मोदी ने सबका विश्वास जीतने का जो मंत्र दिया है वह सबके लिए लाभकारी होगा

By ललित गर्ग | Publish Date: May 29 2019 11:17AM
मोदी ने सबका विश्वास जीतने का जो मंत्र दिया है वह सबके लिए लाभकारी होगा
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राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का नेता चुने जाने के बाद अपने करीब 75 मिनट के भाषण में मोदी ने नये भारत की रूपरेखा प्रस्तुत कर दी है, उन्होंने अल्पसंख्यकों का भी विश्वास जीतने की जरूरत बताते हुए इस वर्ग को गुमराह न किये जाने की आवश्यकता व्यक्त की।

नरेन्द्र मोदी ने ऐतिहासिक एवं सुनामी जीत के बाद देश के सामने नये भारत का संकल्प व्यक्त करते हुए राजनीति की विसंगतियां को दूर करने के साथ नये भारत के निर्माण की प्राथमिकता को व्यक्त किया है, जिससे उनकी स्वीकार्यता और अधिक बढ़ गई है। मोदी का व्यक्तित्व एवं कर्तृत्व समूचे देश का प्रतिनिधित्व कर रहा है एवं भारत की ख्याति देश और दुनिया में एक नई ऊर्जा, छवि एवं शक्ति के साथ स्थापित होते हुए दिखाई दे रही है। नरेंद्र मोदी एवं उनकी बनने वाली सरकार अब नई ऊर्जा के साथ, नए भारत के निर्माण के लिए नयी यात्रा शुरू करने जा रही है। जिसमें शुभ भारत का भविष्य स्पष्टतः दिखाई दे रहा है। 

मोदी ने एनडीए के नवनिर्वाचित सांसदों से बिना भेदभाव किए लोगों का दिल जीतने का आह्वान करके राजनीति को एक नई दिशा देने की कोशिश की है। भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का नेता चुने जाने के बाद अपने करीब 75 मिनट के ऐतिहासिक भाषण में मोदी ने नये भारत की रूपरेखा प्रस्तुत कर दी है, उन्होंने अल्पसंख्यकों का भी विश्वास जीतने की जरूरत बताते हुए इस वर्ग को गुमराह न किये जाने की आवश्यकता व्यक्त की। वोट-बैंक की राजनीति में भरोसा रखने वालों अल्पसंख्यकों को डर में जीने की मजबूरी को दूर करना होगा, इस छल को समाप्त करना होगा एवं सबको साथ लेकर चलना होगा। 'सबका साथ सबका विकास' और आज के भारत की यही जरूरत है।
 
मोदी का संकल्प है नया भारत निर्मित करते हुए अब युवा पीढ़ी के सपनों को आकार देकर भारत को नई बुलंदियों पर ले जाना और हिन्दुस्तान को फिर से विश्वगुरु बनाना। आज गरीबों के साथ जो छल चल रहा था, उससे देश को मुक्त करना है। देश पर इस गरीबी का जो टैग लगा है, उससे देश को मुक्त करना है। गरीबों के हक के लिए जीना-जूझना है, अपना जीवन खपाना है, यह हर भारतीय के लिए संकल्प होना चाहिए। गरीबों के साथ जैसा छल हुआ, वैसा ही छल देश की माइनॉरिटी, आदिवासी और दलित के साथ भी हुआ है। दुर्भाग्य से देश के इन वर्गों को उस छलावे में भ्रमित और भयभीत रखा गया है। अच्छा होता कि माइनॉरिटी, आदिवासी और दलित की शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, उन्नत जीवन की चिंता की जाती।


