जकार्ता शहर में बच्चों के लिए बनी है यह अनूठी लाइब्रेरी

By सुषमा तिवारी | Publish Date: May 7 2019 6:01PM
जकार्ता शहर में बच्चों के लिए बनी है यह अनूठी लाइब्रेरी
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बच्चों इस लाइब्रेरी में बड़ी मात्रा में आते हैं। स्कूल की छुट्टी होने के बाद रोजाना 70 से अधिक बच्चे यहां किताबें पढ़ने के लिए आते हैं। इस लाइब्रेरी में टीचर्स भी हैं जो बच्चों को काफी मदद करती हैं पढ़ाई में… यहां की टीचर्स बच्चों का होमवर्क भी करवाती हैं और कहानियां भी सुनाती हैं।

इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता एक खूबसूरत और काफी हैपनिंग जगह है। राजधानी होने के कारण जकार्ता पर राजनीतिक जिम्मेदारियां भी हैं, साथ ही यहां कई सारे अंतरराष्ट्रीय संगठनों के मुख्यालय भी हैं। इस लिए ये शहर हर मायने में खास है और यहां की सड़कों पर गाड़ियों की रफ्तार हमेशा बनी रहती हैं। जकार्ता शहर से बाहर निकलते ही फ्लाईओवर के नीचे दो सड़कें साथ निकलती ही इन्हीं सड़कों के बीच एक खाली जगह है जिसमें छोटे बच्चों के लिए लाइब्रेरी बनाई गई हैं। आपको बता दें कि ये लाइब्रेरी और लाइब्रेरी से बिलकुल अलग है क्योंकि यहां पर शांत रहकर पढ़ाई करने का कोई रिवाज नहीं है। यहां पर बच्चे अपनी शोरगुल के साथ पढ़ाई कर सकते हैं। क्योंकि लाइब्रेरी में लगातार बाहर के ट्रैफिक की आवाज आती हैं।  


सड़क के ट्रैफिक जाम के शोर शराबों के बीच ये लाइब्रेरी दुनिया में मशहूर है। गूगल पर ये 'तमान बाका मासयाराकट कोलांग' नाम से यह लाइब्रेरी हिट हो चुकी है। हर देश में लोग अपना ज्यादा से ज्यादा वक्त फोन पर बिताने लगे हैं ऐसे में सार्वजनिक पुस्तकालयों की संख्या में कमी आई हैं। अब सरकार भा लाइब्रेरियां बनाने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं लेती ऐसे में जकार्ता की सड़कों के बीच में बना ये पुस्तकालय काफी खास है। 
'तमान बाका मासयाराकट कोलांग' लाइब्रेरी को देखने के लिए जकार्ता के बड़ी मात्रा में पर्यटक आते हैं। क्योंकि ये जगह काफी खूबसूरत तरीके से बनाई गई है और यहां पर किताबें पढ़ने का मजा ही कुछ और हैं। लेकिन हम आपको बताना चाहेंगे की  कई साल पहले जाकार्ता के इस फ्लाईओवर के नीचे गंदगी के ढेर लगे रहते थे और यह जगह चारों उचक्कों का बड़ा ठिकाना हुआ करती थी। लेकिन कुछ स्थानीय संगठनों ने इस फ्लाईओवर के नीचे सफाई करके इसका कायाकल्प कर दिया। कलाकारों मे दीवारों पर सुदंर पेटिंग्स बनाई है, यहां घास जैसी हरे रंग की मैट बिछाई गई, गमलों में पौधे लगाए गए और कई दर्ज पुस्तकों के साथ एक पुस्तकालय में इस बदल दिया गया। 


बच्चों इस लाइब्रेरी में बड़ी मात्रा में आते हैं। स्कूल की छुट्टी होने के बाद रोजाना 70 से अधिक बच्चे यहां किताबें पढ़ने के लिए आते हैं। इस लाइब्रेरी में टीचर्स भी हैं जो बच्चों को काफी मदद करती हैं पढ़ाई में… यहां की टीचर्स बच्चों का होमवर्क भी करवाती हैं और कहानियां भी सुनाती हैं। यहां बच्चे नाच-गाने का भी आनंद उठाते हैं। 11 साल की स्टूडेंट एमिलिया क्लारा बताती हैं कि उसे यहां आकर दोस्तों के साथ कहानियां पढ़ना पसंद है, खासकर कहानियों वाली किताबें। इलाके के पास रहने वाले अभिभावकों का भी अब मानना है कि नई चीजें सीखने से लेकर खेलने के लिए भी उनके बच्चों के लिए यह एक शानदार जगह है।
 
- सुषमा तिवारी

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