Lockdown के 34वें दिन तक 886 मरे, PM ने CMs के साथ Exit Plan पर की चर्चा

Lockdown के 34वें दिन तक 886 मरे, PM ने CMs के साथ Exit Plan पर की चर्चा

कोरोना वायरस के संक्रमण का पता लगाने के लिये चीन से आयात की गयी त्वरित एंटीबॉडी जांच किट को लेकर सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कांग्रेस ने मांग की कि इस ‘मुनाफाखोरी और कालाबाजारी’ की तत्काल जांच कराकर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को ‘दो गज दूरी’ का मंत्र दोहराते हुए सामाजिक अंतराल बनाकर रखने पर जोर दिया और कहा कि आने वाले दिनों में मास्क और चेहरे ढकने वाले गमछे हमारे जीवन का हिस्सा बन जाएंगे। अनेक राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बातचीत में मोदी ने इस बारे में भी आगाह किया कि इस घातक वायरस का खतरा जल्द खत्म नहीं होने वाला और सतत निगरानी की अत्यंत आवश्यकता है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार मोदी ने कहा कि आने वाले दिनों में मास्क और गमछे हमारे जीवन का हिस्सा बन जाएंगे। प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्रियों से आग्रह किया कि आगे की रणनीतियों को आकार देते समय मौसम में परिवर्तन-गर्मियों तथा मानसून के आने तथा इस मौसम में संभावित बीमारियों को ध्यान में रखा जाए। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शुक्रवार को ग्राम पंचायतों को संबोधित करते हुए मोदी ने सामाजिक दूरी को ‘दो गज दूरी’ के सामान्य शब्दों में परिभाषित करने के लिए ग्रामीण भारत की सराहना की थी। उन्होंने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी इन शब्दों का इस्तेमाल किया था।

कोविड-19 के संक्रमितों की संख्या 28,380 हुई

देश में कोविड-19 से मरने वालों की संख्या सोमवार को 886 हो गई और संक्रमितों की संख्या बढ़ कर 28,380 पर पहुंच गई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, पिछले 24 घंटों के दौरान देश में कोरोना वायरस के संक्रमण से अब तक सर्वाधिक, 60 लोगों मौत हुयी है। जबकि इस अवधि में संक्रमण के 1463 नये मामले सामने आये हैं। मंत्रालय के अनुसार 21,132 लोग अब भी संक्रमण की चपेट में हैं और इनका विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। कुल 6,184 मरीजों को इलाज के बाद स्वस्थ होने पर अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है। स्वस्थ हुये मरीजों का प्रतिशत 22.41 पर पहुंच गया है। इनमें एक व्यक्ति स्वस्थ होने के बाद विदेश चला गया है। संक्रमित हुये लोगों में 111 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। रविवार की शाम से कुल 60 लोगों की मौत हुई है जिनमें से 19 की मौत महाराष्ट्र में, 18 गुजरात में, आठ राजस्थान, सात मध्य प्रदेश में, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में दो-दो और एक-एक व्यक्ति की मौत पंजाब और तमिलनाडु में हुई है। मौत के कुल 886 मामलों में से सबसे अधिक 342 मौतें महाराष्ट्र में हुई हैं। इसके बाद गुजरात में 151, मध्य प्रदेश में 106, दिल्ली में 54, राजस्थान में 41 और उत्तर प्रदेश एवं आंध्र प्रदेश में 31-31 मौतें हुई हैं। तेलंगाना में 26, तमिलनाडु में 24, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक में 20 और पंजाब में 18 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, बीमारी से जम्मू-कश्मीर में छह, केरल में चार जबकि झारखंड और हरियाणा में तीन-तीन, बिहार में दो लोगों की जबकि मेघालय, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा और असम में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई है। सुबह मंत्रालय के अद्यतन डेटा के मुताबिक, देश में संक्रमण के सबसे अधिक 8,068 मामले महाराष्ट्र में हैं। इसके बाद गुजरात में 3,301, दिल्ली में 2,918, राजस्थान में 2,185, मध्य प्रदेश में 2,168, उत्तर प्रदेश में 1,995 और तमिलनाडु में 1,885 मामले हैं। आंध्र प्रदेश में संक्रमण के मामलों की संख्या 1,177 और तेलंगाना में 1,002 हो गई है। पश्चिम बंगाल में संकमण के मामले बढ़कर 649 जबकि जम्मू-कश्मीर में 523, कर्नाटक में 511, केरल में 469, पंजाब में 313 और हरियाणा में 289 हो गए हैं। बिहार में कोरोना वायरस के 277 मामले जबकि ओडिशा में 108 मामले सामने आए हैं। झारखंड में वायरस से 82 लोग और उत्तराखंड में 51 लोग संक्रमित हैं। हिमाचल प्रदेश में संक्रमण के 40, छत्तीसगढ़ में 37 और असम में अब तक 36 मामले हैं। अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में कोविड-19 के 33 जबकि चंडीगढ़ में 30 और लद्दाख में 20 लोग संक्रमित हैं। मेघालय में 12 मामले और पुडुचेरी में कोविड-19 के आठ और गोवा में सात मामले सामने आए हैं। मणिपुर और त्रिपुरा में दो-दो मामले जबकि मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश में एक-एक मामला सामने आया है। मंत्रालय ने अपनी वेबसाइट पर कहा, “हमारे आंकड़ों का आईसीएमआर के आंकड़ों के साथ मेल किया जा रहा है।” साथ ही मंत्रालय ने कहा कि राज्यवार आंकड़ों की और पुष्टि की जा रही है।

