सीएसआईआर-सीडीआरआई की वैज्ञानिक को उत्कृष्टता पुरस्कार

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एसईआरबी-महिला उत्कृष्टता पुरस्कार 40 वर्ष से कम उम्र की उन महिला वैज्ञानिकों को दिया जाता है, जिन्हें एक या अधिक राष्ट्रीय अकादमियों से सम्मानित किया गया हो। इस पुरस्कार के अंतर्गत महिला शोधकर्ताओं को कुल 15 लाख रुपये की धनराशि शोधकार्य के लिए अनुदान के रूप में दी जाती है।

नई दिल्ली। (इंडिया साइंस वायर): हाल के वर्षों में कई महिला वैज्ञानिकों ने विज्ञान की दुनिया में अपनी छाप छोड़ी है। इस सूची में अब केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (सीडीआरआई), लखनऊ की वैज्ञानिक डॉ नीति कुमार का नाम भी शामिल हो गया है। डॉ कुमार को वर्ष 2020 के एसईआरबी-महिला उत्कृष्टता पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। विज्ञान और इंजीनियरी अनुसंधान बोर्ड (एसईआरबी) द्वारा यह पुरस्कार महिलाओं को विज्ञान के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया जाता है।

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राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के मौके पर 28 फरवरी को दिल्ली के विज्ञान भवन में डॉ नीति कुमार को राष्ट्रपति द्वारा यह पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। वह सीडीआरआई के आणविक परजीवी-विज्ञान एवं प्रतिरक्षा-विज्ञान विभाग में कार्यरत हैं और मलेरिया की रोकथाम के लिए वैकल्पिक दवाओं एवं नये लक्ष्यों की खोज के लिए कार्य कर रही है। डॉ कुमार का कहना है कि “हमारी रुचि तनाव और संक्रमण के दौरान कोशिकाओं द्वारा अपनायी गई प्रोटीन गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रियाओं को समझने में अधिक है।”

एसईआरबी-महिला उत्कृष्टता पुरस्कार 40 वर्ष से कम उम्र की उन महिला वैज्ञानिकों को दिया जाता है, जिन्हें एक या अधिक राष्ट्रीय अकादमियों से सम्मानित किया गया हो। इस पुरस्कार के अंतर्गत महिला शोधकर्ताओं को कुल 15 लाख रुपये की धनराशि शोधकार्य के लिए अनुदान के रूप में दी जाती है। पुरस्कृत वैज्ञानिकों को यह रकम तीन वर्षों तक पांच लाख की तीन अलग-अलग किस्तों में प्रदान की जाती है।

डॉ नीति कुमार को इससे पहले कई सम्मान एवं पुरस्कार मिल चुके हैं। इनमें इनोवेटिव यंग बायोटेक्नोलॉजिस्ट अवार्ड, इंडियन नेशनल साइंस अकादमी द्वारा युवा वैज्ञानिक के लिए मेडल, रामलिंगस्वामी फेलोशिप, ईएमबीओ पोस्ट-डॉक्टरल फेलोशिप, अलेक्जेंडर वॉन हम्बोल्ट फेलोशिप, मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट ऑफ बायोकेमिस्ट्री में मैक्स प्लैंक पोस्ट-डॉक्टरल फेलोशिप एवं 6वें फ्रेमवर्क प्रोग्राम के तहत यूरोपीय संघ द्वारा मैरी क्यूरी अर्ली रिसर्च फेलोशिप आदि शामिल हैं। 

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21वीं सदी की चुनौतियों का सामना करने के लिए अपनी पूरी क्षमता का दोहन करने की आवश्यकता है। विज्ञान के क्षेत्र में लैंगिक असुंतलन इन चुनौतियों से निपटने में एक बड़ी बाधा रही है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष राष्ट्रीय विज्ञान दिवस-2020 की विषयवस्तु "वुमन इन साइंस" रखी गई है ताकि विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं को प्रोत्साहन मिल सके। 

(इंडिया साइंस वायर)

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