Lockdown के 59वें दिन सरकार का दावा- कोरोना से ठीक होने की दर 40.32% हुई

Lockdown के 59वें दिन सरकार का दावा- कोरोना से ठीक होने की दर 40.32% हुई

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में जल्द ही कोरोना वायरस के सक्रिय मामलों की तुलना में ठीक होने वाले लोगों की संख्या ज्यादा होगी। उन्होंने एक ट्वीट में कहा, ‘‘हमारे डॉक्टरों और नर्सों की टीम पर मुझे बहुत गर्व है।''

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि लॉकडाउन की अवधि का उपयोग देश में स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचे को बढ़ाने में किया गया। कोविड-19 महामारी से लड़ने के लिये देश में करीब 3,027 विशेष अस्पताल और 7,013 देखभाल केंद्र तैयार किये गये। अत्यधिक संक्रामक रोग से निपटने की देश की तैयारियों पर मीडिया की कुछ खबरों में सवाल उठाये जाने के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह कहा। मंत्रालय ने कहा, ‘‘लॉकडाउन लागू करने के बारे में और कोविड-19 प्रबंधन के प्रति प्रतिक्रिया के बारे में सरकार के कुछ फैसलों को लेकर मीडिया के एक हिस्से ने खबरें प्रकाशित/प्रसारित की। जबकि लॉकडाउन की अवधि का उपयोग देश में स्वास्थ्य से जुड़े बुनियादी ढांचे को बढ़ाने में किया गया।’’ मंत्रालय ने कहा, ‘‘आज की तारीख तक कोविड-19 के 45,299 मरीज संक्रमण मुक्त हुए हैं, जिससे देश में इस रोग से उबरने की दर 40.32 प्रतिशत हो गई है।’’ मंत्रालय ने कहा कि 2.81 लाख से अधिक आइसोलेशन बेड, 31,250 आईसीयू बिस्तर और 1,09,888 ऑक्सीजन आपूर्ति सुविधा से लैस बिस्तरों की कोविड-19 से निपटने के लिये विशेष अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में व्यवस्था की गई है। साथ ही, 6,50,930 आइसोलेशन बेड कोविड-19 देखभाल केंद्रों में तैयार रखे गये हैं। मंत्रालय ने कहा कि कुल 26,15,920 नमूनों की अब तक जांच हो चुकी है और पिछले 24 घंटों में 1,03,532 नमूनों की जांच की गई। देश में 555 प्रयोगशालाएं में कोविड-19 नमूनों की जांच की जा रही है जिनमें 391 सरकारी और 164 निजी प्रयोगशालाएं शामिल हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र के साथ समन्वय कर भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) सहित राज्य के स्वास्थ्य विभागों एवं मुख्य हितधारकों के सहयोग से समुदाय आधारित सेरो-सर्वेक्षण कर रही है, ताकि भारत की आबादी में कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार का आकलन लगाया जा सके। केंद्र सरकार ने 65.0 लाख व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) और 101.07 लाख एन-95 मास्क राज्यों को आपूर्ति की है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘करीब तीन-तीन लाख पीपीई और एन 95 मास्क का प्रतिदिन घरेलू उत्पादक विनिर्माण कर रहे हैं। इससे पहले देश में इनका उत्पादन नहीं होता था।’’ इसके अलावा सरकार कोविड-19 से निपटने के लिये सभी स्तरों पर महामारी विशेषज्ञों से परामर्श ले रही है और उन्हें सक्रियता से इस कार्य में शामिल कर रही है। बयान में कहा गया है कि आईसीएमआर द्वारा गठित कोविड-19 के लिये राष्ट्रीय कार्य बल ने मध्य मार्च से 20 बैठकें की हैं और महामारी के प्रति वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रतिक्रिया में प्रभावी रूप से योगदान दिया है। मंत्रालय ने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तहत आने वाले जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च ने आईआईएससी बेंगलुरू के सहयोग से कोविड-19 का एक अनुमान मॉडल विकसित किया है जो इस रोग के विकासक्रम के बारे में लघु अवधि के अनुमान मुहैया करता है। बयान में कहा गया है कि प्रवासी श्रमिकों, फेरीवालों, शहरी गरीबों, छोटे कारोबारियों, स्वरोजगार लोगों, सीमांत किसानों आदि की मुश्किलों को दूर करने के लिये प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना और आत्मनिर्भर भारत अभियान सहित कई नीतिगत घोषणाएं भी की गई हैं। देश में पिछले 24 घंटे में 132 मरीजों की मौत हुई है जबकि संक्रमण के 5,609 नये मामले सामने आये हैं। इसके साथ ही, कोविड-19 से मरने वाले लोगों की संख्या बृहस्पतिवार को बढ़ कर 3,435 हो गई है, जबकि अब तक कुल 1,12,359 संक्रमण के मामले सामने आ चुके हैं।

