बाबा केदारनाथ धाम के कपाट खुले, 10 क्विंटल गेंदे के फूलों से सजा दरबार

बाबा केदारनाथ धाम के कपाट खुले, 10 क्विंटल गेंदे के फूलों से सजा दरबार

दुनियां में कोरोनावायरस की तबाही आयी हुई है जिसनें लाखों लोगों को मौत की नींद सुला दिया है। कोरोना को रोकने के लिए सरकार हर मुमकिन प्रयास कर रही है। दुनिया भर की सरकारों ने लॉकडाउन कर दिया है ऐसे में जहां सब कुछ बंद है लेकिन भगवान भोले नाथ के कपाट बिना भक्तों के ही खोले गये।

कहते हैं केदारनाथ धाम के मात्र दर्शन से भक्तों को समस्त पापों से मुक्ति मिल जाती है। यहीं वजह है कि हर साल यहां लाखों भक्त केदारनाथ के दर्शन के लिए आते हैं। लेकिन जून 2013 में आयी केदारनाथ में भयंकर त्रासदी ने कोहराम मचा दिया। केदारनाथ में जो कुदरत ने विनाशलीला रची थी उसे देखकर ऐसा लगा मानों शिव स्वम अपने तांडव रूप में आ गये हो। 

केदारनाथ में आई प्राकृतिक आपदा के बाद तुरंत किसी को भी समझ नहीं आया कि आखिर इतना बड़ा संकट किस वजह से आ गया। कयास तो बहुत लगाए गए, लेकिन पुख़्ता वजह किसी को पता नहीं थी। 

केदारनाथ में आयी तबाही के बाद इस समय पूरी दुनियां में कोरोनावायरस की तबाही आयी हुई है जिसनें लाखों लोगों को मौत की नींद सुला दिया है। कोरोना को रोकने के लिए सरकार हर मुमकिन प्रयास कर रही है। दुनिया भर की सरकारों ने लॉकडाउन कर दिया है ऐसे में जहां सब कुछ बंद है लेकिन भगवान भोले नाथ के कपाट बिना भक्तों के ही खोले गये।

कोरोना वायरस के खिलाफ जारी जंग के बीच केदारनाथ मंदिर के कपाट 29 अप्रैल को खोल दिए गए। केदारनाथ मंदिर के कपाट को पूरे विधि विधान और परम्पराओं के साथ सुबह 6 बजकर 10 मिनट पर सादगी के साथ खोले गये। शिव के मंदिर के कपाट खोटले वक्त वहां कोई बाहर से आया भक्त नहीं था। केदारनाथ धाम के मुख्य पुजारी शिव शंकर लिंग की मौजूदगी में मंदिर के द्वार खोले गए। कोरोना वायरस कारण श्रद्धालुओं को धाम में जाने की इजाजत नहीं मिली है। 

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कोरोना के कहर से बचे रहे और भगवान का भक्ति भी हो जाए इसके लिए प्रशासन ने यहां आने की किसी को इजाड़त नहीं दी। जितने भी लोग कपाट खुलते वक्त धाम में मौजूद थे सभी ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया और भगवान शिव को अपने आपको समर्पित किया। कपाट जब खोले गये तो यहां काफी कम लोग थे। जो भी थे सभी ने मास्क और दस्ताने पहले हुए थे। ऐसा इतिहास में पहली बार हुआ है जब केदारनाथ के कपाट खुले हो और भक्त न रहे हो। हमेशा जब कपाट खुलते थे तो भोलेनाथ के जयकारों से पूरा केदारनाथ गूंज जाता था। इस बार हजारों भक्तों की बम-बम भोले के जयघोषों की गूंजों की कमी खली।

 कपाट खोलने से पहले मंदिर को 10 क्विंटल गेंदे के फूलों से खूबसूरत सजाया गया। कपाट खोलने के बाद रूद्राभिषेक एवं जलाभिषेक किया गया। अगले छह महीने तक शिव की पूजा अर्चना की जाएगी। इस समय केदारनाथ में कड़ाके की ठंड है। चारों तरफ केवल बर्फ ही बर्फ थी। छह महीने के बाद कपाट बंद कर दिए जाते हैं 

आपको बता दें कि चारों धामों के सर्दियों में भारी बर्फवारी और भीषण ठंड की चपेट में रहने के कारण उनके कपाट हर साल अक्टूबर—नवंबर में श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिये जाते हैं, जो अगले साल दोबारा अप्रैल—मई में फिर खोल दिये जाते हैं.

केदारनाथ एक पवित्र स्थान होने के साथ-साथ एक बेहद खूबसूरत जगह भी है। सर्दियों के मौसम में यहां खूब बर्फबारी होती है। श्रद्धालु भगवान के दर्शन के साथ यहां की खूबसूरत वादियों और बर्फबारी का भी मजा उठाते हैं। 

भारत के उत्तराखंड राज्य में स्थित, हिमालय की गोद में बसा यह एकांत सा कस्बा प्राचीन युग का एक दिलचस्प पवित्र स्थान है। इसके आसपास बर्फ से ढंकी ऐसी पहाड़ियां हैं जो अचरज में डाल देती हैं।

उत्तराखण्ड में हिमालय पर्वत की गोद में केदारनाथ मन्दिर बारह ज्योतिर्लिंग में सम्मिलित होने के साथ चार धाम और पंच केदार में से भी एक है। शिव के इस मंदिर को पत्‍थरों से कत्यूरी शैली में बनाया गया है। यहां के पुजारियों की मानें तो इस विशाल मंदिर का निर्माण पाण्डव वंश के जनमेजय ने कराया था। यहाँ स्थित स्वयम्भू शिवलिंग अति प्राचीन है। सदियों बाद इस मंदिर का जीर्णोद्धार आदि शंकराचार्य ने करवाया था।