इन गानों के बिना आप की होली है अधूरी, सुनते ही थिरकने लगते हैं पांव

holi
अंकित सिंह । Mar 26, 2021 4:12PM
रंग बिरंगे फूल किलकारियां लेती पृथ्वी को मोहक बनाने लगती हैं। हर तरफ मौज और उत्साह ही नजर आता है और इस उत्साह को चार चांद लगाते हैं वे तराने जिस पर आप थिरकने को मजबूर हो जाते हैं। इन गानों के बिना आप की होली अधूरी सी लगती है। ढोल ताशों के बगैर आपको होली की मस्ती फीकी लगने लगती है।

फागुन में हर तरफ बहार रहता है। मन प्राणों में गजब से खुशी छाई रहती हैं। प्राकृतिक सुनहरी छटा बिखेरती है और इन सबके बीच होली की खुमारी रहती है। आंखों के प्याले मे फागुनी मस्ती की मदिरा गजब ढा रही होती है। रंग बिरंगे फूल किलकारियां लेती पृथ्वी को मोहक बनाने लगती हैं। हर तरफ मौज और उत्साह ही नजर आता है और इस उत्साह को चार चांद लगाते हैं वे तराने जिस पर आप थिरकने को मजबूर हो जाते हैं। इन गानों के बिना आप की होली अधूरी सी लगती है। ढोल ताशों के बगैर आपको होली की मस्ती फीकी लगने लगती है। तभी तो आज हो या बीता हुआ कल हो, हर समय होली के गीतों का अलग ही खुमार रहता है। आज प्रभासाक्षी आपके लिए वे गाने ढूंढ कर लाया है जिसे आप होली में सुनना पसंद करते हैं, जिस पर आप थिरकना पसंद करते हैं और जिसकी मस्ती में डूबना पसंद करते हैं। तो सबसे पहले सुनिए उस दौर के गाने जब होली में लोग अंग से अंग मिला लेते थे तो आज ना छोड़ेंगे कहकर एक दूसरे को चिढ़ाते थे। वही महबूब अपनी महबूबा को यह कहकर छेड़ते थे कि रंग बरसे भीगे चुनरवाली रंग बरसे। 

"रंग बरसे भीगे चुनर वाली" 

फिल्म- सिलसिला

अवाज- अमिताभ बच्चन 

गीत- हरिवंश राय बच्चन

संगीत- शिव और हरि

"होली के दिन" 

फिल्म- शोले

अवाज- किशोर कुमार और लता मंगेशकर

गीत- आनंद बख्शी

संगीत- आर डी बर्मन

"आज ना छोड़ेंगे" 

फिल्म- कटी पतंग

अवाज- किशोर कुमार और लता मंगेशकर

गीत- आनंद बख्शी

संगीत- आर डी बर्मन

"अंग से अंग लगना"

फिल्म- डर

अवाज- अलका याग्निक, विनोद राठौड़, सुदेश भोसले, देवकी पंडित

गीत- आनंद बख्शी

संगीत- शिव और हरि

यह धूम होली की है, जहां बीड़ा और इलायची की बात होती है। रंग में भंग जमाने की बात होती है तो गुजियों की मिठास आपको ललचाने लगती है। धर्म कोई भी हो, जाति कोई भी हो, हर कोई अपने आप को होली के रंग में डूबो लेना चाहता है। जिसने होली नहीं खेली, उसे लगता है कि मैंने कुछ किया ही नहीं। चाहे होली मथुरा-वृंदावन की हो या मुंबई या अहमदाबाद की। पटना की कुर्ता फाड़ होली हो या लखनऊ की नवाबी होली, रंग तो सभी पर चढ़ता है। फूलों की बौछार तो हर ओर होती हैं। यह होली ही तो है जिसके मौके पर स्वयं रघुवीर भी अवध में खुद को रंगने पर मजबूर हो जाया करते थे। इसी मौके पर वृंदावन में भगवान श्री कृष्ण गोपियों के संग रास रचाया करते थे। होली ही तो है जिसकी खुमारी मिटाए नहीं मिटती है। फिलहाल 90s के वे गाने जो आपके होली के रंगों को और रंगीन बना देगा। 

"सोनी सोनी अंखियों वाली"

फिल्म- मोहब्बतें

अवाज- जसपिंदर नरूला, श्वेता पंडित, उदित नारायण और कोरस

गीत- आनंद बख्शी

संगीत- जतिन- ललित

Do me favor lets play holi

फिल्म- वक़्त

अवाज- अनु मलिक, सुनिधि चौहान

गीत- समीर

संगीत- अनु मलिक

"होली खेले रघुवीरा"

फिल्म- बागबान

अवाज- अलका याग्निक, सुखविंदर सिंह, उदित नारायण, अमिताभ बच्चन

गीत- समीर

संगीत- आदेश श्रीवास्तव

होली उसी को तो कहते हैं जहां उम्र की दीवार टूट जाती है। ऊंच-नीच का फर्क मिट जाता है। सुखिया-दुखिया सभी एक रंग में सराबोर नजर आते हैं। बालक हो या वृद्ध, हर किसी पर मौजों की खुमारी चढ़ी रहती है। होली इसी को तो कहते हैं जहां मनुष्य सिर्फ मनुष्य होता है। जो अपने जीवन के इस क्षण को हर एक रंग में डुबो लेना चाहता है। चाहे दौर कोई भी रहा हो, किसी का भी रहा हो। लेकिन होली की खुमारी में कभी कोई कमी नहीं देखने को मिली है। आज के इस दौर में भी होली के मौके पर ही बद्री अपनी दुल्हनिया को ले जाने की बात करता है तो बलमुआ आज भी पिचकारी मारता है। 

"बालम पिचकारी" 

फिल्म- ये जवानी है दीवानी

अवाज- विशाल ददलानी और शाल्मली खोलगड़े

गीत- अमिताभ भट्टाचार्य

संगीत- प्रीतम

"जय जय शिवशंकर" 

फिल्म- वार

अवाज- विशाल ददलानी, बेनी दयाल

"बद्री की दुल्हनिया"

फिल्म- बद्रीनाथ की दुल्हनिया

अवाज- देव नेगी, नेहा कक्कर, मोनाली ठाकुर, इक्का

गीत- शब्बीर अहमद 

संगीत- तनिष्क बागची

अन्य न्यूज़