 
मोदी को पहले भी लोग सुनते थे, आज भी सुन रहे हैं और आगे भी उनको सुनेंगे। वे जुबान से नहीं बोलते, दिल से बोलते हैं, यही बात लोगों के दिल को छूती है। वे जो कहते हैं, वही करते हैं और जो सोचते हैं वही उनका संकल्प एवं दृढ़ इच्छाशक्ति होता है। मोदी का मत है जिन्होंने हम पर भरोसा किया, हम पर विश्वास किया, उन सभी का हमें विश्वास दिल से जीतना है। मोदी ने मंत्री बनाए जाने को लेकर होने वाली कानाफूसी और अटकलों पर भी विराम लगाने की कोशिश करते हुए राजनीति को पद-प्रतिष्ठा एवं स्वार्थ का माध्यम न बनाकर सेवा का माध्यम बनाने की सीख दी है। अब देश में बांटने और भेदभाव की राजनीति खत्म होनी चाहिए, वैसा माहौल निर्मित नहीं किया जाना चाहिए जिससे आपसी भाईचारा बिगड़े एवं जनमानस में बिखराव हो, क्योंकि इन स्थितियों से देश पिछड़ता है, आगे नहीं बढ़ता। हमें समाज को तोड़ना नहीं, जोड़ना है।


मोदी को कठिन से कठिन कार्य करने में भी सिद्धहस्ता प्राप्त है। इसी संकल्प एवं दृढ़ता के बल पर वह एक नये भारत को निर्मित करना चाहते हैं। मोदी ने एनडीए नेताओं के लिए जिन मंत्रों एवं राजनीतिक संकल्पों को अनिवार्य बनाने की जरूरत व्यक्त की है उससे भारत की राजनीति को एक नई दिशा मिलेगी। उनका यह कहना कि छपास और दिखास से बचना चाहिए। निश्चित ही सत्ता और राजनेताओं के लिए नई राजनीति की एक नई इबारत है क्योंकि सत्ता का मोह हमें संकट में डालता है। उन्होंने बहुमत की जगह सर्वमत को महत्व देकर राजनीतिक जीवन में एक अभिनव क्रांति का सूत्रपात किया है।
 
21वीं सदी में हिंदुस्तान को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है तो सबका साथ, सबका विकास और अब सबका विश्वास ये मंत्र निश्चित ही भारत के अभ्युदय का द्योतक है। स्वच्छता अगर जन आंदोलन बन सकता है तो समृद्ध भारत भी जन आंदोलन बन सकता है और ऐसा घटित हो तो कोई आश्चर्य नहीं। क्योंकि सत्ता में रहते हुए लोगों की सेवा करने से बेहतर अन्य कोई मार्ग नहीं है। वीआईपी कल्चर से देश को बड़ी नफरत रही है और यह बात मोदी सरकार ने बड़ी गहराई से महसूस करते हुए पिछली सरकार में इस संस्कृति को समाप्त करने की दिशा में उपयोगी कदम उठाए। अभी इस दिशा में व्यापक प्रयत्न किये जाने की आवश्यकता है। हम भी नागरिक हैं तो कतार में क्यों खड़े नहीं रह सकते, आज इस बात पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। हमें जनता को ध्यान में रखकर खुद को बदलना चाहिए। लाल बत्ती हटाने से कोई आर्थिक फायदा नहीं हुआ है लेकिन जनता के बीच में एक सकारात्मक संदेश गया है एवं समतामूलक, संतुलित एवं भेदभावपूर्ण रहित शासन व्यवस्था देने की प्रतिबद्धता सामने आई है। इस तरह की स्थितियां राजनीतिक विसंगतियों एवं विषमताओं को दूर करने की दिशा में कारगर उपाय हैं।
 