त्वरित जांच किट के सही परिणाम नहीं मिले

स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि कोरोना वायरस के संक्रमण का पता लगाने के लिये चीन से आयात की गयी त्वरित एंटीबॉडी जांच किट से सटीक परिणाम नहीं मिलने पर, आपूर्तिकर्ता कंपनियों के विरुद्ध करार के मुताबिक कार्रवाई की गयी है। स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने नियमित संवाददाता सम्मेलन में बताया कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने चीन की दो कंपनियों (बायोमेडीमिक्स और वोंडफो) से त्वरित जांच किट की खरीद का करार किया था। उन्होंने बताया कि पिछले दिनों इन किट की आपूर्ति के बाद फील्ड परीक्षण के दौरान इनसे सटीक परिणाम नहीं मिलने पर आईसीएमआर ने आपूर्तिकर्ता कंपनियों के विरुद्ध करार की शर्तों के मुताबिक कार्रवाई की है। त्वरित जांच किट की खरीद प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों के बारे में अग्रवाल ने कहा कि आईसीएमआर ने पूर्व निर्धारित खरीद प्रक्रिया का विधिवत पालन किया है। उन्होंने कहा कि आपूर्ति से पहले किट की कीमत का अग्रिम भुगतान नहीं किया था, इसलिये आर्थिक नुकसान का प्रश्न ही नहीं उठता है। उल्लेखनीय है कि चीन से आयात की गयी त्वरित जांच किट से पश्चिम बंगाल सहित कुछ राज्यों में सटीक परिणाम नहीं मिलने के बाद आईसीएमआर ने इनके इस्तेमाल को फिलहाल रोक दिया है। इस बीच आईसीएमआर द्वारा जारी एक बयान में भी खरीद प्रक्रिया का पालन करने की जानकारी देते हुये कहा गया है कि किट की आपूर्ति के बाद फील्ड परीक्षण में खरा नहीं उतरने पर इनकी आगे की आपूर्ति को भी रद्द कर दिया गया है। आईसीएमआर ने स्पष्ट किया कि आपूर्तिकर्ता को खरीद का भुगतान नहीं किया गया है, इसलिये इस खरीद से सरकार को कोई एक भी रुपये का नुकसान नहीं हुआ है। संवाददाता सम्मेलन में अग्रवाल ने कोरोना वायरस के संक्रमण की देश में मौजूदा स्थिति के बारे में बताया कि कोविड-19 से संक्रमण के मामले बढ़कर 27,892 हो गये हैं । उन्होंने बताया कि देश में कोरोना वायरस से संक्रमण के पिछले 24 घंटों में 1396 नये मामले सामने आये है और इसके साथ ही संक्रमित मरीजों की कुल संख्या 27,892 हो गयी है। उन्होंने बताया कि संक्रमित मरीजों में स्वस्थ होने वालों की संख्या 6,184 हो गयी है। यह कुल संक्रमित मरीजों की संख्या का 22.17 प्रतिशत है। मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, कोरोना वायरस संक्रमण से देश में अब तक 872 लोगों की मौत हो चुकी है। अग्रवाल ने संक्रमण को रोकने के उपायों के असर की जानकारी देते हुये बताया कि देश के 16 जिले ऐसे हैं, जिनमें पिछले 28 दिनों से संक्रमण का एक भी मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि 24 अप्रैल के बाद इस फेहरिस्त में तीन जिले- महाराष्ट्र का गोंदिया, कर्नाटक का दावणगेरे और बिहार का लखीसराय जिला- जुड़े हैं। वहीं, दो जिलों (उत्तर प्रदेश में पीलीभीत और पंजाब में एसबीएस), में संक्रमण के नये मामले मिलने के कारण वे इस सूची से हट गये हैं। अग्रवाल ने बताया कि 25 राज्यों के 85 जिलों में पिछले 14 दिनों से कोविड-19 का एक भी मरीज नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के अभियान में लगे स्वास्थ्य कर्मियों और संक्रमित मरीजों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाये जाने की घटनाओं पर मंत्रालय ने चिंता जतायी है। उन्होंने स्पष्ट किया ‘‘कोरोना वायरस का संक्रमण किसी के लिये कलंक नहीं है, हमारी लड़ाई बीमारी के खिलाफ है, बीमारों के खिलाफ नहीं।'' अग्रवाल ने मंत्रालय की ओर से देशवासियों से अपील की, ‘‘किसी भी समुदाय या क्षेत्र को कोविड-19 का संक्रमण फैलने के लिए दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए, स्वास्थ्य कर्मियों और सफाई कर्मियों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।’’ संवाददाता सम्मेलन में गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने लॉकडाउन के नियमों में पिछले दिनों छूट दिये जाने के बाद ग्रामीण एवं उपनगरीय इलाकों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की जानकारी देते हुये बताया कि ग्रामीण इलाकों में 26 अप्रैल तक गेहूं की 80 प्रतिशत कटाई हो चुकी है। साथ ही मनरेगा योजना के तहत दो करोड़ से अधिक श्रमिकों को काम मिलने लगा है। इस दौरान देश में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिये केन्द्र सरकार द्वारा गठित कार्यसमूह के अध्यक्ष परमेश्वरन अय्यर ने बताया कि सड़क, रेल और जल मार्गों से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति की व्यवस्था बहाल हो गयी है। साथ ही 1.5 करोड़ जरूरतमंद लोगों को सामाजिक संगठनों की मदद से भोजन भी मुहैया कराया जा रहा है।

इसे भी पढ़ें: स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देकर भारतीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ किया जा सकता है

80 प्रतिशत से अधिक गेहूं फसल की कटाई

सरकार की एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को कहा कि देश में गेहूं की 80 प्रतिशत से अधिक फसल की कटाई हो चुकी है और अब अधिकतर मंडियों में काम हो रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने संवाददाताओं से कहा कि देश में अब तक दो करोड़ से अधिक लोगों को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत जल संरक्षण और सिंचाई कार्यों में रोजगार मिला है। उन्होंने प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि 80 प्रतिशत गेहूं की फसल की कटाई हो चुकी है, वहीं इस समय में देश में करीब 2,000 या 80 प्रतिशत बड़ी मंडियों में काम हो रहा है। श्रीवास्तव ने कहा कि एक सर्वेक्षण के अनुसार देश में करीब 60 प्रतिशत खाद्य-प्रसंस्करण इकाइयां संचालित हैं। इनके अलावा विशेष आर्थिक क्षेत्रों (सेज) में अब 2825 इकाइयां तथा करीब 350 निर्यातोन्मुखी इकाइयां चालू हैं। अधिकारी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण कार्य, ईंट भट्टे और सड़क परियोजनाएं शुरू हो गयी हैं और स्थानीय तथा प्रवासी मजदूरों को फिर से रोजगार मिल रहा है। श्रीवास्तव ने कहा कि तिलहन और दलहन की खरीद चल रही है। उन्होंने कहा कि ‘किसान रथ’ मोबाइल ऐप ने लॉकडाउन के दौरान किसानों और व्यापारियों के बीच खरीद तथा बिक्री को आसान किया है। 80 हजार से अधिक किसान और 70 हजार व्यापारियों ने ऐप पर पंजीकरण कराया है। अधिकारी ने कहा, ‘‘महत्वपूर्ण बात यह है कि इन गतिविधियों को संचालित करते समय हम सतर्कता बरतें और सामाजिक-दूरी बनाने, मास्क पहनने के नियमों का पालन करें तथा साफ-सफाई रखें।’’ उन्होंने संवाददाताओं को अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दलों (आईएमसीटी) के कार्यों तथा सिफारिशों के बारे में बताया जिन्हें पुणे और जयपुर जैसे कुछ बुरी तरह प्रभावित स्थानों पर भेजा गया था। श्रीवास्तव ने कहा कि इन दोनों जिलों में स्थानीय प्रशासन कोविड-19 से निपटने के लिए मेहनत से काम कर रहा है और महाराष्ट्र में मुंबई के बाद सबसे बुरी तरह प्रभावित पुणे में संक्रमण के मामले दोगुने होने की दर चिंता का विषय बनी हुई है। पुणे में केंद्रीय दल ने पिंपरी-चिंचवाड़, खराडवाडी और बारामती के नियंत्रण क्षेत्रों का दौरा किया। श्रीवास्तव के अनुसार पता चला कि पुणे में कोविड-19 के मामले सात दिन में दोगुने हो रहे हैं और यह दर बाकी देश से थोड़ी उच्च है। देश में जहां 23 नमूनों में से एक में कोरोना वायरस के संक्रमण की पुष्टि हो रही है वहीं पुणे में नौ नमूनों में एक मरीज सामने आ रहा है। श्रीवास्तव के अनुसार टीम ने सुझाव दिया कि अति जोखिम वाले लोगों की जल्द पहचान कर जांच और संपर्कों का पता लगाने का काम तेज करना चाहिए। उन्होंने कहा कि उन झुग्गियों, बाजारों और अन्य स्थानों पर सामाजिक दूरी के नियमों का कड़ाई से पालन कराने की जरूरत है जहां इन्हें नहीं अपनाया जा रहा है। उन्होंने पुणे के लिए आईएमसीटी की सिफारिश का जिक्र करते हुए कहा कि झुग्गी बस्तियों में घरों में पृथक-वास के बजाय संस्थागत पृथक-वास जरूरी है। श्रीवास्तव ने कहा कि पुणे में डॉक्टर, अर्द्धचिकित्सा कर्मी, पुलिस कर्मी, सब्जी विक्रेता और अन्य आवश्यक सेवा प्रदाता दुकानदार आदि कोविड-19 से संक्रमित पाये गए हैं। उन्होंने कहा कि चिंता की बात है कि वे रोजाना कई लोगों के संपर्क में आते हैं। आईएमसीटी ने सुझाया कि सुनिश्चित होना चाहिए कि अग्रिम मोर्चे पर काम करने वाले कर्मी नियमों का कड़ाई से पालन करें ताकि वे सेवाएं देते समय वायरस के वाहक नहीं बनें। उन्होंने कहा, ‘‘आईएमसीटी को पता चला कि दोनों जिलों (पुणे और जयपुर) में स्थानीय प्रशासन समर्पण के साथ काम कर रहा है और इन सुझावों के साथ वे हालात को बेहतर कर पाएंगे।’’ श्रीवास्तव ने कहा कि कोविड-19 की कड़ी को केवल लॉकडाउन के नियमों का कड़ाई से पालन करके तोड़ा जा सकता है और इसके लिए महत्वपूर्ण है कि राज्य सरकारें उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें।

