Unlock 3 के 25वें दिन ICMR ने कहा- लोगों की लापरवाही से बढ़ रहे कोरोना के मामले

Unlock 3 के 25वें दिन ICMR ने कहा- लोगों की लापरवाही से बढ़ रहे कोरोना के मामले

अहमदाबाद में कोरोना वायरस संक्रमण के 157 नये मामले सामने आये जिसके साथ ही जिले में संक्रमितों की कुल संख्या 30,519 हो गयी है। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि जिले में संक्रमण से चार और मरीजों की मौत हो गयी जिससे मरने वालों की संख्या 1692 हो गयी है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि कोविड-19 की जांच में काफी बढ़ोतरी होने के बावजूद संक्रमित होने की दर में लगातार कमी आई है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने साथ ही रेखांकित किया कि उपचाराधीन मामलों में पहली बार 24 घंटे में 6,423 की कमी आयी है। मंत्रालय ने कहा कि कोविड-19 की जांच वर्तमान में बढ़कर प्रतिदिन प्रति दस लाख 600 जांच से अधिक हो गई है जो कि एक अगस्त को प्रतिदिन प्रति 10 लाख पर 363 जांच की थी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सात-दिवसीय ‘रोलिंग’ औसत के आधार पर कोविड-19 से संक्रमित होने की दर अगस्त के पहले सप्ताह के दौरान 11 प्रतिशत थी, वह अब घटकर आठ प्रतिशत हो गई है। उन्होंने कहा, ‘‘कोविड-19 संक्रमण का पता लगाने के लिए जांच की संख्या तेजी से बढ़ी है, लेकिन संक्रमित होने की दर में लगातार कमी आई है। पहली बार, कोविड-19 के उपचाराधीन मामलों में 24 घंटे में 6,423 की कमी आई है।’’ भूषण ने कहा कि कोरोना वायरस संक्रमण के उपचाराधीन मामलों में से 2.70 प्रतिशत ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं, जबकि 1.92 प्रतिशत आईसीयू में हैं और 0.29 प्रतिशत वेंटिलेटर पर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ठीक हुए मामले उपचाराधीन मामलों की संख्या का 3.4 गुना हैं। भूषण ने होने वाली मौतों का आयु और लिंग के आधार पर विश्लेषण पेश करते हुए कहा कि कोविड-19 से जान गंवाने वालों में से 69 प्रतिशत पुरुष और 31 प्रतिशत महिलाएं हैं। उन्होंने कहा, ‘‘36 प्रतिशत मौतें 45-60 वर्ष के आयु समूह में और 51 प्रतिशत मौतें 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में हुई हैं। 11 प्रतिशत मौतें 26 से 44 आयु वर्ग के लोगों में और 18 से 25 वर्ष आयुवर्ग और 17 वर्ष से कम आयु के लोगों में क्रमश: एक-एक प्रतिशत हुई हैं।’’ यह पूछे जाने पर कि क्या रूसी सरकार ने अपने कोविड-19 टीके के भारत में उत्पादन के लिए कोई औपचारिक अनुरोध किया है तो भूषण ने कहा कि जहां तक रूस द्वारा विकसित कोविड-19 टीका ‘स्पुतनिक वी’ का सवाल है, ‘‘दोनों देश (भारत और रूस) सम्पर्क में हैं। कुछ प्रारंभिक जानकारी साझा की गई है जबकि कुछ विस्तृत जानकारी की प्रतीक्षा है।’’ यह पूछे जाने पर कि भारत में किन के जरिये यह महामारी बढ़ रही है, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने कहा, ‘‘मैं कहूंगा कि गैर जिम्मेदार और कम सतर्क लोग जो मास्क नहीं पहन रहे हैं और एकदूसरे से दूरी नहीं बना रहे हैं, उनकी वजह से भारत में महामारी बढ़ रही है।’’ जांच क्षमता बढ़ाये जाने को लेकर उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे जांच क्षमता में वृद्धि की गई और 21 अगस्त को यह आखिरकार एक दिन में 10 लाख नमूनों की जांच करने की हो गई। भार्गव ने कहा, ‘‘कोविड-19 जांच क्षमता में काफी वृद्धि हुई है- 30 जनवरी को प्रतिदिन 10 जांच से यह 21 अगस्त को प्रतिदिन 10 लाख हो गई है।’’ भार्गव ने कहा, ‘‘भारत में हमारे पास 1,524 कोविड-19 जांच प्रयोगशालाएं हैं और 25 अगस्त 2020 तक 3,68,27,520 जांच की जा चुकी हैं।’’

कर्नाटक में 8,161 नये मामले सामने आए

कर्नाटक में मंगलवार को कोविड-19 के 8,161 नये मरीज आने के साथ राज्य में कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 2,91,826 हो गई। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि मंगलवार को कोरोना वायरस से 148 और लोगों की मौत हुई जिन्हें मिलाकर अब तक राज्य में 4,958 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। वहीं, इस अवधि में 6,814 मरीज ठीक हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग के बुलेटिन के मुताबिक, राज्य में अब तक 2,04,439 लोग संक्रमण मुक्त हुए हैं जबकि 82,410 मरीज उपचाराधीन हैं जिनमें से 751 मरीज गंभीर हालत होने की वजह से गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में भर्ती हैं। इसके मुताबिक, मंगलवार को सामने आए नए मामलों में से अकेले बेंगलुरु शहरी क्षेत्र में 2,294 नये मरीज सामने आए जबकि मौत के नए मामलों में से 61 लोग इस क्षेत्र से संबंधित थे। संक्रमण के नए मामलों में से बेंगलुरु शहरी जिले में 2,294, मैसूर में 1,331, बेल्लारी में 551, दावणगेरे में 318, बेलगावी में 298, शिवमोगा में 276, दक्षिण कन्नड़ में 247, कोप्पल में 238, कलबुर्गी में 227 मामले सामने आए। राज्य में अब तक 25,13,555 नमूनों की जांच की जा चुकी है।