  
भारत में तो चुनाव अपने-आप में एक उत्सव की तरह होता है। मतदान भी अनेक रंगों से भरा हुआ होता है, लेकिन विजयोत्सव उससे भी शानदार होता है। प्रचंड जनादेश जिम्मेदारियों को भी बहुत बढ़ा देता है, आज नरेन्द्र मोदी की जीत से उनकी जिम्मेदारियां अधिक बढ़ गई हैं लेकिन एक ऊर्जावान एवं सशक्त नेतृत्व में देश आगे बढ़ेगा, ऐसा विश्वास रोशनी बनकर सामने आया है। भारत का लोकतंत्र, भारत का मतदाता, भारत का नागरिक उसका जो नीर-क्षीर विवेक है, शायद किसी मापदंड से उसे मापा नहीं जा सकता है। सत्ता का रुतबा भारत के मतदाता को कभी प्रभावित नहीं करता है। सत्ता-भाव न भारत का मतदाता स्वीकार करता है, न पचा पाता है। इस देश की विशेषता है कि बड़े से बड़े सत्ता सामर्थ्य के सामने भी सेवाभाव को वो सिर झुका कर के स्वीकार करता है। चाहे भाजपा हो या अन्य राजनीतिक दल उन्हें जनता की इस मानसिकता को स्वीकारना होगा, जिसने भी स्वीकारा है वो विजय हासिल कर पाया है।
जनप्रतिनिधि को इस बात पर गौर करना होगा कि वे जातीय, सांप्रदायिक एवं धार्मिक राजनीति से दिलों को नहीं जीत सकते। दिलों से जुड़ने के लिए उदार एवं विश्वासी होना जरूरी है। शासन से ज्यादा स्वशासन जरूरी है। निज पर शासन फिर अनुशासन, ममता और समता, समभाव एवं ममभाव का संतुलन भी जरूरी है। इसी ने मोदी को नई ऊंचाइयां दी हैं, नई दिशाएं दी हैं, उन्हें शहंशाह बनाया है। देश की जनता परिश्रम की पूजा करती है, वह ईमान को सिर पर बैठाती है। मोदी को भी इसी तरह जीत की बुलंद ऊंचाइयां दी हैं। जिसमें देश आश्वस्त भी है और आगे बढ़ने के लिए तत्पर भी है।
 

 
मोदी का व्यक्तित्व एवं कर्तृत्व समूचे देश का प्रतिनिधित्व कर रहा है। उनका पिछला प्रधानमंत्री का कार्यकाल सबके सामने है। उसकी उपलब्धियां उनकी जीत का कारण बनी हैं। वे एक संकल्प के साथ आगे बढ़े, लक्ष्य बनाकर चुनाव अभियान को निर्णायक मोड़ दिए। वे न रूके, न थके, न डिगे हैं। विषम एवं विपरीत परिस्थितियां भी उन्हें विचलित नहीं कर सकीं। वे इन अंधेरों के बीच भी सदैव कुछ नया करने, नया सोचने और नये तरीके से काम को अंजाम देने में तत्पर दिखाई दिए। ऐसा उन्होंने सदैव किया और अब एक नई पारी के प्रधानमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल निश्चित ही भारत को विश्वगुरु बनाने, एक महाशक्ति के रूप में भारत को प्रस्तुत करने, भारत की जनता की समस्याओं को दूर करने एवं विकास के नये कीर्तिमान स्थापित करने की दिशा में अग्रसर होता हुआ दिख रहा है। उन्होंने सदैव एकदम नये भारत की बात कही, संस्कृति को संपुष्ट करने वाले एक स्वस्थ, स्वच्छ, समृद्ध और सुरक्षित भारत की निर्माण की भारत कही। इसलिए उनकी बातों में जनता ने विश्वास किया और दुनिया ने भी स्वीकारा है।
हमें किसी पार्टी विशेष का विकल्प नहीं खोजना है। किसी व्यक्ति विशेष का विकल्प नहीं खोजना है। विकल्प तो खोजना है भ्रष्टाचार का, अकुशलता का, प्रदूषण का, भीड़तंत्र का, गरीबी के सन्नाटे का, महंगाई का, राजनीतिक अपराधों का, राष्ट्रीय असुरक्षा का। यह सब लम्बे समय तक त्याग, परिश्रम और संघर्ष से ही सम्भव है। अल्पसंख्यक तुष्टीकरण, भ्रष्टाचार और पाक समर्थित आतंकवाद को नजरअंदाज करने वाली राष्ट्रघाती नीतियों की जगह अब इस देश को सुरक्षित जीवन और विकास चाहिए, इस तरह की परिवर्तित सोच मोदी सरकार की राष्ट्रहितैषी नीतियों का ही सुफल है, अर्जुन की आंख की तरह उनका निशाना सशक्त एवं नये भारत के निर्माण पर लगा है।
 
-ललित गर्ग
 

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