हमें इसके साथ जीना होगा

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने सोमवार को कहा कि कोरोना वायरस का खात्मा नहीं किया जा सकता है और संक्रमण को रोकने के लिए पर्याप्त एहतियात बरतकर ‘‘हमें इसके साथ रहना होगा।’’ टेलीविजन के माध्यम से राज्य के लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि एक वर्ष या इसके बाद ही वायरस का टीका विकसित किया जा सकता है और तब तक बीमारी को फैलने से रोकने के लिए ‘‘सामूहिक प्रतिरोधक’’ का विकास करना ही एकमात्र विकल्प है। उन्होंने लोगों से अपील की कि सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करें क्योंकि प्रसार को रोकने का एकमात्र यही तरीका है। वायरस के कारण राज्य में अभी तक 1177 लोग संक्रमित हुए हैं और 31 लोगों की मौत हुई है। उन्होंने कहा, ‘‘कोरोना को अछूत के तौर पर नहीं देखना चाहिए या लोगों को महसूस करने की जरूरत नहीं है कि इसके साथ हर चीज बर्बाद हो गया। यह सामान्य बुखार की तरह है।’’ उन्होंने कहा कि वृद्ध लोगों और अलग-अलग बीमारियों से पीड़ित लोगों का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने सभी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, ग्रामीण वालंटियर, पुलिस, साफ-सफाई और राजस्व कर्मचारियों को संकट से लड़ने में उल्लेखनीय सेवाओं के लिए धन्यवाद दिया।

मुंबई में कोविड-19 से पुलिसकर्मी की मौत

कोविड-19 से सोमवार को मुंबई पुलिस के 57 वर्षीय हेड कांस्टेबल की मौत हो गई। शनिवार से इस बीमारी से जान गंवाने वाले यह तीसरे पुलिसकर्मी थे। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। एक अन्य अधिकारी ने दावा किया कि कई सरकारी अस्पतालों में भर्ती करने से मना करने के बाद परेल स्थित केईएम अस्पताल में हेड कांस्टेबल का इलाज चल रहा था। वह कुर्ला यातायात मंडल में कार्यरत थे। उन्होंने दावा किया, 'बुखार महसूस होने पर वह शुक्रवार को सबसे पहले घाटकोपर में राजावाड़ी अस्पताल गए। वहां डॉक्टरों ने उन्हें कस्तूरबा अस्पताल जाने को कहा जोकि संक्रमण के मरीजों के इलाज का मुख्य केंद्र है। वहां भी उन्हें भर्ती करने से मना किया गया और इसके बाद वह नैयर अस्पताल गए, जिसने उन्हें केईएम अस्पताल जाने को कहा।' अधिकारी ने कहा कि दोबारा जब हेड कांस्टेबल को कस्तूरबा अस्पताल जाने को कहा गया तो कुर्ला यातायात मंडल के वरिष्ठ निरीक्षक ने हस्तक्षेप कर उन्हें केईएम में भर्ती करवाया। उन्होंने कहा कि हेड कांस्टेबल शुक्रवार को संक्रमित पाए गए थे। इससे पहले शनिवार को एक कांस्टेबल की और रविवार को एक भी एक पुलिसकर्मी की मौत हुई थी।

वायु सेना ने पहुंचाई छह सौ टन चिकित्सा सामग्री

भारतीय वायु सेना ने लॉकडाउन शुरू होने से लेकर अब तक देश के विभिन्न हिस्सों में लगभग छह सौ टन चिकित्सा उपकरण और आवश्यक सामग्री पहुंचाने का कार्य किया है। रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को यह जानकारी दी। चिकित्सा उपकरण का उपयोग कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए किया जाना है। मंत्रालय ने एक वक्तव्य में कहा कि 25 अप्रैल को भारतीय वायु सेना का मालवाहक विमान 22 टन चिकित्सा सामग्री लेकर आइजॉल के लेंगपुई हवाई अड्डे पर पहुंचा। मंत्रालय ने कहा कि यह सामग्री मिजोरम और मेघालय सरकारों को प्रदान की जाएगी। मंत्रालय ने कहा, “भारतीय वायु सेना ने अब तक लगभग छह सौ तन चिकित्सा उपकरण और सहायता सामग्री पहुंचाई है।” सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवा के 15 सदस्यीय त्वरित प्रतिक्रिया दल को 11 अप्रैल को कुवैत सरकार के आग्रह पर भेजा गया था। मंत्रालय ने कहा कि इस कार्य को पूरा करने के बाद वायु सेना के सी-130 विमान से दल 25 अप्रैल को वापस आ गया था। इस दौरान कैंसर पीड़ित छह साल की एक बच्ची को भी उसके पिता समेत बचाकर लाया गया था।

इसे भी पढ़ें: क्या है प्लाज्मा थैरेपी ? कैसे कोरोना के मरीजों के लिए बनी यह संजीवनी ?

गुजरात में कोविड-19 के 247 नये मामले

गुजरात में सोमवार को कोरोना वायरस से संक्रमण के 247 नये मामले आने के साथ राज्य में कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 3,548 तक पहुंच गई है। वहीं 11 और लोगों की मौत के साथ राज्य में कोविड-19 की वजह से जान गंवाने वालों की संख्या 162 हो गई है। गुजरात की प्रधान सचिव (स्वास्थ्य) जयंती रवि ने बताया कि अकेले अहमदाबाद में 197 नये मामले सामने आए हैं जिससे शहर में कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 2,378 तक पहुंच गई है। उन्होंने बताया कि 30 नए मामले के साथ सूरत में कुल संक्रमितों की संख्या 564 हो गई है। रवि ने बताया कि कोरोना वायरस से संक्रमित जिन 11 लोगों की मौत हुई है, उनमें से सात अन्य बीमारियों से भी ग्रस्त थे। उन्होंने बताया कि 81 मरीजों को संक्रमण मुक्त होने के बाद सोमवार को अस्पताल से छुट्टी दी गई। इसके साथ ही राज्य में संक्रमण मुक्त हो चुके लोगों की संख्या 394 हो गई है। रवि ने बताया कि इस समय गुजरात में 2,992 मरीजों का इलाज चल रहा है जिनमें से 31 को वेंटिलेटर पर रखा गया है। उन्होंने बताया कि राज्य में अबतक 53,575 लोगों के नमूनों की जांच की गई है।

अहमदाबाद में कोविड-19 से मृत्युदर राष्ट्रीय औसत से अधिक

ऐसे में जब कोरोना वायरस से अहमदाबाद में 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई है, शहर में ऐसे रोगियों की मृत्यु दर 4.71 प्रतिशत है, जो देश के कुछ प्रमुख शहरों और राष्ट्रीय औसत से अधिक है। अहमदाबाद के नगर आयुक्त विजय नेहरा ने सोमवार को कहा कि मृत्यु दर को कम करने के लिए लोगों को वरिष्ठ नागरिकों की अतिरिक्त देखभाल करने की आवश्यकता है क्योंकि उनके अन्य की तुलना में संक्रमण की चपेट में आने का खतरा अधिक है। गुजरात सरकार के आंकड़ों के अनुसार अहमदाबाद में कोरोना वायरस के अब तक 2,167 मामले सामने आए हैं। इनमें से 102 मरीजों की मौत हो चुकी है। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि शहर में कोविड-19 की मृत्यु दर 4.71 प्रतिशत है जो नयी दिल्ली और मुंबई तथा राष्ट्रीय औसत से अधिक है। दिल्ली में कुल 2,919 मामलों में से कोविड-19 के 54 मरीजों की अब तक मौत हो चुकी है। इससे पता चलता है कि मृत्यु दर 1.85 प्रतिशत है। मुंबई में, मृत्यु दर 3.77 प्रतिशत है क्योंकि अभी तक कुल 5,407 मामलों में से 204 मरीजों की मृत्यु हुई है। इसके अलावा, देश में कोरोना वायरस के कुल 26,917 मामले सामने आए हैं। इनमें से 826 मरीजों की मौत हुई है, जिससे मृत्यु दर 3.07 प्रतिशत होने का पता चलता है। अहमदाबाद में मृत्यु दर गुजरात की तुलना में भी अधिक है, जहां कोविड-19 के कुल 3,301 मामलों में से 151 मरीजों या 4.57 प्रतिशत मरीजों की मृत्यु हुई है। नेहरा ने कहा कि मृत्यु दर को कम करने का सबसे अच्छा तरीका वरिष्ठ नागरिकों की अतिरिक्त देखभाल करना है क्योंकि उनके अन्य की तुलना में संक्रमण की चपेट में आने का खतरा अधिक है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं लोगों से वरिष्ठ नागरिकों, विशेष रूप से उन लोगों की देखभाल करने का आग्रह करता हूं, जो किसी न किसी तरह की बीमारियों से पीड़ित हैं। यह मृत्यु दर नीचे लाने के लिए जरूरी है। ऐसे नागरिकों को स्थिति में सुधार होने तक परिवार के अन्य सदस्यों के साथ दूरी बनाए रखने, मास्क लगाने और अपने घरों से बाहर नहीं निकलना चाहिए।’’ इस बीच, प्रधान सचिव (स्वास्थ्य) जयंती रवि ने कहा कि गुजरात सरकार संक्रमण से अधिक प्रभावित क्षेत्र (हॉटस्पॉट) अहमदाबाद में कोविड-19 के ऐसे 75 रोगियों को आयुर्वेदिक उपचार देगी जिनमें कोरोना वायरस के कोई लक्षण नहीं हैं। ऐसा आयुष इलाज के तहत ‘‘उनके ठीक होने की अवधि’’ देखने के लिए किया जाएगा। प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य) ने कहा कि राज्य आयुष विभाग ने गुजरात में 1.26 करोड़ से अधिक लोगों को एक आयुर्वेदिक दवा मुफ्त में वितरित की थी। इसका उद्देश्य उनकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना था। उन्होंने कहा, ‘‘पृथक-वास में रखे गए 7,778 लोगों को आयुर्वेदिक दवा दी गई और उनमें से केवल 21 कोरोना वायरस से संक्रमित पाये गए।’’

