Unlock-5 का 106वां दिन: PM मोदी 16 जनवरी को करेंगे टीकाकरण अभियान की शुरुआत

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 14, 2021   20:33
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Unlock-5 का 106वां दिन: PM मोदी 16 जनवरी को करेंगे टीकाकरण अभियान की शुरुआत

अनुसंधाकर्ताओं ने कहा कि व्यापक जांच से पता चला है कि अमेरिका में वितरण के लिये मंजूर किये गए टीके मजबूत प्रतिरोधक प्रतिक्रिया पैदा करने के मामले में बेहद कारगर है। हर किसी को तत्काल इसका पूरा फायदा नहीं मिलेगा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आगामी 16 जनवरी को देशव्यापी कोविड-19टीकाकरण अभियान की शुरुआत करेंगे और इसके मद्देनजर सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में टीकों की पर्याप्त खुराकें भेज दी गई हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने एक बयान में बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। बयान में कहा गया है, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 16 जनवरी को सुबह 10.30 बजे वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से देशव्यापी कोविड-19 टीकाकरण अभियान की शुरुआत करेंगे। यह विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान होगा।’’ इस कार्यक्रम से सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के 3006 स्थान डिजिटल माध्यम से जुडेंगे और हर केंद्र पर 100 लाभार्थियों का टीकाकरण होगा। बयान में कहा गया कि यह टीकाकरण अभियान जन भागीदारी के सिद्धांत के तहत प्राथमिकता के आधार पर चलाया जाएगा जिसमें पहले चरण के तहत सरकारी व निजी क्षेत्रों के स्वास्थ्यकर्मियों और आईसीडीएस कर्मियों का टीकाकरण किया जाएगा। बयान के मुताबिक, नागर विमानन मंत्रालय के सक्रिय सहयोग से सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में टीकों की पर्याप्त खुराकें भेजी गई हैं तथा राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों ने इन्हें सभी जिलों में भेज दिया है। टीकाकरण अभियान को सुचारू रूप से चलाने और टीका वितरण कार्यक्रम की निगरानी के लिए को-विन (कोविड वैक्सीन इंटेलिजेंस नेटवर्क) नामक एक डिजिटल मंच भी तैयार किया गया है। सरकार की ओर से कोविड-19 महामारी, टीकाकरण और इसके डिजिटल प्लेटफॉर्म से संबंधित सवालों के समाधान के लिए 24 घंटे और सातों दिन संचालित होने वाले कॉल सेंटर और हेल्पलाइन 1075 स्थापित की गई है। इससे इतर, सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री इस दौरान वीडियो कांफ्रेंस के जरिए देश के विभिन्न हिस्सों के कुछ स्वास्थ्यकर्मियों के साथ संवाद भी कर सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, राजधानी दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और सफदरजंग अस्पताल के अधिकारियों ने कहा है कि वे दोतरफा संवाद के लिए आवश्यक सभी इंतजाम के साथ तैयार हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘प्रधानमंत्री 16 जनवरी को देशव्यापी कोविड-19 टीकाकरण अभियान की शुरुआत करेंगे। यह विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान होगा। इसलिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने राष्ट्रपति कार्यालय से विमर्श के बाद यह निर्णय लिया है कि पोलियो टीकाकरण दिवस, जिसे ’पोलियो रविवार’ के रूप में मनाया जाता है, को बदलकर 31 जनवरी कर दिया जाए।’’ देश में कोविड-19 के खिलाफ टीकाकरण अभियान के पहले दिन 16 जनवरी को करीब तीन लाख स्वास्थ्य कर्मियों को 2,934 केंद्रों पर टीके लगाए जाएंगे। प्रत्येक टीकाकरण सत्र में अधिकतम 100 लाभार्थी होंगे। सरकार द्वारा खरीदे गए कोविशील्ड और कोवैक्सीन टीके की 1.65 करोड़ खुराकें उनके स्वास्थ्यकर्मियों के आंकडों के अनुसार राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को आवंटित की गई है। मंत्रालय ने कहा, ‘‘इसलिए किसी भी राज्य से भेदभाव का कोई सवाल ही नहीं है। यह आरंभिक स्तर पर दी गई खुराक है। इसलिए कम आपूर्ति किए जाने को लेकर जताई जा रही चिंताए निराधार और दुर्भाग्यपूर्ण हैं।’’ राज्यों को सलाह दी गई है कि वे 10 फीसदी आरक्षित/बर्बाद खुराकों और रोजाना प्रत्येक सत्र में औसतन 100 टीकाकरण को ध्यान में रखते हुए टीकाकरण सत्रों का आयोजन करें। राज्यों से यह भी कहा गया है कि प्रत्येक टीका केंद्र पर हड़बड़ी में तय सीमा से ज्यादा संख्या में लोगों को न बुलाएं। मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को टीकाकरण सत्र स्थलों को बढ़ाने की सलाह दी है और उनके रोजाना संचालन की बात कही है ताकि टीकाकरण प्रक्रिया स्थिर हो सके और आगे सुचारू रूप से बढ़ सके। ज्ञात हो कि पहले चरण में तीन करोड़ लोगों का टीकाकरण किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इनमेंस्वास्थ्यकर्मी और अग्रिम पंक्ति के कर्मचारी शामिल हैं। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा निर्मित ऑक्सफोर्ड के कोविड-19 टीके ‘कोविशील्ड’ और भारत बायोटेक के स्वदेश में विकसित टीके ‘कोवैक्सीन’ को देश में सीमित आपात इस्तेमाल के लिये भारत के औषधि नियामक की ओर से पिछले दिनों मंजूरी दी गई थी। भारत में टीकाकरण अभियान के लिए 2360 लोगों को राष्ट्रीय स्‍तर के प्रशिक्षण शिविर में प्रशिक्षण दिया गया है। इनमें राज्‍य टीकाकरण अधिकारी, प्रशीतन श्रृंखला अधिकारी, आईईसी अधिकारी तथा अन्‍य भागीदार शामिल हैं। इसके अलावा 61 हजार से ज्‍यादा कार्यक्रम प्रबंधन, दो लाख टीकाकरण कर्मी तथा तीन लाख 70 हजार अन्‍य कर्मियों को राज्‍य, जिला और खण्‍ड स्‍तर पर प्रशिक्षित किया जा चुका है।  

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वैज्ञानिकों का कहना है कि अवसाद, तनाव और अकेलापन शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करके कोविड-19 टीके समेत विभिन्न टीकों की प्रभावकारिता को कम कर सकता है। पर्सपेक्टिव ऑन साइकोलॉजिकल साइंस में प्रकाशित होने के लिये स्वीकार की गई एक रिपोर्ट के अनुसार व्यायाम और टीका लगवाने से 24 घंटे पहले रात में अच्छी नींद लेने समेत साधारण कोशिशों से टीके की प्रारंभिक प्रभावकारिता बढ़ सकती है। अनुसंधाकर्ताओं ने कहा कि व्यापक जांच से पता चला है कि अमेरिका में वितरण के लिये मंजूर किये गए टीके मजबूत प्रतिरोधक प्रतिक्रिया पैदा करने के मामले में बेहद कारगर है। हर किसी को तत्काल इसका पूरा फायदा नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि पर्यावरण कारक, व्यक्तिगत अनुवांशिकी तथा शारीरिक एवं मानसिक परेशानियां शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर सकती हैं, जिससे टीके का असर धीमा पड़ सकता है। अमेरिका के ओहायो विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ता एनेलीज मेडिसन ने कहा, कोविड-19 महामारी से शारीरिक दिक्कतों के साथ-साथ मानसिक दिक्कतें भी पेश आई हैं, जिसके चलते तनाव, अवसाद, और अन्य संबंधित परेशानियां पैदा हुई हैं। इस तरह के भावनात्मक तनाव पैदा करने वाली परेशानियां किसी व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। इस रिपोर्ट में टीके की प्रभावकारिता और इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि किस तरह स्वास्थ्य हालात और भावनात्मक तनाव पैदा करने वाली परेशानियां प्रतिरोधक प्रतिक्रिया विकसित करने की शरीर की क्षमता को नुकसान पहुंचा सकती हैं। टीका प्रतिरोधक प्रणाली को चुनौती देते हुए अपना काम करता है, लिहाजा टीके की प्रभावकारिता काफी हद तक प्रतिरोधक क्षमता पर निर्भर करती है।

