Lockdown के 65वें दिन भी इसके लाभ और हानि को लेकर हुए आरोप-प्रत्यारोप

Lockdown के 65वें दिन भी इसके लाभ और हानि को लेकर हुए आरोप-प्रत्यारोप

उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रवासी मजदूरों की स्थिति पर संज्ञान लेते हुए इसे ‘दुर्भाग्यपूर्ण एवं दयनीय’ बताने के एक दिन बाद विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि इस चुनौतीपूर्ण समय में केंद्र और राज्य सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रहे हैं तथा बेहतरी के लिये हम तैयार हैं।

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि लॉकडाउन से ‘‘कई फायदे’’ हुए हैं और उनमें से सबसे महत्वपूर्ण यह है कि इसने कोविड-19 के प्रसार की ‘‘गति को कम’’ किया है। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में कोरोना वायरस के मामलों की संख्या 1,51,767 हो गई है और मृतकों की संख्या 4,337 पहुंच गई है। मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि बुधवार की सुबह आठ बजे तक 24 घंटे की अवधि में कोरोना वायरस संक्रमण के कुल 6,387 नये मामले सामने आये हैं और 170 मरीजों की मौत हुई है। देश में पिछले छह दिन में प्रतिदिन कोरोना वायरस के छह हजार से अधिक मामले सामने आ रहे हैं। मंत्रालय ने कहा, ‘‘लॉकडाउन के कई लाभ हुए हैं और इनमें से एक प्रमुख फायदा यह है कि इससे इस बीमारी का संक्रमण फैलने की गति कम हुई है।’’ मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा किए गए अनुमानों से पता चला है कि बड़ी संख्या में मौतों और मामलों को टाल दिया गया है। बयान में कहा गया है कि वहीं लॉकडाउन की अवधि के दौरान कोविड-19 विशिष्ट स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे का विकास, ऑनलाइन प्रशिक्षण मॉड्यूल और वेबिनार के माध्यम से मानव संसाधन की क्षमता का विकास, जांच क्षमता में वृद्धि, दवाओं का परीक्षण और टीका अनुसंधान आदि किए गए। इसमें कहा गया है, ‘‘लॉकडाउन के दौरान कोविड-19 प्रबंधन के लिए स्वास्थ्य ढांचे का विकास किया गया। देश में 27 मई की तिथि तक 930 समर्पित कोविड अस्पतालों में 1,58,747 पृथक बिस्तर हैं, 20,355 आईसीयू बिस्तर और 69,076 ऑक्सीजन सुविधा से लैस बिस्तर उपलब्ध हैं।’’ बयान में कहा गया है कि इसके अलावा देश में कोविड-19 से निपटने के लिए 10,341 पृथक केन्द्र और 7,195 कोविड देखभाल केन्द्र और 6,52,830 बिस्तर उपलब्ध हैं। मंत्रालय ने कहा कि केन्द्र ने राज्यों, केन्द्र शासित प्रदेशों और केन्द्रीय संस्थानों को 113.58 लाख एन95 मास्क और 89.84 लाख व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) उपलब्ध कराये हैं। उसने कहा कि 435 सरकारी प्रयोगशालाओं और 189 निजी प्रयोगशालाओं के जरिये देश में जांच क्षमता को बढ़ाया गया है। मंत्रालय ने कहा कि भारत की कोविड-19 से मृत्यु दर 2.86 प्रतिशत है, जबकि विश्व औसत 6.36 प्रतिशत है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने कहा कि सुबह नौ बजे तक कोविड-19 के लिए अब तक 32,42,160 नमूनों की जांच की गई है। पिछले 24 घंटे में 1,16,041 नमूनों की जांच की गई है।