विभिन्न स्थानों पर लॉकडाउन के उल्लंघन की सूचनाएं

केंद्र ने गुरुवार को कहा कि विभिन्न स्थानों पर लॉकडाउन के उल्लंघन की सूचनाएं मिली हैं। उसने राज्यों को कड़ाई से पाबंदियों का पालन कराने को निर्देश दिया। राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को भेजे संदेश में केंद्रीय गृहसचिव अजय भल्ला ने यह भी कहा कि शाम सात बजे से लेकर सुबह सात बजे तक रात के कर्फ्यू के लिए जारी आदेशों या गैर जरूरी गतिविधियों का निषेध कड़ाई का पालन कराया जाना चाहिए। भल्ला ने कहा कि मीडिया की खबरों एवं अन्य स्रोतों से गृह मंत्रालय के संज्ञान में आया कि देश में कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए जारी किये गये गृह मंत्रालय के निर्देशों का विभिन्न स्थानों पर उल्लंघन हुआ है। उन्होंने कहा, ''मैं इस बात पर बल देना चाहूंगा कि गृह मंत्रालय के निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए तथा उसके लिए राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के अधिकारियों द्वारा जरूरी कदम उठाया जाना चाहिए।’’ 

घरेलू हवाई यात्रा के लिये टिकट किराया तय

घरेलू हवाई यात्रा किराया की उच्चतम सीमा नागर विमानन मंत्री हरदीप सिंह पुरी के घोषणा करने के कुछ ही घंटों बाद विमानन नियामक डीजीसीए ने टिकटों की दर की सात श्रेणियां जारी कीं, जिनमें किराये की निम्न और उच्च सीमा निर्धारित की गई है। इस तरह की प्रथम श्रेणी में 40 मिनट से कम अवधि की उड़ानें शामिल हैं। डीजीसीए के आदेश में कहा गया है कि इस अवधि की उड़ानों के लिये न्यूनतम किराया 2,000 रुपये और अधिकतम किराया 6,000 रुपये होगा। नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने कहा कि 40 से 60 मिनट, 60 से 90 मिनट, 90 से 120 मिनट, 120 से 150 मिनट , 150 से 180 मिनट और 180-280 मिनट की उड़ानों के लिये किराये की निम्न एवं उच्च सीमा क्रमश: 2,500-7,500 रुपये; 3,000 से 9,000 रुपये; 3,500 से 10,000 रुपये; 4,500 से 13,000 रुपये; 5,500 से 15,700 रुपये और 6,500 से 18,600 रुपये होगा। इससे पहले, नागर विमानन मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि दो महीने की रोक के बाद सोमवार को जब घरेलू यात्री उड़ान सेवा पुन: शुरू होगी तो सख्त नियमों के साथ करीब एक तिहाई परिचालन की अनुमति होगी और सभी एयरलाइनों को सरकार द्वारा निर्धारित किराये की उच्च और निम्न सीमा का पालन करना होगा।

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राज्यों को 92,077 करोड़ रुपये जारी किये

सरकार ने केंद्रीय करों में राज्यों के हिस्से के रूप में अप्रैल और मई माह की किस्त के तौर पर कुल 92,077 करोड़ रुपये जारी किए हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के कार्यालय ने ट्वीट कर कहा, ‘‘भारत सरकार ने केंद्रीय करों में राज्यों का हिस्सा... अप्रैल और मई के लिए 92,077 करोड़ रुपये जारी कर दिया है।’’ इसमे अप्रैल माह के 46,038.10 करोड़ रुपये और मई के लिए 46,038.70 करोड़ रुपये जारी किए गए। ट्वीट में कहा गया है कि जारी की गई राशि बजट अनुमान 2020-21 की प्राप्तियों के अनुमान पर आधारित है। यह राशि वास्तविक कर प्राप्तियों के अनुरूप नहीं दी गई है। वित्त मंत्री कार्यालय ने कहा कि संकट के इस समय में राज्यों के नकदी प्रवाह को कायम रखने को यह कदम उठाया गया है। वर्ष 2020-21 के बजट में केन्द्रीय करों में राज्यों का हिस्सा 7.84 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया है। 15वें वित्त आयोग ने राज्यों के लिए 41 प्रतिशत और नवगठित संघ शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर, लद्दाख के लिए एक प्रतिशत हिस्से की सिफारिश की है। वहीं 14वें वित्त आयोग ने राज्यों को करों में 42 प्रतिशत हिस्सा देने का सुझाव दिया था।

