सहस्त्राब्दियों से घनिष्ठ संबंध रहे हैं भारत, इंडोनेशिया के बीच

By अनीता वर्मा | Publish Date: Dec 13 2016 3:43PM
सहस्त्राब्दियों से घनिष्ठ संबंध रहे हैं भारत, इंडोनेशिया के बीच

दोनों देशों ने द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात स्वतंत्रता हासिल कर शीत युद्ध काल में विश्व की दो महाशक्तियों के गुटों में सम्मिलित होने के बजाय स्वतंत्र विदेश नीति को अपनाया जिसके फलस्वरूप गुटनिरपेक्ष आंदोलन (नाम) अस्तित्व में आया।

भारत और इंडोनेशिया एक दूसरे के महत्वपूर्ण, राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक साझेदार हैं। वस्तुतः इंडोनेशिया दक्षिण पूर्व एशिया और ओशिनिया में अवस्थित देश है, जिसकी जमीनी सीमा पापुआ न्यू गिनी, मलेशिया और पूर्वी तिमोर के साथ मिलती है। भारत और इंडोनेशिया के मध्य सहस्त्राब्दियों से घनिष्ठ व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं लेकिन दोनों देशों के मध्य औपचारिक राजनयिक संबंधों की स्थापना 3 मार्च 1951 को हुई। इंडोनेशिया की लोक कला तथा नाटक रामायण और महाभारत नामक महाकाव्यों की कहानियों पर आधारित है। दोनों देशों की साझी संस्कृति, औपनिवेशिक इतिहास तथा स्वतंत्रता के पश्चात स्वतंत्र विदेश नीति, राजनीतिक सम्प्रभुता और आर्थिक आत्मनिर्भरता जैसे लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु द्विपक्षीय संबंध सुदृढ़ हुए हैं।

ज्ञातव्य है कि जब शीत युद्ध के दौरान जहाँ विश्व दो गुटों में विभाजित था वहीं मिस्र, भारत, इंडोनेशिया ने गुट निरपेक्ष आंदोलन के माध्यम से अलग राह चुनी ताकि ये देश अपनी स्वतंत्र विदेश नीति और राजनीतिक सम्प्रभुता को बनाए रखने के साथ साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त कर विकास की पटरी पर दौड़ सकें। वर्ष 1991 में भारत ने पूर्व की ओर देखो नीति (वर्तमान में एक्ट ईस्ट नीति) को अपनाया। इसके पश्चात दोनों देशों के मध्य राजनीतिक सुरक्षा, रक्षा, सांस्कृतिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों में तीव्र गति से प्रगति हुई है। वर्तमान में दोनों देशों द्वारा संबंधों को सुदृढ़ करने का प्रयास जारी है। इसी क्रम में जनवरी 2011 में राष्ट्रपति सुशीलो बंबाग युधोयोनी की भारत यात्रा को देखा जा सकता है। अक्टूबर 2013 में भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की इंडोनेशिया यात्रा और पुनः नवंबर 2015 में भारतीय उपराष्ट्रपति की इंडोनेशिया यात्रा को देखा जा सकता है। 12-13 दिसंबर 2016 को इंडोनेशियाई राष्ट्रपति की दो दिवसीय भारत यात्रा भी संबंध प्रगाढ़ करने में मददगार साबित हुई।
 
भारत के साथ संबंधों को सुदृढ़ करने हेतु इंडोनेशियाई राष्ट्रपति युधोयोनी ने 2011 में गणतंत्र दिवस के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में भारत की यात्रा की थी। यह यात्रा कई दृष्टियों से काफी महत्वपूर्ण रही। उनकी इस यात्रा के दौरान 16 द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए जिसमें प्रत्यर्पण संधि, विधिक सहायता संधि, तेल एवं गैस के क्षेत्र में सहयोग संबंधी समझौता, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में और परस्पर सांस्कृतिक आदान प्रदान के क्षेत्र शामिल हैं। इसके अतिरिक्त व्यक्ति समूह स्थापित करने, रक्षा, तेल, गैस, विद्युत, नवीकरणीय ऊर्जा इत्यादि पर एवं शिक्षा मंत्रियों की नियमित बैठकें आयोजित करने का फैसला किया।
 


भारत हेतु इंडोनेशिया एक्ट ईस्ट नीति के तहत महत्वपूर्ण देश है। इंडोनेशिया के साथ संबंधों को मजबूत बनाने के क्रम में तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 10-12 अक्टूबर 2013 को इंडोनेशिया की यात्रा की। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के मध्य स्वापक दवाओं के अवैध व्यापार तथा भ्रष्टाचार के विरुद्ध सहयोग और आपदा प्रबंधन में सहयोग हेतु समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अतिरिक्त दोनों नेताओं ने रणनीतिक, व्यापक आर्थिक भागीदारी, सांस्कृतिक, रक्षा तथा सुरक्षा और दोनों देशों की जनता के बीच संबंध एवं आम चुनौतियों का सामना करने के दृष्टिकोण से कई क्षेत्रों में रणनीतिक भागीदारी को मजबूत करने हेतु पांच स्तरीय पहल को अपनाने पर सहमति व्यक्त की। 1-4 नवंबर 2015 को भारतीय उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने दोनों देशों के मध्य गतिशीलता बनाए रखने हेतु इंडोनेशिया की यात्रा की और राष्ट्रपति जोको विडोडो के साथ ही अन्य दूसरे नेताओं से बातचीत की। यात्रा के दौरान 3 समझौतों पर हस्ताक्षर किए- नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा, संस्कृति के क्षेत्र में सहयोग हेतु समझौता आदि।
 
