अमित शाह की प्रोफाइल फोटो क्यों हटाई? बवाल के बाद आई ट्विटर की सफाई

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  नवंबर 13, 2020   12:45
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अमित शाह की प्रोफाइल फोटो क्यों हटाई? बवाल के बाद आई ट्विटर की सफाई

असावधानीवश हुई भूल की वजह से हमने अपनी वैश्विक कॉपीराइट नीतियों के तहत इस खाते को अस्थायी रूप से बंद कर दिया था। तत्काल फैसले को वापस ले लिया गया और अब अकाउंट पूरी तरह से चालू है।

नयी दिल्ली। ट्विटर की ओर से शुक्रवार को कहा गया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का अकाउंट ‘‘असावधानीवश हुई भूल’’ के कारण अस्थायी तौर पर बंद किया गया था और उस फैसले को तत्काल वापस ले लिया गया। ट्विटर के प्रवक्ता ने शुक्रवार को एक बयान में यह जानकारी दी। इसमें बताया गया कि अकाउंट अब सुचारू ढंग से चल रहा है। ट्विटर ने ‘‘एक कॉपीराइट धारक की रिपार्ट’’ पर बृहस्पतिवार को शाह के ट्विटर अकाउंट की डिस्प्ले पिक्चर हटा दी थी जिसके बाद शाह की तस्वीर पर क्लिक करने पर एक खाली पेज नजर आ रहा था जिसमें संदेश लिखा था ‘मीडिया नॉट डिस्प्लेड’।

ट्विटर के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘असावधानीवश हुई भूल की वजह से हमने अपनी वैश्विक कॉपीराइट नीतियों के तहत इस खाते को अस्थायी रूप से बंद कर दिया था। तत्काल फैसले को वापस ले लिया गया और अब अकाउंट पूरी तरह से चालू है।’’ ट्विटर पर शाह के 2.36 करोड़ फॉलोअर हैं। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब सरकार ने लेह को केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख की बजाय जम्मू कश्मीर का हिस्सा दर्शाने के लिए ट्विटर को नोटिस जारी किया। 

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सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार ट्विटर को पांच कार्यदिवस में इस बारे में स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है कि गलत मानचित्र दर्शाकर भारत की क्षेत्रीय अखंडता का अपमान करने के लिए इस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तथा उसके प्रतिनिधियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जानी चाहिए।





Disclaimer:प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।


नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।


कृषि क्षेत्र में स्टार्टअप को प्रोत्साहन की जरूरत, Processed Food के वैश्विक मार्केट में करना होगा विस्तार

  •  अंकित सिंह
  •  मार्च 1, 2021   12:23
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कृषि क्षेत्र में स्टार्टअप को प्रोत्साहन की जरूरत, Processed Food के वैश्विक मार्केट में करना होगा विस्तार

देश के लिए बहुत अच्छा होता अगर ये काम दो-तीन दशक पहले ही कर लिया गया होता। किसानों को ऋण, बीज और बाजार, खाद ये किसान की प्राथमिक जरूरत है, जो उसे समय पर चाहिए। बीते वर्षों में किसान क्रेडिट कार्ड छोटे से छोटे किसानों तक, पशुपालकों से लेकर मछुआरों तक इसका दायरा बढ़ाया है।

बजट में कृषि क्षेत्र के लिए की गई घोषणाओं पर वेबिनार में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत में 21वीं सदी के दौरान फसल कटाई के बाद, खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में और मूल्य वर्धन के क्षेत्र में क्रांति लाने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र के शोध एवं विकास कार्यों में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने का समय आ गया है। मोदी ने कहा हमें कृषि क्षेत्र में स्टार्टअप को प्रोत्साहन देने की जरूरत है। लगातार बढ़ते हुए कृषि उत्पादन के बीच, 21वीं सदी में भारत को Post Harvest क्रांति या फिर Food Processing क्रांति और Value Addition की आवश्यकता है। देश के लिए बहुत अच्छा होता अगर ये काम दो-तीन दशक पहले ही कर लिया गया होता। किसानों को ऋण, बीज और बाजार, खाद ये किसान की प्राथमिक जरूरत है, जो उसे समय पर चाहिए। बीते वर्षों में किसान क्रेडिट कार्ड छोटे से छोटे किसानों तक, पशुपालकों से लेकर मछुआरों तक इसका दायरा बढ़ाया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज हमें कृषि के हर सेक्टर में हर खाद्यान्न, फल, सब्जी, मत्स्य सभी में प्रोसेसिंग पर विशेष ध्यान देना है। इसके लिए जरूरी है कि किसानों को अपने गांवों के पास ही स्टोरेज की आधुनिक सुविधा मिले। खेत से प्रोसेसिंग यूनिट तक पहुंचने की व्यवस्था सुधारनी ही होगी। उन्होंने कहा कि हमें देश के एग्रीकल्चर सेक्टर का, Processed Food के वैश्विक मार्केट में विस्तार करना ही होगा। हमें गांव के पास ही Agro-Industries Clusters की संख्या बढ़ानी ही होगी ताकि गांव के लोगों को गांव में ही खेती से जुड़े रोजगार मिल सकें। हमारे यहां कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग लंबे समय से किसी न किसी रूप में की जा रही है। हमारी कोशिश होनी चाहिए की कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग सिर्फ व्यापार बनकर न रहे। बल्कि उस जमीन के प्रति हमारी जिम्मेदारी को भी हम निभाएं। 