भाजपा का पलटवार

लॉकडाउन को ‘फेल’ बताने के राहुल गांधी के बयान पर पलटवार करते हुए भाजपा ने बुधवार को आरोप लगाया कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष गलत बयानबाजी करके और तथ्यों को गलत एवं गैर जिम्मेदाराना तरीके से पेश करके कोविड-19 महामारी के खिलाफ देश की लड़ाई के संकल्प को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं तथा उन्हें इस विषय पर दुनिया के आंकड़ों पर ध्यान देना चाहिए। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने संवाददाताओं से कहा कि राहुल गांधी ने पहले कहा था कि लॉकडाउन कोई समाधान नहीं है। लेकिन पंजाब और राजस्थान में उनकी पार्टी की सरकार ने पहले ही 31 मई तक लॉकडाउन को बढ़ा दिया। केंद्रीय मंत्री ने सवाल किया, ''क्या आपके (राहुल) मुख्यमंत्री आपकी नहीं सुनते?’’ उन्होंने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष से पूछा कि क्या आपके मुख्यमंत्री लॉकडाउन और गरीबों को नकद देने के सुझाव पर अमल नहीं करते? रविशंकर प्रसाद ने कहा कि दुनिया के 15 ऐसे देश जहां कोरोना बड़ी बीमारी बन गया है उसकी आबादी 142 करोड़ है। उसमें अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा व अन्य देश हैं। इन देशों में 26 मई तक करीब 3.43 लाख लोगों की मृत्यु कोरोना से हुई है। उन्होंने कहा कि भारत की आबादी 137 करोड़ है और हमारे देश में 4,345 लोगों की मृत्यु हुई है। 64 हजार से ज्यादा लोग ठीक हुए हैं। वैसे मृत्यु कहीं भी हो, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रसाद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रंटफुट पर खेल रहे हैं और उन्होंने लॉकडाउन करके देश को एकजुट किया है। भाजपा ने राहुल गांधी पर निशाना साधने के लिये ‘‘‘कोविड के खिलाफ भारत की लड़ाई को कौन कमजोर बना रहा’’ शीर्षक से एक पुस्तिका भी जारी की। इस पुस्तिका में राहुल गांधी की टिप्पणियां और कोरोना वायरस से निपटने में मोदी सरकार के सकारात्मक प्रयासों संबंधी रिपोर्ट का संकलन किया गया है। रविशंकर प्रसाद ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने नकारात्मकता फैला कर, संकट के समय राष्ट्र के खिलाफ काम करके, झूठा श्रेय लेने का प्रयास करके, गलत तथ्यों और झूठी खबरें फैलाकर देश का संकल्प कैसे कमजोर करने की कोशिश की और उनकी कथनी एवं करनी में भी अंतर रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में मजदूरों की टिकट के लिए भी झूठे आरोप लगाए कि टिकट का पैसा लिया जा रहा है और राजनीतिक विरोध में आईसीएमआर जैसी संस्थाओं पर भी झूठे आरोप लगाए। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘जब से कोरोना संकट आया है तब से राहुल गांधी इस लड़ाई में देश के संकल्प को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि वह (राहुल) झूठ बोलकर, गलत बयानबाजी करके और तथ्यों को गलत तरीके से बातें पेश कर रहे हैं। गौरतलब है कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने देश में चार चरणों में लगाए गए लॉकडाउन के विफल रहने का आरोप लगाते हुए मंगलवार को कहा था कि प्रधानमंत्री को बताना चाहिए कि आगे कोरोना संकट से निपटने और जरूरतमंदों को मदद देने की उनकी रणनीति क्या है? उन्होंने अपनी मांग दोहराई थी कि गरीबों और मजदूरों को 7500 रूपये की मदद दी जाए और राज्य सरकारों को केंद्र की तरफ से पूरी मदद मिले। राहुल ने बुधवार को पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट प्रोफेसर आशीष झा से बात की और इसमें टेस्टिंग और लॉकडाउन जैसे मुद्दों पर चर्चा की। भाजपा नेता ने कहा कि जब कोरोना की कोई वैक्सीन नहीं है, तब ऐसे में लॉकडाउन ही एक उपाय है। दूसरी ओर, महाराष्ट्र में राजनीतिक अस्थिरता उत्पन्न करने का प्रयास करने के विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए प्रसाद ने कहा कि अभी भाजपा और केंद्र की प्राथमिकता कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई को आगे बढ़ाने की है हालांकि राज्य में व्यवस्था को बहुत ही जिम्मेदारी से आगे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि चीजें वहां (महाराष्ट्र में) नियंत्रण में नहीं हो सकती हैं लेकिन हमारी रूचि अभी वहां राजनीति में नहीं है, हमारी रूचि कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में है। उन्होंने सवाल किया कि क्या राहुल गांधी ने नहीं कहा था कि कांग्रेस वहां निर्णय लेने की सक्रिय भूमिका में नहीं है। राहुल पर निशाना साधते हुए प्रसाद ने कहा, ''आप (कांग्रेस) वहां की सरकार में घटक हैं, आपके वरिष्ठ नेता वहां मंत्री हैं। ऐसे में पल्ला नहीं झाड़ सकते।’’ उन्होंने कहा कि भाजपा नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने साफ कहा है कि सरकार गिराने में कोई रूचि नहीं है। प्रसाद ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी स्वयं महाराष्ट्र के साथ राजनीति कर रहे हैं।