वैश्विक तुलना में कम मृत्युदर

केद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि भारत में कोविड-19 के कारण मृत्युदर 3.06 है जबकि वैश्विक मृत्युदर 6.65 है। मंत्रालय ने इसके लिए समय पर मामलों की पहचान और उचित क्लीनिकल प्रबंधन को श्रेय दिया। मंत्रालय ने कहा कि मृत्यु के मामलों के विश्लेषण से पता चलता है कि संक्रमण से मरने वालों में 64 प्रतिशत पुरुष और 36 प्रतिशत महिलाएं हैं। मृतकों को आयु के आधार पर बांटते हुए मंत्रालय ने बताया कि मौत के 0.5 प्रतिशत मामले 15 साल से कम आयु के बच्चों के हैं, 2.5 प्रतिशत मामले 15 से 30 साल की उम्र के बीच के, 11.4 प्रतिशत मामले 30 से 45 साल के बीच के, 35.1 प्रतिशत मामले 45-60 आयुवर्ग के और 50.5 प्रतिशत मामले 60 साल से अधिक उम्र के लोगों के हैं। मंत्रालय ने बताया कि मौत के 73 प्रतिशत मामलों में अन्य गंभीर बीमारियां भी साथ थीं। 60 साल से अधिक उम्र के लोगों और अन्य बीमारियां वालों को कोविड-19 के लिहाज से उच्च जोखिम वाले समूह में रखा गया है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘संक्रमण के मामलों में भारत में मृत्युदर 3.06 प्रतिशत है, जो वैश्विक मृत्युदर 6.65 प्रतिशत की तुलना में बहुत कम है। यह समय पर मामलों का पता लगाने और उनके उचित क्लीनिकल प्रबंधन की दिशा में हमारे प्रयासों को दर्शाता है।’’ देश में बृहस्पतिवार को सुबह आठ बजे तक पिछले 24 घंटे में कोविड-19 के 5,609 नये मामले सामने आए और कुल मामलों की संख्या बढ़कर 1,12,359 तक पहुंच गयी, जबकि संक्रमण के कारण मरने वाले लोगों की संख्या 3,435 हो गई। पिछले 24 घंटों में कोरोना वायरस के संक्रमण से 132 लोगों की मौत हो गई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि देश में अभी 63,624 लोगों का इलाज चल रहा है, जबकि 45,299 लोग ठीक हो चुके हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘इस प्रकार, अब तक लगभग 40.32 प्रतिशत मरीज ठीक हो चुके हैं।''

सोनिया के खिलाफ मामला दर्ज

कांग्रेस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से पीएम केयर फंड के दुरूपयोग संबंधी ट्वीट के बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ कर्नाटक में एक मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने इसकी जानकारी दी। कर्नाटक के शिवमोगा जिले के सागर शहर के पुलिस थाने में बुधवार को एक व्यक्ति प्रवीण केवी की शिकायत पर यह मामला दर्ज किया गया। प्रवीण ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से आधारहीन आरोप लगा कर लोगों के बीच अविश्वास पैदा करने का प्रयास किया है। प्रदेश कांग्रेस ने इस संबंध में मामला दर्ज किये जाने की आलोचना की है। भारतीय दंड विधान की धारा 153 एवं 505 (1)(ब) के तहत यह मामला दर्ज किया गया है, जो लोगों को भड़काने और उन्हें किसी अन्य वर्ग या समुदाय के खिलाफ अपराध करने के लिए उकसाने से संबंधित है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 11 मई को शाम छह बजे कांग्रेस ने अपने ट्विटर हैंडल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ संदेश पोस्ट किया और पीएम—केयर फंड के दुरूपयोग का आरोप लगाया गया। शिकायतकर्ता ने सोनिया गांधी और ट्विटर हैंडल संचालित करने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। दूसरी ओर मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने आरोप लगाया कि प्रवीण ने राजनीतिक मंशा एवं झूठी सूचना के आधार पर यह मामला दर्ज कराया है। प्रवीण पेशे से अधिवक्ता हैं। शिवकुमार ने प्राथमिकी वापस लिये जाने तथा 'कानूनी प्रक्रिया का दुरूपयोग करने के लिये एवं न्याय तथा समानता के हित में' उस पुलिस अधिकारी को निलंबति करने की मांग की जिसने कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ यह मामला दर्ज किया है। कांग्रेस प्रवक्ता सुभाष अग्रवाल ने भी इस कार्रवाई की निंदा की और कहा, 'सरकार से सवाल पूछना विपक्ष की भूमिका एवं जिम्मेदारी है।' प्रवक्ता ने कहा, 'अगर विपक्ष की आवाज को दबाया गया तो लोकतंत्र समाप्त हो जायेगा।' उन्होंने यह भी कहा है कि पार्टी शुरू से यह कहती आ रही है कि पीएम—केयर फंड की आवश्यकता नहीं है जब पहले से प्रधानमंत्री राहत कोष मौजूद है।