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प्रधानमंत्री ने कहा कि ऑपरेशन ग्रीन्स योजना के तहत किसान रेल के लिए सभी फलों और सब्जियों के परिवहन पर 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। किसान रेल भी आज देश के कोल्ड स्टोरेज नेटवर्क का सशक्त माध्यम बनी है। खेती से जुड़ा एक और अहम पहलू सॉइल टेस्टिंग का है। बीते वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा करोड़ों किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड दिए गए हैं। अब हमें देश में सॉइल हेल्थ कार्ड की टेस्टिंग की सुविधा गांव-गांव तक पहुंचानी है। एग्रीकल्चर सेक्टर में R&D को लेकर ज्यादातर योगदान पब्लिक सेक्टर का ही है। अब समय आ गया है कि इसमें प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी बढ़े। हमें अब किसानों को ऐसे विकल्प देने हैं जिसमें वो गेहूं-चावल उगाने तक ही सीमित न रहे। मोटे अनाज के लिए भारत की एक बड़ी जमीन बहुत उपयोगी है। मोटे अनाज की डिमांड पहले ही दुनिया में बहुत अधिक थी, अब कोरोना के बाद ये इम्यूनिटी बूस्टर के रूप में बहुत प्रसिद्ध हो चुका है। इस तरफ किसानों को प्रोत्साहित कराना भी फूड इंडस्ट्री के साथियों की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है।





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अरुण कुमार सिंह बने बिहार के नए मुख्य सचिव, दीपक कुमार को भी मिली बड़ी जिम्मेदारी

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  मार्च 1, 2021   12:17
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अरुण कुमार सिंह बने बिहार के नए मुख्य सचिव, दीपक कुमार को भी मिली बड़ी जिम्मेदारी

बिहार के नये मुख्य सचिव बने अरूण कमार सिंह।सिंह इससे पहले राज्य के विकास आयुक्त थे। यह पद अब अतिरिक्त मुख्य सचिव आमिर सुभानी को दिया गया है जिनके पास गृह, सतर्कता, आबकारी एवं मद्यनिषेध जैसे अहम विभाग थे।

पटना। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अरूण कुमार सिंह को रविवार को बिहार का अगला मुख्य सचिव नामित किया गया। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार 1985 बैच के अधिकारी सिंह वर्तमान मुख्य सचिव दीपक कुमार की जगह लेंगे। कुमार साल भर पहले सेवानिवृत हो गये थे और उनका सालभर का सेवा विस्तार आज पूरा हो गया। सिंह इससे पहले राज्य के विकास आयुक्त थे। यह पद अब अतिरिक्त मुख्य सचिव आमिर सुभानी को दिया गया है जिनके पास गृह, सतर्कता, आबकारी एवं मद्यनिषेध जैसे अहम विभाग थे।

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सुभानी के स्थान पर चैतन्य प्रसाद को नियुक्त किया गया है जो अब तक अतिरिक्त मुख्य सचिव (जल संसाधन) थे। सिंह अगस्त में सेवानिवृति की उम्र प्राप्त कर लेंगे। कैबिनेट सचिवालय विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार दीपक कुमार मुख्यंमत्री नीतीश कुमार के प्रधान सचिव होंगे।





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नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।


पत्नी मंजू के 20 हजार और देवीलाल की कार, राजनीतिक जीवन त्यागने की चाह वाले नीतीश को कुछ इस तरह मिली पहली जीत

  •  अभिनय आकाश
  •  मार्च 1, 2021   12:07
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पत्नी मंजू के 20 हजार और देवीलाल की कार, राजनीतिक जीवन त्यागने की चाह वाले नीतीश को कुछ इस तरह मिली पहली जीत

नीतीश का आरंभिक चुनावी रिकॉर्डर इतना खराब रहा है कि उन्होंने राजनीतिक छोड़ने का इरादा कर लिया। उन्होंने जनता पार्टी के टिकट पर राज्य के विधानसभा के लिए हरनौत से पहला चुनाव लड़ा और हार गए। जबकि वह हरनौत को अपनी ही सीट समझते थे। उन्होंने लेकिन हरनौत से उनकी अपनी घरेलू सीट ही उनकी हार का कारण बनी।

दिलीप कुमार मनोज कुमार किशोर कुमार1 50-50 के दशक में फिल्मों में कुमारों का राज था। लेकिन राजनीति के एकलौते कुमार का जन्म पटना से 50 किलोमीटर दूर एक छोटे से कस्बे बख्तियारपुर में हुआ। 1 मार्च 1951 यानी देश को आजादी मिलने के चार साल बाद बख्तियारपुर के छोटे से गांव में नीतीश को आज भी मुन्ना के नाम से पुकारते हैं। नीतीश के पिता जाने माने आर्युवेदिक वैद्य थे। 

