Lockdown के 63वें दिन सरकार ने कहा- जल्द ही दो लाख Corona जांच रोज हो सकेंगी

Lockdown के 63वें दिन सरकार ने कहा- जल्द ही दो लाख Corona जांच रोज हो सकेंगी

देश में सोमवार को लगातार चौथे दिन, एक दिन में कोविड-19 के सर्वाधिक मामले सामने आए। पिछले 24 घंटे में 6,977 नये मामले सामने के बाद देश में संक्रमण के कुल मामले 1,38,845 हो गए हैं जबकि मृतक संख्या 4,021 हो गई है।

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने सोमवार को कहा कि सरकार ने 2009 में फैले स्वाइन फ्लू के प्रकोप से सीख लेते हुए कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए एक ‘कुशल जांच रणनीति’ पर काम किया और अपनी तैयारियों को बढ़ाया। आईसीएमआर ने कहा कि स्वाइन फ्लू के प्रकोप के समय देश के जांच ढांचे में कमियां सामने आयी थीं। उसने कहा कि जांच की बढ़ती जरूरत को पूरा करने के लिए भारत ने एक ‘कुशल जांच रणनीति’ अख्तियार की है ताकि वायरस से लड़ने में आगे रहा जा सके। आईसीएमआर ने कहा कि देश में इस समय 610 प्रयोगशालाएं हैं जहां रोजाना 1.1 लाख नमूनों की जांच हो रही है। इनमें 432 प्रयोगशालाएं सरकारी और 178 निजी हैं। जांच क्षमता को 1.4 लाख नमूने प्रति दिन तक बढ़ा लिया गया है और इसे दो लाख प्रतिदिन की क्षमता तक बढ़ाया जा रहा है। वायरस को लेकर बदली हुई समझ के मद्देनजर और भारत तथा अन्य देशों में हो रहे अनुसंधान कार्यों को देखते हुए जांच के मानदंडों को बढ़ाया गया और उनमें विदेश से लौटने वाले लोगों, प्रवासी श्रमिकों तथा कोविड-19 के खिलाफ अग्रिम मोर्चे पर काम कर रहे लोगों को शामिल किया गया। शीर्ष चिकित्सा अनुसंधान इकाई ने कहा कि अधिकतर राज्य कोविड-19 की जांच के लिए ‘‘ट्रूनैट’’ मशीनों को लगाने के लिहाज से राष्ट्रीय क्षयरोग उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के साथ काम कर रहे हैं। इस मशीन के माध्यम से उन क्षेत्रों या जिलों में जांच की जा रही है जहां निजी या सार्वजनिक क्षेत्र में आधुनिक विषाणु विज्ञान प्रयोगशाला नहीं है। उसने कहा, ‘‘इससे किसी राज्य में अभी तक जांच ढांचा पस्त नहीं हुआ है। किसी राज्य में नमूने बड़ी संख्या में जांच के लिए लंबित नहीं हैं। और अधिक प्रयोगशालाएं स्थापित की जा रही हैं तथा संभावित अधिक जरूरतों को पूरा करने के लिए उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों तथा बाकी देश में अतिरिक्त मशीनें लगाई जा रही हैं।’’ आईसीएमआर ने कहा, ‘‘एक दशक पहले जब भारत ने 2009 में सबसे भयावह संक्रमण स्वाइन फ्लू का प्रकोप देखा था। तब वायरस संक्रमण के आणविक निदान के लिए बुनियादी ढांचा नहीं होने की वजह से सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली पंगु हो गयी थी। सरकारी क्षेत्र के स्वास्थ्य कर्मियों ने असहाय होकर महामारी को तेजी से देश के सभी हिस्सों में फैलते देखा था।’’ उसने कहा कि देश में उस समय सीरोलॉजी आधारित एलिसा या रैपिड ब्लड जांच की सुविधाएं थीं, लेकिन वायरस चुनौतीपूर्ण था और खून में इसका पता नहीं लगाया जा सकता था। एच1एन1 का पता लगाने का एकमात्र विकल्प आणविक विषाणु विज्ञान (मॉलिक्यूलर वायरोलॉजिकल) जांच थी और यह देश में केवल दो संस्थानों- राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी), पुणे और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी), दिल्ली में उपलब्ध थी। आईसीएमआर ने कहा, ‘‘वह दौर देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के लिए आंखें खोल देने वाला था जहां जांच क्षमता के अंतराल सामने आए।’’ उसने कहा कि इससे विषाणु अनुसंधान और निदान प्रयोगशाला (वीआरडीएल) नेटवर्क के माध्यम से भारत में वायरस के लिए आणविक निदान सुविधाओं को मजबूत करने का रास्ता साफ हुआ। आईसीएमआर ने कहा, ‘‘2009 के विपरीत, जनवरी 2020 में, जब कोविड-19 महामारी का खतरा हमारे सामने खड़ा था तो सरकार आईसीएमआर-एनआईवी, पुणे में जांच पद्धति का मानकीकरण कर अपनी तैयारियों को तत्काल बढ़ा पाई।''

