नयी खोजों के साथ नवाचारों का मालिक भी बनना होगा

By उमाशंकर मिश्र | Publish Date: Jan 9 2019 4:06PM
नयी खोजों के साथ नवाचारों का मालिक भी बनना होगा
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आठवीं महिला विज्ञान कांग्रेस को संबोधित करते हुए प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी कम भले ही हो, पर अपने साहस, सामंजस्य और करुणा जैसे गुणों के कारण वे पुरुषों से अधिक कार्य कर सकती हैं।

जालंधर। (इंडिया साइंस वायर): मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि सिर्फ नवाचारों से काम नहीं चलेगा, बल्कि देश की तरक्की के लिए नयी खोजों के साथ-साथ हमारे वैज्ञानिकों तथा शोधकर्ताओं को उनका मालिक भी बनना होगा। जावड़ेकर ने ये बातें जालंधर में 106वीं विज्ञान कांग्रेस में आयोजित महिला विज्ञान कांग्रेस के समापन सत्र में कही हैं। उन्होंने कहा कि दुनियाभर में हो रहे वैज्ञानिक शोधों और नवाचारों में भारत के वैज्ञानिकों की अहम भूमिका है, लेकिन उन पर भारतीयों का मालिकाना हक नहीं है। 
 
आठवीं महिला विज्ञान कांग्रेस को संबोधित करते हुए जावड़ेकर ने कहा कि विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी कम भले ही हो, पर अपने साहस, सामंजस्य और करुणा जैसे गुणों के कारण वे पुरुषों से अधिक कार्य कर सकती हैं। दो बार नोबेल पुरस्कार प्राप्त वैज्ञानिक मैडम क्यूरी का हवाला देते हुए जावड़ेकर ने कहा कि उन्होंने विज्ञान की दो अलग-अलग शाखाओं भौतिकी एवं रसायनशास्त्र में कार्य करते हुए रेडियम और पोलोनियम जैसी महत्वपूर्ण खोजें की हैं।
 


 
चीन, कोरिया, ताइवान और सिंगापुर जैसे देशों का उदाहरण देते हुए जावड़ेकर ने कहा कि विज्ञान में तरक्की करने वाला देश ही आगे बढ़ता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नारे 'जय अनुसंधान' का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि "समुद्र मंथन की तरह ही निरंतर शोध में भी समय लगता है, लेकिन ये प्रयास मीठे फल देते हैं।" 
 
उन्होंने कहा कि सरकार ने अनुसंधान की फंडिंग में वृद्धि की है और आईआईटी संस्थानों में छह रिसर्च पार्क स्थापित किए गए हैं। इन रिसर्च पार्कों में छात्रों और प्राध्यापकों की टीम विभिन्न समस्याओं को लेकर कई तरह के शोध कर रही हैं। शोध परियोजनाओं के वित्त पोषण के लिए 'इम्प्रिंट' नामक योजना भी शुरू हुई है। उन्होंने दावा किया कि इस योजना के तहत लगभग 300 प्रयोग हो रहे हैं।
 
शोध कार्यों को बढ़ावा देने के लिए जावड़ेकर ने तीन चीजों को महत्वपूर्ण बताया है, जिनमें विश्व स्तरीय प्रयोगशालाएं, पर्याप्त छात्रवृत्तियां और कुशल पर्यवेक्षक शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन कमियों की वजह से ही हमारे प्रतिभाशाली वैज्ञानिकों को विदेशों में जाकर काम करना पड़ता है। अब इन कमियों को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि इन कोशिशों की वजह से ही हमारे वैज्ञानिक वापस आकर देश में शोध कर रहे हैं। इससे "ब्रेन ड्रेन" की स्थिति बदलकर अब "ब्रेन गेन" की स्थिति बन रही है।


 
 
उच्च शिक्षा वित्त पोषण एजेंसी (हीफा) का जिक्र करते हुए जावड़ेकर ने कहा कि देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में बुनियादी ढांचे के निर्माण और अनुसंधान तथा विकास के लिए यह एजेंसी वित्तीय सहायता प्रदान करती है। उन्होंने बताया कि हीफा के जरिये इस साल 30 हजार करोड़ रुपये विभिन्न संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण प्रयोगशालाओं की स्थापना के लिए दिये गए हैं।
 


मानव संसाधन विकास मंत्री ने शिक्षा, उद्योग और अनुसंधान क्षेत्रों के एकीकृत रूप से कार्य करने के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री, शोध संस्थानों और वैज्ञानिकों के बीच संवाद स्थापित करने के लिए उच्चतर आविष्कार योजना शुरू की गई है। इसी के साथ मानविकी के क्षेत्र में भी शोध को बढ़ावा देने के लिए इम्प्रेस नामक योजना शुरू की गई है।
 
जावड़ेकर ने कहा कि अनुसंधान के बिना नवाचार संभव नहीं है और इसके लिए अनुकूल वातावरण जरूरी है। इसकी शुरुआत स्कूलों से की गई है। करीब 3000 स्कूलों में अटल टिंकरिंग लैब्स शुरू की गई हैं। इन लैब्स में 3डी प्रिटिंग, आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और आधुनिक गैजेट्स जैसी सुविधाएं मौजूद हैं, जिन पर छात्र काम कर रहे हैं। इस तरह छात्रों में विज्ञान के प्रति अभिरुचि बढ़ायी जा सकती है। इस मौके पर जावड़ेकर ने जालंधर की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के छात्रों द्वारा बनायी गयी ड्राइवर रहित सौर ऊर्जा से चलने वाली बस में भी सफर किया। 
 
(इंडिया साइंस वायर)

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