कोविड टीकाकरण पर सभी तैयारियां पूरी

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बृहस्पतिवार को कहा कि दिल्ली सरकार ने 16 जनवरी से कोरोना वायरस का टीका लगाए जाने की मुहिम की शुरुआत के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं और शहर में हर निर्धारित दिन पर 8,000 स्वास्थ्यकर्मियों को टीका लगाया जाएगा। ऑनलाइन संवाददाता सम्मेलन में केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली सरकार को केंद्र से अब तक टीके की 2.74 लाख खुराक मिल चुकी हैं, जो 1.2 लाख स्वास्थ्यकर्मियों के लिए पर्याप्त होंगी। उन्होंने कहा, ‘‘प्रत्येक व्यक्ति को दो खुराक दी जायेगी। केन्द्र ने टीके की शीशी टूटने या अन्य कारण से उसके खराब होने की स्थिति को ध्यान में रखते हुए 10 प्रतिशत अतिरिक्त खुराक मुहैया करायी है। दिल्ली में कुल 2.4 लाख स्वास्थ्यकर्मियों ने टीकाकरण के लिए पंजीकरण कराया है और जल्दी ही और खुराक मिलने की संभावना है।’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि शहर में शनिवार को 81 केन्द्रों पर टीकाकरण शुरू होगा और कुछ दिनों बाद इनकी संख्या बढ़कर 175 और अंतत: 1,000 केन्द्रों तक पहुंचेगी। उन्होंने बताया कि टीके सप्ताह के चार दिन- सोमवार, मंगलवार, बृहस्पतिवार और शनिवार को लगाए जाएंगे। कोविड के टीके रविवार और सप्ताह के दो अन्य दिन नहीं लगाए जाएंगे। इन दिनों में सामान्य टीकाकरण जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि रोजाना 100 लोगों को टीका लगाया जाएगा। उन्होंने आशा जतायी कि पिछले कई महीने से मुश्किलें झेलने के बाद लोगों को अंतत: इस वायरस से निजात मिलेगी। मीडिया के साथ बातचीत से पहले केजरीवाल ने दिल्ली सरकार के टीकाकरण अभियान की समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने स्थिति की समीक्षा की है और सभी टीमें और दिल्ली के लोग भी कोविड टीकाकरण के लिए तैयार हैं। केजरीवाल ने कहा, ‘‘पिछले एक साल से लोग कोरोना के कारण तकलीफ में हैं और मैं आशा करता हूं और ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि दिल्ली, देश और दुनिया भर के लोगों को टीका आने के बाद समस्याओं से निजात मिले।’’ सूत्रों ने पहले बताया था कि दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन और मुख्यमंत्री की उपस्थिति में सादे समारोह में 16 जनवरी को एलएनजेपी अस्पताल से टीकाकरण अभियान की शुरुआत होगी। अधिकारियों ने दिन में बताया था कि ऑक्सफोर्ड कोविशील्ड टीके के 2.64 लाख खुराक की पहली खेप दिल्ली के राजीव गांधी सुपर स्पेशियालिटी अस्पताल के केन्द्रीय भंडारण गृह में कड़ी सुरक्षा के बीच मंगलवार को पहुंची। 

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पुडुचेरी में कोविड-19 के 43 नए मामले

केन्द्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में बृहस्पतिवार को कोविड-19 के 43 नए मामले आने के साथ ही संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 38,567 हो गई है। संक्रमण से और एक व्यक्ति की मौत होने के साथ ही मरने वालों की संख्या बढ़कर 640 पहुंच गई है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के निदेशक एस. मोहन कुमार ने बताया कि जेआईपीएमईआर में 84 वर्षीय महिला की और हुई। उन्हें अन्य बीमारियां भी थीं। प्रदेश में 2,992 नमूनों की जांच की गई जिनमें से 43 लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। केन्द्र शासित प्रदेश में मृत्युदर 1.66 प्रतिशत और रिकवरी दर 97.57 प्रतिशत है। निदेशक ने बताया कि प्रदेश में फिलहाल कोविड-19 का 298 लोगों का इलाज चल रहा है।

ओडिशा में कोविड-19 के 222 नए मामले

ओडिशा में कोविड-19 के 222 नए मामले आने से बृहस्पतिवार को संक्रमितों की संख्या बढ़कर 3,32,763 हो गयी। राज्य के एक स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि संक्रमण के कारण एक और व्यक्ति की मौत हो जाने से मृतकों की संख्या बढ़ कर अब 1896 हो गयी। कोरोना वायरस के संक्रमण के 127 मामले पृथक-वास केंद्रों से आए जबकि संक्रमितों के संपर्क का पता लगाए जाने के दौरान 95 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई। उन्होंने बताया कि राज्य के अंगुल जिले से सबसे ज्यादा 28 नए मामले आए। सुंदरगढ़ से 24 और झारसुगुडा से 23 मामले आए। ओडिशा में 2192 संक्रमित लोगों का इलाज चल रहा है जबकि अब तक 3,28,622 लोग ठीक हो चुके हैं। राज्य में बुधवार को 30168 नमूनों की जांच के साथ अब तक कुल मिलाकर 72.92 लाख से ज्यादा नमूनों की जांच की गयी है।

वैक्सीन की आलोचना करने वालों को विशेषज्ञों के समूह ने धोया !

