• नक्सल प्रभावित इलाकों बस्तर-सुकमा में तेजी से बढ़ रहे हैं कोरोना के मामले, यह है मुख्य कारण

कोरोना प्रभावित इलाकों में सबसे ऊपर बीजापुर और सुकमा है। इन इलाकों में कोरोना बुरी तरह से अपना कहर दिखा रहा है। नक्सिलयों के साथ-साथ मासूम भी इस वायरस की चपेट में आ रहे हैं।

नक्सल प्रभावित इलाके बस्तर में इन दिनों एक समस्या और खड़ी हो गई है। दरअसल यहां नक्सलियों के अलावा कोरोना भी अपना कहर बरपा रहा है। कोरोना प्रभावित इलाकों में सबसे ऊपर बीजापुर और सुकमा है। इन इलाकों में कोरोना बुरी तरह से अपना कहर दिखा रहा है। नक्सिलयों के साथ-साथ मासूम भी इस वायरस की चपेट में आ रहे हैं।  

वहीं इससे भी ज्यादा चिंता की बात यह है कि कोरोना संक्रमण की रफ्तार के हिसाब से टीकाकरण नहीं हो रहा है। अधिकारियों के मुताबिक नक्सली और रिमोट एरियाज की वजह से भी यहां टीकाकरण में दिक्कत हो रही है लेकिन टीकों की कमी भी एक विषय है। 

केंद्र ने भेजी रायपुर एम्स की टीम

 

दक्षिण बस्तर में 70 मामले सामने आए थे जबकि कुल मामले रविवार को 188 थे। केंद्र भी इसको लेकर सतर्क हो गया है। केंद्र सरकार की तरफ से एम्स रायपुर से एक टीम कोरोना के मामलों में उछाल की जांच के लिए भेजी गई है। साथ ही इससे निपटने के तरीके भी ढूंढने के लिए टीम को कहा गया है। 

नक्सल प्रभावित इलाकों सुकमा, बस्तर और बीजापुर में 34,35 और 24 मामले क्रमश: मिले हैं। वहीं अगर सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा सक्रिय मामले सुकमा में 525 हैं। कोरोना वायरस की इस मार से कोई भी समुदाय अछूता नहीं रहा है।

बस्तर में अबतक कोरोना से 688 लोगों की मौत

नक्सलियों की केंद्रीय कमेटी के सदस्य हरिभूषण और उनकी पत्नी की मौत भी कोरोना की वजह से हुई थी। बस्तर में कोरोना की वजह से 668 लोगों की मौत हुई है। इसी वजह से यहां पर टीकाकरण की रफ्तार को भी बढ़ा दिया गया है। यहां अबतक 1।7 लोगों को पूरी तरह टीका लगाया जा चुका है।  

संभाग के संयुक्त स्वास्थ्य निदेशक डॉ आनंदराम गोट ने कोरोना संक्रमण बढ़ते हुए मामलों का कारण बताते हुए कहा कि आदिवासी पुरुषों की हत्या के बाद हजारों ग्रामीणों के प्रदर्शन की वजह से यहां वायरस के मामले तेजी से बढ़ने लगे।