मुश्किल समय में अच्छा बजट लेकर आई है राजस्थान की गहलोत सरकार

Ashok Gehlot
निवेशकों को आकर्षित कर धरातल पर उद्यमों की स्थापना बड़ी बात है। हालांकि मुख्यमंत्री गहलोत ने बजट पेश करते हुए राजस्थान फाउण्डेशन के माध्यम से देश-विदेश में रोड़ शो आयोजित करने की बात कही है वहीं राजस्थान इंवेस्टर्स समिट के आयोजन का प्रस्ताव किया है।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सबसे लंबे बजट भाषण का रिकॉर्ड बनाते हुए कोरोना प्रभावित उद्योग जगत को बड़ी राहत देने का प्रयास किया है। कोरोना के कारण प्रभावित प्रदेश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का ठोस विजन प्रस्तुत करते हुए उन्होंने बजट प्रस्तावों में एक और नई एमएसएमई पॉलिसी लाने की बात की है तो दूसरी और प्रदेश में नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के प्रस्ताव किए हैं। राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना 2019 का दायरा बढ़ाते हुए हेल्थ केयर को ट्रस्ट क्षेत्र के रूप में शामिल करने के साथ ही अनुसूचित जाति, जनजाति उद्यमियों को आगे लाने के लिए डॉ. बीआर अंबेडकर एससी-एसटी उद्यमी प्रोत्साहन योजना लागू करते हुए रिप्स, 2019 में लाभ देने के प्रावधान किए हैं। इसके अलावा आदिवासी जिलों के औद्योगिक विकास के लिए रिप्स योजना का दायरा बढ़ाया गया है तो पुरानी रिप्स योजना की अवधि बढ़ाकर लाभार्थियों को राहत दी है। भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र का दायरा बढ़ाते खुशकेड़ा, भिवाड़ी, नीमराणा और टपूकड़ा को शामिल करते हुए ग्रेटर भिवाड़ी इण्डस्ट्रियल टाउनशिप विकसित करने के लिए एक हजार करोड़ का प्रावधान किया है। इसी तरह से मारवाड़ इण्डस्ट्रियल कलस्टर बनाना प्रस्तावित है। युवाओं को ऋण, बुनकरों को 3 लाख तक का ब्याज मुक्त ऋण, मेगा व मिनी फूड पार्कों को बनाने, स्टार्टअप्स को सहयोग देने के प्रावधान कर बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने की दिशा दी है।

इसे भी पढ़ें: राजस्थान के बजट में कोई नया कर नहीं, 910 करोड़ रुपये की राहतें दी गई

दरअसल औद्योगिक निवेश की दृष्टि से राजस्थान की ओर आज निवेशक रुख कर रहे हैं। पिछले सालों में राजस्थान में निवेश भी बढ़ा है और राज्य सरकार द्वारा निरीक्षण राज खत्म कर एमएसएमई एक्ट के सरलीकरण और वन स्टॉप शॉप जैसी व्यवस्थाएं निश्चित रूप से निवेशकों को आकर्षित करने में सहायक सिद्ध हो रही हैं। इसके साथ ही राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना में विशेष रियायतें और अब उसका दायरा बढ़ाकर उद्यमियों को आकर्षित करने से नए उद्यम लगेंगे। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग अर्थव्यवस्था की रीढ़ होते हैं। कृषि के बाद सबसे अधिक रोजगार एमएसएमई उद्योग ही उपलब्ध कराते हैं। राज्य में सरकार आने के बाद जिस तरह से औद्योगिक निवेश का वातावरण का प्रयास किया गया है उसके परिणाम सामने आने लगे हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि निरीक्षणों व अनुमतियों से तीन साल से मुक्त करने का सकारात्मक असर रहा है। उद्यमी एमएसएमई पोर्टल पर आगे आ भी रहे हैं।

निवेशकों को आकर्षित कर धरातल पर उद्यमों की स्थापना बड़ी बात है। हालांकि मुख्यमंत्री गहलोत ने बजट पेश करते हुए राजस्थान फाउण्डेशन के माध्यम से देश-विदेश में रोड़ शो आयोजित करने की बात कही है वहीं राजस्थान इंवेस्टर्स समिट के आयोजन का प्रस्ताव किया है। निश्चित रूप से यह अच्छी सोच है। अब देखना यह होगा की सरकारी मशीनरी इन आयोजनों को कहां तक ले जाती है और नए निवेशकों को राजस्थान की यूएसपी से प्रभावित करने में कितनी सफल होती है, यह भविष्य के गर्भ में छिपा है। समिट व रोड शो के आयोजन में सतर्कता भी बरतनी होगी ताकि पूर्व के आयोजनों की तरह अपने उद्देश्यों से यह आयोजन भटक नहीं जाए।