कोविड-19 रोधी दो टीकों, खासकर स्वदेश विकसित भारत बायोटेक के टीके को मंजूरी देने के सरकार के फैसले की आलोचना करने वालों को चिकित्सकों और वैज्ञानिकों के एक समूह ने आड़े हाथों लेते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि उनके कथन ‘‘निंदनीय’’ हैं तथा भारतीय वैज्ञानिक समुदाय के लिए विश्वसनीयता का भारी संकट पैदा कर रहे हैं। वक्तव्य पर चिकित्सा क्षेत्र के 45 पेशेवरों और वैज्ञानिकों ने हस्ताक्षर किए हैं। इसमें ‘‘निहित स्वार्थी तत्वों के गैरजिम्मेदाराना बयानों’’ पर हैरानी जताई गई है तथा आलोचकों पर आरोप लगाया गया है कि वे राजनीति से प्रेरित बयान देकर कोविड-19 टीकों के क्षेत्र में हालिया शोध पर संदेह जाहिर करके भारतीय विशेषज्ञों की ईमानदारी को कलंकित कर रहे हैं। इस बयान पर एम्स के पूर्व निदेशकों टीडी डोगरा और एमसी मिश्रा,सीएसआईआर-आईआईसीटी, हैदराबाद के पूर्व मुख्य वैज्ञानिक ए. गंगाग्नी राव तथा मणिपाल एजुकेशन ऐंड मेडिकल ग्रुप के बोर्ड के अध्यक्ष रंजन पई ने हस्ताक्षर किए हैं। इसमें कहा गया है कि ये टीके मानवता को उनकी ओर से उपहार हैं। गौरतलब है कि भारत में कोविड-19 के दो टीकों के आपात स्थिति में इस्तेमाल को हाल में मंजूरी दी गई है, जिनमें से एक ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका का कोविशील्ड है जिसका उत्पादन सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने किया है तथा दूसरी भारत बायोटेक की कोवैक्सीन है। कुछ विशेषज्ञों और विपक्ष के कुछ नेताओं ने टीकों को मंजूरी देने के फैसले पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि कोवैक्सीन के तीसरे चरण का परीक्षण अभी तक पूरा नहीं हुआ है और इसके प्रभाव को लेकर आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। हालांकि, सरकार का कहना है कि उसने सभी प्रक्रियाओं का पालन किया है। इस वक्तव्य में कहा गया है कि भारत टीकों की आपूर्ति के मामले में वैश्विक अगुआ बनकर उभरा है तो इसके पीछे चिकित्सकों और वैज्ञानिकों के प्रयास हैं। भारत से 188 से अधिक देशों में टीके भेजे जा रहे हैं तथा भारत का टीका बाजार 2019 में 94 अरब रुपये का हो चुका है।  

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उत्तराखंड में कोविड-19 के 154 नए मामले

उत्तराखंड में बृहस्पतिवार को कोविड-19 के 154 नए मामले सामने आये जबकि तीन और मरीजों की संक्रमण के कारण मौत हो गई। यहां प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी बुलेटिन के अनुसार, 154 नये मरीजों के मिलने के साथ ही प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या बढ़कर 94324 हो गयी है। नये मामलों में से सर्वाधिक 40 देहरादून जिले में सामने आए जबकि हरिद्वार में 37, नैनीताल में 30 और ऊधमसिंह नगर में 15 नये मरीज मिले। बृहस्पतिवार को प्रदेश में तीन और कोविड-19 मरीजों की मौत हो गई जिससे संक्रमण से प्रदेश में अब तक 1596 मरीज जान गंवा चुके हैं। प्रदेश में बृहस्पतिवार को 187 और मरीज उपचार के बाद स्वस्थ हो गए। अब तक कुल 88948 मरीज उपचार के बाद स्वस्थ हो चुके हैं और उपचाराधीन मामलों की संख्या 2510 है। प्रदेश में कोविड-19 के 1270 मरीज प्रदेश से बाहर चले गए हैं।

राजस्थान में कोविड-19 से दो और मरीजों की मौत

राजस्थान में बृहस्पतिवार को कोविड-19 के 281 नये मामले सामने आये जिससेराज्य में संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 3,14,372 हो गई। वहीं राज्य में संक्रमण से दो और लोगों की मौत होने से राज्य में मृतक संख्या बढ़कर 2744 हो गयी। अधिकारियों ने बताया कि बृहस्पतिवार शाम छह बजे तक के बीते 24 घंटे में राज्य में कोरोना वायरस संक्रमण से दो और मौत हुई हैं जिससे मरने वालों की संख्या अब बढ़कर 2744हो गयी। अधिकारियों ने बताया कि राज्य में अब तक जयपुर में 509,जोधपुर में 299,अजमेर में 221,कोटा में 168, बीकानेर में 167, भरतपुर में 120,उदयपुर में 112,पाली में 109और सीकर में 100संक्रमितों की मौत हो चुकी है। उन्होंने बताया कि बृहस्पतिवार को राज्य में 384लोग कोरोना वायरस संक्रमण से ठीक हुए जिससे राज्य में अब तक ठीक हुए मरीजों की संख्या बढ़कर 3,05,953हो गई है। इसके साथ ही संक्रमण के 281नये मामले सामने आने से राज्य में इस घातक वायरस से संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 3,14,372हो गयी जिनमें से 5675रोगी उपचाराधीन हैं। नये मामलों में जयपुर-जोधपुर में 36-36, कोटा में 26, उदयपुर में 25, भीलवाडा में 24, अजमेर में 22 नये संक्रमित शामिल हैं।

दिल्ली में कोविड-19 के 340 नये मामले

दिल्ली में बृहस्पतिवार को कोविड-19 के 340 नये मामले सामने आये तथा चार संक्रमितों की मौत हो गई। हालांकि, इस महामारी से होने वाली मृत्यु की प्रतिदिन की दर कई महीनों के बाद दहाई की संख्या से घट कर इकाई पर आई है। अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में संक्रमण की दर घट कर 0.48 प्रतिशत रह गई है। वहीं, जनवरी में यह 11 वां मौका है, जब प्रतिदिन के नये मामलों की संख्या 500 से कम है। उन्होंने बताया कि शहर में अब तक 6.31 लाख से अधिक लोग संक्रमित हुए, जबकि चार और मरीजों की मौत होने जाने से कुल मृतक संख्या बढ़ कर 10,722 हो गई। बुधवार को कोविड-19 से 11 मरीजों की मौत हुई थी। दिल्ली में अभी कोविड-19 के 2,937 मरीज उपचाराधीन हैं। दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी एक बुलेटिन के मुताबिक बुधवार को की गई 71,325 नमूनों की जांच में 340 नये मामलों की पुष्टि हुई।

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गणतंत्र दिवस समारोह में कोई विदेशी शासनाध्यक्ष मुख्य अतिथि नहीं होगा

वैश्विक स्तर पर कोविड-19 की स्थिति के कारण इस साल गणतंत्र दिवस समारोह में किसी भी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष या शासनाध्यक्ष को मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित नहीं करने का फैसला किया गया है। विदेश मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। पिछले पांच दशकों में यह पहला मौका होगा जब भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि नहीं होंगे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने साप्ताहिक प्रेस वार्ता में कहा, ‘‘ कोविड-19 की स्थिति के कारण यह फैसला किया गया है कि इस साल गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर कोई विदेशी राष्ट्राध्यक्ष या शासनाध्यक्ष नहीं होगा। ’’ यह फैसला ऐसे समय में किया गया है कि जब ब्रिटेन में कोरोना वायरस के नये प्रारूप के फैलने के कारण ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने अपनी भारत यात्रा रद्द करने का हाल ही में फैसला किया था। भारत ने जॉनसन को गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया था। जॉनसन ने इस आमंत्रण को बड़े सम्मान की बात कह कर स्वीकार किया था। हालांकि, इस महीने के प्रारंभ में कोविड-19 के नये प्रारूप के फैलने के कारण जॉनसन ने अपनी यात्रा रद्द कर दी थी।





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गणतंत्र बने इतने वर्ष हो गये पर अब भी जारी है जाति, धर्म के आधार पर भेदभाव

  •  ब्रह्मानंद राजपूत
  •  जनवरी 25, 2021   14:45
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गणतंत्र बने इतने वर्ष हो गये पर अब भी जारी है जाति, धर्म के आधार पर भेदभाव