ध्यान देगी सरकार

वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि सरकार आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान देगी, क्योंकि इसका अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि भारत को एक आत्मनिर्भर देश बनाने के प्रमुख स्तंभों में विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे का निर्माण भी एक स्तंभ है, जैसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस महीने की शुरुआत में अपने संबोधन में कहा था। पिछले महीने एक सरकारी कार्य बल ने देश में बुनियादी संरचना को बेहतर बनाने और देश में रोजगार पैदा करने के लिये अगले पांच साल में 111 लाख करोड़ रुपये के कुल निवेश की जरूरत का अनुमान लगाया था। ठाकुर ने कहा कि अर्थव्यवस्था के पहिये को चालू रखने के लिये सरकार यह भी सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है इस मुश्किल समय में व्यवसायों के हाथों में पर्याप्त नकदी रहे। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा, ''सरकार का प्रयास अपने खर्च को युक्तिसंगत बनाने और कोविड-19 महामारी के प्रकोप से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के लिये चालू वित्त वर्ष में जरूरी चीजों के लिये आवंटन में तेजी लाने का होगा।’’ उन्होंने उदाहरण के लिये कहा कि सरकार ने हाल ही में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के लिये आवंटन बढ़ाकर चालू वित्त वर्ष में 1.01 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक उच्च स्तर पर पहुंचा दिया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा घोषित 20.97 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज के तहत कई उपाय किये गये। इन उपायों में मनरेगा के तहत आवंटन बढ़ाना और कृषि क्षेत्र में बुनियादी संरचना के विकास के लिये एक लाख करोड़ रुपये आवंटित करना भी शामिल है। ठाकुर ने कहा, "हम अपने खर्च में कटौती नहीं कर रहे हैं... हम इसे तर्कसंगत बनाएंगे। हमने पलायन कर रहे प्रवासी मजदूरों को उनके गृह राज्य में ही रखने के लिये मनरेगा के तहत 1.01 लाख करोड़ रुपये का ऐतिहासिक आवंटन किया है।’’ उन्होंने कहा, "मैं उन्हें प्रवासी श्रमिक नहीं कहता, मैं अतिथि श्रमिक कहूंगा। जब वे अपने गृह राज्य वापस चले गये हैं, तो हम उन्हें वहीं रास्ते उपलब्ध करा रहे हैं, ताकि वे वहीं फिर से काम शुरू कर सकें।" ठाकुर ने यह भी कहा कि इससे बड़ी संख्या में टिकाऊ माध्यमों और आजीविका का सृजन होगा तथा उच्च उत्पादन के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।

एन-95 मास्क 47 प्रतिशत सस्ता

सरकार ने सोमवार को कहा कि एन-95 मास्क बनाने वाली प्रमुख कंपनियों और आयातकों ने इसके दाम 47 प्रतिशत तक कम कर दिये हैं। नियामक राष्ट्रीय औषधि मूल्य प्राधिकरण (एनपीपीए) के देश में इस प्रमुख उत्पाद को सस्ती दर पर उपलब्ध कराने के लिये कदम उठाये जाने के बाद कीमतें नीचे आयी हैं। बाजार में पहले एन-95 मास्क प्रति इकाई 150 से 300 रुपये में बेचे जा रहे थे। एनपीपीए के परामर्श के बाद इसी कीमत कम हुई हैं। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने सोमवार को एक बयान में कहा कि एन-95 मास्क की ऊंची कीमत के मसले के समाधान के लिये एनपीपीए ने कदम उठाया और यह सुनिश्चित किया कि वह देश में आम लोगों को सस्ती दर पर उपलब्ध हो। बयान के अनुसार, ‘‘प्राधिकरण ने 21 मई 2020 को सभी विनिर्माताओं/आपूर्तिकर्ताओं को परामर्श जारी कर एन-95 मास्क की गैर-सरकारी खरीद के लिये मूल्य एकसमान और युक्तिसंगत रखने को कहा था।’’ एनपीपीए ने बंबई उच्च न्यायालय के समक्ष भी कहा कि वह देश में एन-95 मास्क की मांग और आपूर्ति में अंतर को देख रहा है और विनिर्माताओं, आयातकों तथा आपूर्तिकर्ताओं को स्वेच्छा से इसके दाम कम करने की सलाह दी है। उच्च न्यायालय के कोरोना संक्रमण से बचाव के इस महत्वपूर्ण उत्पाद के दाम तय करने से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान प्राधिकरण ने यह बात कही। बयान के अनुसार परामर्श जारी करने के बाद एन-95 मास्क के दाम में 47 प्रतिशत तक की कमी आयी है। सरकार ने एन-95 मास्क को अनिवार्य वस्तु अधिसूचित किया है और इसे आवश्यक वस्तु अधिनियम के अंतर्गत रखा है।

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गुजरात से 12.28 लाख प्रवासी गए

