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आयुष्मान भारत योजना के तहत कैसे होगा बीमा? कैसे मिलेगा पैसा?

By शुभा दुबे | Publish Date: Feb 4 2018 2:14PM

आयुष्मान भारत योजना के तहत कैसे होगा बीमा? कैसे मिलेगा पैसा?
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केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2018-19 के आम बजट में 'आयुष्मान भारत योजना' शुरू करने की घोषणा की है। इस योजना के तहत सभी को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करायी जाएंगी। इस महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना के तहत प्रति वर्ष 10 करोड़ गरीब परिवार को उन्नत इलाज के लिए 5-5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार ने फिलहाल इस योजना के लिए 2000 करोड़ रुपये का आवंटन करने की बात कही है। इस योजना ने गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों के लिए 2008 में पेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा की जगह ली है जिसमें 30,000 रुपये का सालाना बीमा कवर दिया गया था। 

मोदीकेयर योजना कैसे सफल होगी?
 
इस योजना को 'मोदीकेयर' का नाम भी दिया जा रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने वर्ष 2010 में करीब ढाई करोड़ अमेरिकी परिवारों के लिए स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू की थी लेकिन मोदी सरकार ने जिस आयुष्मान योजना का एलान किया है उसका फायदा 10 करोड़ परिवारों यानी देश की करीब 40 फीसदी आबादी को मिलने वाला है। हालांकि अभी बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि सरकार इस योजना पर खर्च होने वाली भारी भरकम राशि का प्रबंध कैसे करेगी? लेकिन सरकार की योजना है कि शिक्षा और स्वास्थ्य के 1 फीसदी बढ़े हुए सेस से आने वाला पैसा इस योजना में लगाया जायेगा। इस 1 फीसदी सेस से सरकार को करीब 11000 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है।
 
देखने में तो यह योजना ग्रामीण भारत के लिए फायदे का सौदा है लेकिन इसकी सफलता इस पर निर्भर करती है कि इसका क्रियान्वयन किस तरह होता है? इस योजना के वृहद स्वरूप को देखते हुए यह भी मांग उठ रही है कि इसमें बीमा कंपनियां विदेशी नहीं हों। आइए डालते हैं एक नजर इस योजना के विभिन्न पहुलओं पर-
 
कैशलेश होगी यह योजना
 
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस योजना के बारे में बताते हुए कहा है कि यह योजना ट्रस्ट मॉडल या इंश्योरेंस मॉडल पर काम करेगी और पूरी तरह कैशलेस होगी। उन्होंने उन आशंकाओं को खारिज कर दिया जिसमें कहा जा रहा था कि पहले गरीब को इलाज के लिए भुगतान करना होगा फिर उसके बाद वह इलाज पर खर्च हुई राशि प्राप्त करने के लिए क्लेम कर सकेगा। वित्त मंत्री ने साफ किया है कि रीईंबर्स प्रक्रिया में गड़बड़ी होने की संभावनाओं को देखते हुए यह योजना पूरी तरह कैशलेस होगी। इसका मतलब यह है कि जो भी आयुष्मान योजना के तहत बीमित व्यक्ति है उसे अपने इलाज का खर्च नहीं देना होगा। पांच लाख रुपए तक का खर्च उसे सरकार की तरफ से आसानी से मिल जायेगा।
 
अस्पताल जाकर क्या करना होगा?
 
मरीज को अस्पताल में भर्ती होने के बाद अपने बीमा दस्तावेज देने होंगे जिसके आधार पर अस्पताल इलाज के खर्च के बारे में बीमा कंपनी को सूचित कर देगा और बीमित व्यक्ति के दस्तावेजों की पुष्टि होते ही इलाज बिना पैसे दिये हो सकेगा। (नोटः चिकित्सा बीमा की सुविधा इसी प्रक्रिया से निजी अस्पतालों में मिलती है।)
 
योजना कब से लागू होगी?
 
इस योजना के लागू होने की तिथि के बारे में वित्त मंत्री ने बजट के बाद बताया है कि यह नये वित्त वर्ष 1 अप्रैल 2018 से लागू हो जायेगी। पहले यह कहा जा रहा था कि यह योजना 15 अगस्त या 2 अक्तूबर से लागू की जा सकती है। इस योजना के तहत ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने की सुविधा मिलेगी जोकि जल्द ही चालू होगी।
 
इलाज कहां कराना होगा?
 
इस योजना के तहत बीमित व्यक्ति सिर्फ सरकारी ही नहीं बल्कि निजी अस्पतालों में भी इलाज करा सकेगा। निजी अस्पतालों को इस योजना के साथ जोड़ने का कार्य शुरू कर दिया गया है। इस वृहद योजना से निजी अस्पतालों को भी लाभ मिलने की संभावना है क्योंकि पैसे की कमी के चलते काफी लोग सिर्फ सरकारी अस्पतालों में ही जाते थे जोकि अब निजी अस्पतालों में भी जा सकेंगे। साथ ही यह योजना सरकारी अस्पतालों पर बढ़ती भीड़ का दबाव भी शायद कम कर पायेगी।
 
प्रीमियम क्या होगा?
 
फिलहाल विशेषज्ञों का आकलन है कि अगर इस योजना के तहत 50 करोड़ लोगों को फायदा पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है तो प्रति व्यक्ति प्रीमियम 40 रुपये आ सकता है। लेकिन जब तक बीमा कंपनियों की सूची अंतिम तौर पर नहीं आ जाती तब तक इसके बारे में साफ तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता है।
 
कैसे होगा चयन?
 
-10 करोड़ परिवारों का चयन 2011 की जनगणना के आधार पर किये जाने के आसार हैं।
-आधार नंबर से परिवारों की सूची तैयार की जा रही है।
-सूची पूरी तरह तैयार हो जायेगी तब इस योजना का लाभ लेने के लिए किसी और पहचान पत्र की जरूरत नहीं होगी।
 
आयुष्मान भारत के तहत अन्य योजना
 
सरकार इस योजना के तहत देशभर में डेढ़ लाख से ज्यादा हेल्थ और वेलनेस सेंटर खोलेगी जोकि आवश्यक दवाएं और जांच सेवाएं निःशुल्क मुहैया करायेंगे साथ ही जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों पर नियंत्रण पाने के लिए प्रशिक्षण भी दिया जायेगा। इस योजना के मद में 1200 करोड़ रुपये रखे गये हैं। 
 
-शुभा दुबे
 

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