गणतंत्र दिवस हमारे संविधान में संस्थापित स्वतंत्रता, समानता, एकता, भाईचारा और सभी भारत के नागरिकों के लिए न्याय के सिद्धांतों को स्मरण और उनको मजबूत करने का एक उचित अवसर है। क्योंकि हमारा संविधान ही हमें अभिव्यक्ति की आजादी देता है।

गणतंत्र दिवस हर वर्ष जनवरी महीने की 26 तारीख को पूरे देश में देश प्रेम की भावना से ओत-प्रोत होकर मनाया जाता है। भारत के लोग हर साल 26 जनवरी का बेसब्री से इंतजार करते हैं, क्योंकि 26 जनवरी को ही 1950 में भारतीय संविधान को एक लोकतांत्रिक प्रणाली के साथ भारत देश में लागू किया गया था। कहा जाए तो 26 जनवरी को ही हमारे गणतंत्र का जन्म हुआ। और भारत देश एक गणतांत्रिक देश बना। हमारे देश को आजादी तो 15 अगस्त 1947 को ही मिल गयी थी, लेकिन 26 जनवरी 1950 को भारत एक स्वतंत्र गणराज्य बना और भारत देश में नए संविधान के जरिए कानून का राज स्थापित हुआ। यह दिन उन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को भी याद करने का दिन है, जिन्होंने अंग्रेजों से भारत को आजादी दिलाने के लिए वीरतापूर्ण संघर्ष किया। आज के दिन ही भारत ने विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की स्थापना के लिए उपनिवेशवाद पर विजय प्राप्त की।

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गणतंत्र दिवस हमारे संविधान में संस्थापित स्वतंत्रता, समानता, एकता, भाईचारा और सभी भारत के नागरिकों के लिए न्याय के सिद्धांतों को स्मरण और उनको मजबूत करने का एक उचित अवसर है। क्योंकि हमारा संविधान ही हमें अभिव्यक्ति की आजादी देता है। अगर देश के नागरिक संविधान में प्रतिष्ठापित बातों को अनुसरण करेंगे तो इससे देश में अधिक लोकतान्त्रिक मूल्यों का उदय होगा। भारत का संविधान सबको सामान अधिकार देता है, भारतीय संविधान किसी से भी जाति, धर्म, ऊंच-नीच और अमीरी-गरीबी के आधार पर कभी भी भेदभाव नहीं करता है।

आज बेशक भारत विश्व की उभरती हुई शक्ति है। लेकिन आज भी देश काफी पिछड़ा हुआ है। देश में आज भी कन्या जन्म को दुर्भाग्य माना जाता है, और आज भी भारत के रूढ़िवादी समाज में हजारों कन्याओं की भ्रूण में हत्या की जाती है। सड़कों पर महिलाओं पर अत्याचार होते हैं। सरेआम महिलाओं से छेड़छाड़ और बलात्कार के किस्से भारत देश में आम बात हैं। कई युवा (जिनमें भारी तादात में लड़कियां भी शामिल हैं) एक तरफ जहां हमारे देश का नाम ऊंचा कर रहे हैं। वहीं कई ऐसे युवा भी हैं जो देश को शर्मसार कर रहे हैं। दिनदहाड़े युवतियों का अपहरण, छेड़छाड़, यौन उत्पीड़न कर देश का सिर नीचा कर रहे हैं। हमें पैदा होते ही महिलाओं का सम्मान करना सिखाया जाता है पर आज भी विकृत मानसिकता के कई युवा घर से बाहर निकलते ही महिलाओं की इज्जत को तार-तार करने से नहीं चूकते। इस सबके लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार शिक्षा का अभाव है। शिक्षा का अधिकार हमें भारतीय संविधान में मौलिक अधिकारों के रूप में अनुच्छेद 29-30 के अन्तर्गत दिया गया है। लेकिन आज भी देश के कई हिस्सों में में नारी शिक्षा को सही नहीं माना जाता है। नारी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार के साथ भारतीय समाज को भी आगे आना होगा। तभी देश में अशिक्षा जैसे अँधेरे में शिक्षा रुपी दीपक को जलाकर उजाला किया जा सकता है।

