बचपन का संघर्ष, भारतीय सेना में एंट्री, सियाचिन में पोस्टिंग, कुछ ऐसी है भारत के स्टीपलचेज चैंपियन अविनाश साबले की कहानी

Avinash Sable
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अभिनय आकाश । Aug 06, 2022 6:50PM
भारत के अविनाश साबले ने शुक्रवार को बर्मिंघम में राष्ट्रमंडल खेलों में पुरुषों की 3000 मीटर स्टीपलचेज में देश के लिए रजत पदक जीता। सेबल ने 8:11.20 के समय के साथ दूसरे स्थान पर रहे जो उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ होने के साथ साथ राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी है।

एथलेटिक्स से जुड़ने से पहले सियाचिन में तैनात रहे साबले ने हाल के समय में कई बार राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा। उन्होंने अपना निजी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पिछले महीने रबात में प्रतिष्ठित डाइमंड लीग में पांचवें स्थान पर रहने के दौरान किया। अविनाश साबले भी कुछ कम नहीं हैं। महाराष्ट्र के बीड जिले के मराठवाड़ा क्षेत्र के 27 वर्षीय साबले ने राष्ट्रमंडल खेल 2022 में भारत के लिए इतिहास रच दिया। अविनाश साबले स्टीपलचेज़ में भारत के लिए पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने। एथलेटिक्स से जुड़ने से पहले सियाचिन में तैनात रहे साबले ने हाल के समय में कई बार राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा। उन्होंने अपना निजी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पिछले महीने रबात में प्रतिष्ठित डाइमंड लीग में पांचवें स्थान पर रहने के दौरान किया।

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भारत के अविनाश साबले ने बर्मिंघम में राष्ट्रमंडल खेलों में पुरुषों की 3000 मीटर स्टीपलचेज में देश के लिए रजत पदक जीता। सेबल ने 8:11.20 के समय के साथ दूसरे स्थान पर रहे जो उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ होने के साथ साथ राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी है। अविनाश की उपलब्धि कितनी बड़ी है इसे समझने के लिए आपका ये जानना जरूरी है कि 1994 के बाद यह पहली बार है कि किसी गैर-केन्याई धावक ने इस आयोजन में पदक जीता है। केन्या ने राष्ट्रमंडल खेलों के पिछले 6 संस्करणों में से प्रत्येक में पोडियम पर कब्जा किया है।

विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप 

भारत के अविनाश साबले विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप पुरुष 3000 मीटर स्टीपलचेज स्पर्धा के फाइनल में 11वें स्थान पर रहे थे। इस 27 वर्षीय भारतीय धावक ने आठ मिनट 31.75 सेकेंड का समय लिया था। ये उनका निजी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी है। यहां हालांकि विश्व चैंपियनशिप के इतिहास का सबसे धीमा 3000 मीटर स्टीपलचेज फाइनल रहा जिसमें तीनों पदक विजेताओं ने अपने सत्र और निजी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से काफी अधिक समय लिया। धावकों ने पदक को ध्यान में रखते हुए रणनीति के साथ फाइनल में हिस्सा लिया। 

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 स्कूल के लिए 6 किमी दौड़

अविनाश साबले का जीवन महाराष्ट्र में मामूली संसाधनों के साथ बीता। साबले के माता-पिता मुकुंद और वैशाली के पास जमीन का एक छोटा सा टुकड़ा था। वे ईंट भट्टों में दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करते थे। आठ साल की उम्र से ही साबले को अपने स्कूल जाने के लिए हर दिन 6 किमी से अधिक पैदल चलना पड़ता था। सेबल अपने माता-पिता के साथ अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए ईंट भट्ठे पर काम करने लगे। साबले की प्रतिभा को एक स्कूली शिक्षक ने देखा लेकिन महाराष्ट्र का यह युवा लड़का कुछ स्कूल मीट का हिस्सा होने के बावजूद दौड़ने और चलने पर ज्यादा ध्यान नहीं दे सका। हालाँकि, जब उन्होंने खुद को एक स्थानीय कॉलेज में नामांकित किया और हर दिन घर से कॉलेज तक 8 किमी दौड़ लगाई, तो उनकी प्रतिभा को एक बार पहचाना जाने लगा।  इस बार, कॉलेज में साबले के शिक्षक ने उन्हें एक्सपोजर हासिल करने में मदद की और उन्हें कॉलेज स्तर की रनिंग मीट में ले गए।

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सेना से स्टीपलचेज 

अविनाश साबले 12वीं कक्षा पास करने के बाद भारतीय सेना में भर्ती हुए और 5 महार रेजिमेंट का हिस्सा थे। वह सियाचिन, राजस्थान और सिक्किम में तैनात रहे। भारतीय सेना में साबले ने क्रॉस कंट्री चैंपियनशिप से शुरुआत की। हालांकि, उनके कोच और मेंटर अमरीश कुमार ने उनके समर्पण और कभी न हारने वाले रवैये को देखकर युवक के लिए स्टीपलचेज वर्ग में दौड़ने की राय दी। महाराष्ट्र का धावक जल्द ही राष्ट्रीय स्तर पर स्टीपलचेज स्पर्धाओं में अपनी पहचान बनाने लगा। स्टीपलचेज़ पर ध्यान केंद्रित करने के एक साल के भीतर साबले ने 2018 में 37 साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ दिया।

भारत के लिए नई ऊंचाइयों को छूना शुरू किया

2019 में उन्होंने फिर से राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा और समय ने उन्हें दोहा में विश्व चैंपियनशिप में पदार्पण करने की अनुमति दी। जिससे वह 1991 में दीना राम के बाद विश्व चैंपियनशिप में दौड़ने वाले पहले भारतीय पुरुष स्टीपलचेज बन गए। उसी वर्ष साबले ने दोहा में एशियाई चैंपियनशिप में भी रजत पदक जीता। साबले 2021 में टोक्यो ओलंपिक क्वालीफाई किया। 1952 में खेलों में देश का प्रतिनिधित्व करने वाले भारत के गुलजारा सिंह मान के बाद पहले व्यक्ति बने। 

पीएम मोदी ने इस अंदाज में दी बधाई

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में पैदल चाल और स्टीपलचेस में पदक जीतने वाले एथलीट प्रियंका गोस्वामी और अविनाश साबले को बधाई दी है। उन्होंने साबले के लिये लिखा ,‘‘ अविनाश साबले को स्टीपलचेस में रजत पदक जीतने पर बधाई। आप लगातार अपने प्रदर्शन का स्तर ऊपर ले जा रहे हैं जो आपकी सफलता का प्रेरक पहलू है। भविष्य के लिये शुभकामनायें।’’ प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया अविनाश साबले बेहतरीन युवा प्रतिभा है। मुझे खुशी है कि उन्होंने 3000 मीटर स्टीपलचेस में रजत पदक जीता।’’ 

 

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