गुजरात सरकार अब तक 839 श्रमिक विशेष ट्रेनों के जरिये 12.28 लाख प्रवासी मजदूरों को उनके गृह राज्य भेज चुकी है। एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा सोमवार रात तक बढ़कर 13 लाख के करीब पहुंच जाएगा क्योंकि कोरोना वायरस लॉकडाउन के बीच परिचालन के लिये और ट्रेनें तैयार हैं। अधिकारी ने कहा कि सरकार ने अब तक प्रवासी कामगारों के लिए 839 ट्रेनों का इंतजाम किया है और 43 और ट्रेनें सोमवार रात को रवाना होंगी। मुख्यमंत्री के सचिव अश्वनी कुमार ने कहा, “रविवार आधीरात तक देश भर में संचालित कुल 2,989 श्रमिक ट्रेनों में से गुजरात से 839 ट्रेनें संचालित की गईं और सोमवार को उसने 43 और ट्रेनों की व्यवस्था की है, जिससे कुल मिलाकर 12.96 लाख मजदूरों को उनके घरों तक भेजा जा रहा है।” उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “राज्य सरकार ने 12.96 लाख प्रवासी कामगारों की 882 श्रमिक विशेष ट्रेनों से सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित की।” उन्होंने कहा कि गुजरात पहले ही 12.28 लाख श्रमिकों के लिये 839 श्रमिक विशेष ट्रेनों को परिचालन कर चुका है और सोमवार रात को अतिरिक्त ट्रेनें 68 हजार और प्रवासी मजदूरों को लेकर जाएंगी। कुमार ने कहा कि सोमवार को 43 ट्रेनों की व्यवस्था की गई है जिनमें से 17 उत्तर प्रदेश, 13 बिहार, आठ ओडिशा, तीन झारखंड, आंध्र प्रदेश और त्रिपुरा के लिए एक-एक हैं। कुमार ने कहा कि यात्रियों के लिये खाने और पीने के पानी के प्रावधान के साथ सभी आवश्यक सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है।

60 और लोगों की मौत

महाराष्ट्र में सोमवार को कोविड-19 के 2,436 नये मामले सामने आने के बाद राज्य में संक्रमितों की कुल संख्या 52,667 हो गई है। एक स्वास्थ्य अधिकारी ने यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि महामारी के कारण 60 और लोगों की मौत होने से मृतकों की संख्या बढ़कर 1,695 हो गई है। सोमवार को राज्य में 1,186 मरीजों को उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। महाराष्ट्र में अब तक 14,600 लोगों को स्वस्थ होने के बाद अस्पतालों से छुट्टी दी जा चुकी है। महाराष्ट्र में संक्रमण का आंकड़ा कुछ उस प्रकार है, कुल मामले- 52,667, नए मामले- 2,436, संक्रमण से हुई कुल मौतें- 1,695, संक्रमणमुक्त मरीज- 15,786 । अभी 35,178 मरीजों का अस्पतालों में इलाज चल रहा है। राज्य में कोरोना वायरस के लिए अब तक 3,78,555 लोगों की जांच की गई है।

केंद्रीय मंत्री सदानंद गौड़ा विवाद में घिरे

केंद्रीय मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा सोमवार को उस वक्त विवादों में आ गये, जब वह दिल्ली से एक उड़ान से यहां हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद पृथक-वास में नहीं गये। उन्होंने अपने इस कदम का बचाव करते हुए कहा कि वह औषध (फार्मास्यूटिकल्स) विभाग का प्रभारी होने के नाते छूट प्राप्त श्रेणी में आते हैं। कर्नाटक सरकार ने भी उनका बचाव करते हुए कहा कि केंद्र ने आवश्यक सेवाओं का प्रबंधन करने वाले लोगों को पृथक-वास में जाने से छूट देने का आदेश जारी किया था। बेंगलुरू (उत्तर) सीट से सांसद गौड़ा एक वाणिज्यिक उड़ान से यहां पहुंचने के बाद पृथक-वास में गये बगैर एक सरकारी कार से वहां से निकल गये। जबकि कोविड-19 के अत्यधिक मामले वाले राज्यों से यहां आने वाले हवाई यात्रियों को कर्नाटक सरकार ने पृथक-वास में जाने का आदेश दे रखा है। देश में घरेलू उड़ान सेवाएं दो महीने बाद बहाल हुई हैं। केंद्रीय मंत्री के इस कदम से विवाद पैदा हो गया क्योंकि कई लोगों ने सोशल मीडिया पर उन पर नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया जबकि अन्य ने कहा कि नियम-कानून सिर्फ आम आदमी के लिये है, मंत्रियों सहित वीवीआईपी के लिये नहीं। सरकार द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के मुताबिक कोविड-19 के अत्यधिक मामले वाले राज्यों-महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली, तमिलनाडु, राजस्थान और मध्य प्रदेश से आने वाले यात्रियों को सात दिनों के लिये पृथक-वास में रहना होगा और उसके लिये उन्हें पैसे देने होंगे। गौड़ा ने खुद का बचाव करते हुए कहा कि आवश्यक आपूर्ति के दायरे में आने वाले ‘फार्मास्यूटिकल्स’ विभाग का प्रभारी मंत्री होने के नाते वह छूट प्राप्त श्रेणी में आते हैं और इसलिए उन्हें वहां से जाने की अनुमति दी गई। रसायन एवं उर्वरक मंत्री ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘...आपको लोगों को कोविड-19 को नियंत्रित करने के लिये काम करने देने की जरूरत है। यदि आप कहते हैं कि किसी को बाहर नहीं आना चाहिए, तो क्या आप इसे रोक सकते हैं? फार्मा मंत्री होने के नाते मुझे उत्पादन, आपूर्ति की जांच करने और यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि यह अंतिम पायदान तक पहुंचे, यह मेरी जिम्मेदारी है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘...मेरे मोबाइल फोन पर आरोग्य सेतु ऐप भी यह प्रदर्शित करता है मैं सुरक्षित हूं। हर चीज की जांच करने के बाद हम एक जिम्मेदार तरीके से काम कर सकते हैं। यदि हम अपनी इच्छा के अनुसार विचरण करेंगे, तो मोदी (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) भी हमें नहीं बख्शेंगे।’’ कनार्टक में कोविड-19 के लिये प्रवक्ता एवं राज्य के मंत्री एस सुरेश कुमार ने कहा, ‘‘उन्हें (गौड़ा को) फार्मा सेक्टर का प्रभारी मंत्री होने के नाते छूट प्राप्त है...इस बारे में केंद्र सरकार ने पहले ही आदेश जारी किये हैं।’’ बाद में, राज्य के मंत्रियों एवं अधिकारियों के साथ गौड़ा ने एक बैठक भी की। उन्होंने कहा कि हवाई अड्डे से रवाना होने से पहले उनके शरीर के तापमान की भी जांच की गई। मंत्री ने कहा कि वह किसी के संपर्क में नहीं आये हैं और इस उड़ान में सिर्फ 11 यात्री थे।