देशमुख ने महाराष्ट्र में लॉकडाउन बढ़ाने का संकेत दिया

महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने सोमवार को संकेत दिया कि राज्य में रेड जोन के रूप में चिह्नित सबसे अधिक संक्रमित स्थानों पर लॉकडाउन तीन मई से आगे बढ़ाया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने कहा कि इस पर अंतिम फैसला मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे करेंगे। महाराष्ट्र कोरोना वायरस की महामारी से सबसे अधिक प्रभावित है। यहां पर रविवार तक कोविड-19 के आठ हजार से अधिक मामले आ चुके हैं जिनमें से 342 लोगों की मौत हुई है। देशमुख ने कहा, ''राज्य के कुछ हिस्सों जैसे कि रेड जोन में कोविड-19 मामलों की व्यापकता के आधार पर, उन क्षेत्रों में लॉकडाउन बढ़ाया जा सकता है। हालांकि, अंतिम फैसले की घोषणा मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे करेंगे।’’ उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यों से कोविड-19 महामारी की चुनौतियों को प्रशासनिक बदलावों के जरिये अवसर में बदलने और जमीनी हालात के आधार लॉकडाउन में छूट देने की स्वयं अपनी नीति बनाने को कहा था जिसके कुछ घंटों के बाद देशमुख का यह बयान आया है। राज्य सरकार के अधिकारी ने रविवार को बताया कि पूरे महाराष्ट्र में 604 इलाके निषिद्ध क्षेत्र के रूप में चिह्नित किए गए हैं।

नीतीश ने भगवान भरोसे छोड़ा

कांग्रेस ने कोटा में फंसे छात्रों के संदर्भ में दिए गए, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कथित बयान को उनकी ‘अवसरवादी राजनीति’ का प्रमाण करार देते हुए सोमवार को दावा किया कि उन्होंने अपने राज्य के बच्चों को वहां भगवान भरोसे छोड़ दिया है। पार्टी प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने एक बयान में कहा, ''कहा जाता है कि बुरे वक्त में इंसान का असली चरित्र सामने आ जाता है। नीतीश जी ने कोटा में फंसे बिहार के छात्रों की मदद नहीं करने का फैसला कर यह साबित कर दिया है कि वह और उनकी सरकार सिर्फ अवसरवादी राजनीति में विश्वास रखते हैं।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ बिहार के छात्र मदद की गुहार लगा रहे हैं वहीं दूसरी तरफ बिहार की जदयू-भाजपा सरकार एवं नीतीश कुमार ने उन्हें भगवान भरोसे छोड़ दिया है। शेरगिल ने कहा कि नीतीश कुमार को अपने रुख पर पुन:विचार करना चाहिए और बच्चों को कोटा से जल्द बिहार लाने का प्रबंध करना चाहिए। गौरतलब है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान राजस्थान के कोटा में फंसे छात्र-छात्राओं का मामला उठाते हुए कहा कि केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों के अनुरुप हमलोग लॉकडाउन का पालन कर रहे हैं, इसलिये जबतक दिशानिर्देशों में अनुकूल बदलाव नहीं होता, तब तक कोटा में फंसे छात्रों को वापस लाना संभव नहीं है।

इसे भी पढ़ें: लॉकडाउन में देश ने त्योहारों का जश्न और शोक मनाने के नये तरीके सीखे

मुंबई में दस इंडोनेशियाई तबलीगी गिरफ्तार

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मार्च में निजामुद्दीन मरकज में आयोजित एक धार्मिक जलसे में हिस्सा लेने वाले तबलीगी जमात के इंडोनेशिया के दस सदस्यों का पृथक—वास पूरा होने के बाद भारतीय दंड विधान की विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया है। एक अधिकारी ने सोमवार को बताया कि ये दस सदस्य इंडोनेशिया के 12 तबलीगी सदस्यों के समूह का हिस्सा हैं जो दिल्ली से वापस लौटने के बाद बांदा पश्चिम में एक अपार्टमेंट में 29 मार्च से रह रहे थे। इनमें छह महिलायें शामिल हैं। अधिकारी ने बताया कि पुलिस को इंडोनेशिया के इन लोगों के बारे में एक अप्रैल को पता चला था कि ये लोग बांद्रा में रह रहे हैं। उन्होंने बताया, ‘'हमें यह पता चला कि वे दो जत्थे में 29 फरवरी एवं तीन मार्च को भारत आये थे और बाद में जलसे में शामिल होने के लिये मरकज पहुंचे।’’ अधिकारी ने बताया कि ये विदेशी नागरिक सात मार्च को मुंबई पहुंचे और 29 मार्च को अपार्टमेंट में रहने लगे । इसका मतलब यह हुआ कि वह 22 दिन तक घूमते रहे। उन्होंने बताया, ‘'चिकित्सीय जांच में 12 में से दो लोगों में कोरोना वायरस की पुष्टि हुयी। इसके बाद दस अन्य को 20 दिन के पृथक—वास में भेज दिया गया। बुधवार 22 अप्रैल को उन्हें गिरफ्तार किया गया।' अधिकारी ने बताया कि उन्हें 23 अप्रैल को अदालत में पेश कर बांद्रा पुलिस ने रिमांड में लिया गया है।

कार्यपालिका बेहतर ढंग से निपट सकती है

देश के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) एसए बोबडे ने सोमवार को कहा कि आपदाओं और कोविड-19 जैसी महामारी से कार्यपालिका बेहतर ढंग से निपट सकती है और यदि कार्यपालिका की कार्रवाई के कारण नागरिकों का जीवन खतरे में पड़ता है तो अदालतें हस्तक्षेप करेंगी। न्यायमूर्ति बोबडे ने कहा कि संकट के समय देश के सभी तीनों अंगों को मिलकर काम करना चाहिए लेकिन कार्यपालिका को यह तय करना है कि ‘‘व्यक्तियों, धन और सामग्री’’ को कैसे प्राथमिकता देनी है और इस तरह के संकट के समय इनका कैसे उपयोग करना है। उन्होंने एक टेलीविजन चैनल से कहा, ‘‘महामारी या किसी आपदा से कार्यपालिका बेहतर ढंग से निपट सकती है। कोविड-19 से संबंधित सभी मामलों में हमने कार्यपालिका से पूछा है कि क्या कदम उठाये गये हैं।’’ प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि यदि कार्यपालिका की कार्रवाई के कारण नागरिकों का जीवन खतरे में होगा तो न्यायपालिका ‘‘हस्तक्षेप’’ करेगी। उन्होंने कहा कि संकट के इस समय में अदालतें भी काम कर रही है और मुकदमों की संख्या में कमी आई है। कोरोना वायरस से निपटने के लिए 25 मार्च को लगाये गये राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के बाद शीर्ष अदालत वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये आवश्यक मामलों की सुनवाई कर रही है और एक महीने में 593 मामलों की सुनवाई की गई है और इनमें से 215 मामलों में फैसला सुनाया गया है।

