मध्य प्रदेश की राजनीति में पोस्टर की राजनीति या राजनीति का पोस्टर

मध्य प्रदेश की राजनीति में पोस्टर की राजनीति या राजनीति का पोस्टर

छिंदवाड़ा में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके पुत्र नकुलनाथ और भोपाल में सांसद प्रज्ञा ठाकुर के ये पोस्टर किसने लगाए यह तो पता नहीं चला। लेकिन ग्वालियर में कांग्रेस नेता सिद्धार्थ सिंह राजावत के खिलाफ पुलिस कार्यवाही के बाद कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने आरोप लगाया था कि ये भाजपा का दोहरा चरित्र है।

मध्य प्रदेश में इन दिनों जनप्रतिनिधियों के लापता होने के पोस्टर संबंधित शहरों में लगाए जा रहे है। जिसमें सबसे पहले पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके सांसद पुत्र नकुलनाथ के लापता होने के पोस्टर उनके विधानसभा और संसदीय क्षेत्र छिंदवाडा में लगाए गए। हालांकि करीब तीन महिने बाद पिता-पुत्र दोनों छिंदवाड़ा पहुँच गए। छिंदवाड़ा में पोस्टर लगने के एक सप्ताह बाद पहुँचे दोनों जन प्रतिनिधियों का कांग्रेस नेताओं ने जमकर स्वागत किया इस दौरान कोरोना संकट और आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भाजपा की शिवराज सरकार पर जमकर निशाना साधा।

तो दूसरी ओर कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थामने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया के पोस्टर ग्वालियर में एक कांग्रेस कार्यकर्ता द्वारा लगाए गए। जिसमें सिद्धार्थ सिंह राजावत नाम के इस कांग्रेस कार्यकर्ता ने लिखा तलाश गुमशुदा जनसेवक की। जिसमें 5100 रूपए तलाश करने वाले नगद ईनाम देने की बात भी लिखी गई। जबकि छिंदवाड़ा में लगाए गए कमलनाथ और नकुलनाथ के पोस्टर पर 21000 रूपए के नगद ईनाम देने की बात लिखी गई थी। सिंधिया की तलाश में लगाए गए पोस्टर लगाने वाले कांग्रेस कार्यकर्ता ने इस पोस्टर के माध्यम से तीन राजनीतिक सवाल भी किए थे। जिसके बाद ग्वालियर भाजपा जिला अध्यक्ष ने कांग्रेस कार्यकर्ता के खिलाफ पुलिस में शिकायत की थी। जिसके बाद ग्वालियर के झांसी रोड थाने में प्राथमिकी दर्ज कर इस मामले में सिद्धार्थ सिंह राजावत कांग्रेस नेता को गिरफ्तार भी किया गया था। ग्वालियर में सिंधिया के खिलाफ पोस्टर लगाने वाले सिद्धार्थ सिंह राजावत ने पोस्टर के नीचे अपने नाम के साथ अपना मोबाइल नंबर भी लिखा था।

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वही अब भोपाल सांसद प्रज्ञा ठाकुर की तलाश वाले पोस्टर प्रदेश की राजधानी में लगाए गए है। गुमशुदा की तलाश कोरोना महामारी में भोपाल की जनता परेशान सांसद प्रज्ञा ठाकुर कहां लापता ? हालांकि भोपाल सांसद प्रज्ञा ठाकुर को लेकर पहले भी कांग्रेस नेता और कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर अभियान चलाया था। जिसके बाद भोपाल सांसद के पक्ष में प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष और विधायक रामेश्वर शर्मा ने मोर्चा संभालते हुए उनके बीमार होने और एम्स में भर्ती होने की खबर दी थी और इसे कांग्रेस और दिग्विजय सिंह का पाप बताया था। जिसके बाद सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने भी खुद के बीमार होने की खबर ट्विटर द्वारा दी थी। लेकिन उनके पोस्टर भोपाल में दीवारों पर चिपके हुए देखे गए। हालांकि, यह पोस्टर शहर में किसने लगवाए हैं, इसको लेकर अभी कोई खुलासा नहीं हुआ है।

छिंदवाड़ा में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके पुत्र नकुलनाथ और भोपाल में सांसद प्रज्ञा ठाकुर के यह पोस्टर किसने लगाए यह तो पता नहीं चला। लेकिन ग्वालियर में कांग्रेस नेता सिद्धार्थ सिंह राजावत के खिलाफ पुलिस कार्यवाही के बाद कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने आरोप लगाया था कि ये भाजपा का दोहरा चरित्र है। छिंदवाडा में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और सांसद नकुलनाथ के लापता होने वाले पोस्टर लगाने वाले भाजपाइयों के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया। जबकि ग्वालियर में भाजपा नेताओं और सिंधिया समर्थकों के दबाब में पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया। जबकि भोपाल में सांसद प्रज्ञा ठाकुर के लापता होने के पोस्टर किसने लगाए यह संशय बना हुआ है। 

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हालांकि यह पोस्टर वार प्रदेश में 24 सीटों पर होने वाले आगामी विधानसभा उपचुनाव की आहट भी देता है। हाल ही में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार को अपदस्थ कर 15 महीने बाद एक बार फिर सत्ता सिंहासन पर बैठी भाजपा इसे आसानी से अपने हाथों से जाने नहीं देना चाहती क्योंकि राज्य में सरकार बनाने के लिए बहुमत का अंतर इतना अधिक नहीं है कि दोनों ही प्रमुख दल कांग्रेस और भाजपा निश्चिंत होकर सरकार चला सकें। अब प्रदेश की 24 विधानसभा सीटों पर ही पूरा दारोमदार है कि किसके पक्ष में अधिक सीटें आती है। हालंकि इस मामले में बीजेपी की राह आसान लगती है लेकिन जैसा दिखता है वैसा होता नहीं। यही कारण है कि दोनों ही पार्टियों के कार्यकर्ता अपने-अपने तरीके से इस कोरोना काल में राजनीति के बड़े चेहरों को पोस्टर के जरिए निशाना बना रहे है। कांग्रेस के अपने दावे है तो भाजपा अपने 15 साल की सरकार की दुहाई देते हुए सत्ता को हाथ से नहीं फिसलने देना चाहती। लेकिन इस पोस्टर वार से यह तो साफ है कि अब पोस्टर के जरिए राजनीति शुरू हो गई है। राजनीतिक विश्लेषक इसे राजनीति का पोस्टर बता रहे है। क्योंकि सोशल मीडिया पर राजनेताओं के मुखौटे लगाकर फिल्मी हीरो बनाने वाले क्लिप्स के आगे मध्य प्रदेश की राजनीति अब गुमशुदा पोस्टर पर आकर टिक गई है।

दिनेश शुक्ल