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रेल भवन फिर बंद

रेल भवन में सोमवार को एक कर्मचारी के कोरोना वायरस से संक्रमित पाए जाने के बाद रेलवे मंत्रालय के सभी कार्यालय अगले दो दिन के लिए बंद कर दिए गए हैं। एक पखवाड़े से कम समय के भीतर ऐसा दूसरी बार हुआ है। रेलवे मुख्यालय की इमारत में पांचवां मामला सामने आने के बाद एक आदेश में कहा गया, ‘‘रेलवे बोर्ड के कुछ अधिकारी हाल में कोविड-19 से पीड़ित पाए गए हैं। तदनुसार निर्णय किया गया है कि रेल भवन में कमरों तथा सामान्य क्षेत्रों को संक्रमणमुक्त करने के लिए 26 और 27 मई को रेल भवन स्थित सभी कार्यालय बंद रहेंगे।’’ इसमें कहा गया कि रेल भवन की चौथी मंजिल गहन संक्रमणमुक्ति अभियान के लिए शुक्रवार तक बंद रहेगी। रेल भवन का एक कर्मचारी सोमवार को कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया। रेलवे मुख्यालय की इस इमारत में दो सप्ताह से कम समय में कोविड-19 का यह पांचवां मामला है। सूत्रों ने बताया कि 19 मई तक कार्यालय आया चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी सोमवार को कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया। रेल भवन में उसके संपर्क में आए नौ लोगों को घर में पृथक-वास में भेज दिया गया है। इस संबंध में एक अधिकारी ने कहा कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का काम फाइलों को एक अधिकारी से दूसरे अधिकारी के पास ले जाने का होता है और इस तरह वह पूरे दिन अनेक लोगों के संपर्क में आता है। ये फाइल रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और यहां तक कि रेल मंत्री के पास भी जा सकती हैं। इस तरह संक्रमण फैलता है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब रेलवे की एक वरिष्ठ अधिकारी रविवार को कोरोना वायरस से संक्रमित मिली थीं और यह रेलवे मुख्यालय में एक सप्ताह से कम समय में चौथा मामला था। संबंधित वरिष्ठ अधिकारी पिछली बार 20 मई को काम पर आई थीं। उनके साथ करीब से काम करने वाले कम से कम 14 अधिकारियों को घर में पृथक-वास में भेज दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि नए मामले से पहले 22 मई को रेल भवन में एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी कोरोना वायरस से संक्रमित मिली थीं। यह अधिकारी रेलवे रक्षा बल (आरपीएफ) सेवा के कैडर पुनर्गठन पर काम कर रही थीं। वह पिछली बार 13 मई को काम पर आई थीं और उसी दिन एक कनिष्ठ आरपीएफ अधिकारी के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई थी। उन्होंने कहा कि इस रेलवे अधिकारी का निवास दिल्ली स्थित कॉमनवेल्थ गेम्स विलेज अपार्टमेंट में है जहां रेलवे के कई वरिष्ठ अधिकारी रहते हैं। अधिकारियों ने बताया कि उनके साथ करीब से काम करने वाले संयुक्त सचिव स्तर के एक अधिकारी को 14 दिन के लिए गृह-पृथक-वास में भेजा गया है, जबकि कुछ कनिष्ठ अधिकारियों से खुद को पृथक करने और चार जून को कार्यालय आने को कहा गया है। सूत्रों ने बताया कि अधिकारी मधुमेह से पीड़ित थीं और उन्होंने कोरोना वायरस से बचाव के लिए जरूरी सभी सावधानियां बरती थीं। हालांकि, उन्हें हल्का बुखार है और घर में निगरानी में हैं। रेल भवन में चौथी मंजिल स्थित आरपीएफ कार्यालय के कनिष्ठ अधिकारी इमारत में कोरोना वायरस से संक्रमित पाए जाने वाले पहले व्यक्ति हैं। उनकी जांच रिपोर्ट 13 मई को आई थी। इसके बाद एक और मामला सामने आया जिसमें इमारत के आसपास से बंदरों को भगाने वाला लंगूर संचालक 14 मई को संक्रमित पाया गया। इन मामलों के मद्देनजर रेलवे ने 14 और 15 मई को संक्रमणमुक्ति अभियान के लिए इमारत को बंद कर दिया था।