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आंध्र प्रदेश में 9,927 नए मामले

आंध्र प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमण के 9,927 नए मामले सामने आने के साथ ही मंगलवार को कोविड-19 के मामलों की कुल संख्या बढ़कर 3,71,639 हो गई है। राज्य में महामारी से कोई राहत नहीं दिख रही है और हर जिले में बड़ी संख्या में नए मामले सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के बुलेटिन में कहा गया कि राज्य में मंगलवार को कोविड-19 के 9,927 नए मामले सामने आए जिससे कुल मामलों की संख्या बढ़कर 3,71,639 हो गई है। राज्य में संक्रमण दर 11 प्रतिशत के आंकड़े से अधिक हो गई है। बुलेटिन में कहा गया कि पिछले 24 घंटे में 92 और लोगों की मौत हो जाने से महामारी से मरने वालों की संख्या 3,460 हो गई है। इसमें कहा गया कि इस अवधि में 9,419 लोगों को ठीक होने के बाद अस्पतालों से छुट्टी मिल गई। इसके साथ ही राज्य में इस बीमारी से उबरे लोगों की कुल संख्या 2,78,247 हो गई है और 89,932 उपचाराधीन मामले हैं।

मणिपुर में मंत्री नेम्चा किपजेन संक्रमित

मणिपुर की सामाजिक कल्याण मंत्री नेम्चा किपजेन ने मंगलवार को फेसबुक पर घोषणा की कि वह कोविड-19 संक्रमित हैं। नेम्चा ने कहा कि हाल में उनके सम्पर्क में जो लोग भी आये हैं वे जल्द अपनी जांच करा लें। उन्होंने फेसबुक पर किये गए पोस्ट में लिखा, ‘‘कोरोना वायरस के लक्षण सामने आने के बाद मैंने स्वयं की जांच करायी और रिपोर्ट में संक्रमण का पता चला। मैं पिछले कुछ दिनों में मेरे सम्पर्क में आये सभी लोगों से अनुरोध करती हूं कि आप स्वयं पृथकवास में चले जाएं और जल्द से जल्द अपनी जांच करायें।’’ कोविड-19 नियंत्रण केंद्र के एक प्रवक्ता के अनुसार नेम्चा को पृथकवास में रहने को कहा गया है।

मेट्रो परिचालन के लिए तैयार

दिल्ली मेट्रो कोरोना वायरस दिशानिर्देशों का पालन करते हुए परिचालन के लिए तैयार है और उसे सेवाएं शुरू करने के लिए अनुमति का इंतजार है। इस दौरान सामाजिक दूरी के पालन के लिए सीटों और प्लेटफार्मों पर संकेत, स्मार्ट कार्ड का ऑटो टॉप-अप जैसी सुविधाएं भी यात्रियों को मुहैया करायी जाएंगी। दिल्ली मेट्रो सेवाएं 22 मार्च से ही स्थगित हैं, जिस दिन कोरोना वायरस के मद्देनजर जनता कर्फ्यू लगाया गया था। सूत्रों के मुताबिक उसे अब तक लगभग 1,300 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने रविवार को कहा था कि सरकार का निर्देश मिलने पर वह परिचालन फिर से शुरू करने के लिए तैयार हो जाएगा। उसी दिन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में मेट्रो ट्रेन सेवाओं को प्रायोगिक तौर पर फिर से शुरू किया जाना चाहिए क्योंकि शहर में कोविड-19 की स्थिति में सुधार हो रहा था। उन्होंने उम्मीद जतायी थी कि केंद्र जल्द ही इस पर फैसला करेगा। लॉकडाउन अवधि के बाद अर्थव्यवस्था जून से धीरे-धीरे चरणबद्ध तरीके से खुल रही है। लेकिन डीएमआरसी को संचालन शुरू करने के लिए केंद्र से अभी अनुमति नहीं मिली है। कार्यकारी निदेशक, डीएमआरसी अनुज दयाल के हवाले से एक बयान में कहा गया था कि सरकार का निर्देश मिलने पर डीएमआरसी परिचालन शुरू करने के लिए तैयार हो जाएगा। सामान्य दिनों में औसतन 26 लाख से अधिक लोग दिल्ली मेट्रो में यात्रा करते हैं। इस बीच डीएमआरसी कोरोना वायरस सुरक्षा मानदंडों के अनुपालन के संबंध में अपने कर्मचारियों को प्रशिक्षित कर रहा है और यात्रियों के लिए यात्रा को सुरक्षित बनाने के तरीकों पर भी जोर दे रहा है। अधिकारियों ने कहा कि यात्रियों का तापमान मापने के लिए थर्मल स्कैनर से लेकर सीटों और प्लेटफॉर्म पर सामाजिक दूरी के स्टिकर लगाने के साथ ही दिल्ली मेट्रो सुरक्षा दिशानिर्देशों के अनुसार यात्रियों के प्रबंधन की तैयारी कर रही है। अधिकारी दिशानिर्देशों पर काम कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जब भी यात्री आएं तो सामाजिक सुरक्षा मानदंड लागू हों। ई-लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली मेट्रो ने 19 अगस्त को एक नयी सुविधा की घोषणा की थी जिसके तहत यात्री स्वचालित किराया संग्रह (एएफसी) गेट पर अपने स्मार्ट कार्ड को ऑटो-टॉप करा सकते हैं। अधिकारियों ने बताया कि यह नया स्मार्ट कार्ड ग्राहकों के लिए 'ऑटोप' ऐप के जरिए उपलब्ध है जिसे इस उद्देश्य के लिए विशेष रूप से विकसित किया गया है। अधिकारियों ने कहा कि इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए पुराने स्मार्टकार्ड को भी अपग्रेड किया जा सकता है।