जीवन के पहले चुनाव में मिली करारी शिकस्त 

नीतीश का आरंभिक चुनावी रिकॉर्डर इतना खराब रहा है कि उन्होंने राजनीतिक छोड़ने का इरादा कर लिया। उन्होंने जनता पार्टी के टिकट पर राज्य के विधानसभा के लिए हरनौत से पहला चुनाव लड़ा और हार गए। जबकि वह हरनौत को अपनी ही सीट समझते थे। उन्होंने लेकिन हरनौत से उनकी अपनी घरेलू सीट ही उनकी हार का कारण बनी उनके प्रभावशाली कुर्मी रिश्तेदार उनके विरोध में एकजुट हो गए थे उन्हें इस बात से बड़ा धक्का लगा कि उन नाते रिश्तेदारों में उनके अपने ससुराल वाले भी शामिल थे। सन 1980 में नीतीश को एक बार फिर से शिकस्त मिली इस बार अरुण कुमार की उम्मीदवारी का पिछले चुनाव में नीतीश कुमार को मात देने वाले भोला प्रसाद सिंह ने समर्थन किया जो बेलछी नरसंहार के मुख्य अभियुक्तों में से एक था। इस प्रकार इस कुमार को कुर्मी होने के कारण और कुर्मी के पक्ष में खड़े ना होने की वजह से दूसरी बार हार का मुंह देखना पड़ा। 

राजनीतिक जीवन का त्याग करना चाहते थे नीतीश

सन 1980 में दूसरी पराजय के बाद ऐसा भी वक्त आया कि नीतीश ने राजनीति से तौबा करने की घोषणा कर दी कह दिया कि बहुत हो गई राजनीति। नीतीश राजनीतिक जीवन का त्याग करना चाहते थे और एक सरकारी ठेकेदार बन जाना चाहते थे। इमरजेंसी के बाद तक अस्थिरता और अराजकता का माहौल बना रहा जनता पार्टी जिसके साथ नीतीश ने अपनी चुनाव संबंधी खोज शुरू की थी। जनता पार्टी दो तीन टुकड़ों में बट गई जिनमें से कई एकजुट हुए और फिर अपनी ही चंचल प्रवृत्ति के कारण पुनः बिखर गए। नीतीश डामाडोल स्थिति में कुछ समय के लिए लोकदल के साथ रहे फिर दलित मजदूर किसान पार्टी में चले गए लौटकर लोकदल के एक गुट में शामिल हुए उसके बाद जनता पार्टी के खंडित अवतार के साथ हो गए और फिर वापस लोकदल में आ गए।

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चंद्रशेखर-देवीलाल का साथ और पत्नी मंजू के 2000 रुपये से सहारे जीता पहला चुनाव

सन 1983 में नीतीश ने मथुरा में चंद शेखर की बहुचर्चित भारत यात्रा के अंतिम चरण में हिस्सा लिया। नीतीश के चंद्रशेखर तक सीधी पहुंच नहीं थी लेकिन जब एक बार नीतीश कौन से मिलने का मौका मिला चंद्रशेखर को प्रभावित करने में उन्हें देर नहीं लगी| सन 1985 के विधानसभा चुनाव में कूदना आसान नहीं था क्योंकि राजीव इंद्रा लहर अभी तक चढ़ाव पड़ती है नीतीश का पुराना विरोधी कुर्मी अधिकारों का तरफदार अरुण चौधरी अभी भी मैदान में था लेकिन इस वर्ष उनकी लोकदल टोली विजय कृष्ण नितेश का सलाहकार प्रबंधक बन गया था उसने राजपूत समुदाय का महत्व समर्थन नीतीश के पक्ष में कर लिया था इस बार का चुनाव नीतीश के लिए सफल होने या मिट जाने का सवाल बन गया था। नीतीश ने मंजू को वचन दिया था कि इस बार यदि वह चुनाव हार गए तो राजनीति हमेशा के लिए त्याग देंगे और परंपरागत काम धंधा ढूंढ कर अपने गृहस्थ जीवन में समझाएंगे इस वादे पर मंजू ने उदारता के साथ ₹20000 का इनाम प्रचार अभियान में खर्च करने के लिए उनकी झोली में डाल दिया इस बार नीतीश के पास साधनों का अभाव नहीं था चंद शेखर और देवीलाल जैसे राजनीतिक संरक्षण ने उन्हें धन मुहैया कराया| देवीलाल ने हरियाणा से एक सुंदर सी आरामदायक विलिस कार सीएचके- 5802 नीतीश के लिए भिजवा दी ताकि वह अपने निर्वाचन क्षेत्र में आसानी से घूम फिर सके। नीतीश को 22 हजार से अधिक मतों से जीत मिली और फिर कभी उन्हें विधानसभा में सीट के लिए तरसना नहीं पड़ा वैवाहिक जीवन की शपथ निभाने के लिए उन्हें मंजू से फिर कभी अपने कहना पड़ेगा कि वह राजनीति त्याग देंगे।





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।


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