जेएनयू में संस्कृत को दूसरी पीठों पर मिल रही है प्राथमिकता

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Publish Date: Feb 19 2018 2:40PM
जेएनयू में संस्कृत को दूसरी पीठों पर मिल रही है प्राथमिकता

राष्ट्रीय राजधानी में स्थित जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में संस्कृत भाषा की पीठ को दूसरी पीठों पर प्राथमिकता दी जा रही है। जेएनयू में सभी भाषाओं को उतनी प्राथमिकता नहीं मिलती जितनी संस्कृत को।



नयी दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में स्थित जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में संस्कृत भाषा की पीठ को दूसरी पीठों पर प्राथमिकता दी जा रही है। जेएनयू में सभी भाषाओं को उतनी प्राथमिकता नहीं मिलती जितनी संस्कृत को। पिछले साल शैक्षणिक परिषद ने ‘स्पेशल सेटर फॉर संस्कृत स्टडीज’ पूर्ण रूप से बदलकर ‘स्कूल ऑफ संस्कृत ऐंड इंडिक स्टडीज’ बनाने की मंजूरी दी थी।

 
दूसरी भाषाओं की पीठों ने अपने साथ सौतेला व्यवहार किए जाने का आरोप लगाया। दूसरी भाषायी पीठों ने संस्कृत भाषा के समान व्यवहार किये जाने की मांग की। ओडिया पीठ के प्रमुख उदयनाथ साहू पिछले साल दिसंबर में पीठ बनने के बाद से ही अपने लिये एक अदद दफ्तर के लिये संघर्ष कर रहे हैं। ओडिशा सरकार ने पांच करोड़ के अनुदान के साथ इसकी शुरूआत की थी। साहू ने ज्यादा कुछ बोलने से इनकार करते हुए कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि जल्द ही मुझे अलग कमरा मिल जाएगा।’’।
 
कन्नड पीठ के प्रमुख पुरुषोत्तम बिलिमाले ने मुफ्त कक्षाएं लेनी शुरू कर दी हैं जिससे कि यह पीठ खत्म न हो। 2015 में गठित इस पीठ को एमफिल या पीएचडी के लिए कोई सीट आवंटित नहीं की गई है। दो अन्य लोगों के साथ अपना कक्ष साझा करने वाले बिलिमाले ने कहा, ‘‘आप संस्कृत को इतनी तवज्जो देते हैं यह अच्छी बात है, लेकिन आप दूसरी भाषाओं से भेदभाव क्यों करते हैं?’’ 


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