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गुजरात में 1096 नये मामले

गुजरात में मंगलवार को कोरोना वायरस संक्रमण के 1,096 नये मामले सामने आने के साथ ही प्रदेश में कोविड-19 संक्रमितों की संख्या बढ़ कर 88,942 हो गयी है जबकि 20 और मरीजों की मौत के साथ मरने वालों का आंकड़ा 2,930 पर पहुंच गया है। स्वास्थ्य विभाग ने इसकी जानकारी दी। विभाग ने बयान जारी कर बताया कि प्रदेश में मंगलवार को 1011 मरीजों को सफल उपचार के बाद स्वस्थ होने पर अस्पतालों से छुट्टी दी गयी जिसके साथ ही सूबे में अब तक 71,261 मरीज ठीक हो चुके हैं।

उत्तर प्रदेश में कोविड-19 से 73 और लोगों की मौत

उत्तर प्रदेश में पिछले 24 घंटे के दौरान कोविड-19 संक्रमित 73 और लोगों की मौत हो गई तथा संक्रमण के 5,124 नए मामले सामने आए। स्वास्थ्य विभाग द्वारा मंगलवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 24 घंटे के दौरान राज्य में कोरोना वायरस से 73 और मरीजों की मौत हो गई। इसके साथ ही राज्य में इस वायरस से मरने वालों की संख्या बढ़कर 3,059 हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार पिछले 24 घंटे के दौरान सबसे ज्यादा 18 मरीजों की मौत कानपुर में हुई हैं। इसके अलावा लखनऊ में 12, गोरखपुर में सात, प्रयागराज में चार, वाराणसी और सिद्धार्थ नगर में तीन-तीन, बरेली, मुरादाबाद, झांसी, बस्ती, मैनपुरी और रायबरेली में दो-दो तथा बांदा, कौशांबी, फर्रुखाबाद, मऊ, बिजनौर, प्रतापगढ़, सीतापुर, संत कबीर नगर, पीलीभीत, गोंडा, अयोध्या, आजमगढ़, बाराबंकी तथा सहारनपुर में एक-एक मरीज की मौत हुई है। राज्य में इस महामारी से सबसे ज्यादा 385 लोगों की मौत कानपुर में हुई हैं। इसके अलावा लखनऊ में 303, वाराणसी में 150, प्रयागराज में 134, मेरठ में 128, गोरखपुर में 112 और आगरा तथा बरेली में 106-106 मरीजों की मौत हुई है। इस अवधि में राज्य में कोविड-19 के 5,124 नए मरीजों का भी पता लगा है। इनमें सबसे ज्यादा 500 मरीज लखनऊ में मिले हैं। इसके अलावा प्रयागराज में 320, कानपुर नगर में 286, गोरखपुर में 202, अयोध्या में 146 और मुरादाबाद में 140 नए मरीजों का पता लगा है। रिपोर्ट के अनुसार पिछले 24 घंटे के दौरान 4,647 लोगों को स्वस्थ होने के बाद अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई। राज्य में इस वक्त 49,575 मरीजों का इलाज चल रहा है। इस बीच, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद ने बताया कि प्रदेश में कोविड-19 से ठीक होने वाले लोगों का प्रतिशत 73.33 है। उन्होंने बताया कि सोमवार को राज्य में एक लाख 21 हजार से ज्यादा नमूनों की जांच की गई। प्रदेश में अब तक 45 लाख से ज्यादा नमूने जांचे जा चुके हैं।