'फैसले लेने में डर महसूस कर रहे हैं उद्धव'

भाजपा नेता देवेन्द्र फडणवीस ने गुरुवार को महाराष्ट्र सरकार पर कोविड-19 से निपटने के लिये निर्णय लेने में नाकाम रहने और वहां हालात को बदतर होने देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे हालात से निपटने के लिये फैसले लेने से डर रहे हैं। फडणवीस ने कोरोना वायरस से बुरी तरह प्रभावित मुंबई पर चर्चा करते हुए कहा कि वहां सरकारी अस्पतालों में कोविड-19 रोगियों के लिये बिस्तर उपलब्ध नहीं हैं जबकि सरकार की नाकामियों के चलते शहर के निजी अस्पतालों के आईसीयू भी खाली पड़े हैं। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि निजी अस्पताल कोरोना वायरस रोगियों से एक दिन के बिस्तर के लिये 30,000 रुपये ले रहे हैं। पिछली भाजपा-शिवसेना गठबंधन सरकार में मुख्यमंत्री रहे फडणवीस ने वीडियो कांफ्रेंस के जरिए पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा, 'कोविड-19 से निपटने के लिये निर्णय लेने में अक्षमता महाराष्ट्र सरकार की सबसे बड़ी समस्या है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे अभी नए हैं और फैसले लेने में डर महसूस कर रहे हैं। वह काफी हद तक नौकरशाही पर निर्भर हैं।' फडणवीस से पूछा गया कि कोविड-19 के मद्देनजर प्रवासी कामगार महाराष्ट्र से चले गए हैं, ऐसे में क्या महाराष्ट्र देश के उद्योगों का पावरहाउस बना रहेगा। इस पर फडणवीस ने कहा कि राज्य सरकार ने लॉकडाउन के दौरान उन्हें रोकने के लिये कुछ खास नहीं किया। फडणवीस ने कहा, 'इस मामले पर राज्य सरकार ने ढुल-मुल रवैया अपनाया। ऐसा लगता है कि राज्य सरकार चाहती थी कि वे चले जाएं। महाराष्ट्र के प्रवासी कामगारों ने राज्य की अर्थव्यवस्था में काफी योगदान दिया है। हमें डर सता रहा है कि वे कब वापस लौटेंगे। लेकिन फिलहाल उनके लौटने की उम्मीद नजर नहीं आती।' उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र हमेशा से भारत में विदेशी निवेश का पसंदीदा स्थान रहा है, लेकिन राज्य सरकार उद्योगों को फिर से शुरू करने को लेकर सक्रिय नहीं दिख रही। फडणवीस ने कहा, 'महाराष्ट्र के पास चीन से जा रहे उद्योगों को आकर्षित करने का अच्छा मौका है, लेकिन इसके लिये राज्य सरकार को सक्रिय होना चाहिये।'

शादियों के वास्ते अनुमति दी जाएगी

कर्नाटक सरकार ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि 24 और 31 मई के लिए तय हो चुकी शादियों के लिए प्रशासन द्वारा निर्धारित ‘रविवार पूर्ण लॉकडाउन’ में कुछ छूट दी जाएगी। राज्य में इस माह के आखिर तक घोषित चौथे चरण के कोविड-19 लॉकडाउन में ऐसी व्यवस्था है। यह स्पष्टीकरण लोगों के आवेदन के बाद आया है जिसमें पहले से इन रविवार के लिए तय की गयी शादियों के लिए स्पष्टीकरण या अनुमति मांगी गयी थी। चौथे चरण के लॉकडाउन की पाबंदियों की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने कहा था कि 31 मई तक रात सात बजे से सुबह सात बजे तक कर्फ्यू रहेगा और रविवार को पूर्ण लॉकडाउन रहेगा, बस जरूरी सेवाएं अपवाद रहेंगी। इस कदम के तहत रविवार को सार्वजनिक परिवहन, दुकानों, प्रतिष्ठानों एवं लोगों की आवाजाही निषिद्ध है। कर्नाटक के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य सचिव टीके अनिल कुमार ने स्पष्टीकरण में कहा, ''आदेश जारी किया गया गया था कि रविवार को पूर्ण लॉकडाउन हेागा लेकिन इन दिनों के लिए पहले से शादियां निर्धारित की गयी हैं, ऐसे में उन पर विशेष मामले के रूप में विचार किया जाएगा।’’ उसके अनुसार उपायुक्तों को सूचना दी जाएगी कि एक दूसरे से दूरी, मेहमानों की अधिकतम 50 की सीमा और अन्य दिशानिर्देशों के कड़ाई के साथ पालन सुनिश्चित कराके शादियों की इजाजत दी जा सकती है। पिछले सप्ताह राज्य के स्वास्थ्य विभाग से जारी परामर्श के अनुसार 50 से अधिक मेहमानों, एसी, शराब, पान की इजाजत नहीं होगी तथा 65 साल से अधिक उम्र के लोगों, दस साल से कम उम्र के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को भी विवाह में आने की अनुमति नहीं होगी। निषिद्ध क्षेत्र के लोग भी ऐसे कार्यक्रम में शिरकत नहीं कर सकते हैं। वहां सेनेटाइजर, थर्मल स्क्रीनिंग आदि अनिवार्य होगी।