राजधर्म

लॉकडाउन के कारण मुश्किल का सामना कर रहे मजदूरों के मामले में उच्चतम न्यायालय में अर्जी दाखिल करने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सुरजेवाला ने बुधवार को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि शीर्ष अदालत सरकार को राजधर्म निभाने के लिए बाध्य करेगी। उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘राष्ट्र निर्माता मज़दूरों के घावों पर मरहम लगाने, उन्हें नि:शुल्क घर पहुंचाने तथा आजीविका उपलब्ध कराने की अपनी जिम्मेवारी से मोदी सरकार पल्ला नही झाड़ सकती। न्यायालय यह सुनिश्चित करे कि सरकार संवैधानिक कर्तव्य का निर्वहन कर प्रवासी मज़दूरों-श्रमिकों के लिए एक राष्ट्रव्यापी प्लान लागू करे।’’ सुरजेवाला के मुताबिक, उन्हें विश्वास है कि उच्चतम न्यायालय सरकार को संवैधानिक जिम्मेदारी और राजधर्म निभाने के लिए बाध्य करेगा। सुरजेवाला ने कोविड-19 लॉकडाउन की वजह से देश में फंसे कामगारों की दुर्भाग्यपूर्ण और दयनीय स्थिति के मामले में बुधवार को उच्चतम न्यायालय में एक अर्जी दाखिल की। न्यायालय ने मंगलवार को ही इन कामगारों की स्थिति का स्वत: संज्ञान लेते हुये केन्द्र, सभी राज्य सरकारों तथा केन्द्र शासित प्रदेशों से जवाब मांगा है। यह मामला 28 मई को सुनवाई के लिये सूचीबद्ध है।

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आरोप पत्र दायर किया

दिल्ली पुलिस ने एक अदालत में निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात के मरकज़ में हुए कार्यक्रम में शिरकत करने वाले 294 विदेशी नागरिकों के खिलाफ बुधवार को आरोप पत्र दायर कर दिया। यह आरोप पत्र वीज़ा नियमों का उल्लंघन, अवैध तरीके से मिशनरी गतिविधियों में शामिल होने और कोरोना वायरस के मद्देनजर सरकारी की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के उल्लंघन के आरोप में दायर किया गया है। पुलिस ने मलेशिया, थाईलैंड, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका और कई अफ्रीकी देशों समेत 14 मुल्कों के नागरिकों के खिलाफ 15 आरोप पत्र दायर किए हैं। मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट सायमा जमील ने मामले की सुनवाई 17 जून को मुकर्रर की है। इससे पहले, पुलिस ने मंगलवार को इस मामले में 20 देशों के 82 नागरिकों के खिलाफ 20 आरोप पत्र दायर किए थे। नए आरोप पत्र के मुताबिक, विदेशी नागरिकों के खिलाफ, वीजा नियमों को तोड़ने, कोविड-19 महामारी के मद्देनजर जारी दिशानिर्देशों और महामारी अधिनियम तथा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के उल्लंघन के आरोप में मामला दर्ज किया गया था। उनके खिलाफ, भारतीय दंड संहिता की धारा 188 (लोक सेवक के आदेश की अवज्ञा करने), 269 (उपेक्षापूर्ण कार्य जिससे जीवन के लिए संकटपूर्ण रोग का संक्रमण फैलना संभव हो), 270 (परिद्वेषपूर्ण कार्य, जिससे जीवन के लिए संकटपूर्ण रोग का संक्रमण फैलना संभव हो), 271 (पृथक-वास में रहने की अवज्ञा) के तहत भी मामला दर्ज किया गया था। विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार नहीं किया गया है। पहले के आरोप पत्र के मुताबिक, चार आरोपी अफगानिस्तान के थे जबकि ब्राजील और चीन से सात-सात, अमेरिका से पांच, ऑस्ट्रेलिया, कज़ाकिस्तान, मोरक्को, ब्रिटेन से दो-दो, यूक्रेन, मिस्र, रूस, जॉर्डन, फ्रांस, ट्यूनीशिया और बेल्जियम से एक-एक, अल्जीरिया से आठ, सऊदी अरब से 10, फिजी से 14 और सूडान और फिलीपीन से छह-छह लोग हैं। दिल्ली के निमाजुद्दीन में हुए इज्तिमे (धार्मिक जमावड़ा) में शामिल होने वाले तबलीगी जमात के कई सदस्यों के कोरोना वायरस से संक्रमित पाए जाने के बाद देश में कोविड-19 के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई थी। इस कार्यक्रम में विदेशी नागरिकों समेत 9,000 लोगों ने हिस्सा लिया था।

