सेरेना का सपना तोड़ सिमोना हालेप बनीं विम्बलडन चैम्पियन

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जुलाई 13, 2019   20:06
  • Like
सेरेना का सपना तोड़ सिमोना हालेप बनीं विम्बलडन चैम्पियन
Image Source: Google

सैंतीस साल की सेरेना ने अपना 23वां ग्रैंडस्लैम खिताब 2017 आस्ट्रेलियाई ओपन में जीता था और वह आस्ट्रेलिया की मारग्रेट कोर्ट के सर्वकालिक मेजर खिताब की बराबरी करने की कोशिश में जुटीं थीं।

लंदन। रोमानिया की सिमोना हालेप ने 56 मिनट तक चले विम्बलडन महिला वर्ग के फाइनल में सात बार की चैम्पियन सेरेना विलियम्स पर सीधे सेटों में सनसनीखेज जीत दर्ज करते हुए अमेरिकी स्टार के 24 ग्रैंडस्लैम खिताब के रिकार्ड की बराबरी करने के सपने को तोड़ दिया। सत्ताईस साल की हालेप ने 6-2 6-2 की आसान जीत से अपना दूसरा ग्रैंडस्लैम खिताब जीता। उन्होंने 2018 रोलां गैरां ट्राफी अपने नाम की थी। 

सैंतीस साल की सेरेना ने अपना 23वां ग्रैंडस्लैम खिताब 2017 आस्ट्रेलियाई ओपन में जीता था और वह आस्ट्रेलिया की मारग्रेट कोर्ट के सर्वकालिक मेजर खिताब की बराबरी करने की कोशिश में जुटीं थीं। मैच के दौरान सेरेन ने 26 सहज गलतियां की जिसका उन्हें खामियाजा भुगतना पड़ा जबकि हालेप ने केवल दो ही गलतियां कीं। वह तीसरी बार ग्रैंडस्लैम के फाइनल में पहुंची लेकिन रिकार्ड की बराबरी करने से चूक गयीं। वह पिछले साल विम्बलडन के फाइनल में एंजेलिक कर्बर से और अमेरिकी ओपन के फाइनल में नाओमी ओसाका से हार गयी थीं।

इसे भी पढ़ें: अमेरिका की सीनियर राष्ट्रीय टीम को अंतरिम आधार पर कोचिंग देंगे किरण मोरे

हालेप ने पहला और दूसरा सेट आसानी से 6-2 से अपने नाम किया। हालेप ने सात बार की चैम्पियन सेरेना के खिलाफ शुरू से ही दबदबा बनाया। उसने सेरेना के पहले दो सर्विस गेम ब्रेक करके 4-0 की बढ़त हासिल कर ली। इस समय तक हालेप ने छह विनर जमा लिये थे और एक भी सहज गलती नहीं की थी जबकि सेरेना एक भी विनर नहीं जमा सकी और नौ सहज गलतियां कर बैठीं। दूसरे सेट में भी यही हाल रहा जिससे हालेप को अपनी पहली विम्बलडन ट्राफी हासिल करने में ज्यादा पसीना नहीं बहाना पड़ा। 







कोरोना महामारी का असर, बीजिंग ओलंपिक 2022 के स्थलों पर स्की प्रतियोगितायें रद्द

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  दिसंबर 4, 2020   18:26
  • Like
कोरोना महामारी का असर, बीजिंग ओलंपिक 2022 के स्थलों पर स्की प्रतियोगितायें रद्द
Image Source: Google

बीजिंग ओलंपिक 2022 के स्थलों पर स्की प्रतियोगितायें रद्द हो गया।महासंघ ने कहा, ‘‘आगामी महीनों में यात्रा की परिस्थितियों के पेचीदा बने रहने की संभावना है। ’’ रद्द टूर्नामेंट में फ्रीस्टाइल स्कींग विश्व चैम्पियनशिप, स्कींग विश्व कप रेस, क्रास कंट्री स्कींग, स्की जम्पिंग और मिश्रित नोर्डिक शामिल हैं।

