लोकसभा चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए लगी नई शर्तें पारदर्शिता लाएंगी

By अजय कुमार | Publish Date: Mar 1 2019 3:56PM
लोकसभा चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए लगी नई शर्तें पारदर्शिता लाएंगी
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चुनाव आयोग का साफ कहना है कि आने वाले लोकसभा चुनावों में उम्मीदवारों को अपने पांच साल के आयकर रिटर्न का विवरण देना होगा तथा साथ ही उन्हें शपथ पत्र में विदेशों में अपनी संपत्ति और जमा का ब्योरा भी देना होगा।

देश में पाकिस्तान के साथ तनाव को लेकर भले ही गहमागहमी हो, लेकिन इससे लोकसभा चुनाव की तैयारियों में कमी नहीं आई है। एक तरफ आयोग ने दो टूक कहा है कि आने वाले लोकसभा चुनावों में उम्मीदवारों को अपने पांच साल के आयकर रिटर्न का विवरण तथा शपथ पत्र में विदेशों में अपनी संपत्ति और जमा का ब्योरा भी देना होगा और यह नियम इन चुनावों में ही लागू हो जाएगा तो दूसरी तरफ राजनैतिक पार्टियों द्वारा चुनाव आयोग पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है कि वह वोटिंग मशीन के साथ वीवीपैट लगाने का प्रतिशत बढ़ाए। उत्तर प्रदेश में अब तक हुई तैयारियों का जायजा लेने के लिए जब केन्द्रीय चुनाव आयोग की टीम लखनऊ पहुंची तो सपा−बसपा सहित तमाम राजनीतिक दलों ने उससे कहा कि वीवीपैट लगाने के लिए समुचित व्यवस्था की जाए। इसमें कोई गड़बड़ी न हो। केन्द्रीय चुनाव टीम का नेतृत्व स्वयं मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा कर रहे थे तो उनके साथ चुनाव आयुक्त अशोक लवासा और सुशील चन्द्र और उप चुनाव आयुक्त उमेश सिन्हा भी मौजूद थे। आयोग की 12 सदस्यीय टीम ने अपने दौरे के दौरान राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के सुझाव व शिकायतों का संकलन किया।
चुनाव आयोग के अधिकारियों से मिलने के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव राजेन्द्र चौधरी का कहना था कि उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ईवीएम की बजाय बैलट पेपर से चुनाव की मांग बार−बार की थी। यही मांग उसने चुनाव आयोग से की है। सपा की ओर से आयोग को दिए ज्ञापन में कहा गया कि पोलिंग पार्टियों को जो ईवीएम मशीन दी जाए वह परीक्षण कर के दी जाए क्योंकि प्रायः अनेक बूथों पर मतदान प्रारम्भ होने के समय ही मशीनों के खराब पाने की जानकारी मिलती है।


 
उधर, कांग्रेस के प्रतिनिधियों ने भी ईवीएम से मतदान करवाने पर मतदान की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। आयोग की टीम ने उन्हें आश्वस्त किया कि ईवीएम से निष्पक्ष चुनाव करवाए जाएंगे। कांग्रेस प्रतिनिधियों ने मांग की कि हर पोलिंग बूथ पर ईवीएम के साथ वीवीपैट अवश्य लगायी जाए और वीवीपैट से निकलने वाली हर पर्ची की गणना भी करवाई जाए। जबकि भाजपा की ओर से उसके नेताओं का कहना था कि चूंकि इस बार ईवीएम के साथ वीवीपैट भी लगाया जाएगा, लिहाजा मतदान में समय ज्यादा लगेगा, इसलिए इस बार मतदान का समय बढ़ाया जाए। इन नेताओं ने सैनिकों के सर्विस वोट की आईडी को लेकर पेश आने वाली खामियों को दूर किए जाने की भी मांग चुनाव आयोग से की।
राजनैतिक दल वीवीपैट को लेकर जागरूक हैं तो चुनाव आयोग प्रत्याशियों के आयकर रिटर्न सहित देश−विदेश की संपत्ति के दस्तावेजों को लेकर गंभीर है। चुनाव आयोग का साफ कहना है कि आने वाले लोकसभा चुनावों में उम्मीदवारों को अपने पांच साल के आयकर रिटर्न का विवरण देना होगा तथा साथ ही उन्हें शपथ पत्र में विदेशों में अपनी संपत्ति और जमा का ब्योरा भी देना होगा। यह नियम इन चुनावों में ही लागू हो जाएगा।


 
गौरतलब है कि कानून और न्याय मंत्रालय द्वारा अधिसूचित किए गए चुनाव संचालन (संशोधन) नियम, 2019 में यह कहा गया है। इसके साथ ही अब फॉर्म 26 फॉर्मेट बदल दिया गया है जिसमें उम्मीदवार को अपनी संपत्ति, दायित्व, शैक्षणिक योग्यता तथा आपराधिक मामलों की जानकारी देनी पड़ती है। इससे पूर्व उम्मीदवार को फॉर्म 26 में सिर्फ अपनी, पत्नी और निर्भरों की आयकर का ब्योरा देना पड़ता था, लेकिन अब संशोधित नियम के अनुसार फॉर्म 26 में पांच साल का रिटर्न दायर करना होगा तथा विदेश में यदि कोई संपत्ति है तो उसका ब्योरा भी देना होगा। कानून मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, इसमें विदेशी बैंकों में जमा पूंजी और वहां किए गए निवेश की जानकारी देना भी शामिल होगा। यह घोषणा सिर्फ उम्मीदवार तक ही सीमित नहीं रहेगी बल्कि उन्हें अपनी पत्नी की आय का ब्यौरा भी देना होगा। वहीं यदि उम्मीदवार हिन्दू संयुक्त परिवार का कर्ता है तो भी उसे यह ब्यौरा देना आवश्यक होगा।


बता दें कि गत वर्ष सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने कई आदेश दिए थे जिसमें उम्मीदवारों को अपनी आपराधिक पृष्ठभूमि का ब्यौरे संबंधी शपथपत्र देने के लिए निर्देश दिए गए थे। कोर्ट ने कहा था कि यदि कोई आपराधिक मुकदमा लंबित है तो शपथपत्र में उसे मोटे अक्षरों में लिखना होगा। साथ ही राजनीतिक दल को उम्मीदवारों के आपराधिक रिकॉर्ड को उचित रूप से बड़े प्रचार वाले अखबारों में प्रचारित करना होगा। कोर्ट ने यह निर्देश देते हुए आपराधिक पृष्ठभूमि के ऐसे लोगों जिनके खिलाफ आरोप तय हो गए हों, को चुनाव से प्रतिबंधित करने से मना कर दिया था।
 
-अजय कुमार

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