जून-जुलाई में मामलों में बढ़ोतरी की आशंका

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस कर कोरोना से बचाव और रोकथाम तथा लॉकडाउन के संबंध में आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श किया और आशंका जाहिर की कि जून-जुलाई में संक्रमण के मामले बढ़ सकते हैं। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव भी इस कॉन्फ्रेंस में मौजूद थे। सिंहदेव ने संवाददाताओं को बताया कि प्रधानमंत्री ने कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि कोरोना वायरस बहुत दिनों तक हमारे बीच में रहेगा तथा जून, जुलाई महीने में इसमें बढ़ोतरी हो सकती है। सिंहदेव ने बताया कि प्रधानमंत्री के साथ आज चौथी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग थी और नौ राज्यों को टॉकिंग मोड पर रखा गया था। आज वीडियो कॉन्फ्रेंस का सार यही था कि कोरोना वायरस हमारे बीच अधिक दिनों तक रहेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि ग्रीन जोन, यलो जोन और रेड जोन है (कोरोना वायरस संक्रमण के अनुसार) उसमें भी बदलाव आ सकता है। ग्रीन जोन है वह ऑरेंज जोन बन सकता है तथा जो ऑरेंज जोन है वह रेड जोन बन सकता है। रेड के भीतर और भी खराब स्थिति हो सकती है। यह सोचना कि हम ग्रीन जोन में हैं कभी कोरोना का प्रभाव नहीं आएगा यह गलत सोचना होगा। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री ने ग्रीन जोन को एक तीर्थ स्थल की संज्ञा दी है तथा कहा है कि इन जोन पर आगे हमको अपनी जीवन शैली कैसी अपनानी है। उसके लिए मॉडल तैयार करना होगा। सिंहदेव ने बताया कि विडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रधानमंत्री ने लॉकडाउन समाप्त करने की बात नहीं की। राज्य में कोरोना वायरस की स्थिति को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि वर्तमान में राज्य में हालात ठीक हैं। लेकिन प्रधानमंत्री ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंस में कहा गया कि जून और जुलाई में इसमें बढ़ोतरी हो सकती है। इसका मतलब है कि कोरोना हमारे बीच में लंबे समय तक रहेगा और उसे ध्यान में रखकर हमको अपनी गतिविधि करनी है। प्रधानमंत्री के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू, मुख्य सचिव आर.पी. मण्डल, पुलिस महानिदेशक डी.एम. अवस्थी समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। इससे पहले मुख्यमंत्री बघेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कोरोनावायरस महामारी को ध्यान में रखते हुए राज्य में राहत और कल्याणकारी योजनाओं के संचालन के लिए अगले तीन महीनों में 30 हजार करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता की मांग की थी। वहीं एक अन्य पत्र में मुख्यमंत्री बघेल ने छत्तीसगढ़ की खनन परियोजनाओं और औद्योगिक इकाईयों द्वारा प्रधानमंत्री केयर फंड में जमा की गई सीएसआर की राशि को शीघ्र राज्य सरकार को अंतरित करने का अनुरोध किया था।

महाराष्ट्र में 522 नये मामले

महाराष्ट्र में सोमवार को कोविड-19 के 522 नये मामले सामने आए जिससे रोगियों की कुल संख्या अभी तक 8590 हो गई है। यह जानकारी स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने दी। उन्होंने कहा कि राज्य में 27 और लोगों की मौत के साथ ही कोरोना वायरस से मरने वालों की कुल संख्या 369 हो गई है। कोरोना वायरस के संक्रमण से ठीक हुए लोगों की संख्या 1282 है।

इसे भी पढ़ें: संकट को अवसर बनाने का मंत्र देकर संघ प्रमुख ने देश को दिखाई नई राह

आगरा में कोरोना वायरस संक्रमण के आठ और मामले

आगरा में सोमवार सुबह आठ और लोगों में कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि होने के साथ ही यहां संक्रमित लोगों की कुल संख्या बढ़कर 381 पहुंच गई। वहीं पृथक-वास केंद्र पर सही व्यवस्था नहीं होने पर एक बीडीओ को निलंबित भी किया गया है। जिलाधिकारी प्रभु नारायण सिंह के अनुसार सोमवार सुबह आठ संक्रमितों में कोरोना की पुष्टि हुई है। उन्होंने कहा कि वहीं मोतीकटरा निवासी 70 वर्षीय व्यक्ति की दो दिन पहले सांस लेने में तकलीफ की वजह से मौत हो गई थी। मृत्यु के बाद उनका सैंपल भेजा गया जिसमें रविवार को उसकी रिपोर्ट में कोरोना संक्रमण की बात आयी है। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही कोरोना से जनपद में मरने वालों की संख्या दस पर पहुंच गयी है। वहीं जिले में 58 लोग उपचार पाकर ठीक हो चुके हैं। उधर पृथक-वासकेंद्रों पर लापरवाही के चलते जिले के नोडल अधिकारी आलोक कुमार ने बीडीओ मनीष वर्मा को निलंबित कर दिया। हिन्दुस्तान कॉलेज में बनाये गये पृथक-वास केंद्र पर गड़बड़ी मिली थी, जांच में दोषी पाए जाने पर वर्मा के खिलाफ कार्रवाई के निर्देशदिये गए। पृथक-वास केंद्र में लोगों को अमानवीय तरीके से खाना-पीना दिया जा रहा था, जिसका वीडियो वॉयरल होने पर प्रशासन की काफी किरकिरी हो रही थी। इस वीडियो को आईजी ए सतीश गणेश आगरा ने रीट्वीट करते हुए डीएम आगरा प्रभुनारायण सिंह से कहा था कि किसी अधिकारी को भेजकर जांच करायें। जांच में दोषी पाये जाने पर सेंटर पर इस अमानवीय व्यवहार के लिए बीडीओ मनीष वर्मा को दोषी मानते हुए चार्जशीट जारी की गयी। बीडीओ मनीष शर्मा को निलंबित किये जाने की जानकारी नोडल अधिकारी आलोक कुमार ने दी।

एचआरडी मंत्री करेंगे राज्यों के शिक्षामंत्रियों से बातचीत

केंद्रीय मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कोविड-19 से जुड़े मुद्दों और मध्याह्न भोजन कार्यक्रम पर चर्चा करने के लिए राज्य के शिक्षा मंत्रियों की बैठक बुलायी है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। यह बैठक मंगलवार को दोपहर दो बजे वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से होगी। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘एचआरडी मंत्री कोविड-19 से निपटने, मध्याह्न भोजन कार्यक्रम, समग्र शिक्षा कार्यक्रम जैसे मुद्दों पर कल वीडियो कॉल के माध्यम से राज्य के शिक्षामंत्रियों के साथ चर्चा करेंगे।’’ इससे पहले सोमवार को पोखरियाल ने अभिभावकों से ऑनलाइन बातचीत की और लॉकडाउन के चलते पुस्तकों की अनुपलब्धता और बोर्ड परीक्षा की अनिश्चितता समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लॉकडाउन लगाया गया है। देशभर में विश्वविद्यालय एवं विद्यालय 16 मार्च से बंद हैं। केंद्र ने कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए पूरे देश में कक्षाओं को बंद करने की घोषणा की थी। बाद में, 24 मार्च को राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन घोषित किया गया। इसे तीन मई तक बढ़ा दिया गया। मार्च के आखिरी सप्ताह में मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों से विद्यालयों के बंद रहने के बावजूद विद्यार्थियों को मध्याह्न भोजन की आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा था। पंजाब और कर्नाटक कोविड-19 के चलते पहले ही ग्रीष्मावकाश की घोषणा कर चुके हैं जबकि अन्य राज्य अकादमिक कैलेंडर पर काम कर रहे हैं तथा अकादमिक नुकसान को कम से कम करने के लिए गर्मियों की छुट्टी पहले करने समेत विभिन्न कदमों पर विचार कर रहे हैं। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने पिछले सप्ताह राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को पत्र लिखकर उनसे स्कूल फीस भुगतान एवं शिक्षकों को तनख्वाह के भुगतान पर संवेदनशीलता से विचार करने का आग्रह किया है।

मुसलमानों को तुष्टिकरण कैसे?