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येदियुरप्पा ने अपने मंत्री की निंदा की

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने एक किसान संगठन का प्रतिनिधित्व कर रही एक महिला के साथ अभद्रता से पेश आने पर अपने वरिष्ठ मंत्रिमंडलीय सहयोगी जेसी मधुस्वामी की यह कहते हुए खुलेआम निंदा की कि उनका आचरण एक मंत्री को शोभा नहीं देता है। येदियुरप्पा ने कहा, ''उन्होंने (मधुस्वामी ने) जो कुछ कहा है, वह सही नहीं है, मैं उन्हें चेतावनी दूंगा।’’ उन्होंने कहा, ''कोई भी इस तहत गैर-शालीन तरीके से एक महिला से इस तरह बात करने को माफ नहीं कर सकता है। उनका आचरण एक मंत्री को शोभा नहीं देता है।’’ मुख्यमंत्री ने यहां संवाददाताओं से कहा, ''मैं मामले से वाकिफ हूं। मैं महिला से बात करूंगा। मैं यह देखूंगा कि ऐसी घटना फिर न हो।’’ उधर, मधुस्वामी ने माफी मांग ली है और कहा कि उन्हें लगा कि उन्हें धमकाया जा रहा है। यह महिला कर्नाटक रैयत संघ और हसीरू सेने की प्रतिनिधि है और घटना बुधवार को एक निरीक्षण के दौरान घटी। स्थानीय खबरिया चैनलों पर प्रसारित इस घटना के वीडियो फुटेज में लघु सिंचाई तथा कानून एवं संसदीय कार्य मंत्री मधुस्वामी महिला को अपनी शिकायत रखने न कि फरमान देने की बात कहते हुए सुने जाते हैं। वह कथित रूप से यह कहते हुए नजर आते हैं कि वह बहुत बुरे व्यक्ति हैं। मंत्री पुलिस से उस महिला को वहां से दूर ले जाने को कहते हैं क्योंकि वह एक झील के अतिक्रमण को लेकर उनसे सवाल करती है। मधुस्वामी के आचरण को लेकर आलोचना करते हुए विपक्ष के नेता सिद्धरमैया ने कहा कि येदियुरप्पा को मंत्री से महिला से माफी मंगवानी चाहिए और उन्हें मंत्रिमंडल से निकाल देना चाहिए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहते हुए व्यक्ति को धैर्य से लोगों की शिकायत सुननी चाहिए। उन्होंने कहा, ''उन्हें (मधुस्वामी को) मंत्रिमंडल से हटाने की सिद्धरमैया की मांग का मैं समर्थन करता हूं।’’

विशेष ट्रेनें प्रवासी मजदूरों को लेकर गईं

गुजरात में फंसे नौ लाख से ज्यादा प्रवासी मजदूरों को विशेष श्रमिक ट्रेनों के जरिए उनके गृह राज्यों में भेजा गया है। मुख्यमंत्री विजय रुपाणी के सचिव अश्विनी कुमार ने गुरुवार को बताया कि लॉकडाउन की वजह से फंसे प्रवासी मजदूरों को कम से कम 633 श्रमिक ट्रेनें गुजरात से अन्य राज्य लेकर गई हैं। उन्होंने बताया कि रेलवे ने 2,023 श्रमिक विशेष ट्रेनें चलाई हैं, जिनमें से 633 बुधवार आधी रात तक गुजरात से रवाना हुईं और 9.18 लाख प्रवासी कामगारों को उनके गृह राज्य लेकर गई हैं। उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा श्रमिक विशेष ट्रेनें गुजरात से रवाना हुईं। इसके बाद महाराष्ट्र से 371, पंजाब से 247 ट्रेनें रवाना हुईं। कुमार ने बताया ट्रेनें मजदूरों को लेकर उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा, झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान समेत अन्य राज्यों में गई हैं। उन्होंने बताया कि गुरुवार को गुजरात से 64 ट्रेनें रवाना होंगी, जिनमें 1.01 लाख श्रमिक जाएंगे।

