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मक्का मस्जिद विस्फोट मामले में 11 साल बाद आया फैसला, असीमानंद बरी

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Publish Date: Apr 16 2018 8:24PM

मक्का मस्जिद विस्फोट मामले में 11 साल बाद आया फैसला, असीमानंद बरी
Image Source: Google

हैदराबाद। वर्ष 2007 के मक्का मस्जिद विस्फोट मामले में यहां की एक विशेष आतंक रोधी अदालत ने स्वामी असीमानंद और चार अन्य को आज बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ‘आरोपियों के खिलाफ एक भी आरोप’ साबित नहीं कर सका। अठारह मई 2007 को रिमोट कंट्रोल के जरिये 400 साल से अधिक पुरानी मस्जिद में जुमे की नमाज के दौरान शक्तिशाली विस्फोट को अंजाम दिया गया था। इसमें नौ लोगों की मौत हो गई थी और 58 अन्य घायल हुए थे। असीमानंद के वकील जे पी शर्मा के अनुसार एनआईए मामलों के लिये विशेष न्यायाधीश के रवींद्र रेड्डी ने कहा, ‘‘अभियोजन: एनआईए: किसी भी आरोपी के खिलाफ एक भी आरोप साबित नहीं कर सका , इसलिये सभी को बरी किया जाता है। ’’न्यायाधीश ने कड़ी सुरक्षा के बीच फैसला सुनाया। कथित ‘हिंदू आतंक’ के बहुचर्चित मामले में फैसला सुनाए जाने के दौरान अदालत कक्ष में मीडिया के प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी। असीमानंद को 2007 के अजमेर दरगाह आतंकी हमला मामले में भी पिछले साल बरी कर दिया गया था। वह 2007 के समझौता एक्सप्रेस विस्फोट मामले में भी आरोपी हैं। 

 
असीमानंद के अतिरिक्त देवेंद्र गुप्ता, लोकेश शर्मा, भरत मोहनलाल रतेश्वर उर्फ भरत भाई और राजेंद्र चौधरी को भी बरी किया गया है। यद्यपि इस मामले में 10 आरोपी थे, लेकिन उनमें से सिर्फ पांच के खिलाफ ही मुकदमा चलाया गया। दो अन्य आरोपी संदीप वी डांगे और रामचंद्र कालसांगरा फरार हैं जबकि सुनील जोशी की हत्या कर दी गई। दो अन्य के खिलाफ जांच चल रही है। बम विस्फोट मस्जिद के वजूखाना के पास हुआ था जब नमाजी वहां वजू कर रहे थे। बाद में दो और आईईडी पाए गए थे, जिसे पुलिस ने निष्क्रिय कर दिया था। इस घटना के विरोध में हिंसक प्रदर्शन और दंगे हुए थे। इसके बाद पुलिस कार्रवाई में और लोग मारे गए थे। मामले की शुरूआत में पुलिस ने जांच की। उसके बाद सीबीआई को मामला सौंप दिया गया और आखिरकार 2011 में एनआईए को जांच की जिम्मेदारी सौंप दी गई। एनआईए देश की अग्रणी आतंक रोधी जांच एजेंसी है। 
 
सीबीआई ने एक आरोप पत्र दायर किया था। एनआईए ने बाद में मामले में पूरक आरोप पत्र दाखिल किये थे। दिल्ली में एनआईए प्रवक्ता ने आज कहा कि आदेश का अध्ययन करने के बाद एजेंसी भावी कदम के बारे में फैसला करेगी। फैसले से उत्साहित भाजपा ने दावा किया कि इसने कांग्रेस की ‘तुष्टीकरण की राजनीति ’ का पर्दाफाश कर दिया है, जबकि कांग्रेस ने एनआईए के कामकाज को लेकर सवाल उठाए। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने वोट की खातिर लंबे समय तक हिंदुओं को ‘बदनाम’ किया है और मांग की कि पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ‘भगवा आतंक’ और ‘हिंदू आतंक’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने के लिये माफी मांगें। पात्रा ने कहा कि लोग कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 2014 के लोकसभा चुनाव की तरह सबक सिखाएंगे। गौरतलब है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस 44 सीटों पर सिमट गई थी। 

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