पंजाब में कोरोना वायरस से 49 और मरीजों की मौत

पंजाब में कोरोना वायरस संक्रमण के कारण 49 और मरीजों की मौत हो गयी जिससे मरने वालों की संख्या प्रदेश में बढ़ कर 1,178 हो गयी है । मंगलवार को संक्रमण के 1293 नये मामले सामने आये जिससे प्रदेश में संक्रमितों का आंकड़ा 44,577 पर पहुंच गया । मेडिकल बुलेटिन में इसकी जानकारी दी गयी है। इसमें कहा गया है कि पंजाब में कोरोना वायरस संक्रमण से एक दिन में होने वाली मौत की यह तीसरी सर्वाधिक संख्या है। इससे पहले 17 अगस्त को 51 और 23 अगस्त को 50 लोगों की मौत हो गयी थी। बुलेटिन के अनुसार पंजाब में आज जिन मरीजों की मौत हुयी है उनमें लुधियाना में 11, मोहाली में नौ, अमृतसर एवं पटियाला में पांच—पांच, फरीदकोट एवं जालंधर में चार—चार, संगरूर में तीन, फतेहगढ़ साहिब एवं मोगा में दो—दो, तथा गुरदासपुर, बठिंडा, पठानकोट एवं मानसा में एक—एक मरीज शामिल हैं। बुलेटिन में कहा गया है कि आज जिन जिलों में नये मामले सामने आये हैं उनमें लुधियाना (175), मोहाली (154), गुरदासपुर (149), पटियाला (140),जालंधर (119), बठिंडा (82), अमृतर (75), कपूरथला (65) और होशियारपुर (61) तथा अन्य जिले शामिल है। इसमें कहा गया है कि संक्रमण का सफल इलाज होने के बाद प्रदेश में आज 788 मरीजों को अस्पताल से छुट्टी दी गयी । अब तक प्रदेश में 29,145 मरीज संक्रमण से ठीक हो चुके हैं। इसमें कहा गया है कि अभी प्रदेश में 14,254 मरीजों का उपचार चल रहा है। बुलेटिन में कहा गया है कि 55 मरीजों की हालत नाजुक हैं और उन्हें वेंटिलेटर पर खा गया है जबकि 499 आक्सीजन पर हैं।

गोवा में मामले 14,530 हुए, नौ की मौत

गोवा में मंगलवार को कोविड-19 के 392 नये मामले सामने आने के साथ ही कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 14,530 हो गई है। यह जानकारी स्वास्थ्य विभाग ने दी। संक्रमण से नौ लोगों की मौत के साथ ही मृतकों की संख्या 157 पहुंच गई है। इसने कहा कि दिन में विभिन्न अस्पतालों से 315 मरीजों को छुट्टी दी गई जिससे ठीक होने वालों की संख्या 11,224 हो गई है। गोवा में कोविड-19 के 3149 मरीजों का इलाज चल रहा है और अभी तक 1,84,872 लोगों के नमूनों की जांच हो चुकी है। बयान में कहा गया है कि प्रदेश में संक्रमित मरीजों के ठीक होने की दर 80.12 फीसदी है ।

केरल में 2,375 नए मामले

केरल में मंगलवार को कोरोना वायरस के 2,375 नए मामले सामने आए तथा संक्रमण के कुल मामले 60,000 के पार पहुंच गए। यहां दस और संक्रमितों की मौत होने से कुल मृतक संख्या 244 पर पहुंच गई। प्रदेश की स्वास्थ्य मंत्री के.के. शैलजा के हवाले से एक विज्ञप्ति में बताया गया कि जो नए मामले सामने आए हैं उनमें से 2,141 लोग संक्रमित व्यक्तियों के संपर्क में आने से संक्रमण का शिकार हुए जबकि 174 लोगों के संक्रमित होने का स्रोत नहीं पता चल सका है। 61 लोग लोग विदेश से लौटे हैं तथा 118 लोग दूसरे राज्यों से यहां आए हैं। शैलजा ने कहा कि राज्य में कोविड-19 से पीड़ित लोगों की संख्या 61,878 है, वहीं अब तक 40,343 लोग स्वस्थ हो चुके हैं। इस समय 21,232 लोगों का इलाज चल रहा है।

दिल्ली में मामले बाहरी मरीजों के आने से बढ़े

विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रीय राजधानी में कोविड-19 के मामलों के बढ़ने की वजह इलाज करवाने के लिए दूसरे प्रदेशों से मरीजों का दिल्ली आना, अर्थव्यवस्था का फिर से खुलना तथा रैपिड एंटीजन जांच की संवेदनशीलता का कम होना हो सकते हैं। जून महीने की शुरुआत में संक्रमित मामलों की दर 30 फीसदी थी जो जुलाई के अंत तक कम होकर छह फीसदी से कम रह गई। मामले भी घटना शुरू हो चुके थे लेकिन बीते एक हफ्ते में मामले फिर बढ़ने लगे। दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग की ओर से सोमवार को जारी बुलेटिन के मुताबिक संक्रमितों की दर 8.9 फीसदी है जिससे विशेषज्ञों के माथे पर बल पड़ गए हैं। रविवार को दिल्ली में अगस्त माह के सर्वाधिक 1,450 मामले सामने आए थे। एक अगस्त से यहां कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या घट-बढ़ रही है। एक अगस्त को दिल्ली में 1,118 नए मामले आए जबकि अगले तीन दिन तक प्रतिदिन नए मामलों की संख्या एक हजार से कम रही। इसके बाद पांच से नौ अगस्त के बीच कोविड-19 के मामले एक हजार से अधिक रहे । हालांकि दस अगस्त को 707 मामले सामने आए। संयोग से दिल्ली में जब-जब संक्रमण के नए मामले एक हजार से कम रहे, तब औसत दैनिक 20,000 जांच से कम जांच हुई। राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ. बीएल शेरवाल ने कहा कि लोगों ने काम पर जाना शुरू कर दिया है, ऐसे में मामले बढ़ने का अनुमान था। उन्होंने कहा, ‘‘लगभग सब कुछ खुल रहा है...अगर नए मामलों की संख्या दो हजार से अधिक होती है तो यह चिंता का विषय है। बढ़ोतरी तो हुई है लेकिन हम इसे चिंता की बात नहीं कहेंगे क्योंकि रोग या तो मध्यम तीव्रता का है या फिर मरीज में लक्षण नहीं हैं। मृत्युदर भी नियंत्रण में है और यह हम सबके लिए राहत की बात है। कुल मिलाकर लोग एहतियात बरत रहे हैं।’’ अपोलो हॉस्पिटल्स में श्वसन एवं गहन चिकित्सा औषधि के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. राजेश चावला ने कहा कि मामलों में वृद्धि की एक वजह यह भी है कि लोग इलाज करवाने के लिए बाहर से यहां आ रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘अपोलो में भर्ती 70 फीसदी मरीज दिल्ली के बाहर से हैं। मरीज बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए दिल्ली आते हैं। उनके रिश्तेदार भी आते हैं जिनमें से कुछ संक्रमित भी होते हैं।’’ अमेरिका के सेंटर फॉर डायनामिक्स, इकोनॉमिक्स ऐंड पॉलिसी के निदेशक रमन्ना लक्ष्मीनारायण ने कहा कि दिल्ली में वास्तव में मामलों में कमी नहीं आई है। संक्रमण के कम मामले सामने आए हैं क्योंकि जांच प्रक्रिया बदली है, रैपिड एंटीजन पद्धति कम संवेदनशील है जिसमें बड़ी संख्या में नतीजे गलत रूप से नकारात्मक आ रहे हैं। इसका मतलब यह है कि रैपिड एंटीजन जांच में व्यक्ति संक्रमण रहित पाया गया लेकिन वास्तव में वह संक्रमित है।

