रंग-बिरंगी स्वदेशी राखियां तैयार कर महिलाएं हो रही है आत्मनिर्भर

रंग-बिरंगी स्वदेशी राखियां तैयार कर महिलाएं हो रही है आत्मनिर्भर

बीडीओ शैलेंद्र सिंह ने बताया कि मौजूदा समय में ब्लॉक में लगभग 150 स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे लगभग 1700 से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। सभी अलग-अलग क्षेत्रों में निपुण हैं।

मेरठ। मेक इन इंडिया को मजबूती देने के लिहाज से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) की ओर से समूह की महिलाओं को बकायदा प्रशिक्षित कर राखियां तैयार कराई जा रही हैं। तैयार होने वाली इन देशी राखियों को बाजार उपलब्ध कराने की कवायद अभी से शुरू कर दी गई है। बीडीओ शैलेंद्र सिंह ने बताया कि मौजूदा समय में ब्लॉक में लगभग 150 स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे लगभग 1700 से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। सभी अलग-अलग क्षेत्रों में निपुण हैं। महिलाओं को इस बार राखी बनाने का भी कार्य दिया गया है। इससे न केवल महिलाएं सशक्त होंगी बल्कि आत्मनिर्भर और स्वाबलंबी भी बनेंगी। 

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रक्षाबंधन जैसे पर्व पर बाजार में चीनी राखियों का ढेर रहता है जो इस बार शायद ही देखने को मिले। कोरोना संक्रमण के मामलों के साथ ही लोगों के मन में चीन के प्रति काफी आक्रोश है। व्यापारियों का भी चीनी उत्पाद से मोहभंग हो रहा है। ऐसे में स्वनिर्मित राखियों की खरीदारी से जहां एक ओर मेक इन इंडिया को बल मिलेगा वहीं जरुरतमंद महिलाओं की भी जरूरतें पूरी हो सकेंगी। 

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एडीओ विनीत भटनागर ने बताया कि तैयार की गई राखियों को ऑनलाइन विक्रय किया जाएगा जिसके लिए संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। इसके अलावा जनपद के सरस केंद्र समेत अन्य बड़ी दुकानों पर स्वदेशी राखियों की बिक्री की जाएगी। साथ ही समूह की सदस्य महिलाएं भी स्वनिर्मित राखियों की स्वयं स्टाल लगाकर बिक्री करेंगी।





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