दुनिया के सबसे तेज 'ह्यूमन कैलकुलेटर' नीलकंठ की कहानी

दुनिया के सबसे तेज 'ह्यूमन कैलकुलेटर' नीलकंठ की कहानी

यह पूछे जाने पर कि ऐसी चीजों के लिए कैलकुलेटर होने पर वह जटिल गणितीय समस्याओं के जवाब देने के लिए अपनी मानसिक क्षमता को तरजीह क्यों देते हैं। नीलकंठ भानू प्रकाश जवाब देते हैं कि उसैन बोल्ट के पास कार होने के बावजूद वो क्यों दौड़ते हैं?

जब भी हमें कोई बड़ा कैल्कुलेशन करना पड़ता है तब हमें कैलकुलेटर की याद आती है। हैदराबाद के रहने वाले दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज का ग्रेजुएट छात्र नीलकंठ भानु प्रकाश ने हाल ही में लंदन में सबसे तेज मानव कैलकुलेटर (फास्टेस्ट ह्यूमन कैलकुलेटर) का टाइटल जीता है। उसे इसी साल 15 अगस्त को लंदन में इस टाइटल से नवाजा गया। इससे पहले सबसे तेज मानव कैलकुलेटर के रिकॉर्ड स्कॉट फ्लैन्सबर्ग और शकुंतला देवी जैसे मैथ मैस्ट्रोज के नाम थे। 

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यह पूछे जाने पर कि ऐसी चीजों के लिए कैलकुलेटर होने पर वह जटिल गणितीय समस्याओं के जवाब देने के लिए अपनी मानसिक क्षमता को तरजीह क्यों देते हैं। नीलकंठ भानू प्रकाश जवाब देते हैं कि उसैन बोल्ट के पास कार होने के बावजूद वो क्यों दौड़ते हैं? फिर विस्तार से बताते हुए कहते हैं कि टल मैथ्स की तुलना स्प्रिंटिंग से करते हैं। वो कहते हैं कि तेज़ दौड़ने वालों पर कोई सवाल नहीं उठाता, लेकिन मेंटल मैथ्स को लेकर हमेशा सवाल उठते हैं। 

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उपराष्ट्रपति नायडू ने की प्रशंसा

 उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने नीलकंठ भानू प्रकाश की दुनिया का सबसे तेज मानव कैलकुलेटर की उपाधि जीतने के लिये प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि प्रकाश ने हाल ही में लंदन में मिंड स्पोर्ट ओलंपियाड के तहत मेंटल कैलकुलेशन वर्ल्ड चैम्पियनशिप में भारत के लिये पहली बार स्वर्ण पदक जीता। मेरी ओर से उन्हें भविष्य के सभी कार्यो के लिये शुभकामनाएं। नायडू ने अपने ट्वीट को हैशटैग ‘ह्यूमन कैलकुलेटर’ के साथ पोस्ट किया।

कैसे हुआ गणित से प्यार

नीलकंठ जन्म से मैथ्स जीनियस हैं? जवाब है- नहीं, खबरों के अनुसार गणित के साथ उनके इस सफ़र की शुरुआत पांच साल की उम्र में हुई। तब उनके साथ एक दुर्घटना हो गई थी। उनके सिर में चोट लगी और वो एक साल के लिए बिस्तर पर रहे। उसी दौरान वो अपने दिमाग को व्यस्त रखने के लिए मेंटल मैथ्स कैलकुलेशन करना शुरू किया।

13 देशों ने लिया भाग

द माइंड स्पोर्ट ओलंपियाड को यूके, जर्मनी, यूएई, फ्रांस, ग्रीस और लेबनान के 13 देशों के 57 वर्ष तक के 30 प्रतिभागियों के साथ खेला गया था। भानु प्रकाश सेकंड व थर्ड आए प्रतिभागियों से 65 अंक आगे थे।





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