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टीके का मानव परीक्षण बुधवार से हो सकता है शुरू

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के अनुसंधाकर्ताओं द्वारा विकसित संभावित कोरोना वायरस टीके की खुराक मानव पर दूसरे चरण के परीक्षण के लिए मंगलवार को पुणे स्थित भारती विद्यापीठ मेडिकल कालेज में पहुंची। यह जानकारी एक अधिकारी ने दी। संस्थान के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि परीक्षण बुधवार से शुरू हो सकता है। यह संस्थान सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) द्वारा भारत में मानव पर परीक्षण के लिए चुने गए 17 संस्थानों में से एक है। भारती विद्यापीठ के मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र के चिकित्सा निदेशक डॉ. संजय लालवानी ने कहा, ‘‘शुरुआत करने के लिए हमने पांच स्वयंसेवकों की पहचान की है, जिनकी कोविड-19 और एंटीबॉडी जांच की जाएगी और जिनकी रिपोर्ट निगेटिव आएगी उन्हें बुधवार को टीकाकरण के लिए चुना जाएगा।’’ उन्होंने कहा कि अस्पताल को 300 से 350 स्वयंसेवकों को सूचीबद्ध करने का लक्ष्य दिया गया है। टीके की एक खुराक प्राप्त करने के लिए चुने गए लोग 18 से 99 वर्ष की आयु के होंगे। अस्पताल के उप चिकित्सा निदेशक डॉ. जीतेन्द्र ओसवाल ने कहा कि वे टीके लगाए जाने के बाद स्वयंसेवकों की निगरानी मानक परीक्षण प्रोटोकॉल के अनुसार करेंगे। जिन अन्य अस्पतालों में परीक्षण किया जाना है उनमें पुणे स्थित बीजे मेडिकल कॉलेज अस्पताल, एम्स दिल्ली, पटना में राजेंद्र मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेस, चंडीगढ़ में पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, गोरखपुर में नेहरू अस्पताल और विशाखापट्टनम में आंध्र मेडिकल कॉलेज शामिल हैं। टीके बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी एसआईआई ने ब्रिटिश-स्वीडिश फार्मा कंपनी आस्ट्राजेनेका के साथ मिलकर जेनर इंस्टीट्यूट ऑफ ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित संभावित टीके के उत्पादन के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

झारखंड में कोरोना वायरस से 15 और की मौत

झारखंड में पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस से 15 और मरीजों की मौत होने से मृतकों की कुल संख्या 335 पहुंच गयी जबकि संक्रमण के 940 नये मामले सामने आने के बाद मामलों की कुल संख्या बढ़कर 31,118 हो गयी। स्वास्थ्य विभाग की आज सुबह जारी रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य में अब तक इस महामारी से 21,025 लोग स्वस्थ हो चुके हैं जबकि 9,758 मरीजों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार पिछले 24 घंटे में 17,173 नमूनों की जांच की गई जिनमें से 940 लोग संक्रमित पाये गये।

