संक्रमण पर लगाम लगा सकती है नई टच-लेस स्क्रीन प्रौद्योगिकी

New touch less screen technology
किसी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के निर्माण में पैटर्निंग शामिल होती है, जो इसकी लागत को काफी बढ़ा देती है। किफायती समाधान के लिए एक अपरंपरागत और कम लागत वाली पैटर्निंग तकनीक का विकास जरूरी है। इस अध्ययन में इस जरूरत को पूरा करने पर जोर दिया गया है।

कोरोना वायरस संक्रमण से उपजी कोविड-19 महामारी ने हमारी जीवन शैली को बड़े पैमाने पर बदल दिया है। महामारी के प्रकोप ने दुनिया को कोविड-19 अनुकूल व्यवहार और इसके प्रति अनुकूलन स्थापित करने संबंधी प्रयासों को तेज करने के लिए बाध्य किया है। आज अधिकांश गतिविधियां स्वाभाविक रूप से वायरस फैलने के जोखिम को कम करने वाली रणनीतियों से प्रेरित हैं, खासतौर से सार्वजनिक स्थलों पर; जहाँ सेल्फ-सर्विस कियोस्क, एटीएम और अन्य वेंडिंग मशीनों पर टचस्क्रीन का उपयोग करना प्रायः जरूरी होता है। 

एक नई शोध परियोजना के अंतर्गत भारतीय शोधकर्ताओं को टचलेस सेंसर आधारित स्क्रीन के विकास को मूर्त रूप देने में सफलता मिली है। शोधकर्ताओं ने टच-कम-प्रॉक्सिमिटी सेंसर अर्थात स्पर्श-सह-सामीप्य संवेदक (Sensor) विकसित करने के लिए प्रिंटिंग प्रौद्योगिकी के जरिये एक किफायती समाधान पेश किया है, जिसे टचलेस टच सेंसर कहा जाता है। यह सफलता महत्वपूर्ण है, जो कोविड-19 के साथ अनुकूलन स्थापित करने और इसके संक्रमण का प्रसार रोकने के प्रयासों को मजबूती प्रदान कर सकती है।

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किसी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के निर्माण में पैटर्निंग शामिल होती है, जो इसकी लागत को काफी बढ़ा देती है। किफायती समाधान के लिए एक अपरंपरागत और कम लागत वाली पैटर्निंग तकनीक का विकास जरूरी है। इस अध्ययन में इस जरूरत को पूरा करने पर जोर दिया गया है। इस परियोजना पर काम कर रहे वैज्ञानिक डॉ. आशुतोष के. सिंह ने बताया कि “हमने एक टच-सेंसर बनाया है, जो डिवाइस से 09 सेंटीमीटर की दूरी से किसी समीपस्थ अथवा आसपास मंडराने वाली चीजों के स्पर्श को महसूस कर सकता है।’’

इस परियोजना में धातु जाल के लिए एक विशिष्ट, सरल और बड़े पैमाने पर पैटर्निंग तकनीक स्थापित की गई है। इसमें स्प्रे कोटिंग, इंकजेट प्रिंटिंग पॉलीविनाइल अल्कोहल (पीवीए) समाधान द्वारा एक पारदर्शी सब्सट्रेट पर क्रैकल टेम्पलेट का गठन शामिल है, जिसके बाद सुखाने, धातु का जमाव और टेम्पलेट लिफ्ट-ऑफ होता है। एक बड़े इलेक्ट्रॉड क्षेत्र (30×30 वर्ग सेंटीमीटर) पर करीब 300 माइक्रोमीटर के अंतर के साथ एक इंटरडिजिटेटेड इलेक्ट्रॉड (IDE) का निर्माण इस प्रक्रिया से किया गया है।

शोधकर्ताओं ने पैटर्निंग तकनीक से एक ऐसी लचीली पॉली एथिलीन टेरेफ्थेलेट (पीईटी) सब्सट्रेट पर इंटरडिजिटेटेड इलेक्ट्रॉड (IDE) विकसित की है, जो करीब 09 सेंटीमीटर सामीप्य और स्पर्श संवेदन (Touch Sensing) क्षमता के साथ पारदर्शी बहु-क्रियाशील कैपेसिटिव सेंसर अनुप्रयोगों में उपयोगी हो सकती है। 

पैटर्न वाले पारदर्शी इलेक्ट्रॉड को उन्नत स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों; जैसे- टचलेस स्क्रीन तथा सेंसर में उपयोग किया जा सकता है। इस सेंसर का उपयोग सेल्फ-सर्विस कियोस्क, एटीएम और वेंडिंग मशीनों जैसे उपकरणों में किया जा सकता है, जहाँ टचस्क्रीन को छूने से संक्रमण फैलने की आशंका होती है।

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जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र (JNCASR) के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रोफेसर जी.यू. कुलकर्णी के नेतृत्व में यह अध्ययन किया गया है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के बेंगलूरू स्थित दो स्वायत्त संस्थानों- नैनो एवं मृदु पदार्थ विज्ञान केंद्र (CeNS), और जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र (JNCASR) के वैज्ञानिकों ने एक अर्ध-स्वचालित उत्पादन संयंत्र स्थापित किया है, जो किफायती प्रिंटिंग एडेड पैटर्न (लगभग 300 माइक्रोन रिजॉल्यूशन) पारदर्शी इलेक्ट्रॉड का उत्पादन करने में सक्षम है। 

इस अध्ययन में शामिल एक अन्य शोधकर्ता डॉ. इंद्रजीत मंडल ने कहा, “हम दूसरे स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक अनुप्रयोगों में व्यावहारिकता का परीक्षण करने के लिए अपने पैटर्न वाले इलेक्ट्रोड का उपयोग करके कुछ और प्रोटोटाइप बना रहे हैं। पैटर्न वाले ये इलेक्ट्रोड; उद्योगों और अनुसंधान प्रयोगशालाओं को उनके अनुरोध पर सहयोगी परियोजनाओं के लिए उपलब्ध कराये जा सकते हैं।’’ 

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के अनुदान पर आधारित यह अध्ययन शोध पत्रिका ‘मैटेरियल्स लेटर्स’ में प्रकाशित किया गया है। 

(इंडिया साइंस वायर)

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