बोर्ड परीक्षा अब और स्थगित नहीं होंगी

तमिलनाडु के स्कूली शिक्षा मंत्री केए सेंगोट्टायन ने गुरुवार को कहा कि दसवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा अब और स्थगित नहीं की जाएंगी। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए प्राथमिक स्कूल शिक्षक संघ से 1.6 करोड़ रुपये प्राप्त करने के बाद उन्होंने कहा कि कोविड-19 लॉकडाउन के विस्तार के कारण परीक्षाओं को 15 जून तक के लिए स्थगित करना आवश्यक हो गया था। उन्होंने कहा, "अब और स्थगन की कोई गुंजाइश नहीं है और हम पहाड़ी क्षेत्र के छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाने की व्यवस्था कर रहे हैं।" उन्होंने कहा कि दसवी की परीक्षा पिछले साल 3,084 केंद्रों पर हुयी थी और इस बार 12,500 केंद्रों पर परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर सामाजिक दूरी के नियम का पालन किया जाएगा।

केंद्रीय बल तैनात

धारावी और मुंबई के कुछ अन्य इलाकों में गुरुवार को केंद्रीय पुलिस सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के जवानों को तैनात कर दिया गया ताकि कोरोना वायरस पर काबू के लिए लॉकडाउन लागू करने में नगर पुलिस को मदद मिल सके। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि धारावी में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की एक कंपनी को स्थानीय पुलिस के साथ तैनात किया गया है। इससे पहले बुधवार की रात केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के जवानों ने सख्त लॉकडाउन लागू करने के लिए दक्षिण मुंबई के भेंडी बाजार में फ्लैग मार्च किया। अधिकारी ने बताया कि गुरुवार को सीआरपीएफ कर्मियों ने धारावी में पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की और क्षेत्र में तैनाती की योजना पर चर्चा की। धारावी कोविड-19 से काफी प्रभावित (हॉटस्पॉट) क्षेत्रों में से एक है। इससे पहले महाराष्ट्र सरकार ने कहा था कि उसने केंद्रीय बलों की मांग की है ताकि थक चुके पुलिस बल को थोड़ा आराम मिल सके। मुंबई में 700 से अधिक पुलिसकर्मी कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं। उनमें से दस की मौत हो चुकी है। केंद्रीय बल कानून व्यवस्था बनाए रखने और लॉकडाउन के दौरान किसी अप्रिय घटना को रोकने में मुंबई पुलिस की सहायता करेंगे।

 

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रेड जोन में शामिल किया गया

उत्तर प्रदेश सरकार ने दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में आने वाले गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर के शहरी इलाकों को कोविड-19 रेड जोन में रखा है। गुरुवार को एक आधिकारिक बयान में यह बात कही गई है। कोरोना वायरस के चलते लागू लॉकडाउन के बीच केन्द्र सरकार ने हालात की गंभीरता के आधार पर सभी जिलों को 'रेड', 'ऑरेंज' और 'ग्रीन' जोन में बांटने का फैसला किया था। इसी के आधार पर विभिन्न जिलों में पाबंदियां लगाई गई हैं। रेड जोन में अधिक पाबंदियां हैं तो ग्रीन जोन में बहुत कम। लखनऊ में जारी आदेश में कहा गया है कि मेरठ, आगरा और कानपुर के शहरी इलाकों को भी रेड जोन की श्रेणी में रखा गया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के प्रधान सचिव अमित मोहन प्रसाद ने भी राज्य के सभी जिला अधिकारियों को निर्देश दिया है कि रेड या ग्रीन जोन में नहीं आने वाले जिलों को ऑरेंज जोन में रखा जाए। एक आधिकारी बयान के अनुसार प्रसाद ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया, 'रेड जोन की श्रेणी में रखे गए जिलों के अधिकारी कोरोना वायरस की रोकथाम के लिये लिये अपने निर्णय खुद लेने के लिये स्वतंत्र हैं।' बयान के अनुसार वे जिले, जिनमें बीते 21 दिन से कोई मामला सामने नहीं आया है, वे अपने आप ही ग्रीन जोन में तब्दील हो जाएंगे।


जम्मू कश्मीर में दो और लोगों की मौत

जम्मू-कश्मीर में कोरोना वायरस संक्रमण के कारण दो महिलाओं की मौत होने के साथ केंद्र शासित प्रदेश में इस महामारी से मरने वाले लोगों की कुल संख्या गुरुवार को बढ़ कर 20 पहुंच गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि बडगाम जिले की 70 वर्षीय एक महिला की यहां के एक अस्पताल में आज मौत हो गई, जबकि बुधवार को मरने वाली बेमीना की 80 वर्षीय एक अन्य महिला के भी कोविड-19 से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। अधिकारी ने बताया कि इन दोनों महिलाओं की मौत के साथ, केंद्र शासित प्रदेश में कोविड-19 से मरने वाले लोगों की कुल संख्या बढ़ कर 20 पहुंच गई।