त्रिपुरा में बढ़ाई जाएगी जांच संख्या

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लव कुमार देव ने राज्य की कोविड-19 की कोर समिति के अधिकारियों को राज्य में अधिक से अधिक नमूनों की जांच करने का निर्देश दिया है और लोगों से कोविड-19 के खिलाफ इस लड़ाई में सरकार का सहयोग करने की अपील की है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। देब ने सोमवार शाम एक समीक्षा बैठक के दौरान, राज्य में कोरोना वायरस मामलों में वृद्धि पर चिंता व्यक्त की, और सुरक्षा निर्देशों को सख्ती से लागू करने की मांग की। सोमवार को कोविड-19 के 293 नए मामले सामने आए और पांच संक्रमित मरीजों की मौत हो गई। अगरतला सरकारी मेडिकल कॉलेज (एजीएमसी) में माइक्रोबायलॉजी विभाग के प्रमुख और समिति के सदस्य डॉ. तपन मजुमदार ने कहा कि हाल ही में यहां के एक स्थानीय बाजार से कोविड-19 जांच के लिए 46 नमूने एकत्र किए गए, जिनमें से 26 संक्रमित पाए गए। उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘‘ऐसे समय में जब भारत में संक्रमण के मामलों में कमी आ रही है, राज्य में पिछले एक सप्ताह में मामलों में नौ से 10 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। त्रिपुरा में कोविड-19 मामलों के दोगुना होने की अवधि 31.5 दिन है। बाजार से एकत्र किए गए नमूनों के जांच परिणामों ने खतरे की घंटी बजा दी है।’’ मजूमदार ने कहा कि त्रिपुरा में अक्टूबर तक कोविड-19 मामलों के अपने चरम पर पहुंचने की संभावना है। उन्होंने कहा, ‘‘यदि मामलों की संख्या अक्टूबर में कम नहीं होती है, तो स्थिति हाथ से निकल सकती है। राज्य सरकार जांच दर को बढ़ाने के लिए तैयार है... लोगों को कोरोना वायरस के खिलाफ इस लड़ाई में सहयोग करना होगा। घर-घर जाकर सर्वेक्षण में लोगों में से कई ने सहयोग नहीं किया।” मजूमदार ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग भी राज्य में प्लाज्मा थेरेपी शुरू करने की व्यवस्था कर रहा है।

मेघालय में 18 और लोग संक्रमित

मेघालय में 11 सुरक्षाकर्मियों समेत कम से कम 18 और लोगों में कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई जिसके बाद मंगलवार को राज्य में संक्रमण के कुल मामलों की संख्या बढ़कर 1,994 हो गई। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। स्वास्थ्य सेवा निदेशक अमन वार ने कहा कि नए मामलों में से 14 पूर्वी खासी हिल जिले से सामने आए, दो मामले री भोई और एक-एक मामले उत्तरी और पश्चिमी गारो हिल्स जिले से सामने आए। उन्होंने कहा, “सशस्त्र सेनाओं के 11 कर्मी संक्रमण के शिकार हुए हैं जिनमें से 10 पूर्वी खासी हिल जिले से हैं और एक पश्चिमी गारो जिले से हैं।” मेघालय में वर्तमान में कोविड-19 के 1,187 मरीजों का इलाज चल रहा है और अब तक 799 मरीज ठीक हो चुके हैं। अब तक राज्य में कोविड-19 से आठ मरीजों की मौत हो चुकी है। वार ने कहा कि पूर्वी खासी हिल जिले में 780 मरीजों का इलाज चल रहा है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी गारो हिल में 224 और री भोई में 93 मरीजों का इलाज चल रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्वी खासी हिल जिले में कोविड-19 के जिन मरीजों का इलाज चल रहा है उनमें से 285 सुरक्षाकर्मी हैं।

तेलंगाना में मामले सितंबर अंत तक कम हो सकते हैं

तेलंगाना स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राज्य में कोविड-19 मरीजों का पता लगाने के लिए इस महीने अब तक पांच लाख से ज्यादा जांच हुई हैं और सितंबर के अंत तक संक्रमण के मामलों में कमी आने की संभावना है। लोक स्वास्थ्य निदेशक डॉक्टर जीएस श्रीनिवास राव ने कहा कि तेलंगाना के ग्रामीण क्षेत्रों में भले ही कोविड-19 के मामले बढ़े हैं लेकिन ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (जीएचएमसी) क्षेत्र में मामलों में कमी आ रही है और आने वाले दिनों में इसके और कम होने की संभावना है। उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ''हमने पहले भी कहा था कि जीएचएमसी क्षेत्र में अगस्त के अंत तक धीरे-धीरे मामलों में कमी आएगी। हमने यह भी कहा था कि कहीं मामले बढ़ेंगे भी। तेलंगाना के ग्रामीण इलाकों में सितंबर अंत तक मामले नियंत्रण में होंगे। इसकी संभावना है।’’ श्रीनिवास ने कहा, ''हमने जीएचएमसी क्षेत्र में मामलों को नियंत्रित किया है। और सितंबर तक पूरे राज्य में संक्रमण के संबंध में स्थिति नियंत्रण में होगी।’’ उन्होंने बताया कि तेलंगाना में अभी 23,737 मरीज हैं। यहां स्वस्थ होने की दर 80 फीसदी और मृत्यु दर राष्ट्रीय स्तर के 1.8 फीसदी के मुकाबले 0.7 फीसदी है। उनके अनुसार राज्य में 24 अगस्त के आंकड़ों के अनुसार संक्रमण के लक्षण नहीं दिखने वाले 17,226 मरीज घर में पृथकवास में हैं और 6,511 मरीजों का इलाज सरकारी या निजी अस्पताल में चल रहा है। अधिकारी ने बताया कि पिछले चार दिनों से यहां रोजाना 40,000 से ज्यादा जांच हो रही हैं और अब तक राज्य में कुल 10,21,054 जांच की जा चुकी है जिनमें से अगस्त में अब तक पांच लाख से ज्यादा जांच हुई हैं।