लागू रहेंगे प्रतिबंधात्मक आदेश

देश में कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में शामिल इंदौर में प्रशासन हालांकि लॉकडाउन के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों में लगातार छूट दे रहा है। लेकिन उसका कहना है कि महामारी के संक्रमण को रोकने के लिये खासकर शहरी सीमा में कर्फ्यू और अन्य प्रतिबंधात्मक आदेश 31 मई के बाद भी लागू रहेंगे। कोरोना वायरस को लेकर लागू देशव्यापी लॉकडाउन का चौथा चरण 31 मई को समाप्त हो रहा है। हालांकि, कोविड-19 का प्रकोप कायम रहने के कारण इंदौर जिला रेड जोन में बना हुआ है। जिलाधिकारी मनीष सिंह ने बुधवार को बताया, "आम लोगों की जरूरतों को देखते हुए हम लॉकडाउन में लगातार छूट देते हुए विभिन्न गतिविधियां बहाल कर रहे हैं। लेकिन खासकर शहरी सीमा में 31 मई के बाद भी कर्फ्यू और अन्य प्रतिबंधात्मक आदेश लागू रहेंगे तथा केवल उन्हीं गतिविधियों से जुड़े लोगों को घर से बाहर निकलने की अनुमति मिलेगी जिन्हें हमने हरी झंडी दिखायी है।" सिंह ने यह भी बताया कि शहर के निजी दफ्तरों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर 33 प्रतिशत कर्मचारियों के साथ दोबारा खोलने की अनुमति दिये जाने पर विचार किया जा रहा है। लेकिन यह अनुमति धीरे-धीरे दी जायेगी। उन्होंने कहा, "लॉकडाउन के चलते हमें कोविड-19 के प्रकोप पर नियंत्रण पाने में काफी हद तक सफलता मिली है। लेकिन आम लोगों को आने वाले दिनों में भी इस महामारी से बचाव के पूरे उपाय अपनाने की जरूरत है, तभी जिला रेड जोन से बाहर आ सकेगा।" इंदौर जिले में अब तक कोविड-19 के 3,182 मरीज मिले हैं। इनमें से 119 लोगों की इलाज के दौरान मौत हो गयी है। जिले में कोरोना वायरस के प्रकोप की शुरूआत 24 मार्च से हुई, जब पहले चार मरीजों में इस महामारी की पुष्टि हुई थी। कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिये प्रशासन ने इंदौर की शहरी सीमा में 25 मार्च से कर्फ्यू लगा रखा है, जबकि जिले के अन्य स्थानों पर कुछ छूटों के साथ लॉकडाउन लागू है।

उप्र में अब तक 1337 ट्रेनें

कोरोना वायरस के कारण जारी लॉकडाउन के आलोक में देश के विभिन्न राज्यों में फंसे उत्तर प्रदेश के करीब 18 लाख लोगों को 1337 श्रमिक ट्रेनों के माध्यम से प्रदेश में वापस लाया जा चुका है। इनमें से सबसे अधिक 474 ट्रेनें गुजरात से आयी हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार ने 1511 गाड़ियों की व्यवस्था की है। इनमें से 104 ट्रेनें अभी रास्ते में हैं। इसके अलावा प्रदेश में मास्क नहीं पहनने पर 13 हजार से अधिक लोगों का चालान किया गया है। प्रदेश के गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी ने बुधवार को संवाददाताओं को बताया कि करीब एक लाख 47 हजार श्रमिक राज्य के सिध्दार्थनगर जिले में आ चुके हैं। उन्होंने बताया कि इसके बाद महाराजगंज, सीतापुर और हरदोई जिले में क्रमश: एक लाख तीन हजार, 50 हजार तथा 58 हजार श्रमिक वापस आ चुके हैं। उन्होंने बताया कि गोरखपुर में कामगारों/श्रमिकों को लेकर अब तक 219 ट्रेनें आ चुकी हैं और इस प्रकार गोरखपुर रेलवे जंक्शन पूरे देश में सर्वाधिक श्रमिक स्पेशल ट्रेन रिसीव करने वाला स्टेशन बन गया है। अवस्थी ने बताया कि इसी प्रकार लखनऊ में करीब 89, वाराणसी में 89, जौनपुर में 99, बलिया में 64, आगरा में 10, कानपुर में 17, बरेली में 12, प्रयागराज में 58, रायबरेली में 20, प्रतापगढ़ में 65, अमेठी में 14, मऊ में 44, अयोध्या में 35, गोंडा में 63, उन्नाव में 27, बस्ती में 67, आजमगढ़ में 33, कन्नौज में तीन, गाजीपुर में 31, बांदा में 16 ट्रेनों के अलावा अन्य जनपदों में भी गाड़ियां आ चुकी हैं। अवस्थी ने बताया कि देश में सबसे अधिक कामगार उप्र में आये हैं। प्रदेश में 1511 ट्रेनों के माध्यम से 21 लाख से अधिक कामगारों एवं श्रमिकों को वापस लाने की की व्यवस्था की गयी है, उन्होंने बताया कि इनमें से अब तक 1337 ट्रेनों से लगभग 18 लाख लोग प्रदेश वापस आ चुके हैं। अधिकारी ने बताया कि संबंधित जनपदों के जिलाधिकारी ट्रेन से आने वाले कामगारों एवं श्रमिकों का स्वास्थ्य परीक्षण कराकर उन्हें उनके घर तक पहुंचाने की व्यवस्था कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रवासी श्रमिकों को दूसरे राज्यों से लेकर आने का सिलसिला लगातार जारी है। अवस्थी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि राज्य सरकार केंद्र के सहयोग से प्रदेश के श्रमिकों को दूसरे राज्यों से यहां लाना सुनिश्चित कर रही है और प्रदेश आने वाले श्रमिकों की स्क्रीनिंग करते हुए उन्हें पृथक—वास केंद्र में अथवा में घर में ही पृथक रहने तथा जरूरतमंदों को कम्युनिटी किचन से शुद्ध एवं भरपेट भोजन की व्यवस्था की जाए। उन्होंने बताया कि इसके अलावा मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि पृथक—वास केंद्र में उनके कौशल की जांच करते हुये उनका मोबाइल नम्बर एवं बैंक खाता संख्या सहित सम्पूर्ण विवरण संकलित किया जाए जिससे उनलोगों को रोजगार प्रदान करने में सुविधा होगी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने कहा है कि घर में पृथक रहने वाले श्रमिकों को खाद्यान्न किट उपलब्ध कराई जाए तथा इस दौरान उन्हें एक हजार रुपए का भरण-पोषण भत्ता अवश्य उपलब्ध कराया जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि यदि किसी कामगार/श्रमिक का बैंक खाता किन्हीं कारणों से निष्क्रिय हो गया हो तो प्रशासन सम्बन्धित बैंक शाखा से सम्पर्क करते हुए उन खातों को अविलम्ब सक्रिय कराएं ताकि भरण-पोषण भत्ते की धनराशि उनके खाते में भेजे जायें। अवस्थी ने बताया कि कोरोना वायरस के दृष्टिगत प्रदेश में लॉकडाउन की अवधि में पुलिस विभाग द्वारा की गयी कार्यवाही में अब तक धारा 188 के तहत 58,436 लोगों के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है। प्रदेश में अब तक 48,79,087 वाहनों की सघन जांच में 46,668 वाहन जब्त किये गये हैं। उन्होंने बताया कि जांच अभियान के दौरान 22,21,42,851 रूपए का शमन शुल्क वसूल किया गया है और आवश्यक सेवाओं के लिये कुल 2,66,817 वाहनों को परमिट जारी किये गये हैं। अधिकारी ने बताया कि मास्क न पहनने पर 13 हजार से अधिक लोगों का चालान किया गया है।

