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विश्लेषण

मोदी ही नहीं अमित शाह के लिए भी कड़ी परीक्षा है गुजरात चुनाव

By बद्रीनाथ वर्मा | Publish Date: Dec 7 2017 3:04PM

मोदी ही नहीं अमित शाह के लिए भी कड़ी परीक्षा है गुजरात चुनाव
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यूपी नगर निकाय चुनाव बीजेपी के लिए अच्छी खबर लेकर आया है। यहां पार्टी ने विधानसभा चुनाव की जीत की लय बरकरार रखी है। इसे राज्य की योगी सरकार का भी टेस्ट माना जा रहा था। समाजवादी पार्टी व कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया है क्योंकि किसी भी जगह इन पार्टियों के उम्मीदवार चेयरमैन पद नहीं जीत सके। हां, बहन मायावती की पार्टी बसपा के लिए यह संतोषजनक है कि उसके तीन उम्मीदवार चेयरमैन पद जीतने में सफल रहे। अगर बात योगी सरकार की की जाए तो नतीजों के आलोक में वह भी पास हो गई है। इस जीत का कुछ न कुछ लाभ गुजरात चुनाव में भी पार्टी को मिलना सुनिश्चित हो गया है। 

बहरहाल, गुजरात में पिछले पांच विधानसभा चुनावों में बीजेपी ही जीत का परचम लहराती आ रही है। इसलिए गुजरात में बीजेपी के लिए यह साख का सवाल हैI प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह दोनों ही अच्छी तरह जानते हैं कि राज्य में पिछले तीन विधानसभा चुनाव से ये चुनाव अलग हैं। पिछले तीनों विधानसभा चुनाव बीजेपी नरेंद्र मोदी को पार्टी के मुख्यमंत्री चेहरे के तौर पर आगे करके लड़ी और हर बार जीत दर्ज की।
 
इस बार बीजेपी के सामने सबसे बड़ा संकट यह है कि मोदी देश के प्रधानमंत्री बन चुके हैं और राज्य में उनके जैसा कोई कद्दावर चेहरा भाजपा के पास नहीं है। ऐसे में नाक का सवाल बने गुजरात चुनाव जीतने के लिए पूरी पार्टी एड़ी चोटी का जोर लगाये हुए है। सबसे बड़ी चुनौती है कि इस बार पार्टी का सीएम चेहरा मोदी नहीं विजय रूपाणी हैंI आनंदीबेन पटेल को हटा कर बीजेपी हाई कमान ने रूपाणी को गुजरात के मुख्यमंत्री की गद्दी पर बिठाया थाI
 
प्रधानमंत्री मोदी व भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का गृह राज्य होने के कारण गुजरात चुनाव पर देश दुनिया की निगाहें लगी हुई हैं। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को कुशल कूटनीतिज्ञ कहा जाता है। इसका सबूत वो पिछले कई चुनावों में दे भी चुके हैं। सबसे ताजा मिसाल यूपी की है। वहां अमित शाह ने बीजेपी के लिए इस तरह की फील्डिंग सेट की थी कि उसके सामने अखिलेश-राहुल गांधी जैसे ‘यूपी के लड़कों’ का गठबंधन हो या ‘बहनजी’ मायावती का सांगठनिक कौशल, सब चारों खाने चित नजर आए। बावजूद इसके गुजरात विधानसभा चुनाव जीतना बेहद जरूरी है वर्ना पूरी सरकार का वजूद संकट में पड़ जाएगा।
 
यही कारण है कि भाजपा के चाणक्य अमित शाह गुजरात में सांगठनिक मोर्चे पर कहीं कोई चूक नहीं होने देना चाहते। चुनाव से जुड़ी हर छोटी-बड़ी बात पर अमित शाह खुद पैनी नजर रखे हुए हैं। साथ ही उन्होंने गुजरात में अपने भरोसेमंद लोगों को उनकी दक्षता के हिसाब से खास जिम्मेदारी सौंप रखी है। पन्ना प्रमुखों और बूथ इंचार्ज की भूमिका को बहुत अहम मानने वाले भाजपा ने गुजरात की सभी 182 विधानसभा सीटों के लिए दस लाख से ज्यादा पन्ना प्रमुखों और 58 हजार बूथ इंचार्ज से फीडबैक लेने की जिम्मेदारी 182 विधानसभा इंचार्जों को दी हुई है। सभी जगह से मिले फीडबैक के आधार पर जरूरत के अनुसार अमित शाह और उनकी टीम रणनीति की दशा और दिशा तय करती है। इसमें सोशल मीडिया की चुनावी रणनीति भी शामिल है।
 
पूरे दिन चुनावी प्रचार की भागदौड़ के बाद अमित शाह देर रात को मुख्यमंत्री विजय रुपाणी, उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल, बीजेपी महासचिव संगठन रामलाल, गुजरात बीजेपी इंचार्ज और महासचिव भूपेन्द्र यादव, बीजेपी महासचिव अनिल जैन और संगठन मंत्री गुजरात भिखुभाई दलसानिया के साथ बैठक करते हैं और पूरे दिन का फ़ीड बैक लेते हैं। अगर कोई अन्य वरिष्ठ मंत्री प्रचार में रहता है तो वह भी बैठक में मौजूद रहता है। इसी बैठक में पार्टी की अगले दिन की रणनीति का खाका तैयार किया जाता है।
 
दीवार पर लिखी इबारत साफ है कि पीएम मोदी और अमित शाह की जोड़ी गुजरात चुनाव में पार्टी की ओर से कहीं कोई चूक होने नहीं देना चाहती। यही वजह है कि सबसे भरोसे के सिपहसालारों को चुन-चुन कर चुनाव के खास मोर्चों पर तैनात किया गया है। देखना दिलचस्प होगा कि जीएसटी को लेकर अपने बेस वोट व्यापारी वर्ग का विरोध झेल रही भाजपा इससे कैसे पार पाती है। यह चुनाव जहां पीएम मोदी की नीतियों पर जनता की मुहर होगी वहीं भाजपा के चाणक्य अमित शाह की भी अग्निपरीक्षा है।
 
- बद्रीनाथ वर्मा

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