बिहार में कोरोना वायरस के 124 नए मामले

बिहार में गुरुवार को कोरोना वायरस संक्रमण के कुल 124 नये मामले सामने आने के साथ प्रदेश में कोविड-19 से संक्रमित लोगों की संख्या 1900 हो गयी। स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त जानकारी के मुताबिक गुरुवार को कोरोना वायरस संक्रमण के 124 नए मामले प्रकाश में आए हैं। इनमें कटिहार के 19, रोहतास के 18, गोपालगंज के 17, समस्तीपुर के 16, पश्चिम चंपारण के 13, लखीसराय के नौ, शेखपुरा एवं बेगूसराय के आठ-आठ, पूर्णिया के पांच, मुंगेर के तीन, सुपौल एवं मधुबनी के दो-दो मामले हैं। खगड़िया, पटना, बांका एवं पूर्णिया से एक-एक मामला सामने आया है। बिहार में कोरोना वायरस से अब तक कुल दस लोगों की मौत हो चुकी है। पटना, वैशाली एवं खगड़िया में दो-दो तथा मुंगेर, रोहतास, पूर्वी चंपारण एवं सीतामढ़ी जिले में एक-एक मरीज की मौत हो चुकी है। बिहार में अब तक 55692 नमूनों की जांच की जा चुकी है और कोरोना संक्रमित 593 मरीज ठीक हुए हैं।

घर लौट रहे प्रवासियों के बच्चों की मुश्किलें

कोरोना वायरस के कारण लागू लॉकडाउन के दौरान अपने पैतृक स्थलों को वापस लौट रहे वयस्क लोगों के साथ साथ चल रहे उनके बच्चों कई जगह कड़ी धूप और लू में भूख एवं प्यास से बदहाल देखा जा सकता है। एक जगह दो बच्चियों को एक पतले से ‘‘गमछे’’ की छांव में अपने छोटे भाई को धूप के ताप से बचाते हुए देखा गया। भारत में प्रवासी संकट लगातार जारी है। लाखों लोग पैदल ही अपने घर जा रहे हैं। इसके अलावा बसों और ट्रेनों से घर जाने लिये प्रवासी एक-दूसरे से लड़ने-मरने को तैयार हैं। अपने साथ कुछ ही सामान ले जा रहे ये प्रवासी खाने के लिये दान पर आश्रित हैं। इस सबके बीच उनके बच्चे मुश्किल हालात से गुजर रहे हैं। बहुत से बच्चे निढ़ाल हो गए हैं। उनके माता-पिता का कहना है कि भूख, चिलचिलाती धूप, तनाव और अपने घर लौटने चिंता ने उनके लिये कई मुश्किलें पैदा कर दी हैं। दिल्ली-हरियाणा सीमा पर कुंडली इलाके में एक खुले मैदान में बैठी नेहा देवी उत्तर प्रदेश के कानपुर में अपने गांव जाने के लिये बस का इंतजार कर रही हैं। वह अपने सात महीने के बच्चे की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। केवल 22 साल की नेहा अपनी बेटी नैन्सी को स्टील के गिलास से पानी पिलाने की कोशिश करती हैं। नैन्सी गिलास पड़क कर थोड़ा-सा पानी पीती हैं और फिर रोने लगती हैं। नेहा उसे अपनी साड़ी के पल्लू से ढंकने की कोशिश करती है, लेकिन चिलचिलाती धूप ने उन्हें परेशान कर रखा है। तापमान 40 डिग्री से ऊपर पहुंच गया है और यहां कोई छांव नहीं है। नेहा ने कहा कि वह धूप से तंग आ गई हैं। दिल्ली सीमा के निकट हरियाणा के सोनीपत कस्बे में गोलगप्पे बेचने वाले उनके पति हरिशंकर के पास 25 मार्च को लॉकडाउन लागू होने के बाद से कोई काम नहीं है। उनकी बचत खत्म होती जा रही है। उनके पास अपने घर जाने के अलावा कोई चारा नहीं है। इससे कुछ ही दूर नौ साल की शीतल और सात साल की साक्षी अपने तीन साल के भाई विनय साथ बैठी हैं। उनके पास एक गमछा है जिससे उन्होंने अपने भाई को ढक रखा है, लेकिन वह भी काम नहीं आ रहा है। उनका परिवार 10 घंटे से बस का इंतजार कर रहा है। बच्चों के माता-पिता राजपूत सिंह (35) और सुनीता असहाय नजर आ रहे हैं। वे अपने बच्चों को लेकर चिंतित हैं। उन्हें उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में अपने घर जाना है, लेकिन सफर की चिंता उन्हें खाए जा रही है। उन्होंने कहा कि बच्चों का भविष्य चिंता की बात है, लेकिन उनके पास घर जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। पिछले सप्ताह आगरा से एक महिला का वीडियो सामने आया था जो अपने पहिये वाले बैग पर बेटे को सुलाकर बैग को घसीटती हुई ले जाती दिख रही है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई यह वीडियो लाखों प्रवासी परिवारों के संघर्षों को बयां करने के लिये काफी है।