चुनौती का सामना

कोविड—19 के मद्देनजर लागू देशव्यापी लॉकडाउन के कारण मध्य प्रदेश में अब तक 13.74 लाख से अधिक प्रवासी श्रमिकों के अपने घरों को वापस आने से राज्य सरकार को इनको रोजगार मुहैया कराने में बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पिछले सप्ताह टेलीविजन के माध्यम से प्रदेश की जनता को संबोधित करते हुए कहा था कि कोविड—19 के कारण प्रदेश की अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो गई है। दिल्ली से 18 मई को टीकमगढ़ जिले के अपने गांव गोपालपुरा वापस पहुंचे मजदूरों छिदामी कुशवाह (35) एवं उसकी पत्नी सगुन देवी (32) ने सोमवार को दावा किया है कि अब तक मध्यप्रदेश सरकार से उन्हें किसी प्रकार की मदद नहीं मिली है। छिदामी कुशवाह के भाई सूरज कुशवाह (28) भी उनके साथ दिल्ली से वापस आये हैं। छिदामी कुशवाह ने बताया, 'हम तीनों दिल्ली एवं हरियाणा में भवन निर्माण के कार्य में मजदूरी का काम किया करते थे। अब तक मध्य प्रदेश सरकार से हमें कोई आर्थिक मदद नहीं मिली है। मेरे पिताजी सुखलाल कुशवाह अब हमारी जरूरतों को पूरा कर रहे हैं।' उन्होंने कहा कि हम तीनों के पास महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत टीकमगढ़ में सक्रिय जॉब कार्ड नहीं है। छिदामी ने बताया, 'हम बेहतर आजीविका के लिए करीब दो साल पहले हरियाणा चले गये थे। लेकिन, कोरोना वायरस की महामारी के चलते हमें पिछले सप्ताह अपने गांव वापस आना पड़ा। इसलिए हमने अपने जॉब कार्डों का नवीनीकरण नहीं करवाया। यदि हमारे पास सक्रिय जॉब कार्ड होते, तो हमें भी मनरेगा के तहत 202 रुपये रोजाना के हिसाब से मजदूरी मिल जाती। फिलहाल हम बेरोजगार हैं।' वहीं, लॉकडाउन के बाद दिल्ली से इसी गोपालपुरा गांव में आये एक अन्य प्रवासी मजदूर परमानंद कुशवाह ने कहा कि उसे भी मध्य प्रदेश सरकार की ओर से कोई आर्थिक मदद अब तक नहीं मिली है। परमानंद कुशवाह दिल्ली में बिल्डिंग निर्माण के काम में वेल्डिंग का काम किया करता था। टीकमगढ़ में एक पंचायत सचिव ने अपना नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि निर्माण कार्य में आधुनिकीकरण के चलते मरनेगा में रोजगार बहुत कम हो गया है। उन्होंने कहा कि आजकल मजदूरों की जगह मशीनों एवं वाहनों का उपयोग बिल्डिंग निर्माण एवं अन्य निर्माण कार्यों में होने लगा है। इससे मजदूर परेशान हैं। टीकमगढ़ बुंदेलखंड क्षेत्र में आता है। इसके अलावा, स्थानीय मजदूर कोविड—19 के डर से इन प्रवासी मजदूरों को अपने साथ काम पर रखने का भी विरोध कर रहे हैं। इससे अपने घर वापस आये इन प्रवासी मजदूरों को काम पाने में और दिक्कत आ रही है। मध्य प्रदेश के सीधी जिले के मोहनिया गांव के खेतिहर मजदूर मोतीलाल केवट (45) ने बताया, 'स्थानीय मजदूर प्रवासी मजदूरों को गांवों में रोजगार देने के खिलाफ हैं, क्योंकि स्थानीय मजदूरों को भय है कि प्रवासी मजदूर अपने साथ कोरोना वायरस की महामारी को ला सकते हैं और इससे वे भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।' हालांकि, मध्य प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (पंचायत एवं ग्रामीण विकास) मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि राज्य सरकार प्रदेश में आये प्रवासी मजदूरों के लिए रोजगार मुहैया करा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार पूरी मेहनत से काम रही है और अपने घर आये प्रवासी मजदूरों को प्राथमिकता के साथ रोजगार, भोजन एवं स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवा रही है। श्रीवास्तव ने बताया, 'अभी तक 13.74 लाख से अधिक मजदूर मध्यप्रदेश में अपने घर वापस आ गये हैं। इनमें से 10 लाख से अधिक मजदूरों को उनके घरों में ही पृथकवास किया गया है, जबकि 61,000 मजदूरों को संस्थागत पृथकवास केन्द्रों जैसे पंचायत घरों एवं स्कूलों में रखा गया है।' उन्होंने कहा कि इन प्रवासी मजदूरों के जॉब कार्ड बनाने का काम चल रहा है। इसके अलावा, इनके जॉब कार्डों को नवीनीकरण भी किया जा रहा है। जैसे ही इनके जॉब कार्ड बन जाएंगे और इनके पृथकवास का 14 दिन का समय पूरा हो जाएगा, उन्हें मनरेगा के तहत रोजगार दे दिया जाएगा। श्रीवास्तव ने बताया कि कुछ प्रवासी मजदूरों को हम मनरेगा के तहत काम दे भी चुके हैं। उन्होंने कहा कि प्रवासी मजदूरों के अपने घर पहुंचने से पहले हम उनकी मेडिकल जांच करते हैं और उनका पूरा ध्यान रखते हैं। श्रीवास्तव ने बताया कि अब तक प्रदेश में 198 मजदूर कोरोना वायरस के संक्रमित पाये गये हैं। उन्होंने दावा किया, 'मध्य प्रदेश में आज प्रतिदिन 37 लाख लोगों को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत रोजगार मिल रहा है। मध्य प्रदेश में मनरेगा में रोजाना 37 लाख मजदूरों को रोजगार देना अब तक का कीर्तिमान है। इनमें वे श्रमिक भी शामिल हैं जो बाहर से आकर पृथकवास पर नहीं हैं।' मध्य प्रदेश सरकार ने पिछले महीने कहा था कि लॉकडाउन के कारण फंसे हुए 22 राज्यों के करीब 7,000 प्रवासी मजदूरों को प्रदेश सरकार 1,000 रूपये आर्थिक मदद मुहैया कराएगी। जब उनसे सवाल किया गया कि कुछ प्रवासी मजदूरों की शिकायत है कि उन्हें मध्य प्रदेश सरकार से यह 1,000 रूपये की आर्थिक सहायता अब तक नहीं मिली, इस पर श्रीवास्तव ने बताया, 'वह हमारे विभाग का काम नहीं है। वह श्रम विभाग का काम है। हमारा काम तो श्रमिकों को काम देना है।'

