कचरा प्रबंधन प्रौद्योगिकी व्यवसायीकरण के लिए वित्तीय सहायता

कचरा प्रबंधन प्रौद्योगिकी व्यवसायीकरण के लिए वित्तीय सहायता
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विश्व स्तर पर सबसे ज्यादा कचरा भारत में पैदा होता है। यदी तत्काल उपाय नहीं किए जाते तो कचरे की मात्रा वर्ष 2050 तक दोगुने स्तर पर पहुँच सकती है। अपशिष्ट या कचरे के प्रबंधन में अभिनव प्रौद्योगिकी की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

व्यवसायीकरण के चरण में पहुँच चुकी अपशिष्ट प्रबंधन की नवाचारी स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकसित करने वाली भारतीय कंपनियों को अब अपनी प्रौद्योगिकी को अगले चरण में ले जाने के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त करने का अवसर मिल सकता है। भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के वैधानिक निकाय प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ी प्रौद्योगिकी के व्यवसायीकरण के आवेदन आमंत्रित किए हैं। 

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अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ी आवश्यकता को पूरा करने में सक्षम और स्वच्छता पर ध्यान केंद्रित करने वाले क्षेत्रों में नवाचारी/स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकसित करने वाली कंपनियां इस पहल के अंतर्गत आवेदन कर सकती हैं। नगरपालिका ठोस अपशिष्ट, प्लास्टिक अपशिष्ट, निर्माण एवं तोड़फोड़ से निकला मलबा, कृषि अपशिष्ट, जैव चिकित्सा अपशिष्ट, ई- अपशिष्ट, औद्योगिक खतरनाक एवं गैर-खतरनाक अपशिष्ट, बैटरी अपशिष्ट, रेडियोधर्मी अपशिष्ट के निस्तारण के लिए बेहतर प्रौद्योगिकीय समाधान प्रदान करने वाली कंपनियाँ इसके लिए प्रस्ताव भेज सकती हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित समाधान भी प्रौद्योगिकी नवाचारों में शामिल हो सकते हैं।

देश के बड़े शहरों को कचरा मुक्त रखने और कचरे से धन उत्पन्न करने की चुनौती का समाधान प्रदान करने के उद्देश्य से टीडीबी ‘वेस्ट टू वेल्थ’ नामक शीर्षक के अंतर्गत प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं। प्रौद्योगिकी व्यवसायीकरण के लिए चयनित भारतीय कंपनियों को टीडीबी की ओर से वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। चयन के लिए मूल्यांकन वैज्ञानिक, तकनीकी, वित्तीय और वाणिज्यिक योग्यता के आधार पर किया जाएगा। वित्तीय सहायता ऋण, इक्विटी और/या अनुदान के रूप में प्रदान की जाएगी। विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा जारी वक्तव्य में यह जानकारी प्रदान की गई है।

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विश्व स्तर पर सबसे ज्यादा कचरा भारत में पैदा होता है। यदी तत्काल उपाय नहीं किए जाते तो कचरे की मात्रा वर्ष 2050 तक दोगुने स्तर पर पहुँच सकती है। अपशिष्ट या कचरे के प्रबंधन में अभिनव प्रौद्योगिकी की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। लेकिन, उत्कृष्ट प्रौद्योगिकी नवाचार भी पर्याप्त सहयोग एवं संसाधनों के अभाव में व्यवसायीकरण के चरण में पहुँचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं। प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) की यह पहल ऐसी प्रौद्योगिकीयों के समुचित उपयोग को सुनिश्चित करने में मददगार हो सकती है।  

टीडीबी, जो आम आदमी के जीवन को सुगम बनाने के उद्देश्य से नवाचारी देसी प्रौद्योगिकी की मदद करने में अग्रणी है, स्वच्छ भारत मिशन- शहरी 2.0 के तहत प्रधानमंत्री की परिकल्पना को साकार करने के उद्देश्य से उद्योग और शिक्षाविदों के सहयोग में मदद करने को आयी है। विस्तृत वित्त पोषण दिशा-निर्देशों और प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए, आवेदक टीडीबी की वेबसाइट- www.tdb.gov.in पर जा सकते हैं। प्रस्ताव प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 03 जुलाई, 2022 है। 

(इंडिया साइंस वायर)