आशा की जानी चाहिए कि लंबे समय से धरातल पर उतरने से तरस रही दिल्ली मुबई इण्डस्ट्रियल कॉरिडोर परियोजना एक हजार करोड़ रु. से विकसित होने वाला ग्रेटर भिवाड़ी इण्डस्ट्रियल टाउनशिप और 500 करोड़ रु. की लागत से विकसित होने वाला मारवाड़ इण्डस्ट्रियल कलस्टर धरातल पर आ सकेगी। देखा जाए तो डीएमआईसी परियोजना औद्योगिक विकास के लिए गेम चेंजर परियोजना है और इसके क्रियान्वयन से औद्योगिक विकास के साथ ही रोजगार के अवसरों का अंबार ही लग जाएगा। इसी तरह से एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रेडियंट्स से जुड़े विनिर्माण क्षेत्र को रिप्स के दायरे में लाते हुए अतिरिक्त परिलाभ देने से फार्मास्यूटिकल सेक्टर में निवेश बढ़ेगा। राज्य में उपखण्ड स्तर पर 64 औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की घोषणा से समग्र औद्योगिक विकास संभव हो सकेगा अन्यथा कुछ क्षेत्र विशेष तक ही उद्यमों के विकास से संपूर्ण राजस्थान का संतुलित औद्योगिक विकास नहीं हो पाता है। जयपुर को फिनटेक सिटी बनाने की अच्छी पहल होगी।

इसे भी पढ़ें: राजस्थान विधानसभा में गहलोत सरकार का 2021- 22 बजट पेश, कई नयी घोषणाएं

जयपुर के राजस्थान हाट को दिल्ली हाट की तर्ज पर विकसित करने का प्रस्ताव आज समय की मांग व आवश्यकता है। इसका कारण भी है। जयपुर पर्यटन की दृष्टि से प्रमुख डेस्टिनेशन होने से दस्तकारों, बुनकरों, हस्तशिल्पियों को नई पहचान मिल सकेगी। जहां तक मुख्यमंत्री लघु उद्यम प्रोत्साहन योजना को दस साल तक लागू रखने, 50 करोड़ के अनुदान का प्रावधान, स्टार्टअप्स को 5 लाख तक की सीडमनी, उनको प्राथमिकता से कार्य देने, स्ट्रीट वेंडर्स के लिए प्रावधान किए गए हैं।

देखा जाए तो पिछला लगभग एक साल कोरोना से प्रभावित रहा है। लंबे लॉकडाउन के दौर के कारण औद्योगिक गतिविधियां बुरी तरह से प्रभावित रही हैं। उद्योगों के सामने दिक्कतें आई हैं तो रोजगार के अवसर कम हुए हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जिस तरह के बजट प्रस्ताव रखे हैं उनसे निश्चित रूप से निवेश को बढ़ावा मिलेगा वहीं फार्मास्यूटिकल और बायोफार्मा सेक्टर में नए उद्योग लग सकेंगे। सबसे बड़ी बात यह कि डीएमआईसी परियोजना को राजस्थान में अमली जामा पहनाने के लिए कदम बढ़ाते हुए ग्रेटर भिवाड़ी टाउनशिप और मारवाड़ कलस्टर धरातल पर आ जाता है तो प्रदेश का औद्योगिक स्वरूप ही बदल जाएगा। स्वयं मुख्यमंत्री गहलोत ग्रेटर भिवाड़ी इण्डस्ट्रियल टाउनशिप को औद्योगिक विकास की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होना मान रहे हैं।

मुख्यमंत्री गहलोत ने समन्वित, संतुलित और समग्र औद्योगिक विकास के लिए नए निवेश और युवाओं के लिए रोजगार दोनों से जुड़े अधिकांश बिन्दुओं को अपने बजट प्रस्तावों में प्रभावी तरीके से रखा है। अब इन प्रस्तावों को अमली जामा महनाने की जिम्मेदारी सरकारी मशीनरी पर आ जाती है। यदि समयबद्ध कार्य योजना बनाकर क्रियान्विति के प्रयास किए जाते हैं तो प्रदेश के औद्योगिक विकास को दिशा मिल सकेगी। होना तो यह चाहिए कि नए वित्तीय वर्ष के शुरू होने से पहले आवश्यक सभी औपचारिकताएं पूरी कर एक अप्रैल से अमली जामा पहनाने का काम आरंभ हो जाता है तो यह घोषणा मात्र ना रह कर वास्तविकता में धरातल पर आ सकेगी।

-डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा

अन्य न्यूज़