हस्ताक्षर करने होंगे खिलाड़ियों को

भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) ने गुरुवार को खुलासा किया कि कोविड-19 महामारी को देखते हुए उसके देश भर के केंद्रों में अभ्यास शुरू करने वाले खिलाड़ियों को इससे जुड़े ‘जोखिम’ को स्वीकार करते हुए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने होंगे। लॉकडाउन दिशा-निर्देशों में छूट मिलने के बाद अभ्यास शुरू करने के लिये मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी करते हुए साइ ने सहमति पत्र भी दिये हैं जिन्हें खिलाड़ियों और राष्ट्रीय खेल महासंघों (एनएसएफ) को एसओपी के तहत भरना होगा। इस फार्म में खिलाड़ियों को यह स्वीकार करना होगा कि वे समझते हैं कि साइ महामारी के बीच अभ्यास शुरू करने से जुड़े जोखिमों के पूर्ण उन्मूलन की गारंटी नहीं दे सकता। फार्म में कहा गया है, ‘‘मैं कोविड-19 महामारी की वर्तमान स्थिति में अभ्यास फिर से शुरू करने से जुड़े जोखिमों को स्वीकार करता हूं।'' साइ ने कहा कि सहमति पत्र पर हस्ताक्षर प्रत्येक केंद्र पर नियुक्त कोविड-19 कार्यबल की निगरानी में किये जाएंगे। यह कार्यबल सभी प्रशिक्षुओं और स्टाफ के मार्गदर्शन के लिये गठित किया गया है। एसओपी ने कहा, ‘‘कार्यबल यह सुनिश्चित करेगा कि प्रत्येक खिलाड़ी हस्ताक्षर सहमति फार्म उन्हें उपलब्ध कराये जिसमें वर्तमान परिस्थितियों में अभ्यास से जुड़ी सीमाओं और जोखिमों की जानकारी और सहमति होगी।''

पेटीएम पर चार गुना अधिक भुगतान

डिजिटल भुगतान मंच पेटीएम पर लॉकडाउन की अवधि के दौरान दुकानदारों के भुगतान स्वीकार करने के मामले में चार गुना वृद्धि दर्ज की गयी है। यह वृद्धि कंपनी को अपनी नयी खाता सेवा में देखने को मिली है। पेटीएम के उपाध्यक्ष सजल भटनागर ने गुरुवार को कहा, ''आठ जनवरी से 14 मार्च और 15 मार्च से 15 मई के बीच दुकानदारों के उसकी ‘बिजनेस खाता’ सेवा पर भुगतान स्वीकार करने के मामले में चार गुना वृद्धि दर्ज की गयी है।’’ पेटीएम ने आठ जनवरी को दुकानदारों के लिए मुफ्त ‘पेटीएम बिजनेस खाता’ सेवा शुरू की थी। इसके तहत दुकानदारों को सामान, उसकी कीमत और ग्राहक का फोन नंबर डालकर भुगतान स्वीकार करने की सुविधा मिलती है। इसके तहत दुकानदार ग्राहक को पेटीएम वॉलेट, पेटीएम यूपीआई, कार्ड या नेटबैंकिंग के माध्यम से तय तारीख पर भुगतान करने की याद भी दिला सकता है। यह सेवा ग्राहक को इस संबंध में दुकानदार की ओर से अपने आप एसएमएस करके भुगतान की याद दिलाती है। भटनागर ने कहा कि पेटीएम बिजनेस खाता किराना दुकानदारों के लिए एक अनिवार्य सेवा बन चुकी है। यह उनके नकद पैसे वसूलने और उधारी याद रखने की प्रक्रिया को डिजिटल बनाती है। उन्होंने कहा कि पांच महीने की अवधि में इस सेवा के माध्यम से कुल 1,500 करोड़ रुपये का भुगतान स्वीकार किया गया। करीब 10 लाख दुकानदार कंपनी की इस सेवा का उपयोग कर रहे हैं।

-नीरज कुमार दुबे






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