ओबरहोफेन (स्विट्जरलैंड)। अंतरराष्ट्रीय स्की महासंघ ने शुक्रवार को चीन में कई प्रतियोगितायें रद्द कर दी जो 2022 बीजिंग ओलंपिक के लिये स्थल परीक्षण के लिये आयोजित होनी थी जिसमें अगले साल की स्नोबोर्डिंग विश्व चैम्पियनशिप भी शामिल है।

इसे भी पढ़ें: किसानों के समर्थन में आए पूर्व मुक्केबाजी कोच जीएस संधू, द्रोणाचार्य पुरस्कार लौटाने की पेशकश की

अंतरराष्ट्रीय स्की महासंघ ने कोरोना वायरस महामारी के बीच यात्रा पाबंदियों का हवाला दिया जिसमें चीन में सभी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के लिये 14 दिन का अनिवार्य पृथकवास शामिल है। महासंघ ने कहा, ‘‘आगामी महीनों में यात्रा की परिस्थितियों के पेचीदा बने रहने की संभावना है। ’’ रद्द टूर्नामेंट में फ्रीस्टाइल स्कींग विश्व चैम्पियनशिप, स्कींग विश्व कप रेस, क्रास कंट्री स्कींग, स्की जम्पिंग और मिश्रित नोर्डिक शामिल हैं।







किसानों के समर्थन में आए पूर्व मुक्केबाजी कोच जीएस संधू, द्रोणाचार्य पुरस्कार लौटाने की पेशकश की

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  दिसंबर 4, 2020   16:44
  • Like
किसानों के समर्थन में आए पूर्व मुक्केबाजी कोच जीएस संधू, द्रोणाचार्य पुरस्कार लौटाने की पेशकश की
Image Source: Google

पूर्व मुक्केबाजी कोच जीएस संधू ने प्रदर्शनरत किसानों के समर्थन में द्रोणाचार्य लौटाने की पेशकश की है। संधू ने पटियाला में अपने घर से कहा, ‘‘मैं किसानों के परिवार से आया हूं, उनके डर को संबोधित किया जाना चाहिए। अगर चल रही बातचीत से किसानों के लिये संतोषजनक नतीजा नहीं निकलता तो मैं पुरस्कार लौटा दूंगा। ’’

नयी दिल्ली। पूर्व राष्ट्रीय मुक्केबाजी कोच गुरबक्श सिंह संधू ने शुक्रवार को कहा कि अगर नये कृषि नियमों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों की मांगों को पूरा नहीं किया गया तो वह अपना द्रोणाचार्य पुरस्कार लौटा देंगे। संधू के कार्यकाल में ही भारत ने मुक्केबाजी का पहला ओलंपिक पदक हासिल किया था। वह दो दशक तक भारत के राष्ट्रीय पुरूष कोच रहे ,जिसके बाद वह दो वर्षों से महिला मुक्केबाजों को कोचिंग दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह किसानों का समर्थन करने का उनका तरीका है जो इतनी ठंड में खुद की परवाह किये बिना आंदोलन कर रहे हैं। संधू ने पटियाला में अपने घर से कहा, ‘‘मैं किसानों के परिवार से आया हूं, उनके डर को संबोधित किया जाना चाहिए। अगर चल रही बातचीत से किसानों के लिये संतोषजनक नतीजा नहीं निकलता तो मैं पुरस्कार लौटा दूंगा। ’’