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रामगोपाल वर्मा ने बनाई कोरोना वायरस पर फिल्म

फिल्मकार रामगोपाल वर्मा ने बुधवार को कहा कि उन्होंने लॉकडाउन के बीच सभी जरूरी एहतियातों और दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए 'कोरोना वायरस' नामक फिल्म की शूटिंग की है। गौरतलब है कि देश में कोरोना वायरस के प्रसार से बचने के लिये मार्च के मध्य से सभी फिल्मों और टीवी धारावाहिकों की शूटिंग बंद है। वर्मा ने ट्विटर पर फिल्म का ट्रेलर जारी करते हुए कहा कि यह फिल्म महामारी पर आधारित है। फिल्म का निर्माण अगस्थ्या मंजू ने किया है जबकि वर्मा निर्माता के तौर पर इससे जुड़े हैं। वर्मा ने पृथक-वास की अपनी वीडियो डालने वाली हस्तियों पर निशाना साधते हुए कहा 'जब फिल्मों से जुड़े लोग पोछा लगाने, खाना पकाने और बर्तन धोने और कपड़े सुखाने आदि के वीडियो डाल रहे हैं, मैंने एक फिल्म बना डाली।' 

केरल में कोरोना वायरस के 40 नये मामले सामने आये

केरल में कोरोना वायरस के 40 नये मामले सामने आने के बाद इस महामारी के मामलों की संख्या एक हजार के पार पहुंच गई है। कोरोना वायरस से संक्रमित पाये गये 40 लोगों में से 37 विदेश और अन्य राज्यों से लौटे हैं। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने पत्रकारों से कहा कि राज्य में कोरोना वायरस के मामलों की कुल संख्या 1003 पहुंच गई है। इस समय 445 लोगों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है और 1.7 लाख से अधिक लोग निगरानी में है। उन्होंने बताया कि कुल 552 लोग स्वस्थ हो चुके हैं और इस महामारी से छह लोगों की मौत हुई है। विजयन ने बताया कि कासरगोड में आज सबसे अधिक 10 मामले सामने आये हैं जबकि पलक्कड़ में आठ, अलाप्पुझा में सात, कोल्लम में चार, पथानामथिट्टा में तीन, वायनाड में तीन, कोझीकोड में दो, एर्नाकुलम में दो और कन्नूर में एक मामला सामने आया है। नये मामलों में से जो नौ लोग इस वायरस से संक्रमित पाये गये हैं, वे विदेश से आये हैं जबकि 28 लोग अन्य राज्यों से आये हैं, जिनमें महाराष्ट्र से 16, तमिलनाडु से पांच, दिल्ली से तीन, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश से एक-एक व्यक्ति शामिल हैं। तीन लोग संक्रमित लोगों के संपर्क में आने से संक्रमित हुए हैं। इस महामारी से 10 और लोग स्वस्थ हो गये हैं और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

