सवाल किस आधार पर स्वीकार-अस्वीकार किए जाते हैं?

दोनों सदनों में निर्वाचित सदस्यों को निजी सदस्यों से तारांकित प्रश्नों, अतारांकित प्रश्नों, अल्प सूचना प्रश्नों और प्रश्नों के रूप में विभिन्न मंत्रालयों और विभागों से सूचना प्राप्त करने का अधिकार प्राप्त है।

संसद जहां से देश को बहुत कुछ हासिल होता है। उसे हासिल में से एक होता है, उसी हासिल में से एक होता है किसी नेता का उभरना, लोकनीतियों के लिए बिल का गढ़ना। प्रश्न और उत्तर के सहारे लोकनीतियों को लेकर संवाद करना। संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है। राज्यसभा में कांग्रेस सांसद के सी वेणुगोपाल द्वारा दिए गए एक प्रश्न को निर्धारित किए गए प्रश्न सूची से हटा दिया गया। उनका सवाल था कि क्या एनआरआई को हवाई अड्डों पर परेशान किया गया और वापस भेज दिया गया। क्या अधिकारियों ने उनसे किसान आंदोलन का समर्थन नहीं करने के लिए कहा। लेकिन कांग्रेस सांसद के इस सवाल को अंतिम रूप से स्वीकार किए जाने के बावजूद जवाब देने के लिए निर्धारित किए गए प्रश्न सूची से हटा दिया गया। लेकिन ये कोई एकलौता मामला नहीं है। इसी तरह के वाक्या का जिक्र बीजेपी के सांसद सुब्रह्मणय स्वामी की तरफ से ट्विटर पर साझा किया गया। बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि उन्होंने जो प्रश्न उठाया था, उसे अस्वीकार कर दिया गया था। सुब्रह्मण्यम स्वामी ने दावा किया कि राज्यसभा सचिवालय ने उनके एक प्रश्न को राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए अनुमति नहीं दी। उनके अनुसार, इस प्रश्न में यह पूछा गया था, “क्या चीनी सैनिकों ने लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को पार किया था?”उन्होंने लिखा, “यह त्रासदीपूर्ण नहीं हास्यास्पद है कि राज्यसभा ने मेरे इस सवाल पर आज मुझे सूचित किया कि इस प्रश्न को राष्ट्रीय हित में अनुमति नहीं दी जा सकती है कि क्या चीन ने एलएसी को पार किया है?” पिछले कुछ सत्रों में, मुख्य रूप से विपक्ष के सांसदों ने अक्सर आरोप लगाया है कि उनके सवालों को अस्वीकार कर दिया गया है।

प्रश्न कैसे स्वीकार किए जाते हैं?

दोनों सदनों में निर्वाचित सदस्यों को निजी सदस्यों से तारांकित प्रश्नों, अतारांकित प्रश्नों, अल्प सूचना प्रश्नों और प्रश्नों के रूप में विभिन्न मंत्रालयों और विभागों से सूचना प्राप्त करने का अधिकार प्राप्त है। आम तौर पर, सांसदों के प्रश्नों की एक लंबी सूची होती है, जो बाद में मंजूरी की एक कठिन प्रक्रिया से गुजरती है। राज्यसभा में प्रश्नों की स्वीकार्यता राज्यों की परिषद में प्रक्रिया और कार्य संचालन नियमों के नियम 47-50 द्वारा शासित होती है। एक बार स्वीकार्यता की शर्तों को पूरा करने वाला कोई प्रश्न प्राप्त होने पर, सचिवालय उसे संबंधित मंत्रालय को भेजता है। मंत्रालय से तथ्य प्राप्त होने के बाद, स्वीकार्यता के लिए प्रश्न की आगे जांच की जाती है। मंत्रियों को प्रश्नों की एक अंतिम सूची परिचालित की जाती है, जिसके आधार पर वे अपने उत्तर तैयार करते हैं। लोकसभा में, प्रश्नों के लिए नोटिस प्राप्त होने के बाद, मतपत्र प्राथमिकता निर्धारित करते हैं। तारांकित, अतारांकित और अल्प सूचना प्रश्नों को सॉफ्टवेयर में अलग-अलग दर्ज किया जाता है। इसके बाद, लोकसभा में प्रक्रिया और कार्य संचालन के नियमों के नियम 41-44 के तहत स्वीकार्यता के लिए प्रश्नों की जांच की जाती है। सवालों के जवाब देने के लिए मंत्रालयों और विभागों को (I से V) तक के पांच समूहों में बांटा गया है, जिन्हें क्रमशः सोमवार, मंगलवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार को आवंटित किया गया है।

तारांकित, अतारांकित और अन्य श्रेणियों के प्रश्न क्या हैं? 

तारांकित प्रश्न

तारांकित प्रश्न का तात्पर्य ऐसे प्रश्न से है जिस पर दिये हूए उत्तर से उत्पन्न अनुपूरक प्रश्न अध्यक्ष की अनुज्ञा से किये जा सकते हैं। वह सदस्य मंत्री से मौखिक उत्तर चाहता है। इस तरह के प्रश्न को सांसद द्वारा तारांकन चिह्न से अलग किया जाता है। उत्तर के बाद सदस्यों के पूरक प्रश्न भी पूछे जा सकते हैं। प्रति दिन ऐसे 15 प्रश्नों को सूचीबद्ध किया जाता है।

अतारांकित प्रश्न

अतारांकित प्रश्न से उस प्रश्न का तात्पर्य है जिसका लिखित उत्तर संबंधित सदस्य को दिया जाये और जिस पर अनुपूरक प्रश्न करने की अनुज्ञा न हो। ऐसे  160 प्रश्नों को प्रतिदिन पृथक सूची में सूचीबद्ध किया जाता है।

अल्पसूचित प्रश्न 

अल्पसूचित प्रश्न का तात्पर्य ऐसे प्रश्न से है जो अविलम्बनीय लोक महत्व के विषय से सम्बन्धित हो। जिसपर एक मौखिक जवाब मांगा जाता है। ऐसा प्रश्न पूछने के लिए न्यूनतम अवधि के रूप में 10 दिनों से कम का नोटिस निर्धारित किया गया है।

निजी सदस्य के लिए प्रश्न

लोकसभा के प्रक्रिया नियमों के नियम 40 के तहत या राज्य सभा के नियमों के नियम 48 के तहत एक निजी सदस्य को एक प्रश्न को संबोधित किया जा सकता है, बशर्ते कि प्रश्न किसी विधेयक, संकल्प या अन्य मामले से संबंधित विषय से संबंधित हो, जिसके लिए वह सदस्य उत्तरदायी है।

प्रश्न कितनी बार अस्वीकृत होते हैं?

राज्यसभा के आंकड़ों के मुताबिक पिछले मानसून सत्र के दौरान 833 सवालों की अनुमति नहीं दी गई थी। वहीं 2013-14 के शीतकालीन सत्र के दौरान, राज्य सभा ने 748 प्रश्नों की अनुमति नहीं दी। एक बार अस्वीकृत हो जाने पर, सदस्यों के लिए निर्णय को चुनौती देना अक्सर कठिन होता है।





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