• आ रहा भयानक सौर तूफान, धराशायी हो सकता है दुनिया का इंटरनेट!

निधि अविनाश Sep 09, 2021 13:05

रिसर्चर के मुताबिक, सबसे पहले सौर तूफान ने साल 1859 और 1921 में एक भयानक रूप में दस्तक दी थी और अब 100 साल बाद दोबारा यह तूफान अपने भयानक और खतरनाक रूप में धरती पर दस्तक देगा।

अग्रेंजी वेबसाइट इंडिपेंडेंट में छपी एक खबर के मुताबिक, जल्द ही भयानक सौर तूफान आने की आशंका है। इस खतरनाक सौर तूफान के कारण पूरी दुनिया की सभी इंटरनेट संचार धाराशायी हो सकती है। बता दें कि यह तूफान इतना खतरनाक होगा कि दुनिया का इंटरनेट हफ्तें या महीनों तक बंद रह सकता है। यहीं नहीं इससे दुनिया का काम पूरी तरह से ठप रह सकती है। जानकारी के लिए बता दें कि, इस सौर तूफान को वैज्ञानिक शब्दों में 'कोरोनल मास इजेक्शन (सीएमई)' कहा जाता है और इस तरीके का सौर तूफान पूरे सोलर सिस्टम के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। बात दें कि अगर सौर तूफान आता है तो इससे इंटरनेट सेक्टर पर बहुत बुरा असर पड़ेगा।

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संयुक्त राज्य अमेरिका में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, इरविन ने एक रिसर्च कर ऐसे तूफान होनें के संकेत दिए थे। बता दें कि यह रिसर्च मंगलवार को ऑनलाइन प्रकाशित की गई है। रिसर्चर के मुताबिक, सबसे पहले सौर तूफान ने साल 1859 और 1921 में एक भयानक रूप में दस्तक दी थी और अब 100 साल बाद दोबारा यह तूफान अपने भयानक और खतरनाक रूप में धरती पर दस्तक देगा। बता दें कि साल 1921 में इस सौर तूफान से पृथ्वी पर काफी तबाही हुई थी। वैज्ञानिक इस तूफान को कैरिंग्टन इफेक्ट का नाम दे रहे है। वहीं टेक रडार की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सौर तूफान से  दुनिया को कोई भी महाद्वीप भी नहीं बच पाएगा। असिस्टेंट प्रोफेसर संगीता अब्दु ज्योति ने एक रिपोर्टजारी की है जिसमें बताया गया है कि, दुनियाभर में इंटरनेट समुद्र के अंदर से केबल के द्वारा लगाई गई है और यह काफी कमजोर है। अगर सौर तूफान आता है तो यह इंटरेनट केबल को खराब कर सकते है साथ ही दुनियाभर में इंटरनेट का बुनियादा ढांचा इस बड़े सौर तूफान को बिल्कुल भी नहीं झेल पाएगा। बता दें कि यह तूफान इंसानों के लिए खतरा तो पैदा नहीं करेगी लेकिन इंसान एक महीनें या उससे ज्यादा दिनों तो ऑनलाइन  नहीं आ पाएंगे। 

सौर तूफान से पृथ्वी  पर क्या होगा असर?

बता दें कि सौर तूफान आने के बाद  पृथ्वी के चारों ओर विशाल चुंबकीय क्षेत्र में बड़ी दरारें दिखाई देगी और जब यह पिघलेगा तो यह सौर कणों और कॉस्मिक किरणों में बदल जाएगा। इससे टेलीग्राफ आग की लपटों में आ जाएगा।रिसर्चरस के मुताबिक, ऐसा तूफान CME (Communication System On Earth) के पृथ्वी से भी टकरा सकता है और इसकी संभावना 1.8 से 12 प्रतिशत प्रति दशक मानी जा रही है। बता दें कि अगर ऐसा सौर तूफान आता है तो ऐसे CME का खामियाजा दुनिया को भुगतना पड़ सकता है। साथ ही वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरी तरह असर पडे़गा। केवल अमेरिका शहर की बात करें तो, अगर यहां इंटरनेट बंद होता है तो केवल एक ही दिन में 7 बिलियन डॉलर से ज्यादा का नुकसान हो सकता है।