आरटी-पीसीआर जांच किट को मंजूरी

स्वास्थ्य क्षेत्र की आईजेनेटिक डायग्नॉस्टिक और बायोजेनॉमिक्स द्वारा संयुक्त तौर पर विकसित आरटी-पीसीआर जांच किट को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) से मंजूरी मिल गयी है। कंपनियों ने बुधवार को एक संयुक्त बयान में कहा कि यह किट अगले कुछ हफ्तों में बाजार में उपलब्ध होगी। आईजेनेटिक डायग्नॉस्टिक की संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुणिमा पटेल ने कहा, ''हमने जैव प्रौद्योगिकी उत्पादों के विनिर्माण और विपणन में बायोजेनॉमिक्स के अनुभव को देखते हुए उनके साथ साझेदारी की थी।'' उन्होंने कहा कि इस समय देश में जांच किट की मांग तेजी से बढ़ी है। जबकि वैश्विक किट आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में ऐसी किट विकसित करना काफी अहम है। बायोजेनॉमिक्स की संस्थापक और निदेशक अर्चना कृष्णन ने कहा कि उन्हें भी आईजेनेटिक के साथ साझेदारी कर खुशी है। हम मिलकर इस महामारी (कोविड-19) से लड़ेंगे।

भोजन उपलब्ध कराएगी पावर फाइनेंस

सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी पावर फाइनेंसस कॉरपोरेशन (पीएफसी) ने कोरोना वायरस मरीजों के इलाज में जुटे डॉक्टरों और चिकित्साकर्मियों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिये ताजसेट्स के साथ समझौता किया है। ताजसेट्स एशिया की सबसे बड़ी खाद्य कंपनियों में से एक है। पीएफसी ने बुधवार को एक बयान में कहा, ‘‘...कंपनी ने एशिया की सबसे बड़ी खाद्य कंपनियों में से एक ताजसैट्स के साथ गठजोड़ किया है। इसका उद्देश्य कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों के इलाज में जुटे चिकित्साकर्मियों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है।’’ बयान के अनुसार इस पहल के तहत राम मनोहर लोहिया अस्पताल के डॉक्टरों और चिकित्‍सा कर्मचारियों को दैनिक आधार पर 25 मई 2020 से 60 दिन की अवधि के लिए उच्च गुणवत्ता वाले, स्‍वच्‍छ और पौष्टिक भोजन (पैक्ड लंच बॉक्स) की आपूर्ति की जाएगी। इसके लिये पीएफसी ने ताजस्‍टेट्स को करीब 64 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की है। राम मनोहर लोहिया अस्पताल उन अस्पतालों में शामिल है जहां कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों का ही उपचार हो रहा है। इससे पहले, पीएफसी कोविड-19 के खिलाफ अभियान में सहायता करने के लिए पीएम-केयर्स फंड (प्रधानमंत्री नागरिक सहायता एवं आपात स्थिति कोष) में 200 करोड़ रुपये का योगदान दे चुकी है। पीएफसी कर्मचारियों ने भी अपने एक दिन का वेतन पीएम केयर्स फंड में दिया है। इसके अलावा, पीएफसी ने राजस्थान के कोटा में चिकित्‍सा उपकरण प्रदान करने के लिए भारतीय रेड क्रॉस सोसायटी को ₹50 लाख रुपये देने के साथ-साथ उत्‍तर प्रदेश में सिद्धार्थ नगर और बुलंदशहर के जिला कलेक्टरों को 50-50 लाख रुपये का योगदान दिया है।

जाम जैसी स्थिति उत्पन्न हुई

गाजियाबाद प्रशासन द्वारा जिले की सीमा सील किये जाने के बाद दिल्ली-गाजियाबाद सीमा पर बुधवार को जाम जैसी स्थिति रही। अधिकारियों ने वाहनों की आवाजाही को लेकर बेहद सख्ती बरती और सिर्फ उन्हें ही अनुमति प्रदान की जिनके पास वैध यात्रा पास था या आवश्यक सेवाओं से जुड़े थे। गाजियाबाद पुलिस के उपाधीक्षक राकेश मिश्रा ने कहा कि यात्रियों की जांच के कारण यातायात धीमी गति से आगे बढ़ा। उन्होंने कहा, ‘‘बिना वैध पास के सीमा पार करने की कोशिश करने वालों को दिल्ली में प्रवेश करने की अनुमति नहीं है।’’ जिले में कोविड-19 मामलों के बढ़ते ग्राफ को रोकने के लिए गाजियाबाद प्रशासन ने सोमवार रात से सीमाओं को फिर से सील कर दिया है। पुलिस ने कहा कि दिल्ली की तरफ से आवश्यक सेवाओं में लगे लोगों को वैध पास के साथ जाने की अनुमति दी जा रही है। डॉक्टरों, पुलिस कर्मियों, पैरामेडिकल स्टाफ और मीडियाकर्मियों को भी अपने आईडी कार्ड के साथ आवाजाही की अनुमति दी जा रही है। गाजियाबाद के यातायात निरीक्षक-2 बीपी गुप्ता ने कहा, ‘‘हम उन यात्रियों को चालान जारी कर रहे हैं, जिनके पास आवाजाही के लिए वैध पास नहीं हैं और उन्हें उनके घर वापस भेज रहे हैं। उन व्यक्तियों के भी चालान किए गए हैं, जिन्होंने चेहरे पर मास्क नहीं लगा रखे।''