देश में आज अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर देश विरोधी ताकतें बढ़ रही हैं, यही देश विरोधी ताकतें संविधान की गलत तरीके से व्याख्या करती हैं। यही देश विरोधी ताकतें देश में अराजकता फैलाने में अहम् भूमिका निभाती है। आज देश में देश विरोधी ताकतें संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों का गलत तरीके  से उपयोग कर रही हैं। अभिव्यक्ति की आजादी का दुरूपयोग करना भारतीय संविधान का अपमान है। देश में आज कुछ ताकतें तुष्टिकरण का काम कर रही हैं और देश को धर्म के आधार पर बांटने का प्रयास कर रही हैं।  देश में आज इन्ही देश विरोधी ताकतों की शह पर कोई पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाता है तो कोई भारत मुर्दाबाद के नारे लगाता है और कुछ राजनैतिक दल ऐसे लोगों की तरफदारी करके उनका साथ देकर उनको संरक्षण देते हैं। ऐसे देश विरोधी लोग इन्हीं राजनैतिक दलों कि शह पर देश का माहौल खराब करने की कोशिशें करते हैं। आज देश में कुछ राजनैतिक दल वोट बैंक की राजनीति की खातिर ऐसे लोगों को संरक्षण दे रहे हैं। यह देश के लिए बहुत ही खतरनाक स्थिति है। बेशक हमारा संविधान हमें अभिव्यक्ति की आजादी देता है लेकिन अभिव्यक्ति की आजादी का अर्थ ये नहीं है कि देश की बर्बादी के नारे लगाए जाएँ और देश के टुकड़े-टुकड़े करने की कसमें खायी जायें। देश की बर्बादी के नारे लगाने वाली ताकतें आज आरोप लगाती हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को हिन्दू राष्ट्र बनाने की तरफ अग्रसर हैं। ऐसे लोग भूल जाते हैं कि हिन्दुस्तान पहले से ही हिन्दू राष्ट्र है, यह हिन्दुस्तान के बहुसंख्यक हिन्दुओं की ही सहिष्णुता है जो खुद हिन्दुस्तान को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र मानते हैं और देश में किसी भी प्रकार का धर्म और सम्प्रदाय के आधार पर भेदभाव नहीं करते हैं। 1947 में देश का विभाजन धार्मिक आधार पर हुआ था जिसमंे पाकिस्तान बना और उसने मुस्लिम देश बनना पसंद किया और बहुसंख्यक हिन्दू वाले राष्ट्र हिन्दुस्तान ने धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बनना पसंद किया। हिन्दुस्तान चाहता तो 1947 में खुद को हिन्दू राष्ट्र घोषित कर सकता था लेकिन यह हिन्दुओं की ही सहिष्णुता थी जो देश में सभी वर्गों और धर्मों के सम्मान के लिए देश को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बनाया। 1947 में आजादी के समय नेहरु-लियाकत समझौता हुआ था। इस समझौते के अनुसार पाकिस्तान से आए मुस्लिमों और पहले से ही भारत में रह रहे मुस्लिमों की रक्षा भारत को करनी थी और पाकिस्तान में रह गए हिंदू, ईसाई, सिख और बौद्धों (समस्त अल्पसंख्यक वर्ग) की रक्षा पाकिस्तान को करनी थी। लेकिन  पाकिस्तान ने इसके विपरीत जाकर पाकिस्तान को मुस्लिम राष्ट्र घोषित किया। हिन्दुस्तान ने देश में संविधान को लागू करकर और अपने आप को धर्मनिरपेक्ष मानकर अपने लोकतंत्र की जड़ें मजबूत करीं। इसके बाद 1971 में पाकिस्तान से अलग होकर बांग्लादेश नया देश बना। लेकिन बांग्लादेश ने भी अपने आप को मुस्लिम राष्ट्र घोषित कर लिया। आजादी के बाद से ही पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को धार्मिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी है आज इसी का परिणाम है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की आबादी में कई गुना गिराबट आई है। आजादी के बाद से ही अल्पसंख्यकों को उत्पीड़न की वजह से पाकिस्तान को छोड़कर भारत में पलायन करना पड़ा और यही स्थिति बांग्लादेश बनने के बाद बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों की रही। पाकिस्तान और बांग्लादेश में रह रहे अल्पसंख्यकों में सबसे अधिक संख्या हिन्दुओं की रही है। आज ऐसे ही अल्पसंख्यक जो कि समय-समय पर पाकिस्तान और बांग्लादेश में हर तरीके की प्रताड़ना झेलकर हिन्दुस्तान में पलायन कर के आये उनको भारत सरकार नागरिकता देने का काम कर रही है। ऐसे धार्मिक आधार पर प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने के लिए भारत की सरकार ने नागरिकता (संशोधन) अधिनियम,  भारत की संसद में पारित किया है। नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2019  द्वारा सन 1955 का नागरिकता कानून को संशोधित करके यह व्यवस्था की गयी है कि 31 दिसम्बर सन 2014 के पहले पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के कारण जिन हिन्दू, बौद्ध, सिख, जैन, पारसी एवं ईसाईओं  को भारत पलायन करना पड़ा, ऐसे  हिन्दू, बौद्ध, सिख, जैन, पारसी एवं ईसाई धर्म के लोगों भारत की नागरिकता प्रदान की जा सकेगी। नागरिकता कानून में संशोधन करके नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2019 बनाना सरकार की एक बहुत अच्छी पहल है, इसका सभी देशवासिओं को स्वागत करना चाहिए। और जो लोग भारत विरोधी ताकतों के बहकावे में आकर नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2019 का विरोध कर रहे हैं, ऐसे लोगों को समझ लेना चाहिए कि यह कानून नागरिकता छीनने वाला नहीं बल्कि नागरिकता देने वाला है। लेकिन भारत के मुस्लिम समुदाय में देश विरोधी ताकतों द्वारा यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि इस कानून से उनकी नागरिकता चली जायेगी और मुसलमानों के अधिकार छिन जाएंगे, ये सब सच नहीं है। नागरिकता (संशोधन) अधिनियम आने के बाद देश विरोधी ताकतों और कुछ राजनैतिक दलों ने वोट बैंक की खातिर लोगों में काफी भ्रम फैलाया है, जिससे देश में काफी जगह अराजकता देखने को मिली और काफी जगह दंगे जैसी स्थिति देखने मिली। लोगों को बिना सोचे समझे ऐसे किसी भी काम में शामिल नहीं होना चाहिए जिससे कि देश की एकता और अखंडता को नुकसान पहुंचे।  इसी प्रकार देश में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) पर भ्रम फैलाकर अराजकता पैदा की जा रही है। राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर  (एनआरसी) नागरिकों का राष्ट्रीय रजिस्टर है, जो भारत से अवैध घुसपैठियों को निकालने के उद्देश्य से एक प्रक्रिया है। देश में केवल असम राज्य में ही राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) लागू है। आज जरुरत है कि लोगों को किसी के बहकावे में न आकर संवैधानिक व्यवस्थाओं का विध्वंस नही करना चाहिये।

आज भारत देश बेशक एक गणतांत्रिक देश हो, जिसमे संविधान का पालन किया जाता हो, लेकिन आज भी देश में महिलाओं पर धार्मिक आधार पर तीन तलाक और बहुविवाह के जरिए अन्याय किया जाता है। जो कि मुस्लिम महिलाओं के लिए न्यायोचित नहीं है। इसके खिलाफ मुस्लिम समाज की महिलाये काफी तादात में आगे आ रही हैं। यह काबिलेतारीफ है। भारतीय आबादी का बड़ा हिस्सा मुस्लिम समुदाय है, इसलिए नागरिकों का बड़ा हिस्सा और खासकर महिलाओं को निजी कानून की आड़ में पुराने रूढ़िवादी कानूनों और सामाजिक प्रथाओं के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। इक्कीसवीं सदी में समय के साथ मुस्लिम लोगों को भी आधुनिकता का बुरका पहनना होगा। अगर मुस्लिम लोग वही पुराने रीति-रिवाजों और कानूनों का बुरका ओढ़े रहे तो मुस्लिम समुदाय और पिछड़ जाएगा। अगर मुस्लिमों को आगे बढ़ना है तो पुरुषों और महिलाओं के समान अधिकारों की बात करनी होगी। और अपने समुदाय में समानता लानी होगी। भारत देश में लोग किसी धर्म के आधार पर महिलाओं के खिलाफ भेदभाव नहीं चाहते। सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में 3 तलाक को अमान्य और असंवैधानिक घोषित किया था और केंद्र सरकार से 6 महीने के अन्दर तीन तलाक के दुरूपयोग को लेकर कानून बनाने के लिए कहा था। तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैंसले को ध्यान में रखते हुए केंद्र की मोदी सरकार संसद में तीन तलाक को प्रतिबंधित करने और विवाहित मुस्लिम महिलाओं के अधिकार सुरक्षित करने से संबंधित ‘मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक को संसद के दोनों सदनों में बड़ी मशक्कत के बाद पास कर चुकी है और आज मुस्लिम महिलाओं को मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम के रूप में सुरक्षा कवच मिल चुका है। मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम आने के बाद कोई भी मुस्लिम मर्द गैरकानूनी तरीके से तीन तलाक देने से पहले 10 बार सोचेगा।

भारत देश  बेशक एक स्वतंत्र गणराज्य सालों पहले बन गया हो। लेकिन इतने सालों बाद आज भी देश में धर्म, जाति और अमीरी गरीबी के आधार पर भेदभाव आम बात है। लोग आज भी जाति के आधार पर ऊंच-नीच की भावना रखते हैं। आज भी लोगों में सामंतवादी विचारधारा घर करी हुयी है और कुछ अमीर लोग आज भी समझते हैं कि अच्छे कपडे पहनना, अच्छे घर में रहना, अच्छी शिक्षा प्राप्त करना और आर्थिक विकास पर सिर्फ उनका ही जन्मसिध्द अधिकार है। इसके लिए जरूरत है कि देश में संविधान द्वारा प्रदत्त शिक्षा के अधिकार के जरिए लोगों में जागरूकता लायी जाये। जिससे कि देश में  धर्म, जाति, अमीरी-गरीबी और लिंग के आधार पर भेदभाव न हो सके। 

