सरदार पटेल ने आखिर क्यों किया था नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर केस, पढ़ें पूरा मामला

सरदार पटेल ने आखिर क्यों किया था नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर केस, पढ़ें पूरा मामला

नेताजी की मुलाकात सरदार वल्लभ भाई पटेल के बड़े बाई विट्ठल भाई पटेल से होती है। विट्ठल भाई बीमार थे और बोस ने उनकी खूब सेवा की। बोस की सेवा से विट्ठल पटेल प्रभावित हुए और उन्होंने अपनी जायदाद का एक हिस्सा देश के काम आने के लिए सुभाष चंद्र के नाम कर दिया।

आज नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 123वीं जयंती है। आज पूरा देश नेताजी की जयंती मना रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी नेता जी को याद करते हुए ट्वीट किया कि 'भारत सुभाष चंद्र बोस के साहस और उपनिवेशवाद के खिलाफ लड़ाई में उनके अमिट योगदान का देश हमेशा आभारी रहेगा।' आज आपको इतिहास से जुड़े एक घटना के बारे में बताते हैं जब देश के लौह पुरूष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने नेताजी बोस पर केस कर दिया था।

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एक रसूखदार वकील जानकीनाथ और प्रभावती बोस के घर सुभाष का जन्म हुआ। सुभाष चंद्र 14 भाई-बहन थे। पढ़ाई में होशियार सुभाष जल्द ही स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रभावित होकर दर्शनशास्त्र में ग्रैजुएशन किया। पिता को दिया वादा पूरा करने के लिए सिविल अफसर बनने लंदन गए। परीक्षा पास किया और आईसीएस में चौथी रैंक हासिल की। असहयोग आंदोलन से प्रभावित सुभाष चंद्र बोस ने 1921 में सिविल सेवा से इस्तीफा दे दिया और भारत लौट आए। साल 1930 की बात है। बर्मा की मंडले जेल में लंबा समय बिताकर बोस के लौटने पर उन्हें कांग्रेस का महासचिव बनाया गया। लेकिन जब वे कलकत्ता के मेयर पद पर थे और सविनय अवज्ञा आंदोलन में फिर से गिरफ्तार हो गए। जिसके बाद उन्हें ऑस्ट्रिया पहुंचा दिया गया। तभी वहां नेताजी की मुलाकात सरदार वल्लभ भाई पटेल के बड़े बाई विट्ठल भाई पटेल से होती है। विट्ठल भाई बीमार थे और बोस ने उनकी खूब सेवा की। बोस की सेवा से विट्ठल पटेल प्रभावित हुए और  उन्होंने अपनी जायदाद का एक हिस्सा देश के काम आने के लिए सुभाष चंद्र के नाम कर दिया। इस बात से सरदार पटेल सुभाष चंद्र बोस से नाराज हो गए और उन पर केस कर दिया। बाद में सुभाष चंद्र बोस वह केस हार गए।

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"विट्ठलभाई पटेलःलाइफ एंड टाइम्स" के नाम से प्रकाशित हुई किताब में बताया गया कि किस तरह दोनों भाई कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में थे लेकिन फिर विट्ठल ना केवल अपने छोटे भाई से दूर होते गए बल्कि उन्होंने सुभाष के साथ मिलकर गांधीजी के नेतृत्व पर सवाल भी खड़े किए थे।





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