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सावधानी बरतने पर जोर

देश के रसायन उद्योग ने कोविड-19 से बचाव में विषाणुनाशक चैंबर बनाये जाने को लेकर जनता के बीच जागरुकता बढ़ाने का फैसला किया है। रसायन उद्योग और शोध संस्थानों का मानना है कि इस प्रकार के चैंबर बनाकर लोगों पर रसायनों का सीधे छिड़काव करना नुकसानदेह हो सकता है। इसमें सावधानी बरती जानी चाहिये। एल्कली मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एएमएआई); नेशनल केमिकल लैबोरेटरी (सीएसआईआर-एनसीएल), पुणे और मुंबई के इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी (आईसीटी) ने इस प्रकार के विषाणुनाशक (डिसइन्फेक्टेंट) के सुरक्षित प्रयोग को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए एक साथ आने का फैसला किया है। उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस महामारी के प्रसार के बीच विषाणुनाशक रसायनों के इस्तेमाल की अहम भूमिका सामने आई है। संगठनों की ओर से जारी बयान के मुताबिक, कई जगहों पर लोगों ने विषाणुनाशक छिड़काव के लिये बड़े चैंबर तैयार कर लिया है। इन चैंबर में से जैसे ही कोई गुजरता है, इसमें लगी मशीन की मदद से उस पर किटाणुनाशक रसायन का छिड़काव हो जाता है। ऐसा करने से फायदा कम नुकसान ज्यादा हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एडवाइजरी के हवाले से इन संगठनों ने कहा कि सोडियम हाइपोक्लोराइट जैसे डिसइन्फेक्टेंट का प्रयोग किसी सतह को विषाणुरहित करने के लिए होना चाहिए, किसी मनुष्य के लिए नहीं। इस विषाणुनाशक में इस्तेमाल होने वाले सोडियम हाइपोक्लोराइट, क्लोरीन, ब्लीचिंग सॉल्यूशन/पाउडर आदि का उत्पादन करने वाले एल्कली उद्योग के प्रतिनिधि संगठन एएमएआई के अध्यक्ष जयंतीभाई पटेल ने कहा, ’वैज्ञानिक शोध में शामिल दो अग्रणी संगठनों का सहयोग मिलना हमारे लिए खुशी की बात है। इन संगठनों ने प्रयोगशाला में अध्ययन के बाद इस तरह के विषाणुनाशक रसायन के सुरक्षित प्रयोग के हमारे विचारों का समर्थन किया है।’ सीएसआईआर-एनसीएल के डायरेक्टर अश्विनी कुमार नांगिया ने कहा, ’डिसइन्फेक्टेंट के तौर पर सोडियम हाइपोक्लोरोइट या ब्लीच या हाइपो का प्रयोग बहुत सावधानी से करना चाहिए और इन्हें त्वचा पर लगाने से बचना चाहिए क्योंकि इससे त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है या खुजली हो सकती है। इनके प्रयोग के समय आंखों को भी चश्मे या फेस शील्ड आदि से ढंककर रखना चाहिए।’ आईसीटी के वाइस चांसलर प्रोफेसर ए.बी. पंडित ने कहा, ’भारतीय मानक ब्यूरो ने घर में प्रयोग के लिए 4 से 6 प्रतिशत कंसंट्रेशन वाले सोडियम हाइपोक्लोराइट को मंजूरी दी है। वाणिज्यिक रूप से मिलने वाले इस कंसंट्रेशन को भी किसी प्रशिक्षित व्यक्ति की निगरानी में पानी मिलाकर डाइल्यूट करना चाहिए, ताकि डिसइन्फेक्शन के लिए उसका प्रयोग किया जा सके।’ डब्ल्यूएचओ ने कहा है, ’किसी सुरंग, कैबिनैट या चैंबर में किसी व्यक्ति पर डिसइन्फेक्टेंट का प्रयोग किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है। यह शारीरिक व मानसिक रूप से घातक हो सकता है। ऐसा करने से किसी भी वायरस का शिकार हुए मरीज की संक्रमण फैलाने की क्षमता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। इस तरह के डिसइन्फेक्शन के बाद भी संक्रमित व्यक्ति के पास जाने या उसके खांसने-छींकने से संक्रमण का खतरा पहले जैसा ही बना रहता है।’