भारत में संविधान लागू हुए बेशक 72 साल के करीब होने आये, लेकिन अब भी भारत देश में बाल अधिकारों का हनन हो रहा है।  छोटे-छोटे बच्चे स्कूल जाने की उम्र में काम करते दिख जाते हैं। आज बाल मजदूरी समाज पर कलंक है। इसके खात्मे के लिए सरकारों और समाज को मिलकर काम करना होगा। साथ ही साथ बाल मजदूरी पर पूर्णतया रोक लगनी चाहिए। बच्चों के उत्थान और उनके अधिकारों के लिए अनेक योजनाओं का प्रारंभ किया जाना चाहिए। जिससे बच्चों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव दिखे। और शिक्षा का अधिकार भी सभी बच्चों के लिए अनिवार्य कर दिया जाना चाहिए। गरीबी दूर करने वाले सभी व्यवहारिक उपाय उपयोग में लाए जाने चाहिए। बालश्रम की समस्या का समाधान तभी होगा जब हर बच्चे के पास उसका अधिकार पहुँच जाएगा। इसके लिए जो बच्चे अपने अधिकारों से वंचित हैं, उनके अधिकार उनको दिलाने के लिये समाज और देश को सामूहिक प्रयास करने होंगे। आज देष के प्रत्येक नागरिक को बाल मजदूरी का उन्मूलन करने की जरुरत है। और देश  के किसी भी हिस्से में कोई भी बच्चा बाल श्रमिक दिखे, तो देश के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह बाल मजदूरी का विरोध करे। और इस दिशा में उचित कार्यवाही करें साथ ही साथ उनके अधिकार दिलाने के प्रयास करें।

भारत देश में कानून बनाने का अधिकार केवल भारतीय लोकतंत्र के मंदिर भारतीय संसद को दिया गया है। जब भी भारत में कोई नया कानून बनता है तो वो संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) से पास होकर राष्ट्रपति के पास जाता है। जब राष्ट्रपति उस कानून पर बिना आपत्ति किये हुए हस्ताक्षर करता है तो वो देश का कानून बन जाता है। लेकिन आज देश के लिए कानून बनाने वाली भारतीय लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्था भारतीय संसद की हालत दयनीय है। जो लोग संसद के दोनों सदनों में प्रतिनिधि बनकर जाते हैं, वो लोग ही आज संसद को बंधक बनाये हुए हैं। जब भी संसद सत्र चालू होता है तो संसद सदस्यों द्वारा चर्चा करने की बजाय हंगामा किया जाता है। और देश की जनता के पैसों पर हर तरह की सुविधा पाने वाले संसद सदस्य देश के भले के लिए काम करने की जगह संसद को कुश्ती का मैदान बना देते हैं। जिसमें पहलवानी के दांवपेचों की जगह आरोप प्रत्यारोप और अभद्र भाषा के दांवपेंच खेले जाते हैं। जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है। आज जरुरत है कि देश के लिए कानून बनाने वाले संसद सदस्यों के लिए एक कठोर कानून बनना चाहिए।  जिसमे कड़े प्रावधान होने चाहिए। जिससे कि संसद सदस्य संसद में हंगामा खड़ा करने की जगह देश की भलाई के लिए अपना योगदान दें।  

भारत देश में कानून का राज स्थापित हुये बेशक कई दशक हो गए हों लेकिन आज भी देश के बहुत लोग अपने आप को कानून से बढ़कर समझते हैं। और तमाम तरह के अपराध करते हैं। आज जरूरत है भारत के प्रत्येक नागरिक को भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त कानूनों का पाठ पढ़ाया जाना चाहिए। और उनका पालन करने के लिए जागरूक करना चाहिए, जिससे की समाज और देश में फैले अपराधों पर रोक लग सके। इसके साथ-साथ भारतीय संविधान द्वारा भारतीय नागरिकों को दिए गए मौलिक अधिकारों को जन-जन तक सरकार को पहुँचाना चाहिए। इन मौलिक अधिकारों को देश के आखिरी आदमी तक पहुँचाने के लिए सरकार के साथ-साथ भारतीय समाज की भी अहम भूमिका होनी चाहिए। तभी भारत देश रूढ़िवादी सोच से मुक्ति पा सकता है। 

गणतंत्र दिवस प्रसन्नता का दिवस है इस दिन सभी भारतीय नागरिकों को मिलकर अपने लोकतंत्र की उपलब्धियों का उत्सव मनाना चाहिए और एक शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण एवं प्रगतिशील भारत के निर्माण में स्वयं को समर्पित करने का संकल्प लेना चाहिए। क्योंकि भारत देश सदियों से अपने त्याग, बलिदान, भक्ति, शिष्टता, शालीनता, उदारता, ईमानदारी, और श्रमशीलता के लिए जाना जाता है। तभी सारी दुनिया ये जानती और मानती है कि भारत भूमि जैसी और कोई भूमि नहीं, आज भारत एक विविध, बहुभाषी, और बहु-जातीय समाज है। जिसका विश्व में एक अहम स्थान है। आज का दिन अपने वीर जवानों को भी नमन करने का दिन है जो कि हर तरह के हालातों में सीमा पर रहकर सभी भारतीय नागरिकों को सुरक्षित महसूस कराते हैं। साथ-साथ उन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को याद करने का भी दिन हैं, जिन्होंने हमारे देश को आजाद कराने में अहम भूमिका निभाई। आज 72वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर भारत के प्रत्येक नागरिक को भारतीय संविधान और गणतंत्र के प्रति अपनी वचनबद्धता दोहरानी चाहिए और देश के समक्ष आने वाली चुनौतियों का मिलकर सामूहिक रूप से सामना करने का प्रण लेना चाहिए। साथ-साथ देश में शिक्षा, समानता, सदभाव, पारदर्शिता को बढ़ावा देने का संकल्प लेना चाहिए। जिससे कि देश प्रगति के पथ पर और तेजी से आगे बढ़ सके।

- ब्रह्मानंद राजपूत







आतिशबाजियों के साथ Google दे रहा है Indian Cricket Team को ऐतिहासिक जीत की बधाई, देखें एमिनेशन

  •  रेनू तिवारी
  •  जनवरी 23, 2021   13:49
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आतिशबाजियों के साथ Google दे रहा है Indian Cricket Team को ऐतिहासिक जीत की बधाई, देखें एमिनेशन

गूगल आज हमारी जिंदगी का एक हिस्सा बन चुका है। अधिकतर लोग गूगल सर्च इंजन पर ही काम करते हैं और तमाम तरह की जानकारी भी प्राप्त करके हैं। किसी महान सख्स की जयंती हो या पुणयतिथि, गूगल अपने सिंबल में डूगल बना कर उन्हें श्रद्धांजलि देता है।

गूगल आज हमारी जिंदगी का एक हिस्सा बन चुका है। अधिकतर लोग गूगल सर्च इंजन पर ही काम करते हैं और तमाम तरह की जानकारी भी प्राप्त करके हैं। किसी महान सख्स की जयंती हो या पुणयतिथि, गूगल अपने सिंबल में डूगल बना कर उन्हें श्रद्धांजलि देता है। इसके अलावा भी कई फनी एनिमेशन के साथ यूजर्स को खास दिन का एहसास करवाता है। 

इसे भी पढ़ें: पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आई फिर से तेजी,जानिए कितना है दाम 

हॉलीवुड प्रोडक्शन हाउस मार्वल की सुपरहिट सीरीज एवेंजर की आखिरी कड़ी एवेजर्स एंड गेम जब पूरी दुनिया में धूमम मचा रही थी तब गूगल ने एक एमिमेशन 'Thanos' नाम के कीवर्ड पर सेट किया था। जब भी लोग गूगल पर थेनोस सर्ज कर रहे थे तब एक चुटकी का रिजल्ट भी रिजल्ट में आता था। उस पर क्लिक करते ही यूजर्स की संख्या आधी शो होने लगती थी। लोग इस ऐमिनेशन को काफी पसंद कर रहे थे। इस फिल्म में भी थेनोस ने एक चुटकी बजाकर पूरी दुनिया के आधे इंसानों को मार दिया था। 