अभी सही आकलन कर पाना मुश्किल

रिजर्व बैंक ने मंगलवार को कहा कि कोविड-19 के आर्थिक प्रभाव का सही आकलन करना मुश्किल है क्योंकि अभी नयी स्थितियां उभर ही रही हैं। आरबीआई ने अपनी सालाना रिपोर्ट में कहा, ‘‘कोविड-19 महामारी से जुड़ी स्थितियां अभी तेजी से उभरती जा रही हैं। ऐसे में इसके पूर्ण वृहत आर्थिक प्रभाव का सही आकलन करना मुश्किल है।’’ रपट में कहा गया है कि कोविड-19 और उसकी रोथाम के लिये लगाये गये ‘लॉकडाउन’ के भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभावों के बारे में नव केंसवादी मान्यताओं वाले तैयार गतिशील संभाव्यताओं पर आधारित सामान्य संतुलन (डीएसजीई) के मॉडल से एक अस्थायी और मोटा आकलन प्राप्त होता है। इस मॉडल के तहत यह माना गया कि संक्रमण के मामले अगस्त 2020 में उच्च स्तर पर होंगे और जब अर्थव्यवस्था सर्वाधिक प्रभावित होगी और अर्थव्यवस्था की संभावनाओं की तुलना में वस्तविक उत्पादन 12 प्रतिशत कम हो जाएगा। इस माडल में को तीन आर्थिक अभिकर्ताओं..परिवार, कंपनी और सरकार रख कर आकलन किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार ‘लॉकडाउन’ में लोगों (परिवार) को घर पर रहना पड़ रहा है, इससे कंपनियों के लिये श्रमिकों की आपूर्ति प्रभावित हुई है। गैर-जरूरी सामानों के उपलब्ध नहीं होने और आय कम होने से खपत घटी। लोगों के मिलने-जुलने पर प्रतिबंध से महामारी का प्रसार थमता है। आरबीआई ने कहा कि मॉडल में दूसरो परिदृश्यों की कल्पना की गयी है। पहला, लॉकडाउन एक से श्रमिकों की आपूर्ति और उत्पादकता कम होने से अर्थव्यवस्था के आपूर्ति पक्ष पर असर पड़ता है। दूसरी स्थिति, लॉकडाउन दो है। इसमें सीमांत लागत में वृद्धि पर विचार किया गया है। दोनों ही परिदृश्य में मुद्रास्फीति में कमी की संभावना देखी गयी। दूसरी स्थिति में कंपनियां लाभ पर असर होने के कारण उत्पादन कम करेंगी। वेतन में कम वृद्धि होगी और अर्थव्यवस्था में बड़े पैमाने पर गिरावट होगी। आरबीआई ने कहा, ‘‘हालांकि इस परिदृश्य में महामारी से ठीक होने की दर तीव्र होती दिखती है। इसका कारण लोगों के बीच संपर्क के अवसरों का सीमित होना है।’’ रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘इसके उलट पहली स्थिति में उत्पादन में कटौती कम दिखती है पर इससे संक्रमण में वृद्धि के कारण मांग में संकुचन ज्यादा होने की की संभावना है। इस प्रकार, लॉकडाउन के परिदृश्य में अर्थव्यवस्था में बड़ी गिरावट आती है लेकिन महामारी के मोर्चे पर सुधार अधिक तेजी से होता है।’’ तीसरा परिदृश्य यह माना गया है जिससमें सरकार लॉकडाउन नहीं लगती है और महामारी अधिक व्यापक होती। इस स्थिति में जनवरी 2021 के दूसरे पखवाड़े में संक्रमण उच्चतम स्तर पर होता और इससे ठीक होने की दर धीमी होती। आरबीआई ने कहा, ‘‘इस स्थिति में श्रम की कमी निरंतर बनी रहती और आपूर्ति झटकों के कारण मुद्रास्फीति तथा उत्पादन अंतर पर दीर्घकालीन प्रभाव पड़ता। इससे एक तरफ जहां मुद्रास्फीति निरंतर बढ़ती हुई होती वहीं संभावित उत्पादन में गिरावट की प्रवृत्ति होती।’’ रिपोर्ट के अनुसार, ''संक्षेप में, लॉकडाउन के बिना कोवि-19 आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित करती। यह मुद्रास्फीति में लगातार वृद्धि और उत्पादन के स्थायी नुकसान का कारण बनता।’’ ‘लॉकडाउन’ दो की स्थिति जो वास्तविकता के करीब जान पड़ती है, में 2020-21 की अप्रैल-जून तिमाही में आर्थिक गतिविधियों में गिरावट निचले स्तर तक पहुंचती है और इसके बाद वृद्धि में 2020-21 की जनवरी-मार्च तिमाही से सकारात्मक बढ़ोतरी के साथ इसमें (आर्थिक गतिविधियों) धीरे-धीरे सुधार आता है।

