रानीखेत में हर जगह बिखरा पड़ा है प्रकृति का अनुपम सौंदर्य

By प्रीटी | Publish Date: Apr 30 2018 5:08PM
रानीखेत में हर जगह बिखरा पड़ा है प्रकृति का अनुपम सौंदर्य
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रानीखेत को पहाड़ों की रानी भी कहा जाता है। प्रकृति का अनुपम सौंदर्य रानीखेत के कण−कण में बिखरा पड़ा है। यहां पर दूर−दूर तक फैली घाटियां, घने जंगल तथा फूलों से ढंके रास्ते व ठंडी मस्त हवा पर्यटकों का मन बरबस ही मोह लेती है।

रानीखेत को पहाड़ों की रानी भी कहा जाता है। प्रकृति का अनुपम सौंदर्य रानीखेत के कण−कण में बिखरा पड़ा है। यहां पर दूर−दूर तक फैली घाटियां, घने जंगल तथा फूलों से ढंके रास्ते व ठंडी मस्त हवा पर्यटकों का मन बरबस ही मोह लेती है। रानीखेत की खास बात यह है कि यहां पर लोगों का कोलाहल व भीड़भाड़ बहुत कम है। यकीन जानिए यहां पहुंचने के बाद पर्यटक स्वयं को प्रकृति के निकट पाता है।

अंग्रेजों के शासन के दौरान अंग्रेजी फौज की छावनी रहे इस क्षेत्र में कुंमाऊं रेजीमेंट का मुख्यालय भी है। छावनी क्षेत्र होने के कारण एक तो यहां वैसे ही साफ−सफाई रहती है दूसरे यहां पर प्रदूषण की मात्रा भी अन्य जगहों की अपेक्षा बहुत कम है। चलिए सबसे पहले आपको लिए चलते हैं चौबटिया। चौबटिया में बहुत ही सुंदर बाग-बगीचे हैं। यहां पर स्थित सरकारी उद्यान व फल अनुसंधान केंद्र भी देखने योग्य हैं। यहां पर पास में ही एक जल प्रपात है, जिसके ऊंचाई से गिरते संगमरमर जैसे पानी का दृश्य आपका मन मोह लेगा।
 
द्वाराहाट रानीखेत से लगभग 32 किमी की दूरी पर स्थित है। द्वाराहाट पुरातात्विक दृष्टि से भी अपना महत्वपूर्ण स्थान रखता है। कभी कत्यूरी वंश के शासकों की राजधानी रहे इस स्थल पर पूरे 65 मंदिर हैं जोकि तत्कालीन कला के बेजोड़ नमूने के रूप में विख्यात हैं। बदरीकेदार मंदिर, गूजरदेव का कलात्मक मंदिर, पाषाण मंदिर और बावड़ियां पर्यटकों को अपने अतीत की गाथा सुनाते हुए लगते हैं। यहां स्थित मंदिरों में से विमांडेश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर एवं कुबेर की विशालकाय मूर्ति देखना न भूलें।
 


रानीखेत से 6 किमी की दूरी पर स्थित है उपत एवं कालिका। यहां पर गोल्फ का विशाल मैदान है। हरी−हरी घास से भरे इस मैदान में गोल्फ खेलने का आनंद ही कुछ और है। कालिका में कालीदेवी का प्रसिद्ध मंदिर भी है। अब आप दूनागिरी जा सकते हैं। द्वाराहाट से लगभग 14 किमी की दूरी पर स्थित दूनागिरी से आप हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियों के मनोहारी दर्शन कर सकते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यहां पर 1181 के शिलालेख भी पाए गए हैं। दूनागिरी में चोटी पर दुर्गा जी सहित अन्य कई मंदिर भी हैं जहां पर आसपास के लोग बड़ी संख्या में आते हैं। इस स्थान को पर्यटन के लिहाज से सर्वश्रेष्ठ भी कहा जा सकता है।
 
शीतलाखेत को आप पर्यटक गांव भी कह सकते हैं। यहां तक आने के लिए आप रानीखेत व अल्मोड़ा से सीधी बस सेवा का भी लाभ उठा सकते हैं। ऊंचाई पर शांत व खूबसूरत नजारों से भरे दृश्य पर्यटकों को भा जाते हैं। ट्रैकिंग की दृष्टि से भी यह अच्छा स्थल है। आप चिलियानौला भी घूमने जा सकते हैं। यहां पर हेड़ाखान बाबा का भव्य मंदिर है। कहते हैं कि इस आधुनिक मंदिर में देवी−देवताओं की कलात्मक मूर्तियां देखने लायक हैं। द्योलीखेत का मैदान तीन ओर से पर्वतों से घिरा हुआ है। इसके एक ओर देवदार तथा चीड़ के वृक्ष इस स्थल की सुंदरता में चार चांद लगा देते हैं।
 
खड़ी बाजार रानीखेत का मुख्य बाजार है। एक ओर से उठे होने के कारण ही शायद इसका नाम खड़ी बाजार पड़ा। इस बाजार के दोनों ओर दुकानें हैं जहां से आप रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने वाले सामानों के साथ ही स्थानीय काष्ठकला की वस्तुएं भी खरीद सकते हैं। ट्रैकिंग में दिलचस्पी रखने वाले पर्यटकों के लिए रानीखेत के आसपास कई ऐसे स्थान हैं जहां पर ट्रैकिंग करके आप अपनी यात्रा को रोमांचक बनाने के साथ ही यादगार भी बना सकते हैं।
 


आसपास के दर्शनीय स्थानों की सैर पर जाने के लिए आपको यहां से निर्धारित दरों पर टैक्सी मिल सकती हैं। यदि आप भारवाहकों की सेवा लेना चाहें तो दाम पहले ही तय कर लें। अप्रैल व जून तथा सितंबर से नवंबर के बीच आप जब भी चाहें, रानीखेत घूमने जा सकते हैं क्योंकि यह माह यहां की सैर के लिए सर्वाधिक उपयुक्त समय है। हां, रानीखेत आप जब भी जाएं, ऊनी कपड़े साथ रखना न भूलें।
 
-प्रीटी

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