अब ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत क्रिकेट टीम की ऐतिहासिक जीत का जश्न भी गूगल कुछ नये अंदाज में मना रहा है। हाल ही में  भारत ने गाबा की सरजमीन पर ऑस्ट्रेलिया की बादशादत को खत्म करते हुए जीत का तिरंगा गाड़ दिया। इस जीत का यूजर्स को एहसास दिलाने के लिए एक बार फिर गूगल ने एक शानदार एनिमेशन भारतीय क्रिकेट टीम के कीवर्ड पर डाला है। अगर आप गूगल पर भारतीय क्रिकेट टीम लिखकर सर्च करते है तो पहले पेज पर आपको भारत-ऑस्ट्रेलिया के गाबा मैच की जानकारी मिलेगी और उसके बाद गूगल पटाखों की आतिशबाजियां शुरू कर देगा। ये काफी मजेदार है। इस तरह का का एनिमेशन एक्टिवेट करके टी इंडिया को बधाई दे रहा है।

 

 

आपको बता दें कि अपने दो युवा बल्लेबाजों शुभमन गिल और ऋषभ पंत की आकर्षक अर्धशतकीय पारियों के दम पर भारत ने चौथे और अंतिम टेस्ट क्रिकेट मैच में तीन विकेट से ऐतिहासिक जीत दर्ज करके श्रृंखला अपने नाम करने के साथ आस्ट्रेलिया की गाबा में 32 वर्षों से चली आ रही बादशाहत भी खत्म कर दी। भारत ने एडीलेड में पहला टेस्ट मैच गंवाने के बाद शानदार वापसी की और आस्ट्रेलिया को उसकी सरजमीं पर लगातार दूसरी बार श्रृंखला में 2-1 से हराकर बोर्डर-गावस्कर ट्राफी अपने पास बरकरार रखी। भारत ने यह जीत तब दर्ज की जबकि उसके कई शीर्ष खिलाड़ी चोटिल होने या अन्य कारणों से टीम में नहीं थे। शुभमन गिल शतक से चूक गये लेकिन उन्होंने 91 रन की प्रवाहमय पारी खेली जबकि पंत ने आक्रामकता और रक्षण की अच्छी मिसाल पेश करके नाबाद 89 रन बनाये।

 







Unlock-5 का 114वां दिन: देश में 10 लाख से अधिक लोगों को लगाए गए कोविड-19 के टीके

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 22, 2021   20:19
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Unlock-5 का 114वां दिन: देश में 10 लाख से अधिक लोगों को लगाए गए कोविड-19 के टीके

संक्रमण के कुल मामले 16 सितम्बर को 50 लाख, 28 सितम्बर को 60 लाख, 11 अक्टूबर को 70 लाख, 29 अक्टूबर को 80 लाख और 20 नवम्बर को 90 लाख और 19 दिसम्बर को एक करोड़ के पार चले गए थे।

नयी दिल्ली। देश भर में कोविड​​-19 टीकाकरण अभियान के तहत अब तक लगभग 10.5 लाख लोगों को कोरोना वायरस-रोधी ठीके लगाए जा चुके हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। मंत्रालय ने कहा कि 24 घंटे की अवधि में देश में आयोजित 4,049 सत्रों में 2,37,050 लोगों को टीके लगाये गये। अब तक कुल 18,167 सत्र आयोजित किए जा चुके हैं। संक्रमण की जांच के मोर्चे पर भी भारत लगातार आगे बढ़ रहा है। मंत्रालय ने कहा कि जांच संबंधी बुनियादी ढांचे के विस्तार ने वैश्विक महामारी के खिलाफ भारत की लड़ाई को और मजबूत किया है। देश भर में अब तक कुल जांच की संख्या 19 करोड़ से अधिक हो चुकी है। पिछले 24 घंटे में कोविड-19 के कुल 8,00,242 नमूनों की जांच की गई, जिससे भारत में अब तक हुई कुल जांच की संख्या बढ़कर 19,01,48,024 हो गई है। मंत्रालय ने कहा, निरंतर आधार पर विस्तृत और व्यापक जांच के परिणामस्वरूप संक्रमण दर में कमी आई है। कुल संक्रमण दर वर्तमान में 5.59 प्रतिशत है।

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पिछले कुछ हफ्तों से देश में उपचाराधीन मरीजों की संख्या भी लगातार कम हो रही है। देश में उपचाराधीन मरीजों की संख्या घटकर अब कुल मामलों का 1.78 प्रतिशत रह गयी है। भारत में वर्तमान में 1,88,688 मरीजों का इलाज चल रहा है। 24 घंटे के अंतराल में कुल 18,002 लोग ठीक हुए। इससे कुल इलाजरत मरीजों की संख्या में एक दिन में 3,620की कमी आई है। देश में ठीक हुए कुल मरीजों की संख्या बढ़कर 1,02,83,708 तक पहुंच गई है। मंत्रालय ने कहा कि ठीक होने वाले नए लोगों में से 84.70 प्रतिशत लोग दस राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के है। केरल में 6,229 लोग बीमारी से ठीक हुए। महाराष्ट्र और कर्नाटक ने क्रमशः 3,980 और 815 नए मरीज ठीक हुए। 24 घंटे के अंतराल में संक्रमण के कुल 14,545 नए मामले सामने आए हैं। नए मामलों में 84.14 प्रतिशत मामले आठ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में आए हैं। केरल में 24 घंटे के अंतराल में 6,334 नए मामले सामने आए। महाराष्ट्र में 2,886 नए मामले सामने आए, जबकि कर्नाटक में 674 नए मामले सामने आए। पिछले 24 घंटों में हुईं 163 मौतों में से 82 प्रतिशत मौतें नौ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में हुई हैं। महाराष्ट्र में सबसे अधिक 52 मौतें हुई हैं। केरल में 21 मौतें हुई हैं।

दिल्ली में कोरोना वायरस संक्रमण के 266 नये मामले सामने आये

दिल्ली में शुक्रवार को कोरोना वायरस संक्रमण के 266 नये मामले सामने आये और इस महामारी के कारण सात और मरीजों की मौत हो गई। अधिकारियों ने यह जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में कोविड-19 के मामलों की संख्या 6,33,542 से अधिक हो गई है और मृतकों की संख्या 10,789 पर पहुंच गई है। दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी एक बुलेटिन के अनुसार शहर में इस समय 2,060 मरीजों का इलाज चल रहा है जबकि संक्रमण की दर बढ़कर 0.37 प्रतिशत हो गई। बृहस्पतिवार को संक्रमण की दर 0.28 प्रतिशत थी।

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कोविड-19 के कारण यूपीएससी परीक्षा से वंचित छात्रों को एक और मौका देने के पक्ष में नहीं केंद्र