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर ‘अल्पसंख्यक तुष्टिकरण’ के संबंध में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ के आरोपों पर आपत्ति जताते हुए राज्यों के इमामों के एक शीर्ष निकाय ने उनसे अपना बयान वापस लेने का अनुरोध किया है। बंगाल इमाम संघ (बीआईए) के अध्यक्ष मोहम्मद याहिया ने राज्य और केन्द्र सरकार से ''पूरे अल्पसंख्यक समुदाय को लॉकडाउन का उल्लंघन करने वाला बताए जाने की कोशिशों को विफल करने लिये कदम उठाने की अपील की है।’’ संघ ने इन आरोपों को सच्चाई से बिल्कुल परे बताया। गत 24 मार्च को बनर्जी को लिखे एक पत्र में धनखड़ ने कहा था, ''...अल्पसंख्यक समुदाय का आपका तुष्टिकरण इतना स्पष्ट और अजीब था कि एक पत्रकार द्वारा निजादुद्दीन मरकज की घटना के बारे में एक प्रश्न पर आपकी प्रतिक्रिया थी, 'सांप्रदायिक सवाल मत पूछो'।" इस टिप्पणी पर आपत्ति जातते हुए बीआईए ने राजभवन को लिखे पत्र में कहा कि निजामुद्दीन मरकज मामला दिल्ली पुलिस और केन्द्र से जुड़ा था। दिल्ली के निजामुद्दीन में पिछले महीने तबलीगी जमात के एक कार्यक्रम में शामिल हुए कई लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए थे, जिसमें कई विदेशी भी शामिल हैं। याहिया ने पत्र में कहा, ''मुझे लगता है कि एक राज्यपाल के तौर पर आपको अच्छे से पता होगा कि इन विदेशियों को वीजा किसने दिया और इस कार्यक्रम के लिए अनुमति किसने दी। आपको पता होगा कि विश्वभर में कोविड-19 के संकट के बारे में जानने के बावजूद लाखों लोगों को देश में आने की अनुमति किसने दी।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि कोरोना वायरस फैलने के लिए केवल मुसलमानों को जिम्मेदार ठहराकर केन्द्र और भाजपा मामले को साम्प्रदायिक रंग दे रही है। बीआईए ने 25 अप्रैल को लिख पत्र में कहा, ‘‘संवाददाता सम्मेलन में उस सवाल का जवाब नहीं देना बंगाल में मुसलमानों का तुष्टिकरण कैसे है?’’ उसने कहा कि मुख्यमंत्री के पास भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है। उन्होंने कहा कि भारत के हर एक मुसलमान का निजामुद्दीन घटना से कोई लेना-देना नहीं है। अगर जमात अधिकारियों ने गलती की है, तो कानून अपना काम करेगा।

एफसीआई में अब तक कोविड-19 का कोई मामला नहीं

खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने सोमवार को संतोष जताया कि सरकारी उपक्रम भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के कर्मचारियों के बीच कोविड-19 का कोई भी मामला सोमने नहीं आया है। उन्होंने एफसीआई कर्मियों के काम की सराहना करते हुए कहा कि निगम के एक लाख से भी अधिक कर्मचारी देश भर में सरकारी खाद्यान्न् योजनाओं के 81 करोड़ लाभार्थियों के बीच खाद्यान्नों के वितरण के काम में अग्रिम मोर्चे पर अथक जुटे हुए हैं। पासवान ने कहा, ‘‘शुक्र है, एफसीआई में अभी तक ऐसा कोई कोविड-19 का मामला नहीं है। हमारे कर्मचारी सभी जोखिम उठा कर काम पर आ रहे हैं। वे हमारे कोरोना योद्धा हैं जो इस महामारी की स्थिति के बीच भी यह सुनिश्चित करने में लगे हैं कि खाद्यान्न गरीबों तक पहुंचे।’’ उन्होंने कहा कि निगम के किसी कर्मचारी या श्रमिक की 24 मार्च से लॉकडाउन के दौरान ड्यूटी करने के छह महीने के अंदर कोविड -19 से मृत्यु हो जाती है उसके परिजनों को 35 लाख रुपये तक का जीवन बीमा का संरक्षण मिलेगा। इसके लिए निगम के एक लाख से अधिक कर्मियों और मजदूरों का बीमा कराया गया है। पासवान ने कहा, ‘‘सरकार कोरोना योद्धाओं की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है जो अपनी जान जोखिम में डालकर देश की सेवा कर रहे हैं।’’ मौजूदा समय में, 80,000 मजदूरों सहित एफसीआई में कुल 1,08,714 कर्मचारी और अधिकारीगण हैं। पासवान ने यह भी कहा कि देश में गरीबों की मांग को पूरा करने के लिए सरकार के पास पर्याप्त खाद्यान्न भंडार उपलब्ध है।

केरल में कोरोना वायरस संक्रमण के 13 नए मामले

केरल में सोमवार को कोरोना वायरस से संक्रमण के 13 नए मामले सामने आए हैं। इसी के साथ संक्रमितों की संख्या बढ़ कर 481 हो गई है। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने यह जानकारी दी। राज्य में कोविड-19 की स्थिति की समीक्षा बैठक में शामिल होने के बाद विजयन ने संवाददाताओं से कहा, “कोट्टायम में छह, इडुक्की में चार, पलक्कड़, मालापुरम और कन्नूर जिले से एक-एक मामला सामने आया है।” उन्होंने बताया कि संक्रमित पाए गए पांच लोग तमिलनाडु से हैं जबकि एक हाल ही में विदेश से लौटा है। बाकी लोग संक्रमित मरीजों के संपर्क में आए थे। एक व्यक्ति कैसे संक्रमित हुआ इसका पता नहीं चल पाया है। उन्होंने बताया कि राज्य में सोमवार को 13 लोगों के नमूनों की जांच रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। वर्तमान में कोविड-19 के 123 सक्रिय मामले हैं और 355 मरीजों का उपचार किया जा चुका है। राज्य में 20000 से अधिक लोग निगरानी में हैं और 400 से अधिक लोगों को विभिन्न अस्पतालों के पृथक-वास में रखा गया है। राज्य में कोट्टायम और इडुक्की जिलों को कोरोना वायरस से अत्यधिक प्रभावित क्षेत्र(हॉटस्पॉट) में शामिल कर दिया गया है।

एम्स ने समिति गठित की

दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के प्रशासन ने कोरोना वायरस महामारी के कारण पिछले एक महीने से जारी देशव्यापी लॉकडाउन भविष्य में हटाये जाने के बाद सामान्य स्वास्थ्य सेवायें बहाल करने की रणनीति बनाने के लिये एक समिति का गठन किया है। कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए देश मे एक महीने से लॉकडाउन है। देश में कोविड-19 से संक्रमण के मामलों की संख्या 27,892 है और 872 लोगों की इसकी वजह से जान जा चुकी है। लॉकडाउन के दौरान देश के शीर्ष चिकित्सा संस्थानों में शुमार एम्स में पिछले एक महीने से बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) की सेवायें बंद होने के अलावा टाली जा सकने वाली शल्य चिकित्सा सुविधा भी निलंबित कर दी गयी है। एम्स प्रशासन के सूत्रों ने बताया कि समिति ने सोमवार को अपनी पहली बैठक में संस्थान की सामान्य स्वास्थ्य सेवायें चरणबद्ध तरीके से बहाल किये जाने के तरीकों पर विचार विमर्श किया। इसमें निलंबित चल रही ओपीडी एवं शल्य चिकित्सा सुविधा को फिर से शुरु किये जाने पर विचार किया गया। फिलहाल एम्स में केन्द्र सरकार के दिशानिर्देशों के तहत सिर्फ कोविड-19 मरीजों के इलाज पर ध्यान देने के लिये इन चिकित्सा सेवाओं को 25 मार्च से बंद रखा गया है। इस दौरान गंभीर मरीजों एवं पहले से उपचाराधीन नियमित मरीजों के लिये एम्स में टेलीमेडिसिन सेवा 21 अप्रैल से शुरु की गयी है। चिकित्सा सेवाओं की सामान्य बहाली के लिये गठित 24 सदस्यीय समिति की अध्यक्षता एम्स के निदेशक डा. रणदीप गुलेरिया कर रहे है। समिति लॉकडाउन के बाद संस्थान की चिकित्सा सेवाओं को बहाल करने की रणनीति तय कर इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करेगी।

