पुराने गोवा विरासत क्षेत्र में क्यों हो रहा विरोध प्रदर्शन, जिसे चर्च के साथ कांग्रेस-टीएमसी समेत सभी विपक्षी दलों का मिल रहा समर्थन

पुराने गोवा विरासत क्षेत्र में क्यों हो रहा विरोध प्रदर्शन, जिसे चर्च के साथ कांग्रेस-टीएमसी समेत सभी विपक्षी दलों का मिल रहा समर्थन

सेव ओल्ड गोवा एक्शन कमेटी (एसओजीएसी), निवासियों, कार्यकर्ताओं और पेशेवरों के एक समूह ने बंगले के निर्माण के लिए दी गई अनुमति के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष अनुमति याचिका दायर की। लोगों के बढ़ते प्रदर्शन और रोष के बाद गोवा सरकार ने अपनी फाइलें फिर से खोल दीं और दी गई अनुमतियों की जांच की।

पुराने गोवा के विरासत क्षेत्र में एक बंगले का निर्माण शनिवार को राजनीतिक खींचतान का केंद्र बन गया। गोवा और दमन के आर्चबिशप फादर फिलिप नेरी फेराओ ने प्रशासन से आग्रह किया कि पुराने गोवा के धरोहर स्थल के लिए घातक अवैध गतिविधियों का समर्थन नहीं करे। आर्चबिशप ने कहा कि वह ‘ इस धरोहर स्थल पर आपत्तिजनक गतिविधियों के विरूद्ध कई दिनों से प्रदर्शन कर रहे विभिन्न धर्मों के भाइयों एवं बहनों’ के प्रति गोवा के चर्च की तरफ से एकजुटता प्रकट करना चाहेंगे। आर्चबिशप धरोहर स्थल पर उस विवादास्पद बंगले का जिक्र कर रहे थे कि जिसका आम आदमी पार्टी के नेता अमित पालेकर समेत कई लोग विरोध कर रहे हैं।

आंदोलन क्यों हो रहा है?

सेव ओल्ड गोवा एक्शन कमेटी (एसओजीएसी), निवासियों, कार्यकर्ताओं और पेशेवरों के एक समूह ने बंगले के निर्माण के लिए दी गई अनुमति के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष अनुमति याचिका दायर की। जुलाई में इस आंदोलन में कांग्रेस पार्टी भी शामिल हो गई। आरोप लगाया गया कि जिस जमीन पर बंगला बन रहा है, उसका एक हिस्सा भाजपा प्रवक्ता शाइना एनसी के पति मनीष मुनोट को 2015 में बेचा गया था। शाइना ने पहले कहा था कि संपत्ति के विकास में उनका कोई हिस्सा नहीं है। फिर मुनोत ने सितंबर में कहा था कि उन्होंने इस परियोजना से हाथ खींच लिए हैं। हालांकि, निर्माण जारी रहा, और वर्तमान में मचानों के बीच टाइल वाली छतों वाला एक ग्राउंड-प्लस-वन विशाल विला खड़ा है। 21 नवंबर को, कम से कम 3,000 लोगों ने सेंट काजेटन चर्च में प्रदर्शन किया। कई वक्ताओं – इतिहासकारों और वास्तुकारों ने – भीड़ को संबोधित किया। श्रोताओं में पुराने गोवा के निवासी, छात्र, पेशेवर और राजनीतिक नेता और कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता थे।

क्या हैं अवैधता का आरोप? 

सेव ओल्ड गोवा एक्शन कमेटी (एसओजीएसी) ने सितंबर में मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि राज्य के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीसीपी) द्वारा दी गई अनुमतियाँ दोषपूर्ण थीं। एनओजीएसी ने इसे यह एक शक्तिशाली और प्रभावशाली पार्टी के पक्ष में राज्य सरकार द्वारा सत्ता के घोर दुरुपयोग का मामला बताया। बंगला उस जमीन पर बनाया जा रहा था जिसे दो भागों में विभाजित किया गया था, दोनों के मालिक जोस मारिया डी गौविया पिंटो थे।  मई, 2015 को निष्पादित बिक्री विलेख द्वारा, 2,400 वर्ग मीटर भूमि का एक हिस्सा सुवर्णा लोटलीकर को बेच दिया गया था और 9,500 वर्ग मीटर का दूसरा हिस्सा मुनोट को बेच दिया गया था। बिक्री के बाद भी पूर्व मालिक पिंटो के नाम पर अनुमति मांगी गई थी। आरटीआई के तहत प्राप्त दस्तावेजों से पता चला है कि पिंटो ने दिल्ली में एएसआई के महानिदेशक को मरम्मत के लिए एक आवेदन दिया था, लेकिन एएसआई के गोवा सर्कल ने अपनी निरीक्षण रिपोर्ट में कहा कि सुवर्णा लोटलीकर ने मरम्मत के लिए एनओसी मांगी थी और ग्राउंड प्लस की एक तस्वीर प्रस्तुत की थी। SOGAC ने कहा कि तस्वीरें 'झूठी' थीं और 1992 से पहले प्लॉट पर मौजूद घर का लोटलीकर का दावा "नकली" था। 

गोवा सरकार का क्या कहना है?

लोगों के बढ़ते प्रदर्शन और रोष के बाद गोवा सरकार ने अपनी फाइलें फिर से खोल दीं और दी गई अनुमतियों की जांच की। 27 नवंबर को सीएम ने कहा कि अगर ढांचा अवैध पाया गया तो उसे गिरा दिया जाए। टीसीपी विभाग ने 30 नवंबर को 18 अक्टूबर, 2016 को पिंटो को दी गई तकनीकी मंजूरी को वापस लेते हुए एक निरसन आदेश जारी किया और आदेश दिया कि एला गांव में भूखंड पर निर्माण रोक दिया जाए। उसी दिन, से ओल्ड गोवा की ग्राम पंचायत ने मुंबई की एक रियल एस्टेट कंपनी कोरस अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर के पिंटो, लोटलीकर और सुमेरलाल जैन को संबोधित एक स्टॉप वर्क ऑर्डर जारी किया, जिसने अब संपत्ति खरीदी है।

अन्य पार्टियों का रूख

जुलाई में कांग्रेस के बाद तृणमूल कांग्रेस ने पिछले महीने प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है। राज्यसभा सांसद लुइज़िन्हो फलेरियो ने इस सप्ताह की शुरुआत में राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाया था। पार्टी के गोवा प्रदेश प्रभारी सांसद मोहुआ मोइत्रा ने धरना स्थल का दौरा किया। आप के राज्य संयोजक राहुल म्हाम्ब्रे ने भी इस सप्ताह की शुरुआत में प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की।

 





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।

Prabhasakshi logoखबरें और भी हैं...

राष्ट्रीय

झरोखे से...