मकर संक्रांति पर जप, तप और दान करने से होता है विशेष लाभ

By शुभा दुबे | Publish Date: Jan 12 2018 11:15AM
मकर संक्रांति पर जप, तप और दान करने से होता है विशेष लाभ
Image Source: Google

मकर संक्रांति एकमात्र ऐसा पर्व है जो सौर कैलेंडर पर आधारित है जिसकी वजह से यह पर्व हर साल 14 जनवरी को मनाया जाता है। लेकिन ज्योतिषियों के अनुसार, इस बार यह पर्व 14 और 15 जनवरी को मनाया जाएगा।

भारत में मनाए जाने वाले पर्वों में मकर संक्रांति एकमात्र ऐसा पर्व है जो सौर कैलेंडर पर आधारित है जिसकी वजह से यह पर्व हर साल 14 जनवरी को मनाया जाता है। लेकिन ज्योतिषियों के अनुसार, इस बार यह पर्व 14 और 15 जनवरी को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन सूर्य अपने पुत्र शनि के घर जाते हैं जो मकर राशि के शासक थे। इस साल सूर्य का मकर राशि में प्रवेश दोपहर 1 बजकर 45 मिनट पर होगा। संक्रांति 14 तारीख की दोपहर में होने की वजह से इस साल मकर संक्रांति का त्योहर 14 जनवरी को मनाया जाएगा और इसका पुण्यकाल सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक होगा जो बहुत ही शुभ संयोग है। लेकिन 15 जनवरी को उदया तिथि के कारण भी मकर संक्रांति मनाई जाएगी।

 
पर्व की देश भर में रहती है धूम
 


मकर संक्रांति पर्व को देश भर में धूमधाम से मनाया जाता है और इस अवसर पर लाखों लोग देश भर में पवित्र नदियों में स्नान कर पूजा अर्चना करते हैं। देश के विभिन्न भागों में तो लोग इस दिन कड़ाके की ठंड के बावजूद रात के अंधेरे में ही नदियों में स्नान शुरू कर देते हैं। इस पावन अवसर पर श्रद्धालु इलाहाबाद के त्रिवेणी संगम, वाराणसी में गंगाघाट, हरियाणा में कुरुक्षेत्र, राजस्थान में पुष्कर और महाराष्ट्र के नासिक में गोदावरी नदी में स्नान करते हैं।
 
शुभ कार्य हो जाते हैं शुरू
 
देश के विभिन्न मंदिरों को इस दिन विशेष रूप से सजाया जाता है और इसी दिन से शुभ कार्यों पर लगा प्रतिबंध भी खत्म हो जाता है। इस दिन लोग पीले वस्त्र पहनकर मंदिरों में जाते हैं और पूजा अर्चना करते हैं। इस पर्व से जुड़ी लोक मान्यता यह भी है कि महाभारत काल में भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिए मकर संक्रांति का ही चयन किया था। मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी भागीरथ के पीछे−पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थीं।


 
दान का है विशेष महत्व
 


शास्त्रों के अनुसार, यह दिन सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। इसीलिए इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तर्पण आदि धार्मिक क्रियाकलापों का विशेष महत्व है। धारणा है कि इस अवसर पर दिया गया दान सौ गुना बढ़कर पुनः प्राप्त होता है। इस दिन शुद्ध घी एवं कंबल दान मोक्ष की प्राप्त करवाता है।
 
देश भर में इस पर्व के हैं अलग-अलग नाम
 
मकर संक्रांति पर्व देश के विभिन्न भागों में अलग अलग नामों से भी मनाया जाता है। मकर संक्रांति को कर्नाटक में सुग्गी कहा जाता है। इस दिन यहां लोग स्नान के बाद संक्रांति देवी की पूजा करते है जिसमें सफेद तिल चढ़ाए जाते हैं। पूजा के बाद ये तिल लोग एक दूसरे को भेंट किये जाते हैं। केरल के सबरीमाला में मकर संक्रांति के दिन मकर ज्योति प्रज्ज्वलित कर मकर विलाकू का आयोजन किया जाता है। यह 40 दिन का अनुष्ठान होता है जिसके समापन पर भगवान अयप्पा की पूजा की जाती है।
 
महाराष्ट्र में इस दिन सभी विवाहित महिलाएं कपास, तेल, नमक आदि चीजें अन्य सुहागिन महिलाओं को दान करती हैं। यहां हलवा बांटने की प्रथा भी है। लोग एक दूसरे को तिल गुड़ देते हैं। राजस्थान में मकर सकरात के दिन लोग तिल पाटी, खीर का आनंद लेते हैं और पतंग उड़ाते हैं। उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद, वाराणसी और हरिद्वार में गंगा के घाटों पर तड़के ही श्रद्धालु पहुंच कर स्नान करते हैं। इसके बाद पूजा की जाती है। उत्तराखंड में इस पर्व की खास धूम होती है। इस दिन पकवान पकाए जाते हैं और इनका कुछ हिस्सा पक्षियों के लिए रखा जाता है। उड़ीसा में मकर संक्रांति को मकर चौला और पश्चिम बंगाल में पौष संक्रांति कहा जाता है। असम में यह पर्व बीहू कहलाता है। यहां इस दिन महिलाएं और पुरुष नए कपड़े पहन कर पूजा करते हैं। गोवा में इस दिन वर्षा के लिए इंद्र देवता की पूजा की जाती है ताकि फसल अच्छी हो। तमिलनाडु में यह पर्व पोंगल कहलाता है।
 
तमिलों के थाई माह की शुरुआत
 
इस दिन से तमिलों के थाई माह की शुरुआत होती है। इस दिन तमिल सूर्य की पूजा करते हैं और उनसे अच्छी फसल के लिए आशीर्वाद मांगते हैं। यह पर्व राज्य में चार दिन मनाया जाता है। आंध्र प्रदेश में भी यह पर्व चार दिन मनाया जाता है। पहले दिन 'भोगी' दूसरे दिन 'पेड्डा पांडुगा' तीसरे दिन कनुमा और चौथे दिन मुक्कानुमा मनाया जाता है। तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में भोगी के दिन घर का पुराना और अनुपयोगी सामान निकाला जाता है और शाम को उसे जलाया जाता है।
 
अयोध्या में भी इस पर्व की खूब धूम रहती है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पवित्र सरयू में डुबकी लगाकर रामलला, हनुमानगढ़ी में हनुमानलला तथा कनक भवन में मां जानकी की पूजा अर्चना करते हैं। हरिद्वार में भी इस दौरान मेला लगता है जिसमें श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता है। इस पर्व पर तीर्थराज प्रयाग एवं गंगासागर में स्नान को महास्नान की संज्ञा दी गई है।
 
-शुभा दुबे
 

रहना है हर खबर से अपडेट तो तुरंत डाउनलोड करें प्रभासाक्षी एंड्रॉयड ऐप   



Disclaimer: The views expressed here are solely those of the author in his/her private capacity and do not necessarily reflect the opinions, beliefs and viewpoints of Prabhasakshi and do not in any way represent the views of Prabhasakshi.