भोजन में संतुलित नमक के सेवन को बढ़ावा देने की नई पहल

By शुभ्रता मिश्रा | Publish Date: Aug 18 2018 4:11PM
भोजन में संतुलित नमक के सेवन को बढ़ावा देने की नई पहल

भोजन में नमक ज्यादा होने से उच्च रक्तचाप और हृदय संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। अध्ययन के आधार पर आहार में नमक की संतुलित मात्रा के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए एक समग्र रणनीति विकसित करने का सुझाव दिया गया है।

वास्को-द-गामा (गोवा), (इंडिया साइंस वायर): भोजन में नमक ज्यादा होने से उच्च रक्तचाप और हृदय संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। वैज्ञानिकों के एक समूह द्वारा किए गए अध्ययन के आधार पर आहार में नमक की संतुलित मात्रा के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए एक समग्र रणनीति विकसित करने का सुझाव दिया गया है।
 
इस अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने नमक की संतुलित मात्रा के सेवन में आने वाली बाधाओं को समझने का प्रयास किया है। इसी आधार पर लोगों को नमक की कम मात्रा के उपयोग के लिए मानसिक रूप से तैयार करने तथा जागरूकता बढ़ाने का सुझाव दिया गया है। इन सुझावों में जागरूकता के प्रसार के लिए जनमाध्यमों के विस्तृत उपयोग, खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों में नमक की कम मात्रा के उपयोग को प्रोत्साहन, खाद्य सामग्रियों पर उल्लिखित पोषण लेबलों के लिए निर्धारित नियमों में बदलाव तथा पोषक तत्वों की पूर्ण जानकारी देने की बात कही गई है।
 




 
कम नमक खाने को लेकर लोगों की यह धारणा है कि भारत एक गर्म देश है और यहां पसीना अधिक निकलने से शरीर में नमक की मात्रा कम हो सकती है। इसलिए नमक अधिक खाना चाहिए। कई लोगों का मानना है कि नमक कम होने से भोजन स्वादिष्ट नहीं रहता। इसी तरह अधिकतर असंगठित खाद्य उत्पाद विक्रेता, छोटे रेस्टोरेंट या स्ट्रीट फूड विक्रेताओं का मानना है कि नमक कम डालने से स्वाद में कमी के कारण ग्राहकों की संख्या कम हो सकती है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों से जुड़े लोगों का कहना है कि कम नमक उपयोग करने से उनके बनाए हुए खाद्य उत्पादों की बिक्री कम हो सकती है। इसके अलावा देश में मौजूदा खाद्य नीतियों के उचित कार्यान्वयन और अनुपालन में भी कमी पायी गई है।
 


भारत में संतुलित नमक सेवन के संबंध में रणनीति विकसित करने में आने वाली चुनौतियों की पड़ताल के लिए किया गया यह अध्ययन विभिन्न हितधारकों के दृष्टिकोण, उनके साक्षात्कार और सामूहिक विचार विमर्श पर आधारित है। गुरुग्राम स्थित पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया, नई दिल्ली के सेंटर फॉर क्रोनिक डिसीज कंट्रोल, हैदराबाद के जॉर्ज इंस्टिट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ, नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान और यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी, ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने मिलकर यह अध्ययन किया है।
 
 
प्रमुख शोधकर्ता डॉ. शैलेष मोहन ने इंडिया साइंस वायर को बताया कि “भारत में लाखों लोग उच्च रक्तचाप से प्रभावित हैं और उनमें से अधिकतर उचित उपचार नहीं लेते हैं। ऐसे में इसकी रोकथाम ही महत्वपूर्ण उपाय हो सकता है। आहार में नमक के सेवन को कम करके उच्च रक्तचाप को नियंत्रित कर सकते हैं। अधिक नमक के सेवन से होने वाले गैर-संक्रामक रोगों के नियंत्रण के लिए एक प्रभावी कार्ययोजना बनाना कारगर हो सकता है।” 
 
शोधकर्ताओं के अनुसार, “कम नमक के उपयोग के साथ ही अधिक आयोडीन उपलब्धता को सुनिश्चित करना भी जरूरी है, जिससे आयोडीन युक्त नमक कार्यक्रम के उद्देश्यों को पूरा किया जा सके। खाद्य उद्योगों को भी लोगों के स्वास्थ्य के प्रति प्रतिबद्धता दिखाते हुए कम नमक का उपयोग करने की ओर गंभीरतापूर्वक ध्यान देना होगा। इसके साथ ही भोजन में नमक के उपयोग को लेकर शोध को बढ़ावा देने की भी आवश्यकता है।”
   
डॉ. शैलेष मोहन के अलावा इस अध्ययन में प्रीति गुप्ता, वंदना गर्ग, सुधीर राज थौट, रूपा शिवशंकर, आनंद कृष्णन, दोरैराज प्रभाकरन तथा यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी ऑस्ट्रेलिया के क्लेयर जॉनसन और ब्रूस नील शामिल थे। यह अध्ययन हाल में प्लॉस वन शोध पत्रिका में प्रकाशित किया गया है। (इंडिया साइंस वायर) 

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