दूसरा प्रोत्साहन पैकेज जारी कर सकती है सरकार

कोविड-19 संक्रमण हल्का पड़ने और लोगों में इसका डर कम समाप्त होने पर सरकार दूसरा वित्तीय प्रोत्साहन पैकेज जारी कर सकती है। वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को यह बात कही। केंद्रीय व्यय सचिव टी.वी. सोमनाथन ने कहा कि सरकार ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण से बैंक खातों में जितनी राशि भेजी, देखने में आया कि उसमें से करीब 40 प्रतिशत का व्यय नहीं किया गया, बल्कि उसे बचाकर रख लिया गया। इससे यह लगता है कि प्रोत्साही कदमों की अपनी सीमाएं हैं और कई बार इसके लिए समय का चुनाव बहुत महत्वपूण हो जाता है। डुन एंड ब्रैडस्ट्रीट इंडिया के एक कार्यक्रम में सोमनाथन ने कहा कि मौजूदा वक्त में सामान्य आर्थिेक गतिविधियां ‘ठहर’ गयी हैं। इसका सरकार ने क्या किया या नहीं किया से कोई लेना देना नहीं है, बल्कि इसका लेना देना लोगों के बीच कोरोना वायरस के डर से है। सोमनाथन ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में स्वास्थ्य हालत ‘बहुत नाजुक’ बने हैं। वित्तीय और बीमा क्षेत्र के अलावा सिनेमाघर, मॉल और रेस्तरां जैसी निजी सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि यह ऐसे क्षेत्र हैं जहां सरकार के वित्तीय प्रोत्साहन लोगों को दोबारा इस क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए बाध्य कर सकें। अर्थव्यवस्था में सुधार लोगों के बीच से कोविड-19 का मनौवैज्ञानिक डर समाप्त होने के बाद ही संभव होगा।’’ सोमनाथन ने कहा कि जब लोगों के बीच स्वास्थ्य चिंता कम होगी तब सरकार वित्तीय प्रोत्साहन देकर अर्थव्यवस्था में मदद कर सकती है। उल्लेखनीय है कि सरकार ने वित्तीय प्रोत्साहन के पहले दौर की घोषणा मार्च के अंत में की। इसमें देश के सकल घरेलू उत्पाद का करीब दो प्रतिशत अतिरिक्त व्यय वाले कदम भी उठाए गए। भारतीय रिजर्व बैंक ने भी सभी को चौंकाते हुए नीतिगत दरों में दो बार बड़ी कटौती की और इस महीने इस कटौती पर रोक भी लगा दी। इसके चलते विशेषज्ञों के एक धड़े के बीच यह धारणा बन रही है कि सरकार को अब ज्यादा व्यय करना होगा।

प्लाजमा पद्धति से इलाज प्रायोगिक चरण में

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने सोमवार को आगाह करते हुए कहा कि कोविड-19 के संक्रमण से ठीक हो चुके मरीजों के रक्त प्लाजमा से दूसरे मरीजों का इलाज अब भी प्रायोगिक इलाज पद्धति माना जाता है। संगठन ने अमेरिका द्वारा इस इलाज पद्धति को प्रोत्साहित करने पर चिंता जताई है क्योंकि कई वैज्ञानिकों को डर है कि इससे सामान्य अध्ययन पटरी से उतर सकता है। उल्लेखनीय है कि रविवार को अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए)ने जन स्वास्थ्य संकट के दौरान भरोसेमंद प्रायोगिक दवा के जरिये इलाज करने की अनुमति देने के अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए 'आपात इस्तेमाल’ बता कर, इस पद्धति से इलाज की अनुमति दे दी। प्लाजमा पद्धति से सुरक्षित और प्रभावी इलाज की अनुमति पर बहस के बीच, कई अध्ययन इसके वास्तविक प्रभाव को जांचने के लिए चल रहे हैं। डब्ल्यूएचओ की मुख्य वैज्ञानिक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘इसके नतीजे निर्णायक नहीं है। इस समय भी इसके बहुत कम गुणवत्ता वाले सबूत मौजूद हैं।’’ स्वामीनाथन ने कहा कि डब्ल्यूएचओ प्लाजमा पद्धति से इलाज को प्रायोगिक मानता है और वह इसका मूल्यांकन जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि इस पद्धति से इलाज का मानकीकरण करना बहुत कठिन है क्योंकि प्लाजमा अलग-अलग व्यक्तियों से एकत्र किया जाता है और उनमें एंटीबॉडी पैदा होने का स्तर अलग-अलग होता है। स्वामीनाथन ने कहा, ‘‘निश्चित रूप से देश अगर खतरे के मुकाबले लाभ अधिक देखते हैं तो आपात स्थिति में इस इलाज को सूचीबद्ध कर सकते हैं, लेकिन सामान्य तौर पर यह तब होता है जब आप अधिक सटीक सबूत का इंतजार कर रहे होते हैं।’’ संगठन की प्रमुख वैज्ञानिक ने पत्र में एफडीए की आपात कार्यवाही का जिक्र करते हुए कहा कि इसे कोविड-19 मरीजों के इलाज का नया मानक नहीं समझना चाहिए और आने वाले महीनों में अध्ययनों से और डाटा उपलब्ध होंगे। उन्होंने कहा, लेकिन पहले ही कई कोविड-19 मरीजों ने प्लाजमा पद्धति से इलाज का अनुरोध किया है बजाय शोध अध्ययनों का हिस्सा बनने के। इससे कई वैज्ञानिकों को डर है कि उन्हें इस बात का स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाएगा कि वास्तव में यह काम करता है, और अगर करता है तो कैसे और कब इसका बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के मार्टिन लैंड्रे ने कहा कि यह पद्धति बहुत अधिक कारगर लगती है लेकिन अभी तक यह सबूत नहीं है कि वास्तव में यह काम करती है।

-नीरज कुमार दुबे





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