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साहित्य जगत

हे पथिक, न हो व्यथित (कविता)

By मोनिका कपूर | Publish Date: Mar 9 2018 6:00PM

हे पथिक, न हो व्यथित (कविता)
Image Source: Google

हिंदी काव्य संगम ग्रुप से जुड़ी कवयित्री मोनिका कपूर द्वारा स्वरचित कविता 'हे पथिक, न हो व्यथित में जीवन के संघर्ष से जुड़ी गाथा दर्शाई गई है।

हे पथिक, न हो व्यथित 
ये राह हो चाहे विषम 
पर ज्ञात तुझको यह रहे 
उजास आते, जाता है तम 
 
ये रात चाहे हो बड़ी 
एक वर्ष जैसी एक घड़ी 
पर क्षितिज में मुस्कान भर 
प्यारी सी उषा है खड़ी।
 
मानती हूँ, है असंभव,
बढ़ के तेरा सूर्य छूना,
पर ग्रहण कर ऊष्मा उसकी
और उसका तेज दूना।
 
ये भी माना कि यह नभ है 
काले मेघों से घिरा सा 
किंतु एक छलिए के जैसा 
सूर्य है, ओट में छिपा सा 
 
माना कि सारे जहाँ में गहन
निस्तब्धता है छाई 
लेकिन सृजन सृष्टि का ही करने 
आज मधुर प्रभात आयी।
 
-मोनिका कपूर (फरीदाबाद)

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