ओलंपिक में कैसा रहा भारत का इतिहास ? हॉकी और निशानेबाजी में पेश की मिसाल

ओलंपिक में कैसा रहा भारत का इतिहास ? हॉकी और निशानेबाजी में पेश की मिसाल

साल 1900 में पेरिस में भारत का एक ही प्रतिनिधि था जिसने पदक हासिल किया था। इसके बाद 20 सालों तक ओलंपिक में भारत का कोई योगदान नहीं रहा लेकिन 1920 में बेल्जियम के एंटवर्प ओलंपिक के दौरान भारत ने पहली बार अपनी टीम भेजी।

नयी दिल्ली। तोक्यो ओलंपिक 2020 में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन जारी है। अभी तक के आयोजनों में भारत महज एक पदक हासिल कर पाने में कामयाब रहा लेकिन आगे और भी कई सारे पदक जीतने की उम्मीद बरकरार है। लेकिन क्या आप जानते है कि भारत को ओलंपिक खेलों में पहला पदक कब मिला था ? ऐसे में हम आपको आज ओलंपिक खेलों की सारी जानकारी दे देते हैं। 

इसे भी पढ़ें: तीरंदाजी में मेडल का सपना टूटा, अतनु दास प्री क्वार्टर फाइनल में हारकर बाहर 

भारत भले ही 1947 में गुलामी से आजाद हो पाया हो लेकिन ओलंपिक खेलों में साल 1900 में ही शानदार प्रदर्शन करते हुए 2 रजत पदक हासिल किए थे। साल 1900 में पेरिस से शुरू हुआ ओलंपिक का सफर आज टोक्यो तक पहुंच गया है।

साल 1900 में पेरिस में भारत का एक ही प्रतिनिधि था जिसने पदक हासिल किया था। इसके बाद 20 सालों तक ओलंपिक में भारत का कोई योगदान नहीं रहा लेकिन 1920 में बेल्जियम के एंटवर्प ओलंपिक के दौरान भारत ने पहली बार अपनी टीम भेजी। जिसके बाद से हर ओलंपिक में टीम भेजना का सिलसिला शुरू हो गया।

100 सालों से भारत ओलंपिक में अपनी टीम भेज रहा है। ऐसे में कुछ शानदार यादें भारत ने सजोयी हैं। हालांकि भारत ने 1928 में एम्सटर्डम ओलंपिक में अपना पहला स्वर्ण पदक हासिल किया था। उसके बाद भारत ने कभी भी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। साल 1928 के ओलंपिक में भारतीय हॉकी पुरुष टीम ने देश का सर गौरव से ऊंचा कर दिया था। उस वक्त भारत ने हॉलैंड को 3-0 से हराया था। इसके बाद 1932, 1936, 1948, 1952 और 1956 में लगातार भारतीय हॉकी टीम ने भारत को स्वर्ण पदक दिलाया।

ओलंपिक में भारतीय हॉकी पुरुष टीम ने ही भारत के सुनहरे युग की शुरुआत की थी। यह युग में हॉकी के जादूगर मेजर ध्यान चंद का युग था। उस दौरान भारत ने कई शानदार मुकाबलों में अपनी छाप छोड़ी थी। हालांकि आजाद भारत का पहला व्यक्तिगत पदक कुश्ती में आया था। 1952 के हेलसिंकी ओलंपिक में केडी जाधव ने कांस्य पदक जीता था। 

इसे भी पढ़ें: खेल मंत्री सोढ़ी का ऐलान, गोल्ड जीतने पर टीम में शामिल पंजाब के हर हॉकी खिलाड़ी को देंगे 2.25 करोड़ 

स्वतंत्रता से पहले (प्री इंडिपेंडेंस)

पेरिस ओलंपिक 1900 में भारत की तरफ से एकमात्र खिलाड़ी नॉर्मन गिलबर्ट प्रिटिहार्ड थे। जिन्होंने 200 मीटर और 200 मीटर बाधा दौड़ में कुल दो रजत पदक जीते थे। हालांकि 1920 से भारत ने ओलंपिक खेलों में अपनी टीम भेजने की शुरुआत की। एंटवर्प ओलंपिक में भारत के 5 एथलीटों ने हिस्सा लिया। जिसमें दो पहलवान भी शामिल थे। हालांकि, भारत एक भी पदक जीत पाने में कामयाब नहीं हुआ। इसके बाद 1924 के पेरिस ओलंपिक में भारत की तरफ से 13 एथलीट शामिल हुए थे। इसमें पहली बार भारत की तरफ से टेनिस खिलाड़ी का पदार्पण हुआ था। हालांकि इस ओलंपिक में भी हम कुछ खास नहीं कर पाए और हमें निराश होकर वापस लौटना पड़ा।