पुनः 12-13 दिसंबर 2016 को संबंधों को प्रगाढ़ता प्रदान करने हेतु इंडोनेशिया के राष्ट्रपति भारत की यात्रा पर आए। प्रधानमंत्री मोदी और इंडोनेशियाई राष्ट्रपति जोको विडोडो के मध्य प्रतिनिध मंडल की वार्ता के पश्चात दोनों देशों के बीच तीन समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों में युवा तथा खेल क्षेत्र में सहयोग, मानकीकरण के क्षेत्र में सहयोग तथा समुद्र में अवैध तरीके से मछली पकड़ने को रोकना शामिल हैं। इन समझौतों से दोनों देशों के मध्य रणनीतिक साझेदारी में इजाफा होगा। दोनों देशों ने कारोबारी, रक्षा, सुरक्षा, रणनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को सुदृढ़ करने पर सहमति जताई। इसके अतिरिक्त हवाला कारोबार के माध्यम से धन शोधन, हथियार एवं नशीले पदार्थों की तस्करी और समुद्री क्षेत्रों में उपद्रव और आतंकवाद पर अंकुश लगाने हेतु उपायों पर मुख्य जोर है क्योंकि दोनों देशों के साझा सामरिक व आर्थिक हित हैं।
 
इंडोनेशिया और भारत दोनों एक दूसरे के महत्वपूर्ण व्यापारिक भागीदार हैं। भारत इंडोनेशिया से कच्चे खजूर तेल का सबसे बड़ा क्रेता है। इंडोनेशिया से रबर, खनिज, कोयला, हाइड्रो कार्बन तथा रबड़ लुग्दी का भारत आयात करता है। भारत द्वारा इंडोनेशिया को निर्यात किए जाने वाली वस्तुओं में वाणिज्यिक गाड़ी, तिलहन, पशु आहार, कपास, प्लास्टिक के सामान, इस्पात के उत्पाद, परिष्कृत पेट्रोलियम आदि शामिल हैं। इसके अतिरिक्त भारत इंडोनेशिया को औषधि पदार्थ और इससे निर्मित उत्पादों का काफी मात्रा में निर्यात करता है। एशिया क्षेत्र में इंडोनेशिया भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। दोनों देशों के मध्य द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि जारी है। दोनों के मध्य 2007-2008 में द्विपक्षीय व्यापार 6.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर था जो 2014-2015 में बढ़कर 19.03 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया। दोनों देशों के मध्य सांस्कृतिक संबंध प्राचीन काल से ही घनिष्ठ हैं जैसे श्रीविजय के काल से ही काफी इंडोनेशियाई बिहार स्थित नालंदा विश्वविद्यालय में अध्ययन करने आते थे क्योंकि नालंदा विश्वविद्यालय की ख्याति प्राचीन काल में दूर दूर तक फैली थी।
 


आधुनिक युग में भी दोनों देशों के मध्य सांस्कृतिक संबंधों को सुदृढ़ करने का प्रयास जारी हैं। इसी क्रम में इंडोनेशिया में जनवरी 2015 में भारत महोत्सव का मनाया जाना संबंधों की प्रगाढ़ता को ही प्रदर्शित करता है। भारत महोत्सव के दौरान जकार्ता के अनेक प्रतिष्ठित स्थानों में बॉलीवुड फिल्में, कठपुतली शो, लोक नाट्य वृत्तचित्र इत्यादि को दिखाया गया। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) इंडोनेशिया के कई शहरों (बाली, मेडन इत्यादि) में पूरे जोश व उत्साह के साथ मनाया गया। उल्लेखनीय है कि इंडोनेशिया में भारतीय मूल के लगभग 100000 इंडोनेशियाई हैं जो सांस्कृतिक बंधनों को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करते हैं। ये लोग मुख्यतः बांडुग, मेडान, ग्रेटर जकार्ता, सौरबाया में रहते हैं जो व्यापार और टोल की वस्तुओं के व्यापार से मुख्य रूप से जुड़े हुए हैं। इसके अतिरिक्त इंडोनेशिया में लगभग 10000 भारतीय नागरिक रह रहे हैं जिनमें बैंकर, इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट, परामर्श दाता इत्यादि शामिल हैं।
 
इस प्रकार भारत और इंडोनेशिया एक दूसरे के राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भागीदार हैं। दोनों देश विश्व के बड़े लोकतांत्रिक देश हैं। इंडोनेशिया साढ़े तीन सौ साल तक डचों का उपनिवेश रहा तो भारत भी लंबे अरसे तक ब्रिटिश उपनिवेश बना रहा और दोनों देशों ने द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात स्वतंत्रता हासिल कर शीत युद्ध काल में विश्व की दो महाशक्तियों के गुटों में सम्मिलित होने के बजाय स्वतंत्र विदेश नीति को अपनाया जिसके फलस्वरूप गुटनिरपेक्ष आंदोलन (नाम) अस्तित्व में आया। दोनों देश गुटनिरपेक्ष आंदोलन के सदस्य के साथ साथ जी-20, ई-7 और संयुक्त राष्ट्र के सदस्य हैं। वर्तमान विश्व में जहाँ खाद्य असुरक्षा, जलावायु परिवर्तन, मानव तस्करी, आतंकवाद जैसी गंभीर समस्याओं से विश्व जूझ रह है वहाँ एशिया के दो बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश समस्याओं से निजात दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर सकते हैं।
 
अनीता वर्मा


(अंतर्राष्ट्रीय मामलों की जानकार)

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