विशेष बीमा कवर

देश की प्रमुख एफएमसजी कंपनियां मसलन नेस्ले इंडिया, गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, मैरिको और डाबर ग्राहकों से सीधे संपर्क में आने वाले अपने कर्मचारियों को विशेष बीमा कवर उपलब्ध करा रही हैं। एफएमसीजी कंपनियों के ये कर्मचारी कोविड-19 संकट के बीच उत्पादों की आपूर्ति और वितरण का काम कर रहे हैं। इनमें वितरकों के कर्मचारी भी शामिल हैं। कोविड-19 की वजह से लागू लॉकडाउन के दौरान एफएमसजी कंपनियों की आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह से प्रभावित हुई है। अब एफएमसीजी कंपनियों ने इस संकट के दौरान आपूर्ति व वितरण करने वाले अपने कर्मचारियों को विशेष बीमा कवर उपलब्ध शुरू किया है। इनमें कोविड-19 की वजह से किसी संभावित बीमारी की स्थिति में नकदीरहित इलाज की सुविधा के अलावा इलाज पर हुए खर्च की वापसी जैसी बीमा योजनाएं शामिल हैं। इन कंपनियों ने आपूर्ति श्रृंखला के कर्मचारियों को प्रेरित करने के लिए बीमा फर्मो। के साथ कुछ विशेष बीमा योजनाएं बनाई है। इससे कंपनियां इस स्वास्थ्य संकट के दौरान बाजार में अपने उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही हैं। गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स ने सोमवार को कहा कि उसने देशभर में आपूर्ति और वितरण श्रृंखला के 4,000 कर्मचारियों का बीमा कराया है। गोदरेज कंज्यूमर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (भारत और दक्षेस) सुनील कटारिया ने कहा कि इनमें हमारी आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े लोगों के कर्मचारी या उनके द्वारा अनुबंध पर नियुक्त किए गए कर्मचारी भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये सभी कर्मचारी नकदीरहित इलाज या 50,000 रुपये तक के चिकित्सा खर्च को वापस पाने के पात्र हैं। गोदरेज समूह की कंपनी ने कहा कि उसने अपने परिचालन वाले स्थानों पर एक व्यापक स्वास्थ्य और सुरक्षा निगरानी प्रणाली लगाई है। इसी तरह मैरिको लि. के मुख्य मानव संसाधन अधिकारी अमित प्रकाश ने कहा कि सभी कर्मचारियों को इस स्वास्थ्य संकट के मद्देनजर सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने के अलावा हमने अपने सभी वितरकों के बिक्री से जुड़े कर्मचारियों का कोविड-19 से जुड़े इलाज के लिए बीमा कराया है। प्रकाश ने कहा कि हमारे वितरकों के कर्मचारी मसलन डिलिवरी ब्वॉय, आपरेटर, लोडर या विक्रेता जिनके पास बीमा कवर नहीं है और उन्हें कोविड-19 संक्रमण की वजह से अस्पताल में भर्ती होना पड़ा है, मैरिको उनको चिकित्सकीय सहायता उपलब करा रही है। एक अन्य एफएमसीजी कंपनी डाबर इंडिया ने भी अपने वितरण से जुड़े कर्मचारियों के लिए विशेष बीमा योजना ‘डाबर आश्रय’ पेश की है। डाबर इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मोहित मल्होत्रा ने कहा कि पूरे देश में बंद है। ऐसी स्थिति के बीच डाबर और हमारे वितरक भागीदारों के कर्मचारियों दवाइयों, आवश्यक उत्पादों, खाद्य सामान और साफ-सफाई के सामान की आपूर्ति सुनिश्चित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे 600 कर्मचारी जिनके पास कॉरपोरेट या राज्य बीमा योजना नहीं हैं, के लिए हमने डाबर आश्रय योजना पेश की है। इसी तरह नेस्ले इंडिया ने भी अपने ऐसे कर्मचारियों के लिए विशेष योजना ‘नेस्ले सुरक्षा’ पेश की है। नेस्ले के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘हमारे वितरक भागीदारों के साथ काम करने वाले कर्मचारी ‘हीरो’ हैं जिन्होंने बाजार में नेस्ले की मौजूदगी को सुनिश्चित करने में मदद की है। ऐसे प्रत्येक कर्मचारी जिसके पास कर्मचारी राज्य बीमा नहीं है, को हम अगले तीन माह तक नेस्ले सुरक्षा कवर उपलब्ध कराएंगे।’’

इसे भी पढ़ें: उत्तर प्रदेश में लॉकडाउन को विफल कराने के पीछे सक्रिय रहती है 'शाहीन बाग' ब्रिगेड

अपने अपने हिसाब से लॉकडाउन में ढील देने में जुटे

विभिन्न देशों एवं अमेरिका के प्रांतों ने अपनी-अपनी दिशादृष्टि के मुताबिक, कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए लागू किए गए लॉकडाउन में ढील देना शुरू किया है लेकिन सभी का साझा लक्ष्य संक्रमण के एक और दौर के बगैर अर्थव्यवस्था को बहाल करना है। ये पाबंदियां थोड़ी-थोड़ी कर हटायी जा रही हैं और इस संबंध में विभिन्न देशों के बीच कोई तालमेल नहीं है। कुछ देशों ने निर्माण कार्य शुरू कर दिया है जबकि कई अन्य देशों ने इसे बंद ही नहीं किया था। कुछ अमेरिकी प्रांतों में सैलून और रेस्तरां फिर खुल गये हैं जबकि अन्य प्रांतों में कुछ सप्ताह बाद यह कदम उठाये जायेंगे। कोरोना वायरस से संक्रमित हो गये ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन कई दिनों के बाद स्वस्थ होकर काम पर लौटे हैं। इस संक्रमण के चलते उनके जीवन पर संकट करीब करीब आ गया था। जॉनसन ने कहा कि ब्रिटेन (कोरोना वायरस संकट से उपजे) हालात को बदलने की शुरुआत करने जा रहा है लेकिन यह अधिकतम जोखिम का भी वक्त है क्योंकि लॉकडाउन में ढील देने से संक्रमण बढ़ सकता है। ब्रिटेन में सात मई तक लॉकडाउन है। ऐसी संभावना है कि प्रौद्योगिकी, देशों को पाबंदियों में ढील देने में मदद करने में भूमिका निभा सकती है। कई सरकारें मोबाइल वायरस छानबीन ऐप पर काम रही हैं और उनकी संक्रमित व्यक्तियों के संपर्क मे आये व्यक्तियों का पता लगाने के लिए स्वचालित समाधान में रूचि है। जब भी उपयोगकर्ता संक्रमित के नजदीक आता है तो यह ऐप उसका पता लगाने के लिए भौगाोलिक अवस्थिति डाटा या ब्लूटूथ प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करता है। लेकिन कार्यकर्ताओं और शोधकर्ताओं को चिंता है कि निगरानी बढ़ाने के अस्थायी उपाय कहीं स्थायी न हो जाएं। आस्ट्रेलिया में मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी डामियान मर्फी ने सोमवार को कहा कि संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आये व्यक्तियों का पता लगाने की गति तेज करने के लिए इस ऐप की शीघ्र लोकप्रियता से वह उत्साहित हैं। इस ऐप के विकसित होने के 12 घंटे के अंदर 11.3 लाख लोगों ने इसे डाउनलोड किया। देश में कम लोगों की ही कोविड-19 से मौत हुई है। सिंगापुर ऐसा ऐप लांच करने वाला पहले देशों में एक है । फ्रांस, स्विटरजरलैंड और ब्रिटेन समेत कई अन्य देश भी खुद ही ऐसा ऐप बनाने में जुटे हैं। दक्षिण कोरिया एक ऐसा विशेष इलेक्ट्रोनिक कलाईबैंड जारी करेगा जो अधिकारियों को पृथक-वास में रह रहे किसी व्यक्ति के घर से निकलने पर को सूचित कर देगा। यूरोपीय देशों में निजता का अधिकार आम तौर पर मजबूत हैं और वे अधिक सावधानीपूर्वक कदम उठा रहे हैं। सात सप्ताह से लॉकडाउन से गुजर रहे इटली में प्रधानमंत्री ग्युसेप कोंते ने पाबंदियां हटाने के लिए दीर्घकालीन समयसारिणी जारी की है। फैक्टरियां, निर्माणस्थल, थोक विक्रेता कारोबार सुरक्षा उपायों के लागू होने पर बहाल हो सकते हैं। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज मंगलवार को लॉकडाउन में ढील की रूपरेखा सामने रखेंगे लेकिन उन्होंने कहा कि यह सावधानी भरा कदम होगा। उनके फ्रांसीसी और यूनानी समकक्ष भी मंगलवार को अपनी योजनाएं सामने रखेंगे। चेक गणराज्य भी पाबंदियां में ढील दे रहा है और छोटे छोटे स्टोरों, चिड़ियाघरों, फिटनेस केंद्रों आदि को खोल रहा है। जॉन्स होपकिंस विश्वविद्यालय के अनुसार दुनिया में कोरोना वायरस से करीब 207,000 लोगों की मौत हो गयी है। चीन में सरकारी मीडिया के अनुसार, वुहान में अब कोविड-19 का कोई मरीज नहीं है। जापान के सेंट्रल बैंक ने मौद्रिक नीति में ढील दी है जिससे स्टॉक बाजार को गति मिली है।