करीब 99 हजार लोग निगरानी में

केरल में सोमवार को कोविड-19 के 49 नये मामले सामने आए हैं जिनमें एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता और हिरासत में रखे गए दो व्यक्ति शामिल हैं। इसके साथ ही प्रदेश में कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 896 हो गई है जबकि करीब 99 हजार लोगों को निगरानी में रखा गया है। केरल सरकार द्वारा जारी विज्ञप्ति के मुताबिक, प्रदेश में 359 लोग उपचाराधीन हैं। इसमें बताया गया कि नये मामलों में 18 वे हैं जो विदेश से आए हैं जबकि 25 हाल में दूसरे प्रदेशों (महाराष्ट्र से 17, तमिलनाडु से चार, दिल्ली और कर्नाटक से दो-दो) से आए हैं। प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक ,छह अन्य लोग कोविड-19 मरीजों के संपर्क में आने से संक्रमित हुए हैं जिनमें तिरुवनंतपुरम का स्वास्थ्य कार्यकर्ता और कन्नूर में हिरासत में रखे गए दो व्यक्ति शामिल हैं। स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा ने बताया कि कासरगोड में सबसे अधिक 14 नये मामले सामने आए हैं। वहीं, कन्नूर में 10, तिरुवनंतपुरम और पलक्कड़ में पांच-पांच, कोझिकोड में चार, पथनमथिट्टा और अलपुझा में तीन-तीन मामले, कोल्लम और कोट्टयम में दो-दो और इडुकी जिले में एक मामला सामने आया है। उन्होंने बताया कि अब तक 532 लोग ठीक हो चुके हैं जिनमें से 12 लोगों को सोमवार को अस्पताल से छुट्टी दी गई जबकि 359 लोग उपचाराधीन हैं। विज्ञप्ति के मुताबिक, राज्य में 97,247 लोग बाहर से आए हैं जिनमें से हवाई मार्ग से 8,390, समुद्री मार्ग से 1,621, सड़क मार्ग से 82,678 और रेलमार्ग से 4,558 लौटे लोग शामिल हैं। सरकार के मुताबिक, राज्य में कम से कम 99,278 लोगों को निगरानी में रखा गया है। इनमें से 98,486 गृह या संस्थागत पृथक-वास में रखे गए हैं। वहीं 792 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है जिनमें से 152 लोगों को सोमवार को भर्ती कराया गया। विज्ञप्ति के मुताबिक, राज्य में अब तक 54,899 लोगों के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं जिनमें से 53,704 नमूनों की रिपोर्ट निगेटिव आई है। राज्य में सबसे अधिक संक्रमित स्थानों (हॉटस्पॉट)के रूप में चिह्नित जगहों की सूची में चार और स्थानों को जोड़ा गया जिससे ऐसे कुल स्थानों की संख्या बढ़कर 59 हो गई है। विज्ञप्ति के मुताबिक, कन्नूर में सबसे अधिक 77 उपचाराधीन मरीज हैं जबकि पलक्कड़ में 53 और मामल्लापुरम में 48 उपचाराधीन मरीज है।

