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उत्तर भारत की सैर

बनारस के इन मशहूर खानों के बारे में जानेंगे तो मुँह में पानी आ जायेगा

By रेनू तिवारी | Publish Date: May 10 2018 6:00PM

बनारस के इन मशहूर खानों के बारे में जानेंगे तो मुँह में पानी आ जायेगा
Image Source: Google

बनारस दुनिया के सबसे प्राचीनतम शहरों में से एक है यहां के प्राचीन मंदिरों और घाटों पर घूमने देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर से लोग आते हैं। वाराणसी को शिव की भूमि भी कहा जाता है। मान्यता है कि यह शहर पृथ्वी के स्तर से ऊपर है क्योंकि इस पर पूर्ण रूप से भोले नाथ की कृपा है। वैसे तो बनारस अपने घाटों, गंगा आरती और मंदिरों के लिए मशहूर है लेकिन बनारसी खाने का भी जवाब नहीं। आज हम आपको वाराणसी में मिलने वाले कुछ खास व्यंजनों का स्वाद चखवाएंगे-

बनारस की मशहूर कुल्हड़ वाली चाट
 वाराणसी में लक्सा रोड़ पर बनारस की सबसे मशहूर चाट की दुकान है दीना चाट भंडार। जिसे अब दुकान के मालिक की तीसरी पीढ़ी चला रही है। यहां की टमाटर चाट को दुनिया भर से लोग खाने आते हैं ये बहुत ही स्वादिष्ट है और इसे मिट्टी के कुल्हड़ में परोस कर दिया जाता है जिससे चाट का स्वाद और बढ़ जाता है।
 
भोलेनाथ की धुन में बनी ब्लू लस्सी 
काशी के मणिकर्णिका घाट पर स्थित है बनारसी लस्सी की मशहूर दुकान ब्लू लस्सी। यहां हर वक्त देशी विदेशी पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है। भोलेनाथ की धुन में बनाई जाने वाली ब्लू लस्सी बनारस की खास पहचान है यहां हर फ्लेवर की लस्सी मिलती है अनार, सेब, चॉकलेट आदि।
 
काशी की सुबह का नाश्ता, पूरी सब्जी और जलेबी
 जब दुनिया अपने घरों पर बेड टी का इंतजार कर रही होती है तो सयाने बनारसी सुबह 6 बजे ही गर्मा गरम पूरी सब्जी और जलेबी का नाश्ता करके फिट हो जाते हैं। 
 
खोया और लौंग का स्वाद वाली लौंगलता
लौंगलता ये बनारस की ऐसी डिश है, जिसका स्वाद हर बनारसी जानता है और ये लगभग हर दुकान पर मिलती है। मैदे को गूंथकर उसे रोटी की तरह बेल लेते हैं। फिर इसमें खोया और लौंग डालकर फोल्ड करके घी में डीप फ्राई करते हैं। एक बार जो लौंगलता खा लेता है, वो इसका दीवाना हो जाता है।
 
ओस की बूंद से बनी ‘बनारसी मलइयो'
 जहाँ बाकी की बनारसी मिठाइयां समय के साथ-साथ भारत में दूसरी जगह भी बनने लगी हैं वहीं बनारसी मलइयो एक मात्र ऐसी मिठाई है जिस पर आज भी बनारस का एकाधिकार है। इस मिठाई की सबसे बड़ी विशेषता यह है की इसको बनाने में ओस की बूंदों का इस्तेमाल होता है। अब चूंकि ओस की बूंदों को इस्तेमाल होता है इसलिए बनारसी मलइयो केवल भरी सर्दी के तीन महीने ही बनाई जाती है।
 
-रेनू तिवारी

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