चीन ने कहा कोई कानूनी आधार नहीं

कोरोना वायरस के स्रोत के बारे में अंतरराष्ट्रीय जांच के बढ़ते दबाव का सामना कर रहे चीन ने सोमवार को कहा कि इस तरह की जांच का कोई कानूनी आधार नहीं है और अतीत में ऐसी महामारियों की जांच के कोई ठोस नतीजे नहीं आए हैं। चीन ने दुनिया भर में कहर बरपाने वाले कोरोना वायरस के स्रोत के बारे में एक तटस्थ अंतरराष्ट्रीय जांच के आह्वान पर बेहद बारीक प्रतिक्रिया दी है। मीडिया की एक खबर के अनुसार चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने कहा कि देश को कोविड-19 संकट पर लंबे समय के लिए अभूतपूर्व प्रतिकूल परिस्थितियों और चुनौतियों के लिए तैयार रहना चाहिए। हांगकांग स्थित ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ में सोमवार को प्रकाशित खबर के अनुसार शी की यह चेतावनी चीन में सदी का सबसे गहरा आर्थिक संकुचन होने, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के पुनर्गठन और चीन के ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ (बीआरआई) को उत्पन्न खतरे के बीच आयी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अलावा ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने कोविड-19 के स्रोत को लेकर बीजिंग से अधिक पारदर्शिता का आह्वान किया है। ट्रंप ने वायरस के स्रोत की जांच की मांग को आगे बढ़ाते हुए कहा है कि इसका पता लगाया जाना चाहिए कि क्या यह वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी से निकला था। यह पूछे जाने पर कि क्या चीन वायरस के स्रोत के बारे में स्वतंत्र जांच के लिए सहमत होगा, तो चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने इसे अधिक महत्व नहीं देते हुए कहा कि पूर्व में ऐसे वायरस की जांच से बहुत अधिक हासिल नहीं हुआ। उन्होंने कहा, ‘‘वायरस की उत्पत्ति का स्रोत विज्ञान का विषय है और इसका अध्ययन वैज्ञानिकों और पेशेवरों द्वारा किया जाना चाहिए। इस तरह का अनुसंधान और निर्णायक उत्तर केवल महामारी विज्ञान के अध्ययन और वायरोलॉजी अध्ययनों पर पारस्परिक रूप से पुष्ट सबूत प्राप्त होने के बाद ही हासिल किया जा सकता है। यह एक बहुत ही जटिल मुद्दा है, अक्सर इसमें बहुत समय लगता है और अनिश्चितता होती है।’’ उन्होंने कहा, “पूरे मानव इतिहास में, कई बीमारियों की उत्पत्ति का पता लगाने में एक दर्जन साल या दशकों लग गए। कुछ प्रगति हुई लेकिन कोई निर्णायक जवाब नहीं मिला। कार्य अभी भी चल रहा है।’’ गेंग ने कहा कि उद्देश्य ‘‘यह पता लगाने का होना चाहिये कि यह कैसे होता है और मानव जाति को भविष्य में होने वाले नुकसान को रोकने का होना चाहिए। यह प्रतिशोध या जवाबदेही के बारे में नहीं है। इस संबंध में दुनिया में कोई मिसाल नहीं है और कोई कानूनी आधार नहीं है।” अंतरराष्ट्रीय समुदाय का फिलहाल ध्यान कोविड-19 महामारी को नियंत्रित करने और जीवन को बचाने पर होना चाहिए।

दुनिया में कोविड-19 से 2,06,567 लोगों की मौत

चीन के वुहान शहर से दुनियाभर में फैले कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते मरने वालों का आंकड़ा 2,06,567 तक पहुंच गया है। यह जानकारी आधिकारिक स्रोतों से मिली सूचनाओं को एएफपी द्वारा सोमवार को अंतररराष्ट्रीय समयानुसार सुबह 11 बजे (भारतीय समयानुसार शाम साढ़े चार बजे) संकलित आंकड़ों से हुई है। दुनियाभर के 193 देशों में अब तक 29,61,540 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हुए हैं जबकि कम से कम 8,09,400 लोग ठीक हो चुके हैं। माना जा रहा है कि राष्ट्रीय एजेंसियों और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से प्राप्त जानकारी के आधार पर एएफपी द्वारा तैयार की गई संक्रमितों के आंकड़े वास्तविक संक्रमितों का महज एक हिस्सा है क्योंकि कई देश केवल गंभीर मामलों में ही जांच कर रहे हैं। अमेरिका कोविड-19 से सबसे अधिक प्रभावित देश है जहां 9,65,933 लोगों के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है जबकि 54,877 लोगों की मौत हुई है। इटली दूसरा देश है जहां पर सबसे अधिक मौतें हुई हैं। यहां पर 26,644 लोगों ने अपनी जान गंवाई हैं एवं 1,97,675 लोगों के कोरोना पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई है। कुल 2,09,465 मामलों और 23,521 मौतों के साथ स्पेन तीसरे स्थान पर है। फ्रांस में 1,62,100 मामले सामने आए हैं जिनमें 22,856 लोगों की मौत हुई है जबकि ब्रिटेन में 20,732 लोगों ने अपनी जान कोविड-19 से गंवाई है। यहां कुल 1,52,840 मामलों की पुष्टि हुई है। चीन में (हांगकांग और मकाउ को छोड़कर) में अब तक 82,830 मामलों की पुष्टि हुई है और 4,633 लोगों ने अपनी जान गंवाई हैं। इनमें हाल में हुई एक मौत और संक्रमण के तीन मामले शामिल हैं।

कोविड-19 से यूरोप महाद्वीप दुनिया में सबसे अधिक प्रभावित है। यहां अब तक 13,79,443 लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि हुई जिनमें से 1,24,759 लोगों की मौत हुई है। अमेरिका और कनाडा में संयुक्त रूप से 10,12,573 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हैं और इनमें से 57,513 लोगों की मौत हुई है। लातिन अमेरिकी और कैरीबियाई देशों में 1,69,174 लोग कोरोना पॉजिटिव हैं जबकि 8,292 लोगों की मौत हुई है। एशिया (पश्चिम एशिया छोड़कर) में कोविड-19 के 2,04,217 मामले सामने आए हैं और 8,077 लोगों की मौत हुई। पश्चिम एशिया में 1,56,097 मामले आए हैं और 6,392 लोगों की मौत हुई है। अफ्रीका में कोविड-19 से 32,015 लोग संक्रमित हुए हैं और 1,425 लोगों की मौत हुई है। प्रशांत क्षेत्र में 109 लोगों की कोरोना वायरस से मौत हुई है जबकि 8,023 मामले सामने आए हैं।

-नीरज कुमार दुबे