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नागरिकों को बुलाने का फैसला

चीन ने भारत में फंसे अपने छात्रों, पर्यटकों और कारोबारियों समेत अन्य नागरिकों को वापस बुलाने का फैसला किया है, जो यहां कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं और अपने घर लौटना चाहते हैं। चीनी दूतावास ने सोमवार को अपनी वेबसाइट पर नोटिस लगाया है जिसमें कहा गया है कि जो लोग घर लौटना चाहते हैं, वे विशेष उड़ानों में टिकट बुक कराएं। भारत में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और रोगियों की संख्या करीब 1.40 लाख होने वाली है। ऐसे में चीन ने अपने नागरिकों को यहां से वापस बुलाने का फैसला किया है। कोरोना वायरस की शुरुआत दिसंबर में चीन के वुहान शहर से हुई थी। दुनियाभर में इस वायरस से 54 लाख से अधिक लोग संक्रमित हुए हैं और 3.4 लाख से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। भारत ने फरवरी में वुहान से करीब 700 भारतीयों को निकाला था। चीनी दूतावास के नोटिस में कहा गया है कि घर वापसी करना चाह रहे लोगों को उड़ान के दौरान तथा चीन में प्रवेश के बाद पृथक-वास एवं महामारी रोकथाम संबंधी सभी नियमों का पालन करना होगा। मंदारिन भाषा में प्रकाशित नोटिस में कहा गया है कि पिछले 14 दिन में कोरोना वायरस का इलाज कराने वाले या बुखार और खांसी जैसे संक्रमण के लक्षण रखने वालों को विशेष उड़ानों में यात्रा नहीं करनी चाहिए। इसमें कहा गया है कि यात्रा के टिकट और चीन में पृथक-वास में रहने का खर्च नागरिक को उठाना होगा।

सात और की मौत

तमिलनाडु में कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से सात और लोगों की मौत हो गई जबकि एक दिन में सबसे अधिक 805 नये मामले सामने आने के साथ राज्य में कुल संक्रमितों की संख्या 17 हजार के पार हो गई है। तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री सी विजय भास्कर ने बताया कि नये मामले सामने आने के साथ कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 17,082 हो गई है। उन्होंने बताया कि सात और कोविड-19 मरीजों की मौत के साथ तमिलनाडु में संक्रमण से मरने वालों की संख्या 118 हो गई है। मंत्री ने पत्रकारों को बताया कि अभी चेन्नई में कोविड-19 के सबसे अधिक मामले सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि सोमवार को सामने आए नये मामलों में 549 अकेले चेन्नई से हैं। भास्कर ने बताया कि राज्य में 407 लोगों को संक्रमण मुक्त होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दी गई।

केवल आवश्यक सेवाओं से जुड़े लोगों को ही अनुमति

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के प्रशासन ने गत दिनों कोरोना वायरस से संक्रमण के बढ़ते मामलों के मद्देनजर सोमवार को दिल्ली से लगी जिले सीमा दोबारा सील कर दी। आधिकारिक आदेश के मुताबिक चिकित्सकों, पैरामेडिकल कर्मी, पुलिस, बैंक कर्मी और मीडिया कर्मियों सहित आवश्यक सेवा से जुड़े लोगों को ही पहचान पत्र दिखाने के बाद दिल्ली-गाजियाबाद सीमा पार करने की अनुमति दी जाएगी। जिलाधिकारी अजय कुमार पांडेय ने आदेश में कहा, ''हाल के दिनों में कोविड-19 के मामले बढ़े हैं। इन बढ़े हुए मामलों में बड़ा हिस्सा उन लोगों के हैं जो दिल्ली से गाजियाबाद आते जाते हैं। इसलिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) की अनुशंसा पर पहले (26 अप्रैल) की तरह दिल्ली-गाजियाबाद सीमा सील करने का फैसला किया गया है।’’ बयान में कहा गया कि यह पाबंदी अगले आदेश तक लागू रहेगी। आधिकारिक बयान के मुताबिक गाजियाबाद में रविवार शाम तक कोविड-19 के 227 मामले सामने आए हैं। गाजियाबाद में 18 सबसे अधिक संक्रमित स्थानों (हॉटस्पॉट) के रूप में पहचान की गई है जबकि पूरे शहरी क्षेत्र को रेड जोन में रखा गया है।

