मिताली राज ने कहा: जब कोई देश के लिए खेलता है तो निजी पसंद या नापसंद मायने नहीं रखती

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  मई 31, 2021   16:59
मिताली राज ने कहा: जब कोई देश के लिए खेलता है तो निजी पसंद या नापसंद मायने नहीं रखती

भारत की टेस्ट और वनडे कप्तान मिताली राज ने कहा, जब आप भारत के लिये खेलते हो तो व्यक्तिगत पसंद-नापसंद मायने नहीं रखती है।ब्रिटेन के दौरे से न्यूजीलैंड में अगले साल के शुरू में होने वाले वनडे विश्व कप के लिये टीम की तैयारियों को काफी मदद पहुंचाने की उम्मीद है।

नयी दिल्ली। भारत की टेस्ट और वनडे कप्तान मिताली राज ने रविवार को कहा कि वह और मुख्य कोच रमेश पोवार महिला टीम को आगे ले जाने के लिये कड़वे अतीत को पीछे छोड़ चुके हैं और वह मानती हैं कि जब कोई देश के लिये खेल रहा होता है तो व्यक्तिगत पसंद और नापसंद मायने नहीं रखती। मिताली और टीम की अन्य खिलाड़ी ब्रिटेन के दौरे से पहले इस समय मुंबई में पृथकवास में हैं। ब्रिटेन के दौरे से न्यूजीलैंड में अगले साल के शुरू में होने वाले वनडे विश्व कप के लिये टीम की तैयारियों को काफी मदद पहुंचाने की उम्मीद है। इस श्रृंखला में भारत को सात साल में पहला टेस्ट खेलना है जो मुख्य कोच के तौर पर पोवार का पहला दौरा होगा।

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2018 विश्व टी20 के सेमीफाइनल में भारत को मिली हार के बाद इस पूर्व भारतीय स्पिनर को बर्खास्त कर दिया गया था लेकिन फिर उनकी इस भूमिका के लिये वापसी हुई। मिताली को विवादास्पद तरीके से उस मैच से बाहर रखा गया था और दोनों के बीच रिश्तों में कड़वाहट आयी जिसमें दोनों ने एक दूसरे पर गैर पेशेवर आचरण का आरोप लगाया। उनसे जब पूछा गया कि क्या अतीत की घटना उनके वर्तमान और भविष्य में आड़े आयेगी तो उन्होंने पीटीआई से कहा, ‘‘हम हमेशा अतीत में नहीं रह सकते। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं इतने वर्षों तक खेल चुकी हूं, मेरे अंदर कोई अहंकार नहीं है और मैं अपनी व्यक्तिगत पसंद-नापसंद को ज्यादा तवज्जो नहीं देती। मैंने ऐसा कभी नहीं किया है। ’’ मिताली ने कहा, ‘‘और 21 साल इतनी सारी चुनौतियों से गुजरने के लिये काफी लंबा समय होता है। जब भारत के लिये खेलने की बात आती है तो आप अपने देश की सेवा करते हो इसलिये व्यक्तिगत मुद्दों को मैं ज्यादा तवज्जो नहीं देती। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम कड़वे नहीं हो सकते और कड़वाहट को आगे नहीं ले जा सकते। मैं कभी भी आक्रामक नहीं रही हूं और न ही मैं अतीत को वर्तमान तक ले जाती हूं। वर्ना मैं इस खेल में इतने लंबे समय तक नहीं बनी रहती जिसमें हमेशा खुद को खोजने और सुधार करने की जरूरत होती है।





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