नवरात्रि सेलिब्रेशन- हर जगह अलग ढंग से मनाई जाती है नवरात्रि

नवरात्रि सेलिब्रेशन- हर जगह अलग ढंग से मनाई जाती है नवरात्रि

असम और कोलकाता में इसे दुर्गापूजा के रूप में मनाया जाता है। देवी दुर्गा के भव्य पंडाल बनाए जाते हैं। इनकी सजावट इतनी सुंदर होती है कि आप बस देखते रह जाएंगे। देवी के दर्शन करने और भव्य पंडाल की एक झलक देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ जुटती है और लोग पूरी रात पंडालों के दर्शन करते हैं।

देवी दुर्गा के नौ रूपों की अराधना का पर्व है नवरात्रि। नवरात्रि के नौ दिन माता रानी के अलग-अलग रूपों की पूजा होती है। यह त्योहार पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन इसे मनाने का तरीका हर जगह थोड़ा अलग है।

घर में कलश स्थापना

महाराष्ट और बिहार में अधिकतर लोग घर में ही कलश स्थापना करते हैं और नौ दिनों तक देवी की पूजा अर्चना करते हैं।  नौ दिनों का उपवास रहता है। इस दौरान कुछ लोग सिर्फ फलाहार ही करते हैं और कुछ सेंधा नमक का सेवन करते हैं।

गुजरात का गरबा

वैसे तो आजकल मुंबई, दिल्ली और बैंग्लोर समेत सभी बड़े शहरों में गरबा और डांडिया की धूम मची रहती है, मगर नवरात्रि के दौरान गुजरात के गरबा की बात ही निराली है। नवरात्रि के पहले दिन एक मिट्टी के बर्तन के अंदर सुपारी, नारियल और चांदी का सिक्का रखा जाता है। मटके के अंदर एक दिया जलाया जाता है। हर रात इसकी पूजा होती है और पूजा के बाद लोग जमकर गरबा खेलते हैं।

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कोलकाता की दुर्गापूजा

असम और कोलकाता में इसे दुर्गापूजा के रूप में मनाया जाता है। देवी दुर्गा के भव्य पंडाल बनाए जाते हैं। इनकी सजावट इतनी सुंदर होती है कि आप बस देखते रह जाएंगे। देवी के दर्शन करने और भव्य पंडाल की एक झलक देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ जुटती है और लोग पूरी रात पंडालों के दर्शन करते हैं। दुर्गापूजा के दौरान कोलकाता शहर रोशनी से पूरी तरह जगमगा उठता है।


दक्षिण की नवरात्रि

तमिलनाडू, कर्नाटक और आंध्रपद्रेश में नवरात्रि थोड़े अलग ढंग से मनाई जाती है। यहां नवरात्रि के समय छोटी-छोटी खिलौने जैसी मूर्तियां बनाई जाती हैं। भगवान के साथ-साथ रथ, दूल्हा-दुल्हन, ऋषि-मुनि, पुरुष, महिलाओं, बर्तन जैसी चीज़ों की भी मूर्तियां बनाई जाती हैं और इसके खरीदते हैं। इन्हें रखने के लिए भी लोग खास तरह का लकड़ी का स्टेज तैयार करते हैं। जिसमें सीढ़ियों की संख्या अपने मन से चुनी जाती है, लेकिन यह संख्या ऑड ही होनी चाहिए जैसे 3,5,7,9 या 11। इन राज्यों में नवरात्रि को गोलू, बोम्मा गोलू, बोम्बे हब्बा कहा जाता है, जिसका मतलब है गुड़िया का त्योहार।

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शहर की सोसायटी

आजकल अधिकांश बड़े शहरों की सोसायटी में सामूहिक नवरात्रि का आयोजन किया जाता है। जिसमें देवी मां की पूजा के बाद सभी लोग मिलकर गरबा का आनंद लेते हैं। बच्चे और महिलाएं इस उत्सव में बढ़-चढ़कर शामिल होती हैं। कई जगह तो बड़े मैदान में खास गरबा और डांडिया नाइट्स का आयोजन किया जाता है।

वैसे नवरात्रि का त्योहार सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रह गया है, लोग इसे त्योहार में जमकर मौज-मस्ती भी करते हैं।

- कंचन सिंह