1928 के एम्स्टर्डम ओलंपिक से जीत का सिलसिला शुरू हुआ। भारत के 22 एथलीटों ने हिस्सा लिया लेकिन एक मात्र पदक भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने दिलाया। इसमें उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया। मेजर ध्यानचंद के नेतृत्व में टीम ने 29 गोल दागे थे।

1932 के लॉस एंजिल्स में 18 एथलीट और 1936 के बर्लिन ओलंपिक में 27 एथलीट शामिल हुए थे। लेकिन हॉकी टीम ही महज अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रही और भारत को 1932 और 1936 के ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक दिलाया।

स्वतंत्रता के बाद (पोस्ट इंडिपेंडेंस)

आजादी के बाद भारत ने हॉकी में तीन स्वर्ण पदक और पहला व्यक्तिगत पदक हासिल किया था। द्वितीय विश्व युद्ध के चलते 1940 और 1944 में ओलंपिक खेलों का आयोजन नहीं हुआ था। उसके बाद 1947 में भारत को आजादी मिली थी। ऐसे में 1948 के ओलंपिक में आजाद भारत अपने पहले ओलंपिक में हिस्सा ले रही थी। लंदन ओलंपिक में भारत ने अब तक के अपने सबसे बड़े दल को भेजा था। इस बार भारत की तरफ से 86 एथलीट शामिल हो रहे थे। 

इसे भी पढ़ें: नोवाक जोकोविच का ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने का सपना टूटा, ज्वेरेव ने दी शिकस्त 

हॉकी में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी रहा। 1952 और 1956 में भी हॉकी टीम ने अपने प्रदर्शन को दोहराया और स्वर्ण पदक हासिल किया। हालांकि 1952 भारत के लिए खास था क्योंकि इस साल भारत को पहला व्यक्तिगत पदक हासिल हुआ था। कुश्ती में केडी जाधव ने कांस्य पदक जीता था। इस साल स्वतंत्र भारत की पहली महिला एथलीट ने भी हिस्सा लिया था।

हालांकि कुछ सालों के लिए हॉकी टीम का स्वर्ण पदक थम सा गया था। 1956 के मेलबर्न ओलंपिक में भारतीय फुटबॉल टीम ने हिस्सा लिया और चौथे स्थान पर रही। 1960 के रोम ओलंपिक में हॉकी टीम के जीत का सिलसिला थम गया था और मिल्खा सिंह ने जरूर विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया था लेकिन वह चौथे स्थान पर रहे थे। जिससे भारतीय प्रशंसकों को बड़ा झटका लगा था।

रोम के बाद 1964 के टोक्यो, 1968 के मैक्सिको सिटी, 1972 के म्यूनिख ओलंपिक में भारत महज एक-एक पदक जीत हासिल कर पाया था। बीच में कई ओलंपिक ऐसे रहे जिसमें भारत एक भी पदक नहीं जीत पाया। हालांकि 1996 के अटलांटा ओलंपिक से भारत के पदक जीतने का सिलसिला एक बार फिर से शुरू हो गया।

अटलांटा ओलंपिक में टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस ने पुरुष एकल स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था। फिर साल 2000 के सिडनी ओलंपिक में भारत की भारोत्तोलक कर्णम मल्लेश्वरी ने कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया था। इसी के साथ वह पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गई थीं। साल 2004 के एथेंस ओलंपिक में राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने निशानेबाजी में भारत को पहला पदक जिताया था। उन्हें भारत का पहला व्यक्तिगत रजत पदक मिला था। 

इसे भी पढ़ें: लवलीना के ओलंपिक पदक पक्का करने के बाद विजेंदर और मैरीकॉम ने कहा- 'Welcome to the club' 

2008 में नए युग की हुई शुरुआत

ओलंपिक में लंबे समय से स्वर्ण पदक के लिए जूझ रहे भारत को एकबार फिर से उपलब्धि हासिल हुई। 2008 के बीजिंग ओलंपिक में 57 एथलीटों ने हिस्सा लिया था। इस दौरान भारत को 3 पदक हासिल हुए। जिसमें निशानेबाज अभिनव बिंद्रा का योगदान असाधारण रहा। उन्होंने 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में देश का पहला व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीता था। जबकि बॉक्सर विजेंदर सिंह और पहलवान सुशील कुमार ने कांस्य पदक हासिल किया था।

2012 के लंदन ओलंपिक में भारत ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 6 पदक हासिल किए थे। यह भारत के अबतक के एक ओलंपिक में हासिल किए गए सबसे ज्यादा पदक थे। इस दौरान साइना नेहवाल, सुशील कुमार, गगन नारंग, विजय कुमार, मैरी कॉम और योगेश्वर दत्त का योगदान सराहनीय रहा।

वहीं साल 2016 के रियो ओलंपिक में 117 एथलीटों ने हिस्सा लिया था, इसमें पीवी सिंधु और साक्षी मलिक ने पदक हासिल किया था।