इसे भी पढ़ें: खेल मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा-

विजेंदर सिंह जब 2008 में ओलंपिक पदक जीतने वहले भारतीय मुक्केबाज बने थे, तब संधू राष्ट्रीय कोच थे और उनकी कोचिंग के दौरान ही आठ भारतीय मुक्केबाजों ने लंदन 2012 ओलंपिक के लिये क्वालीफाई किया था। संधू को इससे पहले ही 1998 में द्रोणाचार्य पुरस्कार से नवाजा गया था। उन्होंने कहा, ‘‘यह पुरस्कार मेरे लिये काफी मायने रखता है लेकिन साथी किसानों का दुख इससे भी ज्यादा अहमियत रखता है। इस सर्दी में उन्हें सड़कों पर बैठे हुए देखना मेरे लिये बहुत कष्टकारी है। सरकार को उनसे बातचीत करने की जरूरत है और उनके संदेहों को दूर करके उन्हें आश्वस्त करने की जरूरत है। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘अगर इसका संतोषजनक हल निकलता है तो मैं ऐसा नहीं करूंगा लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है तो मैं पुरस्कार लौटा दूंगा। ’’ कई पूर्व खिलाड़ियों ने भी आंदोलन कर रहे किसानों का समर्थन किया है जिसमें पद्म श्री और अर्जुन पुरस्कृत पहलवान करतार सिंह, अर्जुन पुरस्कृत बास्केटबॉल खिलाड़ी साजन सिंह चीमा और अर्जुन पुरस्कार प्राप्त हॉकी खिलाड़ी राजबीर कौर शामिल हैं।







खेल मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा- "भारत को प्रेरित करते हैं पैरा एथलीट"

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  दिसंबर 4, 2020   11:16
  • Like
खेल मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा-
Image Source: Google

खेल मंत्री ने कहा, ‘‘हमारे पैरा एथलीट और ‘दिव्यांग’ योद्धा हमारी ताकत हैं। वे हमें प्रेरणा देते हैं। हमारे खेल मंत्रालय में सक्षम और दिव्यांग खिलाड़ियों के बीच कोई अंतर नहीं है। ’’ उन्होंने बयान में कहा, ‘‘हम उन्हें उन्हें एक समान तरीके से सम्मानित करते हैं, पुरस्कार राशि देते हैं और अन्य चीजें भी समान हैं।

नयी दिल्ली। खेल मंत्री किरेन रीजीजू ने गुरूवार को कहा कि दिव्यांग एथलीट देश की ताकत और प्रेरणा हैं और सरकार उन्हें सक्षम खिलाड़ियों के बराबर ही अहमियत देती है। रीजीजू ने भारतीय पैरालंपिक समिति (पीसीआई) की अध्यक्ष दीपा मलिक और शीर्ष एथलीट जैसे देवेंद्र झाझरिया, पारूल परमार और शताब्दी अवस्थी की मौजूदगी में 29वें विश्व विकलांगता दिवस के मौके पर आयोजित वर्चुअल सत्र के दौरान यह बयान दिया। खेल मंत्री ने कहा, ‘‘हमारे पैरा एथलीट और ‘दिव्यांग’ योद्धा हमारी ताकत हैं। वे हमें प्रेरणा देते हैं। हमारे खेल मंत्रालय में सक्षम और दिव्यांग खिलाड़ियों के बीच कोई अंतर नहीं है। ’’ उन्होंने बयान में कहा, ‘‘हम उन्हें उन्हें एक समान तरीके से सम्मानित करते हैं, पुरस्कार राशि देते हैं और अन्य चीजें भी समान हैं। ’’

इसे भी पढ़ें: 1960 के रोम ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले राफेर जॉनसन का 86 वर्ष की उम्र में निधन

रीजीजू ने यह भी कहा कि वे संबंधित राज्य सरकारों से अनुरोध करेंगे कि अपने संबंधित क्षेत्र में पैरालंपियनों का बेहतरीन तरीके से सहयोग करें। उन्होंने कहा, ‘‘सरकार, पीसीआई और सभी एक टीम की तरह हैं, हमें अपने पैरा एथलीटों को समर्थन के काम को करते रहना होगा। ’’ पद्म श्री, खेल रत्न और अर्जुन पुरस्कार प्राप्त कर चुके देवेंद्र झाझरिया ने सरकार का धन्यवाद करते हुए कहा, ‘‘जब भी हम सरकार को अपनी समस्याओं को बताते हुए या फिर हमें जिस चीज की जरूरत होती है, उसके बारे में मेल करते हैं तो हमें एक घंटे के अंदर जवाब मिल जाता है।