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ओडिशा में कोविड-19 के 99 मरीज स्वस्थ हुए

ओडिशा में सोमवार को कोविड-19 के सर्वाधिक 99 मरीज स्वस्थ हुए। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने एक बयान में एक बयान में कहा कि 99 मरीजों के स्वस्थ होने के साथ ही राज्य में अबतक 649 लोग कोविड-19 संक्रमण से मुक्त हो गये हैं। उसने कहा कि यह पहली बार है कि राज्य में एक दिन में इतने लोग स्वस्थ हो गये। सूत्रों के अनुसार जो 99 लोग सोमवार को स्वस्थ हुए, उनमें बालासोर के 34, गंजाम के 15, जाजपुर और केंद्रपाड़ा के 13-13, पुरी के 10, भद्रक के नौ, नयागढ़ के तीन तथा सुंदरगढ़ एवं देवगढ़ के एक-एक व्यक्ति हैं। अधिकारी ने बताया कि इन 99 लोगों के स्वस्थ हो जाने के बाद अब राज्य में कोविड-19 के उपचाराधीन मरीजों की संख्या घटकर 782 रह गयी है। राज्य में कोरोना वायरस संक्रमण के अबतक 1438 मामले सामने आये हैं, जिनमें से 104 मरीज पिछले 24 घंटे में सामने आये। राज्य में सात लोगों की अब तक इस बीमारी से मृत्यु हुई है। उनमें खुर्दा और गंजाम जिलों के तीन-तीन तथा कटक का एक मरीज शामिल है। इस बीच, विपक्षी कांग्रेस के विधायक और पूर्व मंत्री सुरेश राउत्रे ने उन व्यक्तियों की सूची मांगी जो इस संक्रामक बीमारी से मुक्त हुए हैं।

14 दिनों के अनिवार्य पृथकवास नियम खत्म होगा

स्पेन ने कहा कि वह एक जुलाई से विदेशों से आने वाले यात्रियों को दो हफ्ते तक अनिवार्य रूप से पृथकवास में रहने के नियम को खत्म करेगा। सरकार ने संक्षिप्त बयान में कहा कि कैबिनेट मंत्रियों ने सोमवार को हुई बैठक में अनिवार्य पृथकवास के नियम को हटाने का फैसला किया। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री पेड्रो सान्चेज़ ने पिछले सप्ताह घोषणा की थी कि उनका देश जुलाई महीने से कुछ विदेशियों का स्वागत करने को तैयार है। सरकार स्पेन के भीतर सुरक्षित गलियारा बनाने पर विचार कर रही है जहां पर महामारी नियंत्रण में है और इसी तरह का गलियारा यूरोप में बनाना चाहती है जो पर्यटकों का प्रमुख स्रोत है। हालांकि, यूरोपीय संघ के बाहर से आने वाले यात्रियों के लिए सीमा खोलने पर कोई बातचीत नहीं चल रही है। उल्लेखनीय है कि स्पेन दुनिया के उन देशों में है जहां सबसे अधिक पर्यटक आते हैं। यहां सालाना आठ करोड़ विदेशी पर्यटक आते हैं। स्पेन के सकल घरेलू उत्पाद में पर्यटन की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत है और करीब 26 लोगों को इसमें रोजगार मिला हुआ है। स्पेन के कैनेरी और बेलियारिक द्वीपों की अर्थव्यवस्था के लिए भी यह महत्वपूर्ण है।

नये स्वास्थ्य संकट का जोखिम

महिंद्रा समूह के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने सोमवार को कहा कि लॉकडाउन बढ़ाना न सिर्फ अर्थव्यवस्था के लिए घातक होगा, बल्कि यह एक नया स्वास्थ्य संकट भी पैदा करेगा। महिंद्रा ने ट्वीट किया, ‘‘लॉकडाउन को आगे बढ़ाना न सिर्फ अर्थव्यवस्था के लिए घातक होगा। बल्कि जैसा कि मैंने पहले भी ट्वीट कर कहा है कि यह एक अन्य स्वास्थ्य संकट को पैदा करने वाला होगा।’’ उन्होंने ‘लॉकडाउन के खतरनाक मनोवैज्ञानिक प्रभाव और कोविड-19 के अलावा अन्य मरीजों की अनदेखी’ विषय पर लिखे एक लेख का हवाला दिया। महिंद्रा ने लॉकडाउन के 49 दिन बाद इसे हटाने का प्रस्ताव किया था। उन्होंने कहा, ‘‘नीति निर्माताओं के लिए चयन करना आसान नहीं है, लेकिन लॉकडाउन से भी मदद नहीं मिलने वाली है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या लागतार बढ़ती रहेगी और हमारा पूरा ध्यान तेजी से अस्पताल के बिस्तरों की संख्या बढ़ाने और ऑक्सीजन की व्यवस्था करने पर होना चाहिए।’’ महिंद्रा ने इस काम में सेना की मदद लेने के लिए भी कहा, क्योंकि सेना के पास इसका तजुर्बा है।

-नीरज कुमार दुबे





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