हरियाणा में मास्क नहीं पहनने पर जुर्माना

हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज ने बुधवार को कहा कि राज्य में मास्क नहीं पहनने और सार्वजनिक स्थानों पर थूकने पर 500 रुपये का जुर्माना लगेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में खंड विकास और पंचायत अधिकारी और शहरी क्षेत्रों में अधिसासी अधिकारी, सचिवों तथा स्थानीय निकायों के अन्य अधिकृत अधिकारियों के पास उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाने का अधिकार होगा। विज ने कहा, 'जो लोग बिना मास्क पहने हुए पाए जाएंगे या सार्वजनिक स्थानों पर थूकते पाए जाएंगे उन पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।' थाना प्रभारियों और चिकित्सा अधिकारियों को भी जुर्माना लगाने का अधिकार दिया गया है। हरियाणा में घर से बाहर जाने पर मास्क लगाने को पहले ही अनिवार्य किया जा चुका है।

नई औषधि के विकास में मिल सकती है मदद

वैज्ञानिकों ने नए कोरोना वायरस की एक विशेषता की पहचान की है जिससे यह मेजबान के प्रतिरोधक तंत्र से बचते हुए प्रभावी रूप से कोशिका में प्रवेश करता है। इस खोज से कोविड-19 के खिलाफ दवा विकसित करने में मदद मिल सकती है। अमेरिका के माउंट सिनाई स्थित ईक्हैन स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधार्थियों समेत शोधकर्ताओं का मानना है कि यह समझने से कि नया कोरोना वायरस, सार्स-सीओवी-2 कैसे कोशिका में प्रवेश करता है और अन्य कोरोना वायरसों से इसकी तुलना कोविड-19 का इलाज तलाश करने की दिशा में अहम कड़ी है। पीएनएएस नामक पत्रिका में छपे नए अध्ययन के मुताबिक वैज्ञानिकों ने यह पता लगा लिया है कि कैसे सार्स-सीओवी-2 और 2002-03 में महामारी का सबब बना। सार्स-सीओवी वायरस मानव एसीई-2 अभिग्राही प्रोटीन को कोशिका में घुसने के लिये प्रवेश द्वार के तौर पर इस्तेमाल करता है। नया कोरोना वायरस और सार्स-सीओवी कोशिकाओं में कैसे प्रवेश करते हैं, यह समझने के लिये प्रयोगशाला में संश्लेषित संस्करण के परीक्षण से शोधकर्ताओं ने उस अहम तंत्र की पहचान की जिससे सार्स-सीओवी-2 मेजबान के प्रतिरोधी तंत्र से बचते हुए कोशिका में प्रवेश करता है। सार्स-सीओवी-2 की सतह पर मौजूद शूलयुक्त प्रोटीन मेजबान कोशिका के अभिग्राही एसीई2 से एक हिस्से के जरिये उसकी सतह पर जुड़ता है जिसे अभिग्राही बाध्यकारी क्षेत्र (रिसेप्टर बाइंडिंग डोमेन) या आरबीडी कहते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि आरबीटी मानव शरीर में मौजूद जैविक अणुओं से सक्रिय होता है जिसे प्रोटीजेज कहते हैं। अध्ययन के मुताबिक सार्स-सीओवी-2 आरबीडी में 2002-03 के सार्स वायरस के मुकाबले उच्च एसीई बाध्यकारी प्रभाव होता है, जो नए वायरस के कोशिका में प्रवेश को ज्यादा सुगम बनाने में मदद करता है।


संक्रमण के मामलों में भारी वृद्धि

लॉकडाउन से राहत के तहत भूमध्यसागरीय समुद्र तटों और लास वेगास के कसीनो के पर्यटकों के लिए फिर से खोले जाने की खबरों के बीच बुधवार को दक्षिण कोरिया में कोविड-19 संक्रमण के मामलों में वृद्धि देखने को मिली। संक्रमण के मामलों में वृद्धि देखने के बाद सामाजिक दूरी के प्रतिबंधों को फिर से लागू करने पर विचार किया जा रहा है साथ ही इससे लॉकडाउन हटाने के दुष्परिणामों का भी खुलासा हो रहा है। यूरोपीय संघ के देशों ने दक्षिण कोरिया के जांच, संपर्कों की पहचान और उपचार की रणनीति को बहुत सराहा था जिसे देखते हुए यूरोपीय संघ ने बुधवार को संघ की अर्थव्यवस्थाओं को पटरी पर लाने के लिए एक प्रोत्साहन पैकेज का अनावरण किया। दक्षिण कोरिया में बुधवार को संक्रमण के 40 नए मामले सामने आए हैं। यह पिछले 50 दिनों में सामने आने वाला सर्वाधिक आंकड़ा है। इससे बुधवार को स्कूल लौटे रहे लाखों बच्चों के लिए खतरा बढ़ गया है।

-नीरज कुमार दुबे