केंद्र ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि वह पिछले साल महामारी के कारण यूपीएससी द्वारा आयोजित परीक्षा में शामिल नहीं होने से अपना आखिरी मौका गंवा देने वाले अभ्यर्थियों को एक और अवसर देने के पक्ष में नहीं है। न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर के नेतृत्व वाली पीठ ने कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) की तरफ से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू के निवेदन का संज्ञान लिया। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने पीठ से कहा, ‘‘हम एक और अवसर देने को तैयार नहीं है। मुझे हलफनामा दाखिल करने का समय दीजिए...कल (बृहस्पतिवार) रात मुझे निर्देश मिला है कि हम इस पर तैयार नहीं हैं।’’ पीठ में न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी भी थे। पीठ ने सिविल सेवा की अभ्यर्थी रचना सिंह की याचिका को 25 जनवरी के लिए सूचीबद्ध किया है और केंद्र से एक हलफनामा दाखिल करने को कहा है। इससे पहले, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया था कि सिविल सर्विसेज के ऐसे अभ्यर्थियों को सरकार एक और मौका देने पर विचार कर रही है। शीर्ष अदालत ने पिछले साल 30 सितंबर को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की प्रारंभिक परीक्षा को स्थगित करने से इनकार कर दिया था। देश में कोविड-19 महामारी और कई हिस्सों में बाढ़ के कारण परीक्षा को टालने का अनुरोध किया गया था।

देश में कोविड-19 के 14,545 नए मामले, 163 और लोगों की मौत

भारत में कोविड-19 के 14,545 नए मामले सामने आने के बाद शुक्रवार को देश में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 1,06,25,428 हो गई, जिनमें से 1,02,83,708 लोग संक्रमण मुक्त हो चुके हैं। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से शुक्रवार सुबह आठ बजे जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, वायरस से 163 और लोगों की मौत के बाद मृतक संख्या बढ़कर 1,53,032 हो गई। आंकड़ों के अनुसार, कुल 1,02,83,708 लोगों के संक्रमण मुक्त होने के साथ ही देश में मरीजों के ठीक होने की राष्ट्रीय दर बढ़कर 96.78 प्रतिशत हो गई है। वहीं कोविड-19 से मृत्यु दर 1.44 प्रतिशत है। देश में कोविड-19 के उपचाराधीन मरीजों की संख्या लगातार तीन दिन से दो लाख से कम बनी हुई है। अभी 1,88,688 लोगों का कोरोना वायरस संक्रमण का इलाज चल रहा है, जो कुल मामलों का 1.78 प्रतिशत है। भारत में सात अगस्त को संक्रमितों की संख्या 20 लाख, 23 अगस्त को 30 लाख और पांच सितम्बर को 40 लाख से अधिक हो गई थी। वहीं, संक्रमण के कुल मामले 16 सितम्बर को 50 लाख, 28 सितम्बर को 60 लाख, 11 अक्टूबर को 70 लाख, 29 अक्टूबर को 80 लाख और 20 नवम्बर को 90 लाख और 19 दिसम्बर को एक करोड़ के पार चले गए थे।

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कोविड-19 टीका लगने के बाद गुरुग्राम में स्वास्थ्यकर्मी की मौत, अधिकारियों ने कहा टीके से कोई लेना-देना नहीं

हरियाणा के गुरुग्राम में हाल ही में कोविड-19 का टीका लगवाने वाली एक महिला स्वास्थ्यकर्मी की शुक्रवार को मृत्यु हो गई। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि अभी तक टीके से इसका संबंध होने की पुष्टि नहीं हुई है। 55 वर्षीय महिला स्वास्थ्यकर्मी की मौत गुरुग्राम स्थित उसके आवास पर हुई। गुरुग्राम के मुख्य चिकित्सा अधिकारी विरेन्द्र यादव ने फोन पर बताया, ‘‘उन्हें 16 जनवरी को टीका लगा था। उनके परिवार ने आज अचानक उनकी मृत्यु होने की सूचना दी, लेकिन अभी तक ऐसा कोई तथ्य नहीं है जो मौत और टीके के बीच संबंध साबित कर सके।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमने उनका विसरा जांच के लिए भेजा है और रिपोर्ट आने पर ही जानकारी मिलेगी।’’ हरियाणा में कोविड-19 टीकाकरण शनिवार को शुरू हुआ और कोरोना योद्धाओं को टीका लगाया जा रहा है।

उत्तराखंड में कोरोना वायरस संक्रमण के 110 नए मामले

उत्तराखंड में शुक्रवार को 110 नए मरीजों में कोविड -19 की पुष्टि हुई जबकि तीन अन्य संक्रमितों ने महामारी से दम तोड दिया। एक बुलेटिन में इसकी जानकारी दी गयी है। इस बीच, प्रदेश में कोविड-19 टीकाकरण अभियान में शुक्रवार को 35 जगहों पर 2308 लाभार्थियों को टीका लगाया गया। सोलह जनवरी को शुरू हुए अभियान में अब तक 10514 लोगों को टीके की पहली खुराक दी जा चुकी है। प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी बुलेटिन के अनुसार, 110 नए मरीजों के मिलने के साथ ही प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या बढकर 95464 हो गयी है। ताजा मामलों में सर्वाधिक 54 देहरादून जिले में सामने आए जबकि नैनीताल में 29, और हरिद्वार में 13 मरीज मिले। शुक्रवार को प्रदेश में तीन और कोविड मरीजों ने दम तोड दिया। महामारी से अब तक प्रदेश में 1629 मरीज जान गंवा चुके हैं। प्रदेश में शुक्रवार को 183 और मरीज उपचार के बाद स्वस्थ हो गए। अब तक कुल 90730 मरीज उपचार के बाद स्वस्थ हो चुके हैं और उपचाराधीन मामलों की संख्या 1795 है। प्रदेश में कोविड 19 के 1310 मरीज प्रदेश से बाहर चले गए हैं।

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आंध्र प्रदेश में कोविड-19 के 137 नये मामले सामने आये

आंध्र प्रदेश में शुक्रवार को सुबह नौ बजे समाप्त हुए 24 घंटे के दौरान कोविड-19 के 137 नये मामले सामने आये। इन्हें मिला कर राज्य में कोरोना वायरस के उपचाराधीन मामलों की संख्या 1,488 है। एक नवीनतम बुलेटिन में कहा गया है कि 167 मरीज ठीक हुए और इस अवधि के दौरान चार और मरीजों की मौत हो गई। इसमें कहा गया है कि संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 8,86,694, ठीक हुए मरीजों की संख्या बढ़कर 8,78,060 और मृतक संख्या बढ़कर 7,146 हो गई है।

जम्मू-कश्मीर में कोरोना वायरस संक्रमण के 88 नए मामले, चार मरीजों की मौत

जम्मू-कश्मीर में शुक्रवार को कोरोना वायरस संक्रमण के 88 नए मामले सामने आने के बाद प्रदेश में अब तक संक्रमण के कुल 1,23,852 मामले सामने आ चुके हैं। वहीं, इसी अवधि में चार और मरीजों की मौत के साथ ही अब तक 1,928 लोग इस घातक वायरस के चलते जान गंवा चुके हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नए मामलों में से 42 जम्मू संभाग में जबकि 46 कश्मीर संभाग में दर्ज किए गए। अधिकारियों ने कहा कि शोपियां, कठुआ, सांबा, किश्तवाड, रियासी और रामबन जिलों में संक्रमण का एक भी नया मामला सामने नहीं आया जबकि 12 अन्य जिलों में एकल संख्या में नए मामले दर्ज किए गए। उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में 1,098 मरीज उपचाराधीन हैं और अब तक 1,20,826 लोग संक्रमणमुक्त हो चुके हैं। अधिकारियों के मुताबिक, पिछले 24 घंटों के दौरान जम्मू एवं कश्मीर दोनों ही क्षेत्रों में दो-दो कोविड-19 मरीजों की मौत हो गई।





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